UP के 11 डैम में 10% से भी कम पानी:ज्यादातर सूखे की कगार पर; ओबरा-माताटीला आधा भी नहीं भरा, क्या होगा इसका असर

यूपी में इस साल 15% कम बारिश हुई है। इसका असर डैमों पर भी साफ दिख रहा है। 11 डैम ऐसे हैं, जिनमें 10% से भी कम पानी है। इनमें कुछ डैम पूरी तरह खाली हैं। हैरानी की बात यह है कि राज्य के 5 सबसे बड़े डैम – रिहंद, माताटीला, ओबरा, मेजा और शारदा सागर में औसतन करीब 50% पानी ही भर पाया है। इन 5 डैमों से कुल 429.6 मेगावाट बिजली बनती है। साथ ही, यूपी और मध्य प्रदेश के 18 से 20 जिलों को सिंचाई के लिए पानी दिया जाता है। इनमें शारदा सागर और माताटीला से सबसे ज्यादा पानी की सप्लाई होती है। चिंता इस बात की है कि पानी का कोटा पूरा न होने से बिजली उत्पादन और सिंचाई पर असर पड़ सकता है। अब सिलसिलेवार यूपी के प्रमुख डैमों की स्थिति समझते हैं… 5 सबसे बड़े बांध में 3 सूखे की कगार पर डैम सूखा, सिर्फ 3.7% पानी आ सका- शारदा सागर पूरी तरह से मिट्टी से बना बांध है। इसे एशिया के सबसे बड़े मिट्टी के बांधों में गिना जाता है। शारदा सागर बांध लगभग पूरी तरह सूखने के कगार पर है। इसमें केवल 3.7% (12,060 हजार घन मीटर) पानी ही आ सका है। पीलीभीत, लखीमपुर खीरी और शाहजहांपुर के लाखों किसानों के लिए यह किसी आपदा से कम नहीं है। धान और गन्ने की खड़ी फसलों को सिंचाई देना मुश्किल हो जाएगा। जलाशय खाली रहने से आसपास के इलाकों का वॉटर लेवल तेजी से नीचे गिरेगा। हैंडपंप जवाब देने लगेंगे। पीलीभीत टाइगर रिजर्व और दुधवा के वन्यजीव पानी की तलाश में इंसानी बस्तियों का रुख कर सकते हैं। सिर्फ 12.9% पानी, पिछले साल 45% भरा था- 28 मिलियन घनमीटर क्षमता वाले ओबरा बांध की स्थिति भी खराब है। इसमें इस समय सिर्फ 12.9% (3600 हजार घन मीटर) पानी बचा है, जबकि पिछले साल यह 45.7% भरा था। पानी की कमी से ओबरा के हाइड्रो और थर्मल, दोनों पावर प्लांट की उत्पादन क्षमता प्रभावित होने की आशंका है। सोनभद्र में पीने के पानी और सिंचाई नहरों का नेटवर्क भी बुरी तरह प्रभावित हो सकता है। पानी कम होने से जलाशय में ऑक्सीजन का स्तर गिर सकता है, जिससे पानी में रहने वाले जीवों पर संकट आ सकता है। सिर्फ 15% पानी पहुंचा, सिंचाई संकट तय- मेजा बांध में सिर्फ 15% (45,730 हजार घन मीटर) पानी ही जमा हो सका है। कम जलभराव की वजह से किसानों पर दबाव है। अगर आने वाले हफ्ते में तेज मानसूनी बारिश नहीं होती, तो गर्मी के मौसम में मिर्जापुर के पठारी इलाकों में पेयजल और सिंचाई का गंभीर संकट खड़ा होना तय है। पिछले साल 73% भरा, इस साल 41% पानी ही पहुंचा- बेतवा नदी पर बना माताटीला बांध 41.1% (लगभग 2.31 लाख हजार घन मीटर) ही भर पाया है। पिछले साल इस समय यह बांध 72.9% तक भरा था। हालांकि, इतना पानी रबी की फसलों (गेहूं, चना, मटर) की शुरुआती बुआई और पहली सिंचाई के लिए पर्याप्त है। ललितपुर, झांसी और आसपास के कस्बों में अगले कुछ महीनों तक पीने के पानी का संकट भी नहीं होगा। टरबाइन सीमित क्षमता से चलने पर स्थानीय ग्रिड को सपोर्ट मिलता रहेगा। बांध की क्षमता का करीब 58.9% हिस्सा खाली है। अगर बचे हुए मानसूनी दिनों या सर्दियों में अच्छी बारिश नहीं हुई, तो अप्रैल-मई की कड़कड़ाती गर्मी में बुंदेलखंड में पानी का भयानक संकट पैदा हो सकता है। नहरों के अंतिम छोर तक पानी पहुंचाना चुनौती बन जाएगा। इस मानसून 40% खाली रहा डैम- देश के कुल बिजली उत्पादन का 3% सिर्फ सोनभद्र और मिर्जापुर में बनती है। इन जिलों की लाइफलाइन रिहंद बांध की स्थिति इस बार काफी बेहतर है। इस विशाल जलाशय में फिलहाल 60.1% पानी आ चुका है। पिछले साल अगस्त में इसमें महज 32.4% पानी ही था। रिहंद में जलस्तर सुधरने से न केवल हाइड्रो पावर प्लांट पूरी क्षमता से चलेंगे, बल्कि सोनभद्र के बड़े थर्मल पावर प्लांटों को मशीनों की कूलिंग के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा। ————————— यह खबर भी पढ़ें- डिजिटल अरेस्ट, न्यूड वीडियो कॉल… साइबर फ्रॉड के 4 हथियार, UP में हर महीने ₹100 करोड़ से ज्यादा की ठगी यूपी में हर महीने 100 करोड़ रुपए से ज्यादा का साइबर फ्रॉड हो रहा है। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) से हैरान करने वाले आंकड़े सामने आए हैं। बीते 7 महीनों में ढाई लाख से ज्यादा शिकायतें मिलीं, लेकिन सिर्फ 1040 मामलों में ही FIR दर्ज हुई। वहीं, पुलिस महज 1957 आरोपियों को गिरफ्तार कर सकी। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…