झांसी में फर्जी पुलिस थाना बनाकर साइबर ठगी:3 गांवों में मुख्यालय बनाए, नकली वर्दी पहनकर डराते थे; 23 गिरफ्तार

झांसी के तीन गांवों में चल रहे साइबर ठगी के बड़े नेटवर्क का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने शुक्रवार रात मौरयाना, खैरयाना और कडोर गांव में एक साथ छापेमारी की। 60 से ज्यादा महिलाओं और पुरुषों को पकड़ा। इनमें से 23 आरोपियों को देर रात गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस के मुताबिक, ठगों ने थाने से लेकर पुलिस मुख्यालय तक के फर्जी सेटअप बना रखे थे। मौके से बड़ी संख्या में मोबाइल फोन, राउटर, पुलिस सायरन समेत साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाला सामान मिला है। पहले 2 तस्वीरें देखिए… मुख्य आरोपी लक्ष्मण यादव से जुड़े 22 लोग, 17 अभी फरार एसएसपी बीबीजीटीएस मूर्ति ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में लक्ष्मण यादव मुख्य आरोपी है। उसी से प्रेरित होकर तीन गांवों के 22 अन्य लोग भी साइबर ठगी के नेटवर्क से जुड़ गए। इनमें राजू यादव, नीतीश यादव, धीरेंद्र यादव, बृजेंद्र यादव, प्रदीप यादव, लाल सिंह, शिवम उर्फ सत्यम यादव समेत अन्य लोग शामिल हैं। नेटवर्क से जुड़े 17 आरोपी अभी फरार हैं। शहर के थानों से बुलाई गई पुलिस SSP ने बताया- कटेरा थाना क्षेत्र के मौरयाना, खैरयाना और कडोर गांव साइबर अपराध के हॉटस्पॉट के रूप में चिह्नित थे। पुलिस करीब एक महीने से इन गांवों पर नजर रख रही थी। इस दौरान भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र और केंद्रीय जांच एजेंसियों से भी इनपुट मिले। इनपुट के आधार पर पुलिस ने शुक्रवार रात गोपनीय तरीके से छापेमारी की योजना बनाई। पुलिस कार्रवाई को गोपनीय रखने के लिए शहर के अलग-अलग थानों से फोर्स बुलाई गई। अभियान में शामिल पुलिसकर्मियों को भी इसकी पूरी जानकारी पहले नहीं दी गई थी। शुक्रवार रात पुलिस की टीमें अचानक तीनों गांवों में पहुंचीं। उन्हें चारों तरफ से घेर लिया। इसके बाद एक साथ तलाशी अभियान चलाया गया। पुलिस अधिकारी बनकर लोगों को धमकाते, फिर ठगी करते पुलिस के मुताबिक, साइबर ठग एफआईआर दर्ज कराने वाले लोगों के मोबाइल नंबर और दूसरी जानकारी जुटाते थे। इसके बाद वे खुद को पुलिस अधिकारी या जांच एजेंसी का कर्मचारी बताकर फोन करते थे। केस में फंसाने या कार्रवाई का डर दिखाकर लोगों को धमकाते थे। इसके बाद अलग-अलग बहाने बनाकर उनसे पैसे ठग लेते थे। आरोपियों के कब्जे से 120 मोबाइल फोन, 35 डेबिट कार्ड, 20 आधार कार्ड, 4 वोटर आईडी कार्ड, एक लैपटॉप, एक टैबलेट, 29 बैंक पासबुक और 13 ग्रीन कार्ड बरामद किए हैं। पुलिस को आरोपियों के पास से 284 ग्राम सोना, 1 किलो 408 ग्राम चांदी और 9 लाख 20 हजार 510 रुपए नकद भी मिले हैं। पुलिस अब मोबाइल, लैपटॉप और टैबलेट की जांच कर रही है। इससे गिरोह के दूसरे सदस्यों, बैंक खातों और साइबर ठगी के लेनदेन की जानकारी जुटाई जा रही है। वर्दी, सायरन और पुलिस लोगो दिखाकर डराते ‘मिनी जामताड़ा’ के नाम से चर्चित इन गांवों में पुलिस की छापेमारी के दौरान सायरन, नकली वर्दी, पुलिस कैप और पुलिस लोगों मिले। साइबर ठग वीडियो कॉल पर पीड़ितों को पुलिस की वर्दी और ये सामान दिखाकर डराते थे। वे पीड़ितों को डिजिटल अरेस्ट करने का झांसा देते थे, जिससे उन्हें लगता था कि पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। इसके बाद केस में समझौते या कार्रवाई से बचाने के नाम पर उनसे पैसे ठग लेते थे। निर्दोषों के खिलाफ कार्रवाई हुई तो हम हस्तक्षेप करेंगे सपा के पूर्व सांसद डॉ. चंद्रपाल सिंह यादव ने कहा कि कटेरा थाना क्षेत्र के 4-5 गांवों से रात करीब 3 बजे पुलिस कई लोगों को उठाकर ले गई। पहले 150-200 लोगों को पकड़े जाने की सूचना थी, लेकिन मौके पर करीब 60 लोग पूछताछ के लिए मिले। पुलिस के मुताबिक मामला साइबर क्राइम से जुड़ा है। दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन निर्दोष लोगों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए। इस मामले में उन्होंने IG जोन और SSP झांसी से बात की है। अधिकारियों ने भरोसा दिया है कि जिनके खिलाफ अपराध साबित नहीं होगा, उन पर कार्रवाई नहीं होगी। ——————————
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