‘समाजवादी पार्टी ने संसद में महिला आरक्षण को रोका, उसे भी यूपी की महिलाओं का आक्रोश सहना होगा। महिला विरोधी समाजवादी पार्टी कुछ भी करके अपने पाप को कभी धुल नहीं पाएगी।’ – पीएम मोदी दिन था पश्चिम बंगाल के ऐतिहासिक जीत के जश्न मनाने का। लेकिन, इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सपा का नाम लेकर यह जता दिया कि अगला मिशन यूपी ही है। मोदी ने संकेत दे दिया है कि अब भाजपा पूरी तरह यूपी पर फोकस करेगी। योगी मंत्रिमंडल के विस्तार और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की नई टीम के गठन में इसकी झलक भी देखने को मिलेगी। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… लोकसभा चुनाव- 2024 में मिले झटके के बाद भाजपा ने हरियाणा, महाराष्ट्र और दिल्ली विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की। अब असम, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में भी पार्टी को भारी जीत मिली। हालांकि, केरल और तमिलनाडु में पार्टी को सफलता नहीं मिली। देश के 22 प्रदेशों में भाजपा या NDA की सरकारें हैं। 2027 में यूपी, उत्तराखंड, गोवा, पंजाब और मणिपुर में चुनाव होना है। इनमें से यूपी, उत्तराखंड और गोवा में भाजपा की सरकारें हैं। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि इनमें से यूपी चुनाव पीएम मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के लिए सबसे अहम है। भाजपा जानती है कि केंद्र में उनका दबदबा तब ही कायम रहेगा, जब यूपी में उसकी सरकार रहेगी। लिहाजा, अब पार्टी और सरकार 2027 में यूपी में तीसरी बार भगवा फहराने में पूरी ताकत लगा देंगे। भाजपा के निशाने पर सपा, महिला बिल का ठीकरा फोड़ेगी महिला आरक्षण संशोधन बिल लोकसभा में गिरने के बाद पीएम मोदी ने देश को संबोधित किया था। इसमें उन्होंने बिल गिरने के लिए सपा को जिम्मेदार ठहराया था। कहा था- सपा के पास मौका था कि वो अपनी महिला विरोधी छवि होने के दाग को कुछ कम कर सके, लेकिन वह इसमें चूक गई। वो लोहिया जी को तो पहले ही भूल चुकी है। बिल का विरोध करके लोहिया जी के सारे सपनों को पैरों तले रौंद दिया है। सपा महिला आरक्षण विरोधी है, ये यूपी की और देश की महिलाएं कभी नहीं भूलेंगी। यही बात उन्होंने पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी में जीत के बाद जश्न मनाने भाजपा मुख्यालय पर कार्यकर्ताओं के सामने दोहराई। जानकार मानते हैं कि इसी लाइन से पीएम मोदी ने संकेत दे दिया कि अब उनका अगला पड़ाव यूपी ही है। यूपी में हैट्रिक के लिए भाजपा क्या करेगी, कहां-क्या असर दिखेगा… 1- सरकार और संगठन पर असर: भाजपा किसी भी हालत में यूपी में तीसरी बार सरकार बनाना चाहती है। इसके लिए वह किसी भी स्तर पर जोखिम उठाने को तैयार है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि योगी मंत्रिमंडल के विस्तार में इसकी झलक देखने को मिल सकती है। इसमें सरकार, संगठन, कार्यकर्ताओं और जनता की अपेक्षाओं पर खरा न उतरने वाले मंत्रियों को हटाया जा सकता है। एंटी इनकंबेंसी कम करने के लिए कुछ नए चेहरों को जगह दी जा सकती है। जातीय समीकरण का ध्यान रखने के साथ महिला वोटबैंक को साधने की भी कोशिश होगी। महिला मंत्रियों की संख्या बढ़ाई जा सकती है। ऐसे चेहरों को मंत्री बनाया जाएगा, जो अपनी जाति के साथ क्षेत्र में भाजपा को फायदा पहुंचा सकें। उधर, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी की नई टीम में भी इसी आधार पर नेताओं को शामिल किया जाएगा। प्रदेश टीम में भी महिलाओं की संख्या पहले से ज्यादा हो सकती है। टीम में ऐसे लोगों को जगह मिलेगी, जो बेहतर चुनाव प्रबंधन कर सकें। 2- जल्द घोषित होंगे संगठन प्रभारी: यूपी भाजपा में बीते दो साल से संगठन प्रभारी की नियुक्ति नहीं हुई है। कभी राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े, तो कभी राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ को समय-समय पर यूपी भेजा जाता रहा है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, आने वाले कुछ दिनों में केंद्रीय नेतृत्व की ओर से किसी वरिष्ठ पदाधिकारी को यूपी का प्रभारी बनाया जा सकता है। इसके बाद विधानसभा चुनाव के लिए भी प्रभारी नियुक्त किए जाएंगे। किसी केंद्रीय मंत्री को यूपी में भाजपा का चुनाव प्रभारी बनाया जाएगा। 3- विकास, राष्ट्रवाद और रोजगार का मुद्दा: यूपी की भाजपा सरकार जनवरी से ही विकास, राष्ट्रवाद और रोजगार के मुद्दे को साथ लेकर चल रही है। फरवरी में मेरठ मेट्रो और नमो भारत ट्रेन की शुरुआत की। नोएडा में देश के पहले सेमीकंडक्टर पार्क का शिलान्यास किया। मार्च में जेवर एयरपोर्ट और अप्रैल में गंगा एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन किया। उधर, अयोध्या के राममंदिर में राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने राम यंत्र की स्थापना की। हिंदू पर्व और त्योहारों पर सरकार की ओर से भी आयोजन किए जा रहे हैं। वहीं, उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC), उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC), पुलिस भर्ती बोर्ड और शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से करीब-करीब हर सप्ताह नई भर्ती निकाली जा रही है। 4. सरकार दे रही एकजुटता का संदेश: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह अरुण कुमार की मौजूदगी में मार्च में हुई समन्वय बैठक के बाद सरकार पूरी तरह एकजुट होने का संदेश दे रही है। किसी भी मंत्री की ओर से ऐसा कोई बयान नहीं दिया जा रहा, जिससे सरकार में खींचतान नजर आए। इतना ही नहीं, NDA के सहयोगी दल भी अब गठबंधन को लेकर बयानबाजी से बच रहे हैं। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक सपा पर हमलावर भी हो रहे हैं। 5. सीएम योगी प्रदेश का दौरा करेंगे: इसके अलावा सीएम योगी आदित्यनाथ कुछ दिनों में प्रदेश का दौरा शुरू करने जा रहे हैं। सीएम हर जिले में पहुंचकर विकास प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास और उद्घाटन करने के साथ जमीनी स्थिति का जायजा लेंगे। वहीं, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी संगठन के लिहाज से जिलों का दौरा करेंगे। चौधरी जिलों में संघ और भाजपा कार्यकर्ताओं से मुलाकात करेंगे। 2027 के नतीजे तय करेंगे योगी का राजनीतिक भविष्य सीनियर जर्नलिस्ट रतनमणि लाल का मानना है कि पश्चिम बंगाल में सरकार बनाना भाजपा की अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि है। अब भाजपा पूरी ताकत वहां लगाएगी, जहां उनकी सरकार है। उन राज्यों में यूपी सबसे आगे रहेगा। सीएम योगी के लिए भी 2027 बड़ी परीक्षा होगी। 2027 के नतीजे योगी का राजनीतिक भविष्य तय करेंगे। सीएम योगी की भी कोशिश रहेगी कि असम के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा की तरह उन्हें भी फ्री-हैंड दिया जाए। सीएम योगी की ओर से जनता और कार्यकर्ताओं में असंतोष कम करने की कोशिश की जा रही है। जैसे स्मार्ट मीटर को लेकर उपजे असंतोष के बाद सरकार को अपना फैसला बदलना पड़ा। वहीं, सीनियर जर्नलिस्ट आनंद राय कहते हैं कि पश्चिम बंगाल चुनाव में जीत के बाद भाजपा का पूरा फोकस अब यूपी पर रहेगा। ऐसा माना जा रहा है कि पीएम मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन और राष्ट्रीय महासचिव सुनील बंसल यूपी में ही ताकत लगाएंगे। ————————– ये खबर भी पढ़ें… बंगाल-असम नतीजों से UP के लिए 5 बड़े मैसेज:अब अखिलेश के सामने दोहरी चुनौती, खास वोट बैंक के सहारे जीतना मुश्किल असम और पश्चिम बंगाल में भाजपा को प्रचंड जीत ने यूपी की सियासत में हलचल तेज कर दी है। भाजपा का जहां मनोबल ऊंचा हुआ है, वहीं सपा-कांग्रेस गठबंधन के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। चुनाव नतीजों ने साफ संकेत दिया है कि 2027 के यूपी चुनाव में मजबूत नेतृत्व और स्पष्ट रणनीति ही जीत दिलाएगी। पूरी खबर पढ़ें…