शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती बोले- श्रीकृष्ण पर टिप्पणी करने वाला मूर्ख:काशी में कहा-किसी कथावाचक को अनर्गल बोलने का अधिकार नहीं, संस्कृति संसद में पहुंचे

काशी में आज से तीन दिवसीय संस्कृति संसद शुरू हो गई। रुद्राक्ष अंतरराष्ट्रीय सहयोग एवं कन्वेंशन सेंटर में हो रही इस संसद का शुभारंभ संतों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। संस्कृति संसद में पहुंचे सुमेरु पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती ने दैनिक भास्कर से बात की। उन्होंने पंडित धीरेंद्र शास्त्री के श्रीकृष्ण वाले बयान पर गुस्सा जताया। कहा कि हर व्यक्ति को अपनी मर्यादा और सीमा में रहकर बयान देना चाहिए। देवी-देवता लोगों की आस्था के केंद्र हैं। किसी कथावाचक को नशे में या किसी अन्य स्थिति में ऐसी अनर्गल टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है। जिससे लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हों। भगवान श्रीकृष्ण और श्रीराम के बीच अंतर बताने वाले व्यक्ति से बड़ा मूर्ख और अज्ञानी शायद ही कोई होगा। भगवान शिव, श्रीकृष्ण और श्रीराम में कोई भेद नहीं है। ये सभी अभिन्न हैं। तत्व की दृष्टि से सभी एक हैं। उन्होंने आगे कहा कि देशद्रोही गतिविधियों में जो लिप्त हैं। उन्हें शूट कर देना चाहिए। सरकारों की हिम्मत नहीं है कि मस्जिद-चर्च ले लें। मगर हिंदुओं का मंदिर लेकर उसका धर्म हड़पना चाहते हैं। मंदिर पर सनातनियों और हिंदुओं का अधिकार होना चाहिए। संसद में देशभर से करीब 3000 संत और 7000 से अधिक युवा शामिल हो रहे हैं। इसमें देश-विदेश के विद्वान, वैज्ञानिक, कलाकार और शिक्षाविद भी शामिल हैं। यह आयोजन 5 नवंबर तक चलेगा। इसमें सनातन परंपराओं, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय चेतना जैसे विषयों पर विमर्श होगा। छह प्रमुख कार्यक्रमों के जरिए संतों, विशेषज्ञों और युवाओं को विचार रखने का मंच मिलेगा।