पीलीभीत का इलहाम-उर्र-रहमान शम्सी कहने को चपरासी था, लेकिन हैसियत किसी अफसर से कम नहीं थी। चालाक इतना कि शिक्षा विभाग के 9 करोड़ रुपए गायब कर दिए और किसी को कानों-कान खबर तक नहीं हुई। खुलासा हुआ, तो FIR हुई। लेकिन, इलहाम अग्रिम जमानत लेकर घर आ गया। जांच में पता चला इलहाम ने अपनी 3 पत्नियों समेत कई रिश्तेदारों के बैंक खाते में सरकारी पैसा भेजा है। इससे पहले किसी को पता नहीं था कि उसने एक से ज्यादा शादियां भी की हैं। पूरे मामले में कई सवाल उठते हैं। आखिर एक चपरासी DIOS ऑफिस में क्लैरिकल काम कैसे करने लगा? ट्रेजरी ऑफिसर्स ने बजट बढ़ने पर सवाल क्यों नहीं किया? महिलाओं को पता कैसे नहीं चला कि इलहाम ने कई शादी कर रखी हैं? पढ़िए पूरी कहानी… पहले इलहाम की निजी जिंदगी के बारे में जानिए… अधिकारियों से सेटिंग, DIOS ऑफिस में अटैच हुआ पीलीभीत शहर में ही पंजाबियान मोहल्ला है। 45 साल का इलहाम यहीं अपने परिवार के साथ रहता है। परिवारवालों का रहन-सहन ऐसा है, जैसे किसी अफसर के घरवाले हों। 2010 के आसपास इलहाम को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की सरकारी नौकरी मिल गई। उसकी तैनाती शहर के पास ही बीसलपुर के जनता टेक्निकल इंटर कॉलेज में हुई। नौकरी लगने के बाद अर्शी खातून से उसकी शादी हो गई। मोहल्लेवाले बताते हैं- इलहाम कॉलेज के टीचर्स और शिक्षा विभाग के अधिकारियों से व्यवहार बनाकर चलता था। किसी से उसका कोई झगड़ा नहीं था। अधिकारियों से नजदीकी का फायदा उठाकर 2014 में इलहाम ने खुद को DIOS ऑफिस में अटैच करवा लिया। पोस्ट तो वहां भी चपरासी की ही थी, लेकिन धीरे-धीरे ऑफिस के बाबुओं का खास बन गया। वो बाबूओं को सिस्टम से पैसा कमाने के तरीके तक बताने लगा था। कंप्यूटर की जानकारी से चपरासी बना ‘क्लर्क’ 2018 से पहले तक पीलीभीत के DIOS ऑफिस के ज्यादातर काम में कंप्यूटर का दखल नहीं था। ज्यादातर काम फाइलों में ही होते थे। इलहाम फाइलें मैनेज करने में तो मास्टर था ही, लेकिन डिजिटलाइजेशन से उसे और फायदा हुआ। ऑफिस के बाबुओं को कंप्यूटर की अच्छी जानकारी नहीं थी, लेकिन इलहाम इसका जानकार था। इसी वजह से इलहाम को सैलरी बिल, टोकन जेनरेशन जैसे फाइनेंशियल कामों की जिम्मेदारी दे दी गई। इलहाम के पास जिले के 35 सरकारी इंटर कॉलेज, हाईस्कूल और 22 अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) इंटर कॉलेजों के टीचर्स और कर्मचारियों का रिकॉर्ड रहता था। कोई काम पड़ने पर टीचर्स इलहाम से ही संपर्क करते थे। साथ काम करने वाले बताते हैं कि कई बार वो महंगे ब्रांड के कपड़े पहनकर आता था। लेकिन, ऑफिस में हमेशा बहुत नॉर्मल तरीके से रहता था। कभी बहुत बड़ी-बड़ी बातें नहीं करता था। 3 शादियां कीं और किसी को खबर तक नहीं इसी बीच इलहाम ने 2 शादियां और कीं। 2016 में दूसरी शादी अजारा खान से की। अजारा अलीगढ़ की रहने वाली थी, लेकिन बुलंदशहर में जामा मस्जिद के पास जामुन गली में रहती थी। इसके बाद तीसरी शादी संभल की लुबना से की। 32 साल की लुबना संभल के जगत मोहल्ला में रहती है। उसने पुलिस पूछताछ में बताया कि उसे इलहाम की दो और शादियों के बारे में पता ही नहीं था। लुबना की बहन फातिमा नवी से भी इलहाम की नजदीकी है। उसके खाते में इलहाम ने 1 करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम भेजी थी। मोहल्लेवाले बताते हैं कि तीन शादियों के बारे में किसी को पता नहीं है। बाकी दो पत्नियां भी कभी पीलीभीत नहीं आईं। इलहाम अक्सर संभल और बुलंदशहर जाता रहता था, लेकिन कभी ऐसी चर्चा नहीं हुई। इलहाम की लाइफस्टाइल पिछले कुछ सालों से बदल गई थी। परिवार के लोग भी बदले हुए नजर आते थे। काफी जमीन खरीद ली थी। बरेली में बड़ा इन्वेस्टमेंट करने वाले थे। अब समझिए पैसे भेजने का खेल कैसे शुरू हुआ… पत्नियों, साली, सास को सरकारी टीचर बनाकर भेजा पैसा इलहाम ने 6 जून, 2024 को पत्नी अर्शी खातून का बैंक ऑफ बड़ौदा में खाता खुलवाया। ठीक 6 दिन बाद पत्नी का खाता ‘सैलरी अकाउंट’ के रूप में अप्रूव करवा लिया। जबकि इसके लिए वेरिफिकेशन होता है, बड़े अधिकारियों के सिग्नेचर होते हैं। ये सारा काम इलहाम ने सिर्फ 6 दिन में करवा लिया। चूंकि इलहाम खुद ही सैलरी टोकन जारी करता था। इसलिए सितंबर से इस अकाउंट में सैलरी भी जाने लगी। फरवरी, 2026 में जब मामला खुला, तब तक इस अकाउंट में 1 करोड़ 15 लाख रुपए से ज्यादा भेजे जा चुके थे। इसी तरह इलहाम ने दूसरी पत्नी अजारा, तीसरी पत्नी लुबना, लुबना की बहन फातिमा नवी, सास नाहिद, सलहज आफिया, परिचित आशकारा और परवीन खातून के अकाउंट भी अटैच करवा दिए। इन सबको भी सरकारी टीचर दिखाया गया, जबकि इनका पढ़ाई या फिर पढ़ाने से कोई मतलब नहीं था। हर महीने 6 बार तक ट्रेजरी से आता था पैसा अब सवाल है कि जब सारा काम इतनी सफाई से हुआ, तो मामला पकड़ा कैसे गया? पूरा खेल 12 सितंबर, 2024 से शुरू होता है। इस दिन इलहाम की पत्नी अर्शी के अकाउंट में ट्रेजरी से 1 लाख रुपए आए। उसी दिन ट्रेजरी से 1 लाख रुपए और आए। इसके बाद हर महीने 2 से 6 बार तक ट्रेजरी से पैसा आता रहा। 17 दिसंबर, 2025 तक 98 बार ट्रेजरी से पैसा आया। ये रकम 1 करोड़ 1 लाख रुपए थी। 17 दिसंबर को 36 लाख 41 हजार रुपए निकाले गए। हर महीने कई बार लाख-लाख रुपए ट्रेजरी से आने पर बैंक को शक हुआ, क्योंकि ये बचत खाता था। अर्शी को नौकरीपेशा दिखाया गया था, न कि व्यापारी। बैंक ने 10 फरवरी, 2026 को जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह को इस बारे में बताया। डीएम के निर्देश पर मुख्य विकास अधिकारी (CDO) ने जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) राजीव कुमार से रिपोर्ट मांगी। इसके बाद DIOS ने 13 फरवरी को इलहाम सस्पेंड कर दिया। साथ ही उसके और पत्नी अर्शी पर सरकारी पैसों के गबन की FIR दर्ज करवाई। हालांकि, इलहाम गिरफ्तारी से बच गया, क्योंकि उसने कोर्ट से अग्रिम जमानत ले ली थी। दरअसल, DIOS के साइन के बाद ही हर महीने के सैलरी बिल ट्रेजरी पहुंचते हैं। फिर ट्रेजरी से टीचर्स और अन्य कर्मचारियों के अकाउंट में सैलरी ट्रांसफर की जाती है। मामले की गंभीरता देखते हुए डीएम ने जांच के लिए 4 सदस्यीय विशेष टीम बना दी। इसमें इंस्पेक्टर क्राइम ब्रांच के साथ साइबर और अकाउंट्स के एक्सपर्ट भी शामिल हैं। इसके बाद पुलिस ने 19 फरवरी को इलहाम की पत्नी अर्शी को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया। हालांकि, अर्शी भी 28 मार्च को जमानत पर बाहर आ गई। जांच में 53 फर्जी अकाउंट सामने आए इसके बाद एएसपी विक्रम दहिया ने जांच तेज की। सीओ सिटी दीपक चतुर्वेदी ने भी कई बार पूछताछ की। इससे जानकारियां सामने आईं। इलहाम ने सिर्फ पत्नी अर्शी के अकाउंट में ही नहीं, अपनी दो अन्य पत्नियों, साली, सास, परिचित समेत कुल 53 फर्जी अकाउंट बना रखे थे। इनमें से 7 आरोपियों को पुलिस ने 1 मई को गिरफ्तार करके जेल भेजा। उनके खातों में करीब 8.15 करोड़ रुपए ट्रांसफर हुए थे। ये रकम सैलरी और कॉलेज में फर्जी काम कराने के नाम पर भेजी गई थी। पुलिस ने अलग-अलग बैंक खातों में जमा 5 करोड़ 50 लाख रुपए की धनराशि को फ्रीज करा दिया है। यहां गौर करने वाली बात ये रही कि इलहाम ने सभी पैसे अपने महिला रिश्तेदारों के खाते में ही भेजे। इसके पीछे इलहाम का मानना था कि महिलाओं का वेरिफिकेशन करवाना पुरुषों के वेरिफिकेशन से आसान था। ट्रेजरी के पास ऐसा कोई टूल नहीं जो फर्जी अकाउंट पकड़े अब सवाल है कि क्या कभी ट्रेजरी विभाग ने फर्जी अकाउंट की जांच नहीं की? इसे लेकर सीनियर ट्रेजरी ऑफिसर संजय यादव कहते हैं- हमारा काम सिर्फ बिल को प्रॉसेस करना होता है। जांच-पड़ताल सब कुछ DIOS से होकर आता है। हमारे पास ऐसा कोई टूल भी नहीं है, जिससे जान पाएं कि अकाउंट फर्जी तरीके से पैसा ले रहा है। फर्जीवाड़े की पूरी कोशिश DIOS ऑफिस से ही होती है, वहीं सारा फर्जीवाड़ा हुआ है। वहीं, सीनियर जर्नलिस्ट केशव अग्रवाल कहते हैं- पूरे मामले में कई सवाल हैं। आखिर एक चपरासी को वेतन बिल, टोकन जनरेशन का काम कैसे दिया जा सकता है? इस काम के लिए कोई तो ऑथराइज्ड कर्मचारी होगा। वो कौन है? उसकी क्या भूमिका थी? इसके अलावा अभी तक इस मामले में इलहाम को ही आरोपी बनाया गया है। जिन्होंने अप्रूवल दिया, सिग्नेचर किए, पैसे ट्रांसफर किए, क्या उन लोगों का कोई हाथ नहीं है? पुलिस को भी बताना चाहिए कि और कौन लोग इसमें शामिल हैं? ————————- ये खबर भी पढ़ें… बंगाल-असम नतीजों से UP के लिए 5 बड़े मैसेज, अब अखिलेश के सामने दोहरी चुनौती, खास वोट बैंक के सहारे जीतना मुश्किल असम और पश्चिम बंगाल में भाजपा को प्रचंड जीत ने यूपी की सियासत में हलचल तेज कर दी है। भाजपा का जहां मनोबल ऊंचा हुआ है, वहीं सपा-कांग्रेस गठबंधन के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। चुनाव नतीजों ने साफ संकेत दिया है कि 2027 के यूपी चुनाव में मजबूत नेतृत्व और स्पष्ट रणनीति ही जीत दिलाएगी। पूरी खबर पढ़ें…