हाईकोर्ट ने मेरठ SSP को 45 मिनट खड़ा रखा:शादी से मुकरने वाले को पेश नहीं किया था, एसएसपी बोले- मेरे अफसरों से चूक हुई

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शनिवार को मेरठ SSP बीबीजीटीएस मूर्ति को 45 मिनट तक कोर्ट में खड़ा रखा। मामला शादी का वादा करके जमानत लेने और बाद में मुकरने से जुड़ा है। कोर्ट ने आरोपी की जमानत रद्द कर SSP को उसे न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया था। लेकिन, SSP के जूनियर पुलिस अफसरों ने आरोपी को हाईकोर्ट में नहीं पेश करके सीजेएम की अदालत में पेश कर दिया था। सीजेएम ने आरोपी को जेल भी भेज दिया था। SSP ने हाईकोर्ट में सफाई देते हुए कहा कि मैं छुट्‌टी पर था। मेरे जूनियरों से चूक हुई है। इसके बाद जज अरुण कुमार सिंह देशवाल की पीठ ने मेरठ के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) के आचरण पर भी गंभीर नाराजगी जताई। कोर्ट ने इसे घोर लापरवाही और अनुशासनहीनता मानते हुए आदेश की प्रति मेरठ के प्रशासनिक न्यायाधीश के समक्ष रखने का निर्देश दिया। जिससे उनके खिलाफ प्रशासनिक स्तर पर उचित कार्रवाई पर विचार किया जा सके। अब पढ़िए पूरा मामला मेरठ के सरधना थाना क्षेत्र में पिछले साल एक लड़की के साथ नितीश उर्फ सिद्धांत उर्फ सेठी ने शादी का झांसा देकर रेप किया था। हाईकोर्ट में उसने लड़की से शादी करने का वादा कर जमानत मांगी। 18 मार्च, 2026 को सेठी को हाईकोर्ट ने जमानत दे दी। जमानत मिलते ही सेठी ने अपना वादा तोड़ दिया। इस पर लड़की ने हाईकोर्ट में अपील की। कोर्ट ने आरोपी सेठी की जमानत रद्द करके उसे कोर्ट में हाजिर करने के लिए 28 सितंबर, 2026 को गैर जमानती वारंट (NBW) जारी कर दिया। कई तारीखों के बाद भी पुलिस ने आरोपी को कोर्ट में पेश नही किया। इसके बाद हाईकोर्ट ने 8 अक्टूबर को मेरठ SSP को व्यक्तिगत पेश होने के आदेश दिए थे। ​शनिवार को सुनवाई के दौरान लड़की और आरोपी सेठी दोनों कोर्ट में मौजूद थे। जब कोर्ट ने सेठी से पूछा, तो उसने लड़की से शादी करने से साफ इनकार कर दिया। ​इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी ने जमानत लेते समय दी गई अंडरटेकिंग का सीधा उल्लंघन किया है। कोर्ट ने तत्काल उसकी जमानत रद्द कर दी। इसके बाद आरोपी सेठी को जेल भेज दिया गया। पुलिस ने आरोपी को हाईकोर्ट की जगह सीजेएम कोर्ट में पेश कर दिया ​इससे पहले हाईकोर्ट से 28 सितंबर को गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद पुलिस ने आरोपी को हाईकोर्ट लाने की जगह सीजेएम, मेरठ की अदालत में पेश कर दिया। वहां से उसे जेल भेज दिया गया। पुलिस की इस लापरवाही का पता चलते ही हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। इसके बाद शनिवार को हाईकोर्ट में खुद एसएसपी बीबीजीटीएस मूर्ति पेश हुए। उन्होंने बताया कि वह 28 सितंबर से 2 अक्टूबर तक अवकाश पर थे। उनके अधीनस्थों से यह चूक हुई है। भविष्य में सतर्क रहने की चेतावनी दी कोर्ट ने इसे लापरवाही तो माना, लेकिन कहा कि वारंट के निष्पादन प्राधिकारी स्वयं एसएसपी थे। इसलिए आरोपी को हाईकोर्ट में पेश कराना उनकी जिम्मेदारी थी। कोर्ट ने उनके खिलाफ कोई प्रतिकूल आदेश करने की बजाय उन्हें शाम 4 बजे तक कोर्ट में ही मौजूद रहने का निर्देश दिया। साथ ही भविष्य में सतर्क रहने की चेतावनी दी। हाइकोर्ट ने सीजेएम मेरठ की घोर लापरवाही बताया ​कोर्ट ने इस बात पर भी ऐतराज जताया कि जब सीजेएम, मेरठ को यह संज्ञान में था कि हाईकोर्ट ने आरोपी को सीधे पेश करने का एनबीडब्ल्यू जारी किया है। फिर भी उन्होंने बिना हाईकोर्ट भेजने के निर्देश के आरोपी को सीधे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। हाइकोर्ट ने इसे सीजेएम मेरठ की घोर लापरवाही और अनुशासनहीनता माना। निर्देश दिया कि इस आदेश की प्रति मेरठ के प्रशासनिक न्यायाधीश के सामने रखी जाए, जिससे सीजेएम के खिलाफ प्रशासनिक स्तर पर उचित कार्रवाई की जा सके। अब जानिए IPS मूर्ति के बारे में
IPS मूर्ति मेरठ से पहले झांसी में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक थे। उन्हें अप्रैल- 2025 में झांसी भेजा गया था। वह कासगंज और कानपुर देहात में भी SP रह चुके हैं। मूर्ति 2015 में यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा के जरिए सीधे भर्ती के तहत यूपी कैडर में IPS चयनित हुए थे। पिछले 11 साल से भारतीय पुलिस सेवा में हैं। 2015 में उनको पहली पोस्टिंग गाजियाबाद में मिली थी। वे लखनऊ में इंटेलिजेंस में भी SP रह चुके हैं। कम्प्यूटर साइंस में बीटेक और मार्केटिंग में MBA किया है 12 फरवरी, 1985 को आंध्र प्रदेश के तिरुपति में जन्मे बीबीजीटीएस ने पूरी शिक्षा हैदराबाद में ली है। कम्प्यूटर साइंस में बीटेक और मार्केटिंग में एमबीए की डिग्री ली है। उन्होंने पुलिस सेवा में कई पुरस्कार हासिल किए हैं। 2022 में उनको डीजी कमेंडेशन डिस्क सिल्वर, 2023 में डीजी कमेंडेशन डिस्क गोल्ड और 2025 में डीजी कमेंडेशन डिस्क प्लेटिनम से सम्मानित किया गया था। —————————- यह खबर भी पढ़ें… योगी बोले- मैं होता तो माफिया को दो किक मारता, CID सीरियल का नाम लेकर कहा- बाल के टुकड़े से केस सुलझा देते थे लखनऊ में सीएम योगी ने पुलिस की जमीन पर माफिया के कब्जे का किस्सा सुनाया। उन्होंने कहा- भूमाफिया ने पुलिस के नाम दर्ज जमीन अपने नाम करा ली थी। योगी ने कहा, “मैं होता तो उसे बुलाता, दो किक मारता और जमीन खाली कराता। आज अपराधी एक चौराहे पर अपराध करता है और अगले चौराहे पर ढेर हो जाता है।” पूरी खबर पढ़ें…