UP की सरकारी भर्तियों में ‘वेटिंग लिस्ट’ नहीं:खाली रह जाते हैं पद; 6 राज्यों में 25% तक बनती है ‘एक्स्ट्रा लिस्ट’

यूपी में सरकारी नौकरियों की भर्ती में ‘वेटिंग लिस्ट’ का नियम नहीं है। इससे हर भर्ती में हजारों पद खाली रह जाते हैं। ये 3 तरह के पद होते हैं। पहला- जिन पर चयनित अभ्यर्थी जॉइनिंग नहीं लेता। दूसरा- जॉइनिंग के एक साल के अंदर नौकरी छोड़ देता है। तीसरा- किसी गलती की वजह से विभागीय जांच के बाद नौकरी से हटा दिया जाता है। जबकि 6 पड़ोसी राज्यों- मध्यप्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा, उत्तराखंड और बिहार में 15 से 25% तक वेटिंग लिस्ट बनाने का नियम है। वहां चयन के एक साल के अंदर किसी वजह से पद खाली होता है, तो वेटिंग लिस्ट में शामिल अभ्यर्थी को मौका देते हुए सिलेक्ट किया जाता है। राजस्थान सरकार के कार्मिक विभाग ने करीब 3 महीने पहले ही वेटिंग लिस्ट को लेकर बड़ा बदलाव किया है। अब यूपी में भी सरकारी भर्तियों में वेटिंग लिस्ट लागू करने की मांग जोर पकड़ रही है। इसको लेकर अभ्यर्थी डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक से मिल चुके हैं। दशमलव के अंतर से छंटे युवाओं को नहीं मिल रहा मौका यूपी में कई बार एक ही अभ्यर्थी का चयन अलग-अलग भर्तियों या बड़े पदों पर हो जाता है। बेहतर नौकरी मिलने पर वह एक पद चुनकर दूसरी नौकरी छोड़ देता है या वहां जॉइन नहीं करता। ऐसे में उसके छोड़े हुए पद खाली रह जाते हैं। इन खाली पदों को अगली भर्ती में शामिल किया जाता है। इसका नुकसान उन युवाओं को होता है, जो कुछ अंकों या दशमलव के अंतर से चयनित नहीं हो पाते। अगर वेटिंग लिस्ट होती, तो खाली हुए इन पदों पर उन्हें मौका मिल सकता था। लेकिन, अभी उन्हें नई भर्ती निकलने तक सालों इंतजार करना पड़ता है। इससे सरकार का समय और पैसा दोनों खर्च होता है। इसके कुछ उदाहरण समझिए- पड़ोसी राज्यों में वेटिंग लिस्ट से चयन कैसे होता है? मध्यप्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा, उत्तराखंड और बिहार में फाइनल सिलेक्शन लिस्ट के साथ 15 से 25% तक एक्स्ट्रा अभ्यर्थियों की वेटिंग लिस्ट तैयार की जाती है। अगर कोई चयनित अभ्यर्थी जॉइन नहीं करता। डॉक्यूमेंट की जांच में बाहर हो जाता है। या नौकरी जॉइन करने के बाद कुछ समय में इस्तीफा दे देता है। ऐसे में खाली हुए पद पर वेटिंग लिस्ट में अगले नंबर वाले अभ्यर्थी को मौका दिया जाता है। इन राज्यों में वेटिंग लिस्ट आमतौर पर 12 से लेकर 18 महीने तक मान्य रहती है। इस दौरान जो भी पद खाली होते हैं, उन्हें वेटिंग लिस्ट में शामिल अभ्यर्थियों से मेरिट के आधार पर भर दिया जाता है। किस राज्य में क्या नियम, ये भी जान लीजिए- 1. राजस्थान : राज्य में 4 जून, 2026 से पहले तक नियम था कि अगर कोई चयनित अभ्यर्थी जॉइन नहीं करता, तो वेटिंग लिस्ट से उस पद को भरा जा सकता है। इसकी समय सीमा 6 महीने थी। लेकिन, जॉइनिंग के बाद खाली हुए पद को भरा नहीं जाता था। इसे लेकर राजस्थान में छात्रों ने प्रदर्शन किया। कुछ छात्र हाईकोर्ट भी गए। इसके बाद राज्य सरकार के कार्मिक विभाग ने नया आदेश जारी किया। अब सरकारी नौकरी में जॉइनिंग के एक साल के अंदर इस्तीफा, मृत्यु या बर्खास्तगी से पद खाली होता है, तो उसे नई भर्ती में शामिल करने के बजाय कैटेगरी के हिसाब से वेटिंग लिस्ट से भरा जाएगा। इससे भर्ती में लगने वाला समय बचेगा। बार-बार परीक्षा कराने पर होने वाला सरकारी खर्च भी कम होगा। 2. मध्यप्रदेश : मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) और MPESB (कर्मचारी चयन मंडल/व्यापम) की भर्तियों में मुख्य चयन सूची के साथ 15% से 25% तक की वेटिंग लिस्ट बनाई जाती है। MPPSC में फाइनल लिस्ट और वेटिंग लिस्ट की वैलिडिटी 12 से 18 महीने तक रहती है। अगर चयनित अभ्यर्थी जॉइन नहीं करता या नौकरी छोड़ देता है, तो वेटिंग लिस्ट में अगले नंबर वाले अभ्यर्थी को मेरिट के आधार पर मौका दिया जाता है। 3. हरियाणा : हरियाणा लोकसेवा आयोग (HPSC) और राज्य कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) की भर्तियों में वेटिंग लिस्ट का प्रावधान है। मुख्य पदों के 25% तक का वेटिंग पैनल तैयार किया जाता है। हरियाणा में वेटिंग लिस्ट की वैलिडिटी 1 साल तक होती है। इस दौरान अगर कोई अभ्यर्थी नौकरी छोड़ देता है या जॉइन नहीं करता, तो खाली पद वेटिंग लिस्ट से मेरिट के आधार पर भर दिया जाता है। 4. बिहार : बिहार कर्मचारी चयन आयोग (BSSC) और राज्य लोक सेवा आयोग (BPSC) की भर्तियों में भी वेटिंग लिस्ट का प्रावधान है। अलग-अलग विभागों और शिक्षक भर्तियों में काउंसिलिंग के बाद खाली बचे पदों या नॉट-जॉइनिंग वाले पदों के लिए सप्लीमेंट्री रिजल्ट जारी किया जाता है। इसके जरिए वेटिंग लिस्ट में शामिल अभ्यर्थियों को मौका मिलता है। इसकी वैलिडिटी आमतौर पर 1 साल तक होती है। 5. उत्तराखंड : उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) और राज्य लोक सेवा आयोग (UKPSC) में वेटिंग लिस्ट या ‘एक्स्ट्रा चयन सूची’ जारी करने का नियम है। फाइनल सिलेक्शन परिणाम के बाद 25% तक एक्स्ट्रा अभ्यर्थियों का पैनल तैयार रखा जाता है। इसकी वैलिडिटी 1 साल तक होती है। 6. दिल्ली : दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (DSSSB) में वेटिंग पैनल बनाने का प्रावधान है। पदों का 20% तक एक्स्ट्रा पैनल तैयार किया जाता है। इसकी वैलिडिटी 1 साल होती है। अगर फाइनल लिस्ट का कोई अभ्यर्थी डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन में बाहर हो जाता है। या पद पर जॉइन नहीं करता है, तो वेटिंग लिस्ट से अगला अभ्यर्थी लिया जाता है। यूपी के डिप्टी सीएम का 3 बार घेराव कर चुके यूपी के प्रतियोगी छात्र भी UPSSSC और दूसरे भर्ती बोर्डों में वेटिंग लिस्ट अनिवार्य करने की मांग कर रहे हैं। कई बार आंदोलन भी कर चुके हैं। अपनी मांग को अब तक 3 बार डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का घेराव भी किया है। छात्रों का कहना है कि अगर यूपी में भी दूसरे राज्यों की तरह 15-25% वेटिंग लिस्ट लागू कर दी जाए, तो हजारों युवाओं को सरकारी नौकरी का मौका मिल सकता है। साथ ही विभागों में खाली पड़े पद भी जल्दी भरे जा सकेंगे। वेटिंग लिस्ट से भर्ती यूपी में क्यों आसान नहीं वेटिंग लिस्ट लागू होने पर भर्ती प्रक्रिया में कई तरह के विवाद खड़े हो सकते हैं। इसको 2 उदाहरण से समझिए- 1- अगर PCS भर्ती में कुछ चयनित अभ्यर्थी जॉइन नहीं करते और PPS में चयनित अभ्यर्थी PCS का दावा करते हैं, तब तक सरकार उनकी ट्रेनिंग शुरू कर चुकी होती है। ऐसे में अगर उन्हें PCS में जगह दी जाती है, तो उनके नीचे चयनित पूरी लिस्ट प्रभावित हो सकती है। 2- यूपी में ऐसे मामले भी सामने आए, जहां वेटिंग लिस्ट में शामिल अभ्यर्थियों पर चयन सूची में शामिल उम्मीदवारों को भर्ती से बाहर कराने के लिए फर्जी मुकदमे दर्ज कराने और उनकी पुलिस रिपोर्ट खराब कराने के आरोप लगे हैं। इसका मकसद खाली हुई सीट पर वेटिंग लिस्ट में अपना नंबर लाना था। —————————– यह खबर भी पढ़ें- IAS दिव्या मित्तल क्या मिर्जापुर से चुनाव लड़ेंगी?, सांसद अनुप्रिया की शिकायत पर हटाई गई थीं नौकरी से इस्तीफा देने वाली यूपी की IAS दिव्या मित्तल क्या चुनाव लड़ेंगी? 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