यूपी के अमरोहा जिले में सोमवार को पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट से चार महिला मजदूरों की मौत हो गई। 9 घायल हैं। इसमें दो की हालत बेहद नाजुक है। अमरोहा के SP अमित कुमार आनंद ने एक्सक्लूसिव बातचीत में ‘दैनिक भास्कर’ को बताया– कुछ महिला मजदूर हाल ही में यहां काम करने आई थीं। उन्हें आतिशबाजी में बारूद भरने की प्रॉपर ट्रेनिंग नहीं दी गई थी। आतिशबाजी में बारूद तेज कूटने से धमाका हुआ है। ‘दैनिक भास्कर’ ने अमरोहा पहुंचकर कई घायलों और चश्मदीदों से बातचीत की। पुलिस की जांच में क्या निकलकर आया, ये भी जाना। पढ़िए ये रिपोर्ट… 300 रुपए मजदूरी, सिर्फ महिलाएं करती हैं काम
दिल्ली–लखनऊ नेशनल हाईवे पर अमरोहा जिले में जोया टोल प्लाजा पार करने के बाद अतरासी गांव है। इस गांव से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर खेतों में पटाखा फैक्ट्री है। इस पटाखा फैक्ट्री के मालिक सैफुर्रहमान हैं, जो हापुड़ के रहने वाले हैं। साल 2027 तक पटाखे बनाने का लाइसेंस मिला हुआ है। इस फैक्ट्री में करीब 15–20 महिला मजदूर काम करती हैं। ये सभी आसपास के गांवों की रहने वाली हैं। सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक काम करने के बदले इन्हें रोजाना 300 रुपए दिहाड़ी मिलती है। धमाका इतना तेज कि 300 मीटर दूर खेतों में बिखरा मलबा
16 जून, सोमवार की दोपहर करीब 12 बजे इस फैक्ट्री में अचानक विस्फोट हो गया। हादसे में रुकसाना, रूमा, सर्वेश और शहनाज की मौत हो गई। ‘दैनिक भास्कर’ सबसे पहले घटनास्थल पर पहुंचा। यहां बराबर में दो बिल्डिंग हैं। जिस दो मंजिला बिल्डिंग में धमाका हुआ, वो पूरी तरह ढह गई। घटनास्थल पर सिर्फ ईंटें बिखरी हुई मिलीं। लोहे की अलमारियों में तैयार पटाखे भरे जाते थे। विस्फोट इतना तेज था कि अलमारियां भी पूरी तरह टूट गईं। दो मंजिला बिल्डिंग का एक भी हिस्सा सुरक्षित नहीं बचा। इसकी ईंटें और बाकी मलबा 300 मीटर दूर खेतों तक बिखरे थे। देखने से ऐसा बिल्कुल नहीं लग रहा था कि यहां इस विस्फोट से पहले कोई बिल्डिंग भी खड़ी थी। बराबर वाली दूसरी बिल्डिंग की टीनशेड पूरी तरह उखड़ गई। गनीमत ये रही कि ये फैक्ट्री आबादी से दूर थी, इसलिए जनहानि कम हुई। प्रधान बोले– बहुत दर्दनाक था मंजर
घटनास्थल पर हमें अतरासी के ग्राम प्रधान नौशाद मिले। उन्होंने बताया– धमाके की आवाज सुनकर मैं मौके पर आया। यहां चींख–पुकार मची थी। मैंने तुरंत कॉल करके थाने को सूचना दी। फिर पुलिस आई और घायलों को अस्पताल भिजवाया। घटनास्थल का मंजर बहुत दर्दनाक था। हमने पूछा– हादसे की क्या वजह दिखाई दे रही है? इस पर ग्राम प्रधान कहते हैं– मुझे ऐसा लगता है कि बारूद कूटने के दौरान हथौड़ी थोड़ा तेज मार दी होगी। संभवत: उससे चिंगारी निकली और विस्फोट हो गया। फैक्ट्री में कई दिन का रखा था स्टॉक, इसलिए तेज हुआ धमाका
यहां से हम अमरोहा के संयुक्त जिला अस्पताल पहुंचे और घायलों से बातचीत की। पपसरा गांव की पूजा देवी करीब 18–19 दिन से यहां मजदूरी करने आ रही थीं। वे बताती हैं– हम फुलझड़ी वाले पटाखों में बारूद का मसाला भर रहे थे। इस दौरान अचानक से धमाका हुआ। आंखों के सामने अंधेरा छा गया। जब होश आया तो बिल्डिंग ही गायब थी। मेरे शरीर पर एक भी कपड़े नहीं थे। शरीर से खून बह रहा था। मैंने सोचा कि इस हालत में कैसे भागूं। जैसे–तैसे मुझे एक दुपट्टा पड़ा मिल गया। उससे मैंने शरीर को ढका और पास में खेत में छिप गई। मैं लोगों को मदद के लिए आवाज लगाती रही, लेकिन कोई मुझ तक नहीं आया। काफी देर बाद तीन–चार लोग मेरे पास आए। मैंने कहा कि पति को कॉल करके बुला लो। पति का मोबाइल बंद था। काफी देर बाद पुलिस आई तब मुझे अस्पताल भिजवाया गया। पूजा कहती हैं– इस फैक्ट्री में जितने भी पटाखे तैयार होते हैं, रोजाना उनकी सप्लाई हो जाती है। अब यहां दो–तीन दिन के पटाखों का स्टॉक रखा हुआ था। शायद बड़ा विस्फोट होने की एक वजह ये भी रही। अगर फैक्ट्री में तैयार पटाखों की मात्रा कम होती तो विस्फोट भी इतना तेज नहीं होता और महिलाओं की जान बच जाती। सलोनी बोली– बारूद को तेज कूट रही थी एक महिला
14 साल की सलोनी 9वीं क्लास में पढ़ती है और मां के साथ इस फैक्ट्री में काम करती है। अब दोनों ही घायल हैं। सलोनी कहती है– स्कूल की छुट्टियां चल रही हैं। मां ने कहा कि घर रहकर क्या करेगी। इसलिए मैं भी 300 रुपए कमाने के लिए मजदूरी करने चार–पांच दिनों से इस फैक्ट्री पर आ रही थी। हादसा कैसे हुआ? ये पूछने पर सलोनी बताती हैं– मल्टी स्काई शॉट बनाए जा रहे थे। इसमें तीन तरह का बारूद चम्मच से भरा जाता है। इसके बाद लकड़ी की एक छोटी डंडी से स्काई शॉट के अंदर बारूद को कूटा जाता है, ताकि बारूद अच्छे से अंदर तक पहुंच जाए। वो महिला डंडी थोड़ा तेज मार रही थी। ठेकेदार ने उसको कई बार ऐसा करने से टोका, लेकिन वो बार–बार ऐसा करती रही। बारूद पर डंडी का तेज प्रेशर पड़ने से संभवत: विस्फोट हुआ है। उस वक्त मेरा मुंह दूसरी तरफ था, इसलिए चेहरे पर मामूली चोटें आई हैं। धमाका कैसे हुआ, ये मुझे नहीं पता
विस्फोट में घायल पूजा भी जिला अस्पताल में भर्ती हैं। वे बताती हैं कि इस फैक्ट्री में शादी या अन्य समारोहों के लिए आतिशबाजी तैयार हो रही थी। हादसे के वक्त मैं फैक्ट्री के पीछे वाले गेट की तरफ बैठी थी, जबकि विस्फोट आगे वाले गेट पर हुआ। धमाका इतना तेज था कि पूरी बिल्डिंग गिर गई। धमाका कैसे हुआ, ये तो मुझे नहीं पता। मैं हाल–फिलहाल में ही यहां काम करने आई हूं। हमने इस प्रकरण में अमरोहा के पुलिस अधीक्षक (SP) अमित कुमार आनंद से बात की। उन्होंने बताया– मैं घटनास्थल पर गया। फैक्ट्री मालिक से बातचीत की। फैक्ट्री का प्रॉपर लाइसेंस है, जो साल–2027 तक वैध है। फैक्ट्री आबादी से दूर थी और मानक अनुसार चल रही थी। सिर्फ एक गड़बड़ी रही, जो अब तक समझ आई है। वो ये कि इस फैक्ट्री में कुछ महिलाएं हाल ही में काम करने के लिए आई हैं। उन्हें पता नहीं था कि बारूद को किस तरह भरा जाता है। संभवत: एक महिला ने नली में बारूद भरने के लिए थोड़ा तेज प्रेशर किया, उस वजह से ही धमाका हुआ। हादसे में इनकी गई जान 8 महिलाएं और एक पुरुष घायल —————- ये खबर भी पढ़ें… यूपी में गंगा को मैली कर रही काली नदी:इत्र नगरी में सीवेज, औद्योगिक कचरा और केमिकल बढ़ा रहे प्रदूषण, पार्ट-3 कन्नौज शहर से 15 किलोमीटर दूर है मेहंदीघाट। एक तरफ शव जल रहे, दूसरी तरफ काली नदी और गंगा के संगम पर लोग स्नान कर रहे। गंगा स्नान कर रहे लोगों के चेहरे के भाव बता रहे हैं कि मजबूरी में उन्हें ऐसा करना पड़ रहा। दरअसल, काली नदी, जो कभी नागिन की तरह लहराती थी, कालिंदी बनकर गंगा को गले लगाती थी। आज नाले की तरह सिसक रही है। यहां काली नदी का काला, बदबूदार जल और गंगा की मटमैली धारा एक-दूसरे से लिपटते हैं। मानो दोनों अपनी व्यथा साझा कर रही हों। पढ़ें पूरी खबर
दिल्ली–लखनऊ नेशनल हाईवे पर अमरोहा जिले में जोया टोल प्लाजा पार करने के बाद अतरासी गांव है। इस गांव से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर खेतों में पटाखा फैक्ट्री है। इस पटाखा फैक्ट्री के मालिक सैफुर्रहमान हैं, जो हापुड़ के रहने वाले हैं। साल 2027 तक पटाखे बनाने का लाइसेंस मिला हुआ है। इस फैक्ट्री में करीब 15–20 महिला मजदूर काम करती हैं। ये सभी आसपास के गांवों की रहने वाली हैं। सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक काम करने के बदले इन्हें रोजाना 300 रुपए दिहाड़ी मिलती है। धमाका इतना तेज कि 300 मीटर दूर खेतों में बिखरा मलबा
16 जून, सोमवार की दोपहर करीब 12 बजे इस फैक्ट्री में अचानक विस्फोट हो गया। हादसे में रुकसाना, रूमा, सर्वेश और शहनाज की मौत हो गई। ‘दैनिक भास्कर’ सबसे पहले घटनास्थल पर पहुंचा। यहां बराबर में दो बिल्डिंग हैं। जिस दो मंजिला बिल्डिंग में धमाका हुआ, वो पूरी तरह ढह गई। घटनास्थल पर सिर्फ ईंटें बिखरी हुई मिलीं। लोहे की अलमारियों में तैयार पटाखे भरे जाते थे। विस्फोट इतना तेज था कि अलमारियां भी पूरी तरह टूट गईं। दो मंजिला बिल्डिंग का एक भी हिस्सा सुरक्षित नहीं बचा। इसकी ईंटें और बाकी मलबा 300 मीटर दूर खेतों तक बिखरे थे। देखने से ऐसा बिल्कुल नहीं लग रहा था कि यहां इस विस्फोट से पहले कोई बिल्डिंग भी खड़ी थी। बराबर वाली दूसरी बिल्डिंग की टीनशेड पूरी तरह उखड़ गई। गनीमत ये रही कि ये फैक्ट्री आबादी से दूर थी, इसलिए जनहानि कम हुई। प्रधान बोले– बहुत दर्दनाक था मंजर
घटनास्थल पर हमें अतरासी के ग्राम प्रधान नौशाद मिले। उन्होंने बताया– धमाके की आवाज सुनकर मैं मौके पर आया। यहां चींख–पुकार मची थी। मैंने तुरंत कॉल करके थाने को सूचना दी। फिर पुलिस आई और घायलों को अस्पताल भिजवाया। घटनास्थल का मंजर बहुत दर्दनाक था। हमने पूछा– हादसे की क्या वजह दिखाई दे रही है? इस पर ग्राम प्रधान कहते हैं– मुझे ऐसा लगता है कि बारूद कूटने के दौरान हथौड़ी थोड़ा तेज मार दी होगी। संभवत: उससे चिंगारी निकली और विस्फोट हो गया। फैक्ट्री में कई दिन का रखा था स्टॉक, इसलिए तेज हुआ धमाका
यहां से हम अमरोहा के संयुक्त जिला अस्पताल पहुंचे और घायलों से बातचीत की। पपसरा गांव की पूजा देवी करीब 18–19 दिन से यहां मजदूरी करने आ रही थीं। वे बताती हैं– हम फुलझड़ी वाले पटाखों में बारूद का मसाला भर रहे थे। इस दौरान अचानक से धमाका हुआ। आंखों के सामने अंधेरा छा गया। जब होश आया तो बिल्डिंग ही गायब थी। मेरे शरीर पर एक भी कपड़े नहीं थे। शरीर से खून बह रहा था। मैंने सोचा कि इस हालत में कैसे भागूं। जैसे–तैसे मुझे एक दुपट्टा पड़ा मिल गया। उससे मैंने शरीर को ढका और पास में खेत में छिप गई। मैं लोगों को मदद के लिए आवाज लगाती रही, लेकिन कोई मुझ तक नहीं आया। काफी देर बाद तीन–चार लोग मेरे पास आए। मैंने कहा कि पति को कॉल करके बुला लो। पति का मोबाइल बंद था। काफी देर बाद पुलिस आई तब मुझे अस्पताल भिजवाया गया। पूजा कहती हैं– इस फैक्ट्री में जितने भी पटाखे तैयार होते हैं, रोजाना उनकी सप्लाई हो जाती है। अब यहां दो–तीन दिन के पटाखों का स्टॉक रखा हुआ था। शायद बड़ा विस्फोट होने की एक वजह ये भी रही। अगर फैक्ट्री में तैयार पटाखों की मात्रा कम होती तो विस्फोट भी इतना तेज नहीं होता और महिलाओं की जान बच जाती। सलोनी बोली– बारूद को तेज कूट रही थी एक महिला
14 साल की सलोनी 9वीं क्लास में पढ़ती है और मां के साथ इस फैक्ट्री में काम करती है। अब दोनों ही घायल हैं। सलोनी कहती है– स्कूल की छुट्टियां चल रही हैं। मां ने कहा कि घर रहकर क्या करेगी। इसलिए मैं भी 300 रुपए कमाने के लिए मजदूरी करने चार–पांच दिनों से इस फैक्ट्री पर आ रही थी। हादसा कैसे हुआ? ये पूछने पर सलोनी बताती हैं– मल्टी स्काई शॉट बनाए जा रहे थे। इसमें तीन तरह का बारूद चम्मच से भरा जाता है। इसके बाद लकड़ी की एक छोटी डंडी से स्काई शॉट के अंदर बारूद को कूटा जाता है, ताकि बारूद अच्छे से अंदर तक पहुंच जाए। वो महिला डंडी थोड़ा तेज मार रही थी। ठेकेदार ने उसको कई बार ऐसा करने से टोका, लेकिन वो बार–बार ऐसा करती रही। बारूद पर डंडी का तेज प्रेशर पड़ने से संभवत: विस्फोट हुआ है। उस वक्त मेरा मुंह दूसरी तरफ था, इसलिए चेहरे पर मामूली चोटें आई हैं। धमाका कैसे हुआ, ये मुझे नहीं पता
विस्फोट में घायल पूजा भी जिला अस्पताल में भर्ती हैं। वे बताती हैं कि इस फैक्ट्री में शादी या अन्य समारोहों के लिए आतिशबाजी तैयार हो रही थी। हादसे के वक्त मैं फैक्ट्री के पीछे वाले गेट की तरफ बैठी थी, जबकि विस्फोट आगे वाले गेट पर हुआ। धमाका इतना तेज था कि पूरी बिल्डिंग गिर गई। धमाका कैसे हुआ, ये तो मुझे नहीं पता। मैं हाल–फिलहाल में ही यहां काम करने आई हूं। हमने इस प्रकरण में अमरोहा के पुलिस अधीक्षक (SP) अमित कुमार आनंद से बात की। उन्होंने बताया– मैं घटनास्थल पर गया। फैक्ट्री मालिक से बातचीत की। फैक्ट्री का प्रॉपर लाइसेंस है, जो साल–2027 तक वैध है। फैक्ट्री आबादी से दूर थी और मानक अनुसार चल रही थी। सिर्फ एक गड़बड़ी रही, जो अब तक समझ आई है। वो ये कि इस फैक्ट्री में कुछ महिलाएं हाल ही में काम करने के लिए आई हैं। उन्हें पता नहीं था कि बारूद को किस तरह भरा जाता है। संभवत: एक महिला ने नली में बारूद भरने के लिए थोड़ा तेज प्रेशर किया, उस वजह से ही धमाका हुआ। हादसे में इनकी गई जान 8 महिलाएं और एक पुरुष घायल —————- ये खबर भी पढ़ें… यूपी में गंगा को मैली कर रही काली नदी:इत्र नगरी में सीवेज, औद्योगिक कचरा और केमिकल बढ़ा रहे प्रदूषण, पार्ट-3 कन्नौज शहर से 15 किलोमीटर दूर है मेहंदीघाट। एक तरफ शव जल रहे, दूसरी तरफ काली नदी और गंगा के संगम पर लोग स्नान कर रहे। गंगा स्नान कर रहे लोगों के चेहरे के भाव बता रहे हैं कि मजबूरी में उन्हें ऐसा करना पड़ रहा। दरअसल, काली नदी, जो कभी नागिन की तरह लहराती थी, कालिंदी बनकर गंगा को गले लगाती थी। आज नाले की तरह सिसक रही है। यहां काली नदी का काला, बदबूदार जल और गंगा की मटमैली धारा एक-दूसरे से लिपटते हैं। मानो दोनों अपनी व्यथा साझा कर रही हों। पढ़ें पूरी खबर