कौशांबी में 11 मौतों का जिम्मेदार कौन?:2 साल पहले लाइसेंस सस्पेंड, जेल गया था मालिक; फिर कैसे चलती रही ‘मौत की फैक्ट्री’

कौशांबी में पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट में 11 लोगों की मौत हो गई। इन मौतों ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल है, आखिर इन मौतों का जिम्मेदार कौन है? जिस फैक्ट्री में धमाका हुआ, उसका लाइसेंस 2 साल पहले ही सस्पेंड हो चुका था। तब मालिक को अवैध विस्फोटक रखने के आरोप में जेल भी भेजा गया था। लेकिन, जेल से बाहर आने के बाद वह दोबारा आबादी के बीच बड़ी मात्रा में पटाखे और बारूद जमा करता रहा। इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों को इसकी भनक तक नहीं लगी। अब इस बात की जांच होगी कि उसने दोबारा कारोबार कैसे शुरू किया? घटना से जुड़ी तस्वीरें देखिए… 25 हजार की आबादी वाला गांव, नई बस्ती बस रही कौशांबी से 35 किमी दूर पिपरी थाना क्षेत्र में मनौरी गांव है। गांव की आबादी करीब 25 हजार है। गांव से बाहर करीब 1 किमी दूरी पर नई बस्ती बस रही है। 8-10 घर बन चुके हैं। यहीं पर नौशाद अली ने कई साल पहले पटाखा फैक्ट्री का लाइसेंस लिया था। 8 अक्टूबर, 2024 को जांच में उसके गोदाम से करीब 12 किलो बारूद और अन्य विस्फोटक सामग्री बरामद हुई थी। इसके अगले दिन नौशाद को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। उसका लाइसेंस भी निलंबित कर दिया गया। नौशाद की ही फैक्ट्री में 31 अगस्त (सोमवार) विस्फोट हो गया। विस्फोट इतना भीषण था कि पूरी फैक्ट्री जमींदोज हो गई। 100 मीटर के दायरे में बने 8 मकान क्षतिग्रस्त हो गए। 3 तो पूरी तरह से ढह गए। जेल से छूटा और फिर शुरू किया ‘बारूद का खेल’ जेल से बाहर आने के बाद नौशाद ने दोबारा पटाखों का कारोबार शुरू कर दिया। इस बार परिवार के दूसरे लोग भी उसके साथ जुड़ गए। इनमें उसका भाई शकील, बेटा आदिल और परिवार की महिलाएं भी शामिल हैं। पटाखों का भंडारण जारी रहा। इसका नतीजा विस्फोट के रूप में सामने आया, जिसने कुछ सेकेंड में कई घरों को मलबे में बदल दिया। 11 परिवारों से उनके अपने छीन लिए। जानिए 4 जिम्मेदार कौन? पिपरी थानाध्यक्ष विकास सिंह
विस्फोट की जगह पिपरी थाना क्षेत्र में आती है। थानाध्यक्ष विकास सिंह पर अपने क्षेत्र में होने वाली अवैध गतिविधियों की निगरानी और कार्रवाई की जिम्मेदारी थी। सवाल है कि आबादी के बीच सैकड़ों किलो बारूद और बड़ी मात्रा में पटाखे जमा किए जाते रहे, लेकिन पुलिस को इसकी भनक तक क्यों नहीं लगी? 2- सीओ चायल शिवांक सिंह
सर्किल ऑफिसर (CO) होने के नाते शिवांक सिंह की जिम्मेदारी अपने अधीन आने वाले थानों की कार्यप्रणाली की निगरानी की भी है। इसके बावजूद एक ऐसा व्यक्ति, जिसे 2 साल पहले अवैध बारूद रखने के आरोप में जेल भेजा गया था, उसी सर्किल में दोबारा बड़े पैमाने पर बारूद जमा कैसे करता रहा? पुलिस को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई? क्या थाना स्तर पर कार्रवाई की समीक्षा हुई? क्या संवेदनशील लाइसेंसधारियों और पूर्व में विस्फोटक अधिनियम से जुड़े मामलों की निगरानी की गई? इन सवालों का जवाब अब जांच में तलाशने होंगे। 3- एसडीएम चायल प्रेरणा गौतम
इस मामले में प्रशासनिक स्तर पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आखिर आबादी के बीच पटाखों का कारोबार कैसे चलता रहा? क्या तहसील प्रशासन ने कभी मौके का निरीक्षण किया? जिस जमीन पर गोदाम और फैक्ट्री चल रही थी, उसका भू-उपयोग क्या था? क्या वहां इस तरह की गतिविधि की इजाजत थी? अगर पटाखा फैक्ट्री का लाइसेंस पहले ही सस्पेंड हो चुका था, तो प्रशासन ने उसके बाद मौके की स्थिति जानने के लिए क्या कार्रवाई की? 4- मुख्य अग्निशमन अधिकारी मंगेश कुमार
पटाखों से जुड़ी गतिविधियों में अग्निसुरक्षा सबसे अहम होती है। ऐसे में मुख्य अग्निशमन अधिकारी मंगेश कुमार की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। लाइसेंस सस्पेंड होने के बाद क्या अग्निशमन विभाग ने मौके की जांच की? क्या यह देखा गया कि वहां अवैध तरीके से विस्फोटक या पटाखों का भंडारण तो नहीं हो रहा? क्या स्थानीय फायरकर्मियों ने कभी इस स्थान की रिपोर्टिंग की? धमाके की भयावहता ने खोली बारूद के भंडारण की पोल विस्फोट की तीव्रता खुद बता रही है कि मौके पर कितना बड़ा खतरा जमा था? धमाके की आवाज करीब 2 किलोमीटर दूर तक सुनी गई। मलबा और विस्फोट के अवशेष करीब 500 मीटर दूर तक बिखरे मिले। फैक्ट्री के सामान के साथ ईंट, सरिया और मकानों का मलबा भी दूर-दूर तक बिखर गया। 200 मीटर दूर 3 मंजिला मकान की दीवारें उड़ीं हादसे में क्षतिग्रस्त एक मकान का आरसीसी पिलर भी करीब 500 मीटर दूर जाकर गिरा। विस्फोट की ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि फैक्ट्री से करीब 200 मीटर दूर स्थित एक 3 मंजिला मकान की पहली और दूसरी मंजिल की एक तरफ की दीवारें उड़ गईं। आसपास के 5 मकानों के पिछले हिस्से भी पूरी तरह जमींदोज हो गए। 33 हजार वोल्ट की लाइन का टॉवर भी क्षतिग्रस्त विस्फोट की ताकत इतनी अधिक थी कि करीब 200 मीटर दूर स्थित 33 हजार वोल्ट की बिजली लाइन का टावर भी क्षतिग्रस्त हो गया। मलबा और अन्य सामान टावर तक जा पहुंचे। बिजली लाइन को भी नुकसान हुआ। देर शाम तक बिजलीकर्मी क्षतिग्रस्त लाइन की मरम्मत में जुटे रहे। 9 घंटे तक मलबे में जिंदगी तलाशते रहे जवान हादसे के बाद सबसे बड़ी चुनौती मलबे के नीचे दबे लोगों को तलाशने की थी। दोपहर 12 बजे शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन रात 9 बजे तक चलता रहा। फायर ब्रिगेड और एनडीआरएफ की टीमें लगातार मलबे को हटाकर जिंदगियां तलाशती रहीं। मौके पर 10 जेसीबी, 11 दमकल की गाड़ियां और 14 एंबुलेंस लगाई गई थीं। पड़ोसी बोला- मैं परिवार को लेकर भागा पटाखा फैक्ट्री से 50 मीटर दूर रहने वाले शिवम गुप्ता बताते हैं- सुबह करीब 11:35 पर मैं नहा रहा था। पहले बिजली गई। मुझे लगा फॉल्ट होगा। इसके बाद धमाके शुरू हो गए, लेकिन हमें पता ही नहीं चला। पीछे मेरा मकान भी गिर गया, लेकिन मुझे नहीं पता चला। इसके बाद जैसे ही मुझे पता चला, मैं अपने घर में मौजूद 2 भांजियों, भाभी और बहन के लेकर बाहर की तरफ भागा। इससे हम लोग बच गए। बाकी जो अगल-बगल मकान थे, वो लोग चपेट में आ गए। उस फैक्ट्री में 6-7 महीने से पटाखा बन रहे थे। पहले सामने वाली फैक्ट्री में बनते थे। उसे सील कर दिया गया, तो इधर बनाने लगे थे। पास में था बूंदी बनाने का कारखाना था एक बुजुर्ग मुनीश कुमार पांडे ने बताया- यहां पटाखे भी बनते थे और बगल में उसका गोदाम भी था। इस लाइन में जितने मकान थे, सब गिर चुके हैं। यहीं मेरा मकान था। उसमें ट्यूबवेल भी था, लेकिन सब बर्बाद हो गया। वहीं, अजय सिंह ने बताया कि हम तो यहां नहीं थे। मुझे जैसे ही पता चला कि जहां मेरे भाई काम कर रहे हैं, वहां विस्फोट हो गया तो हम भागकर यहां आए। यहां पता चला कि भाई की मौत हो गई है। मेरे भाई का नाम ज्ञान सिंह है। बगल में बूंदी बनाने का काम हो रहा था। वह वहीं काम कर रहे थे। महिला बोली- पूरी बस्ती-बच्चों का नाश कर दिया प्रयागराज में स्वरूप रानी अस्पताल पहुंची रानी ने बताया- बिजली का खंभा गिरने के बाद फैक्ट्री में रखे बारूद में तेज धमाका हुआ। वहां पटाखा बनाने या बम बनाने की कोई फैक्ट्री थी। बताया जा रहा है कि बिजली का खंभा वहां गिरा। चिंगारी से पूरा ब्लास्ट हुआ है। उसने पूरी बस्ती और हमारे बच्चे लोग का नाश कर दिया है। हादसे में 8 बच्चों समेत 11 की गई जान मृतकों में मंजीत कुमार के दो बच्चे प्रियांजलि और प्रवीन सिंह शामिल हैं। वहीं, गया प्रसाद के तीन बच्चे जाह्नवी, आदित्य और रवि की भी मौत हुई है। गया प्रसाद की पत्नी अनीता (38) घायल हैं। उन्होंने मामले में फैक्ट्री मालिक के खिलाफ FIR लिखाई है। कहा- हादसे में मेरा पूरा कुनबा समाप्त हो गया। इसी तरह, रेलकर्मी विक्रम खाना खाने घर आए थे। घटना में विक्रम, पत्नी अंजू, बेटी अंशू व बेटा नन्हा की जान चली गई। सबसे बड़ी बेटी संजना किराना की दुकान में कुछ सामान लेने गई थी। इसलिए वह बच गई। 6 लोगों पर FIR, 4 टीम गिरफ्तारी में लगीं कमिश्नर एम. लोकेश ने बताया- फिलहाल पूरा ध्यान रेस्क्यू ऑपरेशन पर था। आवासीय क्षेत्र में पटाखा फैक्ट्री कैसे चल रही थी, इसकी जांच कराई जाएगी। डीएम अमित पाल शर्मा ने बताया कि जिसकी भी लापरवाही सामने आएगी, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। कौशांबी SP सत्यनारायण प्रजापति ने बताया कि इस मामले में 6 लोगों के खिलाफ FIR लिखी गई है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए 4 टीमें बनाई गई हैं। यह फैक्ट्री अवैध तरीके से चल रही थी। इसका लाइसेंस 2 साल पहले ही रद्द किया जा चुका है। —————————- यह खबर भी पढ़ें… प्रयागराज एयरफोर्स स्टेशन के पास पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट, 11 की मौत, इनमें 8 बच्चे यूपी में सोमवार को प्रयागराज और कौशांबी बॉर्डर पर एक पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट हो गया। इस हादसे में 8 बच्चों समेत 11 लोगों की मौत हो गई, जबकि 5 झुलस गए। पुलिस के मुताबिक, विस्फोट इतना भीषण था कि पूरी फैक्ट्री जमींदोज हो गई। 100 मीटर के दायरे में बने 8 मकान क्षतिग्रस्त हो गए। इनमें से 3 ढह गए। हादसा सोमवार दोपहर साढ़े 12 बजे कौशांबी जिले के मोहम्मदपुर गांव में हुआ। यह गांव प्रयागराज बॉर्डर पर है। यहां से मनौरी स्थित एयरफोर्स स्टेशन 2 किमी है। पढ़ें पूरी खबर…