अरुण गोविल को देख महिलाएं फूट-फूटकर रोईं:गाया- मेरे राम आए हैं…, प्रदर्शन के 15वें दिन मेरठ सेंट्रल मार्केट पहुंचे सांसद

सांसद अरुण गोविल मेरठ सेंट्रल मार्केट में चल रहे व्यापारियों के प्रदर्शन में पहुंचे। शुक्रवार को प्रदर्शन का 15वां दिन है। उन्हें देखते ही प्रदर्शन में मौजूद महिला-पुरुष रोने-बिलखने लगे। रोते-रोते ही हाथ जोड़कर गाने लगे- मेरे भगवान आए हैं, मेरे राम आए हैं…। इस पर अरुण गोविल ने कहा- मैं भगवान नहीं तुम्हारा भाई हूं। आप लोग मेरा परिवार हो। ये महिलाएं मेरी बहन हैं। उन्होंने कहा कि भगवान से जब कुछ मांगते हैं तो यह नहीं देखते कि वह अच्छा है या बुरा। हमें भगवान से यह प्रार्थना करनी है कि जो हमारे लिए अच्छा हो, वह होना चाहिए। इस मामले में क्या होगा, कैसे होगा, कब होगा? इस बात के बारे में किसी को कुछ नहीं मालूम। इसलिए भगवान से प्रार्थना कीजिए। अरुण गोविल ने व्यापारियों से काफी देर तक बातचीत की। उनको काफी समझाया। इसके बाद व्यापारियों ने अपना प्रदर्शन स्थगित करा दिया। अरुण गोविल ने कहा कि माननीय सुप्रीम कोर्ट का आदेश है। उसके अनुसार ही हमें और आवास विकास को काम करना होगा। लेकिन, सरकार लगातार आप लोगों का संज्ञान ले रही है। निश्चित रूप से आपको न्याय मिलेगा। गोविल बोले- मैंने मुख्यमंत्री और वकीलों से बात की है अरुण गोविल ने महिलाओं से कहा- ऐसा नहीं है कि मैं आज 15 दिन बाद आया हूं, तो मुझे इस मामले का कुछ पता नहीं है। मैंने लगातार सुप्रीम कोर्ट के वकीलों और यहां तक मुख्यमंत्री से भी मैंने इस मामले को लेकर बात की है। सुप्रीम कोर्ट में हमारा पक्ष मजबूती से रखा जाएगा और हमें न्याय मिलेगा। बोले- नेता मत बनाओ, मैं आपका भाई हूं अरुण गोविल जब बातचीत के लिए महिलाओं के बीच पहुंचे, तो वहां मौजूद कुछ लोग जिंदाबाद के नारे लगाने लगे। इस पर सांसद ने कहा कि नारे लगाकर मुझे नेता मत बनाओ। मैं इन लोगों का भाई बनकर ही ठीक हूं। हालांकि, इसके बावजूद लोगों ने जय श्रीराम के नारे लगाए। राम के किरदार से बाहर आने का प्रयास सांसद अरुण गोविल को विपक्ष लगातार राम के नाम से ट्रोल कर रहा है। इसके साथ ही लोग यह भी कहते हैं कि हम तो राम को लाए थे। अब हमारे साथ यह सब क्या हो रहा है? ऐसे में खुद को उस किरदार से अलग करने के लिए सांसद को कहना पड़ा कि मैं राम नहीं हूं। उधर, व्यापारियों का दावा है कि जो सूची सुप्रीम कोर्ट में पेश होनी थी, वह पहले ही कुछ लोगों तक पहुंच गई। अगर कोई गड़बड़ी नहीं थी, तो लिस्ट पहले कैसे बाहर आई? इस पूरे मामले में यह भी आरोप लगाया गया कि आवास विकास के अधिकारियों ने कोर्ट और सरकार दोनों को गुमराह किया। सूची से बाहर किए गए 12 भवनों में कैलाश डेरी का नाम प्रमुख रूप से चर्चा में है। मार्केट के व्यापारियों का कहना है कि वहां व्यावसायिक गतिविधियां जारी थी, इसके बाद भी सीलिंग लिस्ट से उनका नाम कट गया। इसी तरह IDBI बैंक की बिल्डिंग को सील कर दिया गया, लेकिन पास ही स्थित SBI की बिल्डिंग को छोड़ दिया गया। इसे लेकर भी अधिकारियों पर दोहरी नीति अपनाने के आरोप लगे। ————————– ये खबर भी पढ़ें… लेक्चरर की पत्नी की हत्या में नौकरानी पर शक:कानपुर पुलिस ने 6 को उठाया, बेटी की शादी के लिए खरीदे थे जेवरात कानपुर में लेक्चरर की पत्नी का मर्डर-लूटकांड में पुलिस खुलासे के करीब पहुंच गई है। पुलिस की जांच नौकरानी के इर्द-गिर्द घूम रही है। पुलिस ने नौकरानी ऊषा और उसकी भांजी समेत छह लोगों को हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ कर रही है। डीसीपी वेस्ट का दावा है कि जल्द ही मर्डर केस का खुलासा करेंगे। पुलिस नौकरानी और उसके परिवार के संदिग्धों की लोकेशन, कॉल डिटेल समेत अन्य सबूतों की जांच कर रही है। तस्दीक होते ही मर्डर और लूटकांड का खुलासा करेगी। पढ़ें पूरी खबर