जागेश्वर धाम में हथियार लेकर घुसे बरेली के DM:मना करने पर बोले- ये प्रोटोकॉल है; उत्तराखंड में भड़के पुजारी

उत्तराखंड के जागेश्वर धाम में उत्तर प्रदेश के बरेली के जिलाधिकारी अविनाश सिंह के मंदिर के गर्भगृह में हथियार के साथ प्रवेश करने पर विवाद खड़ा हो गया है। पूजा के दौरान उनके साथ एक सुरक्षाकर्मी कार्बाइन के साथ मौजूद था। मामले में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) देहरादून का कहना है कि मंदिर में हथियार ले जाना नियमों के खिलाफ है, इसकी जांच होगी। इसके साथ ही मंदिर परिसर में नो आर्म्स के पर्चे चस्पा कर दिए हैं। मंदिर के पुजारियों ने घटना का विरोध करते हुए कहा कि गर्भगृह में इस तरह हथियार ले जाना मंदिर की परंपरा और पवित्रता के खिलाफ है। इसे धार्मिक मर्यादा का उल्लंघन बताया गया है। आरोप है कि पुजारियों के विरोध के बावजूद डीएम प्रोटोकॉल और सुरक्षा का हवाला देते हुए गर्भगृह में प्रवेश कर गए। इस घटना से पुजारियों और स्थानीय लोगों में नाराजगी है। पंडित नवीन चंद्र भट्ट हनुमान, पंडित मनोज भट्ट, पूरन भट्ट, व्यापार मंडल अध्यक्ष मुकेश भट्ट, पंडित गोपाल भट्ट, पंडित बसंत भट्ट और खीमानंद भट्ट सहित कई लोगों ने इस पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि मंदिर परिसर के भीतर किसी प्रकार का खतरा नहीं होता, इसलिए हथियार के साथ प्रवेश अनुचित है। पहले बड़े नेता आए, हथियार नहीं गए पुजारियों ने कहा कि पहले भी कई बड़े नेता और अधिकारी धाम में दर्शन के लिए पहुंचे हैं, लेकिन गर्भगृह में कभी हथियार नहीं ले जाए गए। उन्होंने भविष्य में ऐसी घटनाओं पर सख्त रोक लगाने की मांग की है। श्री ज्योतिर्लिंग जागेश्वर धाम के मंदिर के मुख्य पुजारी और महामंडलेश्वर हेमंत भट्ट ने भी मामले पर चिंता जताई। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) तथा भारत सरकार से इस संबंध में सख्त कदम उठाने की अपील की है। हेमंत भट्ट ने मंदिरों में इस तरह की वीआईपी परंपरा समाप्त करने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि धार्मिक स्थलों की मर्यादा सभी के लिए समान रहनी चाहिए। महामंडलेश्वर का प्रशासन को पत्र हेमंत भट्‌ट ने जिलाधिकारी अल्मोड़ा, एसएसपी अल्मोड़ा और स्थानीय थाने को पत्र भेजकर जागेश्वर धाम मंदिर परिसर में हथियारों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। उन्होंने पत्र में कहा कि जागेश्वर धाम करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और मंदिर परिसर में हथियार ले जाने से न केवल आध्यात्मिक वातावरण प्रभावित होता है, बल्कि आम श्रद्धालुओं में भय और असुरक्षा का भाव भी पैदा होता है। उन्होंने सुझाव दिया कि अन्य प्रमुख मंदिरों की तरह यहां भी परिसर के बाहर ही हथियार जमा कराने की व्यवस्था लागू की जाए। एएसआई बोला- मामले की जांच होगी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) देहरादून मंडल के अधीक्षक मोहन चंद्र जोशी ने मामले पर स्पष्ट कहा कि मंदिर परिसर में आर्म्स ले जाना नियमों के खिलाफ है। उन्होंने बताया कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी। प्रवेश द्वार पर नियमों का बोर्ड लगे जागेश्वर मंदिर प्रबंधन समिति के निवर्तमान उपाध्यक्ष नवीन भट्ट ने कहा कि मंदिर के प्रवेश द्वार पर एएसआई को स्पष्ट नियमावली का बोर्ड चस्पा करना चाहिए। वीआईपी हो या आम श्रद्धालु, सभी को पहले से नियमों की जानकारी दी जानी जरूरी है। लोगों को नियमों की जानकारी होगी तो भविष्य में कोई भी श्रद्धालु मंदिर में असलहा लेकर प्रवेश नहीं करेगा। सभी श्रद्धालु यहां पूरी आस्था और श्रद्धा के साथ आते हैं, इसलिए व्यवस्था भी उसी अनुरूप होनी चाहिए। मंदिर परिसर में लगे ‘नो आर्म्स’ पोस्टर मामला सामने आते ही भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) सक्रिय हो गया। जागेश्वर मंदिर परिसर में तुरंत पर्चे चस्पा कर दिए गए। इन पर्चों में साफ लिखा गया है कि मंदिर परिसर में किसी भी प्रकार का शस्त्र लेकर आना पूर्णतः वर्जित है। मंदिर में असलहा पहुंचने की सूचना से एएसआई में हड़कंप मच गया, जिसके बाद आनन-फानन में पोस्टर लगाए गए। साथ ही जानकारी मिली है कि अगले दिन तक एएसआई की ओर से स्थायी फ्लेक्स बोर्ड लगाने की भी तैयारी की जा रही है, ताकि नियमों को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया जा सके। —————– ये खबर भी पढ़ें : केदारनाथ के कपाट कल खुलेंगे, डोली गौरीकुंड से निकली: 17km की दूरी तय कर आज धाम पहुंचेगी; शीतकाल में बाबा ऊखीमठ में विराजते हैं चारधाम यात्रा का आज यानी 21 अप्रैल को तीसरा दिन है। रुद्रप्रयाग में बाबा केदारनाथ की पंचमुखी डोली गौरीकुंड से धाम के लिए रवाना हो चुकी है। डोली करीब 17 किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई पूरी कर आज शाम तक केदार धाम पहुंच जाएगी। कल सुबह 8 बजे श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के कपाट खोल दिए जाएंगे। (पढ़ें पूरी खबर)