बंद कमरे में शाह से मिले, फिर पंडित-पासी-पासवान का नारा:UP में क्या दिल्ली की स्क्रिप्ट पर आगे बढ़ रहे चिराग, BJP का पूरा प्लान डिकोड

2 जुलाई को दिल्ली की बढ़ती गर्मी की तपिश के बीच शाम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने मुलाकात की। इसके 3 दिन बाद 5 जुलाई को लखनऊ पहुंचे। वहां पिता दिवंगत रामविलास पासवान की जयंती पर भव्य कार्यक्रम किया। जिसमें जनवरी-फरवरी 2027 में उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में चुनाव लड़ने का ऐलान किया। मंच से नेताओं ने नारा दिया-पंडित, पासी और पासवान। चिराग पासवान ने यह बातें 18 जुलाई को पटना में भी दोहराया। क्या UP में चिराग की एंट्री दिल्ली की स्क्रिप्ट का हिस्सा है, पंडित-पासी-पासवान के नारे से क्या योगी का काम बिगाड़ेंगे, समझेंगे; आज बूझे की नाही में…। सवाल-1ः चिराग पासवान की पार्टी उत्तर प्रदेश में चुनाव लड़ेगी? जवाबः हां। 5 जुलाई को लोकजनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने लखनऊ में सभा कर ऐलान किया कि हमारी पार्टी UP में चुनाव लड़ेगी। पार्टी राज्य में अपना विस्तार चाहती है। उत्तर प्रदेश हमारे नेता (रामविलास पासवान) के दिल के करीब रहा है। उसी मंच से UP के प्रभारी और चिराग पासवान के जीजा अरुण भारती ने लोगों के बीच नारा दिया-पंडित, पासी और पासवान। 18 जुलाई को पटना पहुंचे चिराग पासवान ने एक बार फिर दोहराया कि हमारी पार्टी लोजपा (रामविलास) UP के सभी 403 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। सवाल-2ः क्यों कहा जा रहा है कि चिराग दिल्ली की स्क्रिप्ट पर आगे बढ़ रहे हैं? जवाबः इसका जवाब जानने के लिए आपको 3 महीने पीछे जाना होगा। दो मुलाकातों की टाइम और ऐलान को समझना होगा। पहली मुलाकात- 1 अप्रैल की भरी दोपहरिया में दिल्ली के पंचशील भवन में चिराग पासवान से मिलने UP के डिप्टी CM केशव प्रसाद मौर्य पहुंचे। मुलाकात का एजेंडा राज्य में खाद्य प्रसंस्करण सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना बताया गया। दूसरी मुलाकात- 2 जुलाई की शाम दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह से चिराग पासवान मिले। उन्होंने X पर फोटो जारी कर मुलाकात का एजेंडा राजगीर में हुई दो पासवान युवकों की हत्या और भोजपुर में पुलिस एनकाउंटर में मारे गए भरत भूषण तिवारी की मौत को बताया। इन दो मुलाकातों और ऐलान के बाद अंदरखाने चर्चा है कि भाजपा की अंदरुनी राजनीति और रणनीति के तहत चिराग पासवान UP पहुंचे हैं। हालांकि, ऐसा नहीं है कि वह पहली बार UP में विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। 2022 विधानसभा चुनाव में LJP(RV) 21 सीटों पर चुनाव लड़ चुकी है। भाजपा के इशारे पर ही लड़ रहे, इसे ऐसे भी समझिए… ऊपर की इन दो मुलाकातों और घटनाक्रमों को आपने जान लिया। अब पिछले विधानसभा चुनाव यानी 2022 की एक घटना से समझिए कि क्यों चिराग भाजपा के इशारे पर लड़ रहे हैं। चिराग पासवान भी केंद्र और बिहार सरकार में भाजपा के सहयोगी हैं। इसका मतलब हुआ कि चिराग अभी चुनाव लड़ने की बातें कह रहे हैं और भाजपा चुप है इसका मतलब है कि उसकी राजामंदी हैं। सवाल-3ः चिराग के UP में लड़ने के क्या मायने हैं? जवाबः सियासी गलियारे में इसे लेकर 2 तरह की थ्योरी है… 1. अखिलेश यादव के PDA का असर कम करना सियासी रणनीतिकारों के मुताबिक, चिराग पासवान के UP में चुनाव लड़ने के पीछे भाजपा की सबसे बड़ी स्ट्रेटजी है कि किसी भी तरह समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के PDA (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) के असर को कमजोर किया जाए। चिराग पासवान दलित समाज से आते हैं। उनकी मां पंजाबी ब्राह्मण हैं। उनके पिता दिवंगत रामविलास पासवान की पकड़ भले बिहार की राजनीति पर रही, लेकिन उनकी पहचान दलितों के राष्ट्रीय स्तर के नेता की भी थी। भाजपा को आशंका है कि 2024 लोकसभा चुनाव की तरह 21% दलित वोटरों में से एक बड़ा तबका सपा-कांग्रेस की तरफ जा सकता है। ऐसी परिस्थिति में भाजपा से नाराज ब्राह्मण और दलितों का एक छोटा सा हिस्सा अखिलेश यादव-कांग्रेस की तरफ ना जाकर चिराग की तरफ शिफ्ट हो जाए तो उत्तर प्रदेश में जीत पक्की हो सकती है। 2024 में दलितों के छिटकने से 62 से 33 पर आ गई थी BJP 2. योगी को कमजोर करना दूसरी थ्योरी है कि BJP का एक बड़ा धड़ा चिराग पासवान को अकेले चुनाव लड़ाकर CM योगी आदित्यनाथ को पार्टी के अंदर कमजोर करना चाहता है। दूसरी थ्योरी के समर्थन में दिए जा रहे तर्कों को जानिए… हालांकि… सवाल-4ः ‘पंडित-पासी और पासवान’ का फॉर्मूला क्या है? जवाबः उत्तर प्रदेश में दलितों की कुल आबादी 20.7% (करीब 4.14 करोड़) है। इनमें से सबसे अधिक जाटव करीब 11.3% हैं। उसके बाद पासी-पासवान करीब 5%। जाटव मायावती के कोर वोटर हैं। सवाल-5ः चिराग का यह फॉर्मूला बिहार में भी लागू करेंगे? जवाबः अभी तय नहीं है, लेकिन चिराग का ब्राह्मणों सहित सवर्णों को लेकर एक सॉफ्ट कॉर्नर रहा है। उनके पिता दिवंगत रामविलास पासवान दलित, सवर्ण और मुस्लिमों की पॉलिटिक्स करते थे। उनके आसपास इन तीनों समाज के नेताओं का घेरा था। बिहार जातीय सर्वे-2023 के मुताबिक, बिहार में दलितों की आबादी 19.65% है। जिसमें सबसे अधिक चिराग पासवान के समाज की हिस्सेदारी 5.31% है। वहीं, राज्य में ब्राह्मणों की कुल आबादी 3.65% है। दलित+ब्राह्मण (19.65+3.65) यानी 23.3% आबादी हुई। जिनका विधानसभा की 75 से 80 सीटों पर प्रभाव है। अगर यह समीकरण बैठा तो चिराग की राह आसान हो सकती है। हालांकि, यह दोनों समाज NDA खासकर भाजपा का कोर वोटर है।