ताजमहल में इस बारिश भी टपकेगा पानी:ASI ने थर्मल स्कैनिंग से 73 मीटर ऊंचाई पर रिसाव पकड़ा; 6 महीने में ठीक होगा गुंबद

ताजमहल के गुंबद की मरम्मत होने में 6 महीने लगेंगे। ASI को थर्मल स्कैनिंग की मदद से 73 मीटर की ऊंचाई पर पानी का रिसाव मिला है। अब 15 दिनों में ASI गुंबद पर लगे पाड़ की जांच पूरी कर लेगा। इसके बाद एक्सपर्ट लेबर इस गुंबद पर काम शुरू करेंगे। कह सकते हैं कि इस बारिश भी ताजमहल के गुंबद से पानी टपकेगा। ASI की लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग जांच में 3 पॉइंट सामने आए हैं। पहला- ताजमहल के मुख्य गुंबद पर जो पत्थर लगे हैं, उनकी टीप का मसाला खराब हो गया है। दूसरा- गुंबद की छत का दरवाजा और फर्श खराब हो गई है। तीसरा- गुंबद पर लगा कलश (पिनेकल) जिस लोहे की रॉड पर टिका है, उसमें जंग लग गई है, आसपास का मसाला फूल गया है। इसलिए पानी रिसा था। इन 3 वजह से मुख्य गुंबद में बारिश के पानी का रिसाव हुआ। यहां बता दें कि ASI की लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग तकनीक में लाइट का इस्तेमाल पल्स लेजर की तरह होता है, इसमें किसी सतह पर लाइट डाली जाती है, उसके पलटकर वापस आने की स्पीड से कमियां देखी जाती है। गुंबद की कमियों का पता चलाने के लिए जीपीएस, स्कैनर और ड्रोन की भी मदद ली गई। एक बार मरम्मत शुरू होने के बाद टूरिस्ट की एंट्री को लेकर भी विचार किया जा रहा है। हो सकता है कि मुख्य गुंबद में टूरिस्ट एंट्री कुछ दिनों के लिए होल्ड की जाए। पढ़िए रिपोर्ट… ताजमहल के मुख्य गुंबद पर पाड़ बांधी जा चुकी है, जोकि दूर से दिखाई देने लगी है। अब ASI टीम, फिजिकल जांच करेगी। अगले 15 दिन में ASI के टेक्नीशियन और कर्मचारी गुंबद की पाड़ पर जाकर देखेंगे। कहां-कहां दरारें हैं? कहां पत्थर निकल गए हैं? मसाला कहां-कहां हटा है? गुंबद के पास की फर्श कहां-कहां टूटी है? क्या छज्जे भी टूट गए हैं? इसकी एक प्रॉपर रिपोर्ट पहले से तैयार है, क्रॉस वैरिफिकेशन के बाद इन्हें ठीक करवाया जाएगा। अब ये जानिए कि मरम्मत को लेकर कवायद शुरू कहां से हुई… 12 सितंबर, 2024 को रिकॉर्ड बारिश में रिसा गुंबद से पानी ये साल 2024 की बात है। 10 से 13 सितंबर तक आगरा में रिकॉर्ड बारिश हुई। 12 सितंबर को ताजमहल के मुख्य मकबरे में स्थित मुगल बादशाह शहंशाह शाहजहां और मुमताज की कब्रों के पास पानी टपका था। इस दौरान ही कैंपस में भी पानी भरा था। ताजमहल के मुख्य गुंबद में पानी टपकने को लेकर सियासत भी हुई। ताजमहल के रख-रखाव को लेकर अखिलेश यादव ने सवाल उठाए। BJP पर निशाना साधते हुए अखिलेश यादव ने मुख्य गुंबद पर उगे पौधे, कलश पर जंग लगने की तस्वीर भी पोस्ट कीं। उन्होंने रख-रखाव पर के लिए जारी होने वाले करोड़ों रुपए का हिसाब भी मांगा है। अखिलेश ने एक्स पर लिखा- विश्व भर के पर्यटकों को आकर्षित करने वाले अजूबे ताजमहल के रख-रखाव को लेकर भाजपा सरकार पूरी तरह से नाकाम है। सरकार एक जीता-जागता उदाहरण होना चाहिए, कोई स्मारक भर नहीं। अखिलेश यादव ने X पर लिखा – इन सब कारणों से दुनियाभर से आने वाले पर्यटकों के बीच देश की छवि वैश्विक स्तर पर धूमिल होती है। पर्यटक ताजमहल को निहारें या समस्याओं से निपटें। सवाल उठाया कि ताजमहल के रख-रखाव के लिए जो करोड़ों रुपए का फंड आता है, वो कहां जाता है। ताजमहल में पहली बार 373 साल पहले पानी रिसा
क्या पहले भी कभी ताजमहल के गुंबद में रिसाव हुआ, इसका जवाब हमें आगरा के इतिहासकार राजकिशोर राजे ने दिया। वह कहते हैं- इसकी 373 साल पुरानी हिस्ट्री है, साल 1652 में औरंगजेब ने बादशाह शाहजहां को ताजमहल का गुंबद से पानी रिसने की पहली रिपोर्ट भेजी थी। इसमें बरसात में उत्तर की ओर दो जगह से पानी टपकने का जिक्र किया गया था। रिपोर्ट में ताजमहल के चार मेहराबदार द्वार, दूसरी मंजिल की दीर्घाएं, चार छोटे डोम, चार उत्तरी बरामदे और सात मेहराबदार भूमिगत कक्षों में भी नमी की जानकारी दी गई थी। उसके बाद मुख्य गुंबद की मरम्मत की गई थी। अंग्रेजों ने 1872 में करवाई मरम्मत
ब्रिटिश काल में 1872 में एग्जीक्यूटिव इंजीनियर जे. डब्ल्यू एलेक्जेंडर ने मुख्य गुंबद से पानी रिसने पर मरम्मत कराई थी। उस समय विशेषज्ञों की समिति बनाई गई थी। इसके बाद वर्ष 1941 में मरम्मत शुरू की गई थी, तब 3 साल तक काम चला और 92 हजार रुपए खर्च हुए थे। जलरोधी बनाने के लिए उभरे हुए पत्थरों को हाइड्रोलिक चूने की मदद से फिर से लगाया गया था। कई पत्थर बदले गए थे। इनके जोड़ों को चूने से भरा गया था, इसकी पूरी ड्राइंग तैयार की गई थी। ASI टीम, 76 लाख खर्चेंगी, 56 लाख सिर्फ लेबर चार्ज
पुरातत्व अधीक्षक स्वाति एस. कुमार ने बताया- पहले एक समिति बनाई जा रही है, इसमें शामिल ASI के टेक्नीशियन और कर्मचारी पाड़ का मुआयना करेंगे। क्या पाड़ इतनी मजबूत है कि मजदूरों और सामान का भार सहन कर सके? समिति की रिपोर्ट के बाद ही संरक्षण का काम शुरू होगा। इसमें 10 से 15 दिन का समय लगेगा। ताजमहल के वरिष्ठ संरक्षण सहायक प्रिंस वाजपेयी ने बताया- हम ड्रोन और लाइट डिटेक्शन से जांच करा चुके हैं। अब फिजिकल जांच होगी। चूंकि मुख्य गुंबद और पिनेकल की ऊंचाई काफी है, इसलिए इस काम में समय लगेगा। गुंबद पर लगे कलश 73 मीटर यानी 239.50 फीट ऊंचाई पर है, वहां तक पहुंचना चुनौतीभरा है। काम के दौरान भी जो दिक्कत दिखेंगी, उन्हें ठीक कराया जाएगा। फिर वो चाहे दरारें भरने का हो, कलश की जंग का हो या पत्थर बदलने का काम हो। उन्होंने बताया- संरक्षण के दौरान 76 लाख रुपए खर्च होंगे। इसमें मेटेरियल पर 19.82 लाख रुपए और मजदूरों की लेबर पर करीब 56.93 लाख रुपए खर्च होने का एस्टीमेट बना है। अब ताजमहल का इतिहास भी जानिए ………………………….