मुजफ्फरनगर कोर्ट ने घर में घुसकर हत्या करने वाले 4 बदमाशों को फांसी की सजा सुनाई है। कोर्ट ने चारों पर कुल 1.70 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया। कोर्ट ने 12 साल पुराने इस मामले का फैसला गुरुवार सुबह 11 बजे सुनाया। मामला 14 जुलाई, 2014 को शामली के भभीसा गांव का है। हथियारों से लैस बदमाश पवन कुमार के घर में घुसे और ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। बदमाशों के निशाने पर पवन के बड़े भाई अशोक कुमार थे। अशोक बदमाशों से बचने के लिए कमरे में छिप गए। इसके बाद बदमाशों ने पवन कुमार को गोली मार दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हमले में अशोक भी घायल हुए थे। इस मामले में मुख्य आरोपी कुख्यात बदमाश विपुल उर्फ खूनी भी नामजद था। 25 जुलाई, 2026 को पुलिस एनकाउंटर में वह बागपत में मारा गया। इसके बाद मामले में बाकी आरोपियों के खिलाफ सुनवाई जारी रही। कोर्ट ने मामले को ‘रेयरेस्ट ऑफ द रेयर’ मानते हुए रामवीर, राजीव उर्फ छोटू, राहुल उर्फ घोसी और हरेंद्र को हत्या का दोषी माना और चारों को फांसी की सजा सुनाई। सिलसिलेवार पूरी घटना पढ़िए… अशोक को मारने पहुंचे बदमाश, भाई पवन की हत्या 14 जुलाई, 2014 को शामली के भभीसा गांव में कुख्यात बदमाश विपुल उर्फ खूनी अपने साथियों के साथ हथियारों से लैस होकर पवन कुमार (65) के घर में घुसा। बदमाशों के निशाने पर पवन के बड़े भाई अशोक कुमार थे। बदमाशों को देखकर अशोक कमरे में छिप गए। इसके बाद बदमाशों ने घर में ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। गोली लगने से पवन कुमार की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि अशोक कुमार भी घायल हो गए। वारदात के बाद सभी बदमाश फरार हो गए। 12 साल हत्याकांड का केस चला घरवालों की शिकायत पर विपुल उर्फ खूनी समेत उसके साथी रामवीर, राजीव, राहुल और हरेंद्र के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने पांचों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। बाद में सभी आरोपी जमानत पर बाहर आ गए। करीब 12 साल तक केस कोर्ट में चलता रहा। 25 जुलाई, 2026 को मुख्य आरोपी विपुल उर्फ खूनी पुलिस एनकाउंटर में मारा गया। इसके बाद मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में जारी रही। कोर्ट ने अब चार आरोपियों रामवीर, राजीव, राहुल और हरेंद्र को हत्या का दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई है। पुरानी रंजिश के चलती की गई हत्या पवन कुमार के परिवार और कुख्यात बदमाश विपुल उर्फ खूनी की मां के बीच किसी बात को लेकर विवाद था। इसी के बाद दोनों परिवारों के बीच रंजिश बढ़ गई। सरकारी वकील कुलदीप सिंह के मुताबिक, इसी रंजिश के चलते विपुल उर्फ खूनी अपने साथियों के साथ अशोक कुमार के घर पहुंचा था। विपुल उर्फ खूनी और राहुल उर्फ घोसी भभीसा गांव के ही रहने वाले थे। वहीं, रामवीर वीरघेड़ा, राजीव बड़ौत और हरेंद्र कंजाहेड़ी गांव के रहने वाले हैं। हमलावरों के निशाने पर अशोक कुमार थे, लेकिन बदमाशों को देखकर वह कमरे में छिप गए और पवन की हत्या कर दी गई। मामले की सुनवाई के दौरान पीड़ित पक्ष ने कुल 9 गवाह पेश किए। पवन के भाई और भाभी की गवाही रही अहम कुलदीप सिंह ने बताया कि पवन के भाई अशोक कुमार और उनकी पत्नी सोनबीरी की गवाही अहम रही। दोनों ने कोर्ट में घटना से जुड़े साक्ष्य भी पेश किए। पुलिस ने जांच के दौरान घटनास्थल से कारतूस के खोखे, खून लगी मिट्टी और अन्य सामान बरामद किया था। इन्हें भी कोर्ट में सबूत के तौर पर पेश किया गया। पीड़ित पक्ष के मुताबिक, आरोपी राहुल उर्फ घोसी के पास से हत्या में इस्तेमाल 315 बोर का तमंचा और कारतूस बरामद हुए थे। उसे आर्म्स एक्ट के मामले में भी दोषी ठहराया गया।पवन खेती-किसानी करते थे। मृतक के परिवार में दो बेटे और दो बेटियां हैं। बड़ा बेटा आदित्य BSF में है, जबकि छोटा बेटा आशू खेती करता है। दोनों बेटियों की शादी हो चुकी है। 4 दोषियों को फांसी की सजा मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने रामवीर, राजीव उर्फ छोटू, राहुल उर्फ घोसी और हरेंद्र को हत्या का दोषी माना। कोर्ट ने चारों को फांसी की सजा सुनाई। साथ ही चारों पर कुल 1.70 लाख रुपए का जुर्माना लगाया। सरकारी वकील कुलदीप सिंह के मुताबिक, अदालत ने मामले को ‘रेयरेस्ट ऑफ द रेयर’ मानते हुए चारों दोषियों को मृत्युदंड दिया। एक अन्य आरोपी अमित की पत्रावली सुनवाई के दौरान अलग कर दी गई थी। इसलिए मौजूदा सुनवाई में चार आरोपियों के खिलाफ फैसला सुनाया गया। ———————– ये खबर भी पढ़िए- दो युवकों की हत्या करके महंत ने मंदिर में दफनाया:एक की बहन से अफेयर था, दोस्त के साथ समझाने गया था; बागपत में 19 दिन बाद खुलासा
यूपी के बागपत में दो दोस्तों की महंत ने हत्या कर दी। दोनों के शव मंदिर परिसर में ही दफना दिए। किसी को शक न हो, इसलिए ऊपर से टाइल्स (सीमेंटेड ईंट) लगवा दीं। 19 दिन बाद इसका खुलासा तब हुआ, जब पुलिस ने गुरुवार तड़के 3 बजे दोनों के शव बरामद किए। पुलिस पहुंचने से पहले ही मंदिर का महंत भाग गया था। उसके शिष्यों ने गुनाह कबूल किया। पूरी खबर पढ़ें…
यूपी के बागपत में दो दोस्तों की महंत ने हत्या कर दी। दोनों के शव मंदिर परिसर में ही दफना दिए। किसी को शक न हो, इसलिए ऊपर से टाइल्स (सीमेंटेड ईंट) लगवा दीं। 19 दिन बाद इसका खुलासा तब हुआ, जब पुलिस ने गुरुवार तड़के 3 बजे दोनों के शव बरामद किए। पुलिस पहुंचने से पहले ही मंदिर का महंत भाग गया था। उसके शिष्यों ने गुनाह कबूल किया। पूरी खबर पढ़ें…