अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद अब श्रीकृष्ण जन्मभूमि का मुद्दा एक बार फिर गरमाने लगा है। हरिद्वार में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रवींद्र पुरी ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को खुली चुनौती देते हुए कहा कि अगर वह खुद को भगवान श्रीकृष्ण की यदुवंशी परंपरा का मानते हैं तो उन्हें कृष्ण जन्मभूमि आंदोलन में साथ आना होगा। अगर नहीं आते तो साफ घोषणा करें कि वह सनातन विरोधी हैं। श्रीमहंत रवींद्र पुरी ने कहा कि जब भी सनातनी मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर दर्शन करने जाते हैं और वहां ईदगाह देखते हैं तो उनका सिर शर्म से झुक जाता है। उन्होंने कहा कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था से जुड़े इस विषय का समाधान अब और टलना नहीं चाहिए। हालांकि, पहले घोषित मथुरा कूच फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि कांवड़ मेले की व्यस्तताओं के कारण अब मेले के बाद संतों और विभिन्न अखाड़ों की बैठक होगी, जिसमें आंदोलन की अगली रणनीति और मथुरा कूच की नई तारीख तय की जाएगी। ‘कृष्ण जन्मभूमि पर ईदगाह देखकर शर्म आती है’ श्रीमहंत रवींद्र पुरी ने कहा कि जब भी वह मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर पूजा करने जाते हैं और वहां ईदगाह देखते हैं तो एक सनातनी होने के नाते उनका सिर झुक जाता है। उन्होंने कहा, “जहां भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ, वहां ईदगाह क्यों है? वहां जाकर हमें खुद को हिंदू कहने में शर्म आती है। आखिर यह स्थिति कब तक रहेगी?” उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है और वहां भव्य मंदिर का निर्माण होना चाहिए। ‘साथ आइए, नहीं तो खुद को सनातन विरोधी घोषित कीजिए’ श्रीमहंत रवींद्र पुरी ने अखिलेश यादव पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि वह खुद को यदुवंशी बताते हैं, जबकि भगवान श्रीकृष्ण भी यदुवंश से जुड़े हैं। ऐसे में उन्हें इस आंदोलन का समर्थन करना चाहिए। उन्होंने कहा- अखिलेश जी, आप भगवान श्रीकृष्ण की परंपरा से हैं। आपको हमारे साथ आना ही होगा। अगर नहीं आते हैं तो साफ घोषणा कर दीजिए कि आप सनातन विरोधी हैं, हिंदूवादी नहीं हैं। हमारी लड़ाई आपके पूर्वज भगवान श्रीकृष्ण के सम्मान की लड़ाई है। पुरी ने आगे कहा कि इस आंदोलन में सभी राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों को बुलाया जाएगा, लेकिन अखिलेश यादव से उन्हें विशेष उम्मीद है। राम मंदिर विवाद का भी किया जिक्र श्रीमहंत रवींद्र पुरी ने कहा कि राम मंदिर को लेकर भी कुछ लोगों ने लगातार विवाद खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर के पुजारी और चढ़ावे को लेकर पूरे देश में सनातन समाज की छवि खराब करने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि भगवान के मंदिरों को लेकर लगातार विवाद खड़े करना उचित नहीं है और धार्मिक आस्थाओं का सम्मान होना चाहिए। PM मोदी, अमित शाह और योगी से की अपील अखाड़ा परिषद अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले में शीघ्र निर्णय लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि केंद्र और उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार है, इसलिए धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व से जुड़े इस विषय के समाधान के लिए यह सबसे उपयुक्त समय है। कानूनी लड़ाई भी जारी, संतों का आंदोलन भी चलेगा श्रीमहंत रवींद्र पुरी ने कहा कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद से जुड़े मामले न्यायालय में विचाराधीन हैं और संत समाज न्यायिक प्रक्रिया का पूरा सम्मान करता है। इसके साथ ही लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से आंदोलन भी जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि कांवड़ मेले के बाद संतों और अखाड़ों की महत्वपूर्ण बैठक होगी, जिसमें आंदोलन की दिशा, मथुरा कूच की नई तारीख और आगे की रणनीति तय की जाएगी। कांवड़ मेले के बाद तेज हो सकती हैं गतिविधियां हरिद्वार में संत समाज की सक्रियता को देखते हुए माना जा रहा है कि कांवड़ मेले के बाद श्रीकृष्ण जन्मभूमि आंदोलन को नई गति मिल सकती है। संतों का कहना है कि वे कानून और संविधान के दायरे में रहकर अपनी बात सरकार और समाज के सामने रखते रहेंगे। अब सभी की नजरें कांवड़ मेले के बाद होने वाली संतों की बैठक पर हैं, जहां से आंदोलन के अगले चरण की औपचारिक घोषणा होने की संभावना है।