मेरी मौत की जिम्मेदार गरिमा सिंह और उसका गिरोह है…गुरुवार सुबह यह लाइन एक कागज पर लिखकर डॉ. परमात्मा सिंह ने सुसाइड कर लिया। वह सुबह 9:10 बजे अपने फ्लैट से निकले। सुसाइड नोट को पैंट की दाएं जेब में डाला और तेजी से पहले नीचे पार्क में गए। करीब 9:13 बजे पार्क से बेसमेंट की तरफ गए, वहां से लिफ्ट से 8वीं मंजिल पर पहुंचे। फिर सीढ़ियों के सहारे छत पर गए। इस दौरान वह कहीं एक बार भी नहीं रुके। सीधे छत पर जाकर 8वीं मंजिल से नीचे कूद गए। वह सिर के बल गिरे, 2 बार पलटकर फिर सीधे हो गए और वहीं पर तड़पकर दम तोड़ दिया। बसंत एनक्लेव अपार्टमेंट के CCTV में ये घटना कैद हो गई। अपार्टमेंट के लोग उन्हें नजदीकी प्राइवेट हॉस्पिटल ले गए। यहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस तरह केवल 5 मिनट के अंदर उनके शरीर से प्राण निकल गए। बेटी स्कूल से आई तो रोकर बोली- पापा प्लीज लौट आओ। उधर, बहन बीच-बीच में चीखने-चिल्लाने लगती है। कहती है कि भाभी से वादा किया था, दो दिन पहले आ जाती तो भैया को समझाकर बचा लेती। बच्चे स्कूल से आए तो उन्हें बताया- बेटा तुम्हारे पापा अब नहीं रहे घर से 500 मीटर दूर गोरखपुर हॉस्पिटल से डॉक्टर का शव अपार्टमेंट में लाया गया। यहां बेसमेंट में जमीन पर ही रख दिया गया। तभी सेकेंड फ्लोर से उनकी पत्नी डॉ. सुमित्रा सिंह रोते चीखते हुए आईं। डॉ. परमात्मा सिंह का बेटा अरिहंत सिंह (12) और बेटी पर्णिका सिंह उर्फ बिन्नी (7) दोनों को जल्दी-जल्दी स्कूल से बुलाया गया। घर पहुंचने पर बिन्नी ने पिता को जमीन पर लेटे देखा तो घबरा गई। उसे बताया कि उसके पिता अब इस दुनिया में नहीं रहे। यह सुनकर वह रोने लगी और बोली , ‘पापा, प्लीज लौट आओ।’ इसके बाद वह अपने बड़े भाई अरिहंत से लिपटकर रोने लगी। पिता बोले- इतनी भीड़ क्यों लगी है बेटे के घायल होने की सूचना मऊ में डॉक्टर के पिता पारसनाथ सिंह और मां पत्नी कुंती देवी को दी गई। अपार्टमेंट में जब वह आए तब उनके बेटे का शव पोस्टमॉर्टम के लिए जा चुका था। यहां भीड़ लगी हुई थी। पुलिस और भीड़ को देखकर पारसनाथ बोले कि इतनी भीड़ क्यों लगी है। तभी उनके भतीजे दिलीप सिंह ने बताया कि परमात्मा भईया अब नहीं रहे। यह सुनते ही पारसनाथ सन्न रह गए, जबकि मां कुंती देवी चीखने-चिल्लाने लगी। बहन बोली- दो दिन पहले आती तो बच जाती जान डॉक्टर की छोटी बहन रंजना सिंह भी भाई की मौत की सूचना पर पहुंचीं। वह चीख-चीख कर रोने लगीं। उन्होंने बताया कि दो दिन पहले भाभी कॉल कर बोली थीं कि एक लोन के मामले में भईया फंस गए हैं। काफी टेंशन में चल रहे हैं। रंजना ने कहा था कि मैं आकर भईया को समझाउंगी। इससे पहले ही वह दुनिया छोड़कर चले गए। दो दिन पहले आकर भईया का समझाया होता तो आज उनकी जान बच जाती। टूटी पसलियां हार्ट और फेफड़ों में घुसीं, कई हड्डियां भी टूटीं डॉ. परमात्मा सिंह का गुरुवार देर शाम पोस्टमॉर्टम कराया गया। रिपोर्ट में शरीर पर गंभीर चोटों के साथ कई हड्डियां टूटी मिलीं। गर्दन की हड्डियों के अलावा गले से नीचे शरीर की कई हड्डियों में फ्रैक्चर था। कई पसलियां भी टूटी मिलीं, जिनके टूटे हिस्से हार्ट और फेफड़ों में घुस गए थे। दोनों पैरों की हड्डियां तीन-तीन जगह से टूटी थीं। रीढ़ और हाथ की हड्डियों में भी फ्रैक्चर मिला। पोस्टमॉर्टम के दौरान आंख, नाक, कान और मुंह से खून निकलने के निशान मिले। गंभीर चोटों से शरीर के कई अंदरूनी अंग प्रभावित हुए। पोस्टमॉर्टम के बाद परिजन शव लेकर मऊ स्थित पैतृक घर रवाना हो गए। शुक्रवार को उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। ठगी करने वाली गरिमा सिंह के बारे में जानिए गरिमा और उसके गिरोह के खिलाफ FIR डॉक्टर के चचेरे भाई दिलीप सिंह की तहरीर पर गोरखनाथ थाने में गुरुवार देर शाम महिला ठग गरिमा सिंह और उसके गिरोह के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज किया गया। पुलिस मामले में गरिमा सिंह से जेल में पूछताछ कर सकती है। डॉ. परमात्मा सिंह मूल रूप से मऊ के रहने वाले थे। कई साल पहले वह गोरखपुर आकर बस गए थे। उन्होंने राजेंद्र नगर के बसंत एनक्लेव में 2BHK फ्लैट लिया था। वह फ्लैट नंबर 213 में पत्नी डॉ. सुमित्रा सिंह और दोनों बच्चों के साथ रहते थे। डॉ. परमात्मा सिंह महराजगंज के नौतनवा में तैनात थे, जबकि उनकी पत्नी इसी जिले के सिसवा ब्लॉक में तैनात हैं। दोनों पशु चिकित्सा विभाग में सरकारी डॉक्टर हैं। जान से मारने की धमकी देती थी गरिमा फरवरी 2026 में सहकर्मी डॉ. दिलीप कुमार सिंह की दूर की रिश्तेदार गरिमा और उसके शिक्षक पति भानू प्रताप सिंह ने परमात्मा से संपर्क किया था। उसने खुद को फाइनेंस कंपनी से जुड़ा बताते हुए कहा था कि एक योजना के तहत उनका चल रहा होम लोन बंद कराया जा सकता है। इसके लिए नया पर्सनल लोन लेने और उसकी रकम उसे देने की बात कही गई। गरिमा ने आश्वासन दिया था कि नए लोन की किस्त वह खुद चुकाएगी। गरिमा सिंह ने होम लोन बंद कराने का झांसा देकर डॉ. परमात्मा सिंह उनके नाम से छह बैंकों से लोन कराया। OTP लेकर रकम अपने अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करा दी। दो किस्तें भर कर बंद कर दी, फिर गरिमा पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी देने लगी। SSP डॉ. कौस्तुभ ने बताया- गरिमा सिंह और उसके गिरोह के सदस्यों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस आरोपियों की आर्थिक गतिविधियों की भी जांच कर रही है। उनके बैंक खातों को फ्रीज कराने के साथ ठगी से अर्जित या अपराध से जुड़ी संपत्तियों को जब्त करने की कार्रवाई भी की जाएगी। —————————- ये खबर भी पढ़िए- डॉक्टर-अधिकारियों से 10 करोड़ ठगे, गोरखपुर में रेलवे अफसर बाप-PhD बेटी पर 3 FIR, 7 शिकायतें ‘मैं गोरखपुर जंक्शन पर स्टेशन अधीक्षक हूं। मुझ पर लोन था। यह बात मेरे परिचित सहजनवा रेलवे स्टेशन के अधीक्षक को पता चली। इसके बाद उन्होंने मुझसे मेलजोल बढ़ा लिया। ज्यादा मिलने-जुलने लगे। उन्होंने कहा कि लोन माफ हो जाएगा, कोई बड़ी बात नहीं है।’ पढ़ें पूरी खबर