खराब हवावाले दुनिया के टॉप-50 शहरों में 21 यूपी के:फेफड़े सोख रहे 50 सिगरेट के बराबर धुआं, दिवाली के बाद क्या होगा?

यूपी के शहरों का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 1000 के पार जा रहा है। ये आंकड़ें हवा की क्वालिटी चेक करने वाली निजी वेबसाइट्स से पता चलते हैं। जबकि, सरकारी आंकड़े 500 के आसपास हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि सरकारी मशीनें 500 से ऊपर के आंकड़े बताती ही नहीं हैं। ऐसा तब है, जब दिवाली के पटाखे अभी जले भी नहीं हैं। सरकारी मशीनें 500 से ऊपर के आंकड़े क्यों नहीं बताती हैं? क्या सरकार जनता से कुछ छिपा रही है? दीवाली से पहले अचानक ‘हवा की सेहत खराब’ होने की वजह क्या है? जानेंगे यूपी एक्सप्लेनर में… सवाल 1: AQI पर 500 का कैप लगाकर सरकार क्या छिपाना चाहती है? जवाब: इसके पीछे सरकार की मंशा जानकारी छिपाने की नहीं है। 2014 में जब AQI सिस्टम देश में लागू हुआ था, तब सरकारी सिस्टम की सीमाओं, प्रशासनिक नियम और वैज्ञानिक सोच की वजह से ऐसा किया गया। एक्सपर्ट्स की राय में अब यह फॉर्मूला पुराना हो गया है। इसे तुरंत बदलने की जरूरत है। अब यूपी के शहरों में हवा की स्थिति जान लेते हैं… कल यानी 6 नवंबर को यूपी के 5 बड़े शहरों में अधिकतम AQI के आंकड़े… दोनों डेटा सेट यानी 5 साल के आंकड़ों और 24-घंटे के अधिकतम AQI आंकड़ों के जॉइंट एनालिसिस से यूपी की एयर क्वालिटी को लेकर 2 अहम बातें पता चलती हैं… I) ‘मॉर्निंग वॉक’ से खराब हो सकती है सेहत: शहरों में दिन का सबसे खराब AQI सुबह के वक्त यानी सुबह 6 बजे से दर्ज हो रहा है। सुबह की सैर, बच्चों का स्कूल और दफ्तर की आवाजाही उसी समय होती है। मेरठ में 1059 AQI का सीधा अर्थ है कि फेफड़े रोज करीब 50 सिगरेट के धुएं जितना नुकसान झेल रहे हैं। II) रात के समय प्रदूषण का साइलेंट ट्रैप: कानपुर में रात 12:30 बजे AQI का 664 पहुंचना यह साबित करता है कि रात में गिरता तापमान, औद्योगिक उत्सर्जन और माल ढोने वाले भारी ट्रकों के शहर से आने-जाने के कारण रात की हवा भी उतनी ही जहरीली है, जितना दिन की। सवाल 2: इस साल बिना पटाखों के ही हवा की क्वालिटी बेहद खराब होने की वजह क्या है? जवाब: इसके पीछे एक वजह नहीं है। मौसम में बदलाव, हवा की सुस्ती और लोकल लेवल पर धुएं का एक साथ मिलना इसके मुख्य कारण हैं। इस सिनैरियो को इस तरह से समझ सकते हैं… I) कम तापमान और ठंडी हवाओं से बना जाल II) हवा की रफ्तार का कम होना तेज हवा धुएं और धूल को उड़ा दूर ले जाती है। लेकिन, इस साल दिवाली के पहले के दिनों में हवा की गति बहुत धीमी रही है। हवा न चलने के कारण प्रदूषित कण एक ही जगह जमा हो गए हैं और हवा दिन-ब-दिन जहरीली होती जा रही है। III) पराली जलने का समय बदलना IV) लोकल लेवल पर प्रदूषण का लगातार बढ़ना ——————————————– ये एक्सप्लेनर भी पढ़ें… सिर्फ 1 फुट पानी बढ़ने से डूबा लखनऊ: गोमती खतरे के निशान के नजदीक भी नहीं पहुंची, फिर कैसे आ गई बाढ़…? इस साल गोमती नदी खतरे के निशान के नजदीक भी नहीं पहुंची थी। इसके बाद भी लखनऊ के कई इलाकों में बाढ़ आ गई। हालात ऐसे हुए कि गोमती बैराज के सभी 10 गेट खोलने पड़े। हैरत की बात है कि जब गोमती खतरे के निशान तक पहुंची ही नहीं, तो लखनऊ में बाढ़ कैसे आ गई? पढ़िए यूपी एक्सप्लेनर में…