यूपी में तीसरी बार भाजपा सरकार बनेगी या सपा का सितारा बुलंद होगा, यह तो चुनाव के नतीजे आने के बाद ही पता चलेगा। लेकिन सोशल मीडिया पर पोस्ट को लाइक, शेयर और कमेंट किए जाने यानी इंगेजमेंट के मामले में सपा, यूपी भाजपा से आगे है। भाजपा के सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर राष्ट्रीय स्तर के अलावा हर राज्य के अलग-अलग अकाउंट हैं। जबकि, सपा का सभी प्लेटफॉर्म पर देश और राज्यों के लिए अकाउंट एक ही है। ऐसे में भाजपा का नेशनल अकाउंट तो हर मामले में (फॉलोअर्स और इंगेजमेंट) सपा से आगे है, लेकिन यूपी भाजपा पिछड़ रही है। मामले की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगता है कि संघ के सह सरकार्यवाह यानी जॉइंट सेक्रेटरी अरुण कुमार को अपने हालिया लखनऊ दौरे में 22 अक्टूबर को इस मुद्दे पर बैठक करनी पड़ी। उन्हें बताया गया कि 20 दिन में यूपी भाजपा का सोशल मीडिया इंगेजमेंट 35% घटा है। हालांकि, सीएम योगी आदित्यनाथ सोशल मीडिया पर अखिलेश यादव से काफी आगे हैं। बीते एक महीने में योगी के इंस्टाग्राम अकाउंट पर हर रील को 15 लाख से ज्यादा व्यूज मिले। जबकि, अखिलेश की रील को एवरेज 55 हजार व्यूज ही मिले। यानी योगी को 27 गुना ज्यादा व्यूज मिले। आज यूपी एक्सप्लेनर में जानेंगे कि सोशल मीडिया इंगेजमेंट घटने-बढ़ने के मायने क्या हैं और 2027 विधानसभा चुनाव पर इसका क्या असर होगा… अब इन आंकड़ों के मायने समझिए… सवाल- 1: सोशल मीडिया पॉपुलैरिटी का 2027 यूपी विधानसभा चुनाव में कितना इम्पैक्ट होगा? जवाब: किसी पार्टी का सोशल मीडिया इंगेजमेंट ज्यादा होने का मतलब यह नहीं है कि चुनाव नतीजे भी उसके फेवर में आएंगे। इसकी कई वजह हैं… सवाल- 2: चुनाव पर असर नहीं होता तो पार्टियां सोशल मीडिया पर करोड़ों रुपए क्यों फूंकती हैं? जवाब: सोशल मीडिया की भारी-भरकम रीच भले ही सीधे तौर पर वोट में न बदले, लेकिन यह पार्टी कार्यकर्ताओं को एक्टिव करने और विरोधियों के नैरेटिव को काटने का काम करती है। आज डिजिटल रूप से गायब रहने का मतलब है राजनीति से बाहर हो जाना। इसके पीछे गहरी मनोवैज्ञानिक और रणनीतिक वजहें हैं… सवाल- 3: यूपी भाजपा सोशल मीडिया पर रीच घटना इतना बड़ा मुद्दा कैसे हो गया कि संघ को दखल देना पड़ा? जवाब: लोकसभा चुनाव में ‘संविधान खतरे में है’ के नैरेटिव ने भाजपा को नुकसान हुआ था। संघ को लगता है कि अगर सोशल मीडिया पर भाजपा पीछे हुई, तो विपक्ष युवा और नए वोटर्स के बीच नैरेटिव सेट करने में सफल हो जाएगा। ————————————— ये एक्सप्लेनर भी पढ़ें… राहुल-अखिलेश जोड़ी की काट निकालने लखनऊ आ रहे अमित शाह, सीट बंटवारा बड़ी चुनौती विधानसभा चुनावों को लेकर अमित शाह की एक सेट रणनीति रही है। वे चुनाव से 4 से 6 महीने पहले एक्टिव होते हैं और भाजपा के खिलाफ चल रही हवा को पलटकर रख देते हैं। वे 30 अक्टूबर को लखनऊ आ रहे हैं। अमित शाह राहुल-अखिलेश की जोड़ी का तोड़ कैसे खोजेंगे? साथ ही सहयोगी दलों को साथ लेकर चलने की कौन-सी जुगत लगाएंगे? पढ़िए यूपी एक्सप्लेनर में…