यूपी सरकार में बेसिक शिक्षा मंत्री और पूर्व सीएम कल्याण सिंह के पोते संदीप सिंह शादी करने जा रहे हैं। 14 नवंबर को अलीगढ़ में संदीप और उनके छोटे भाई सौरभ का तिलक होगा। नवंबर के आखिरी सप्ताह में दोनों भाई दिल्ली में एक साथ सात फेरे लेंगे। दोनों की दुल्हनें कौन हैं, इसकी जानकारी भी सामने नहीं आई है। सूत्रों के मुताबिक, मंत्री संदीप की होने वाली दुल्हन कारोबारी परिवार से ताल्लुक रखती हैं। शादी किस तारीख को और किस होटल में होगी, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। सूत्रों की मानें तो शादी 26, 27 या 28 नवंबर में से किसी एक दिन हो सकती है। शादी के बाद रिसेप्शन की भी चर्चा है। लखनऊ में अलग से दावत का आयोजन किया जा सकता है। परिवार के राज पैलेस आवास की साफ-सफाई शुरू संदीप के पिता और पूर्व सांसद राजवीर सिंह के मुताबिक, अलीगढ़ में गोद भराई और तिलक का आयोजन होगा। इसके लिए अलीगढ़-रामघाट कल्याण मार्ग पर 100 बीघा मैदान में तैयारियां शुरू करने की प्लानिंग है। परिवार के राज पैलेस आवास की साफ-सफाई, रंगाई-पुताई और नए पत्थर लगाने का भी काम चल रहा है। तिलक में अलीगढ़, अतरौली विधानसभा क्षेत्र और प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से परिवार के करीबी, समर्थक और परिचित शामिल होंगे। बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं और समर्थकों को निमंत्रण भेजने की तैयारी है। शादी के लिए अलग से वेडिंग प्लानर बुक किए जाने की भी चर्चा है। केटरिंग और जर्मन हैंगर की बुकिंग पर काम चल रहा है। 8 साल पहले बहन की शादी में राष्ट्रपति और कई राज्यों के CM पहुंचे थे कल्याण सिंह परिवार में इससे पहले 2018 में वैवाहिक समारोह हुआ था। कल्याण सिंह की पौत्री पूर्णिमा सिंह की शादी प्रवीण राज सिंह के साथ हुई थी। समारोह में तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अलावा कई राज्यों के मुख्यमंत्री और राज्यपाल शामिल हुए थे। मंत्री के छोटे भाई सौरभ सिंह को जानिए- संदीप के छोटे भाई सौरभ सिंह अतरौली विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय रहते हैं। पिता और बड़े भाई के जिले में मौजूद नहीं होने पर वह परिवार की ओर से सामाजिक और राजनीतिक कार्यक्रमों में शामिल होते हैं। सौरभ अखिल भारतीय लोधी राजपूत कल्याण युवा महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं। संगठन के संरक्षक उनके पिता राजवीर सिंह हैं। ——————— ये खबर भी पढ़ें- ‘जज के साथ अन्याय हो तो वह कहां जाए’: यूपी में फांसी की 23 सजा सुनाने वाले जज का दर्द ‘एक जज का काम न्याय करना होता है, लेकिन अगर उसके साथ ही अन्याय हो तो वह कहां जाए? क्या जिला जज के प्रशासनिक नियंत्रण में काम कर रहा जज उनके ऐसे आदेशों को मानने के लिए बाध्य है, जो कानून के खिलाफ हों?’ यह टिप्पणी मुजफ्फरनगर के जज रवि कुमार दिवाकर ने 17 सितंबर को 10 साल पुराने मामले में फैसला सुनाते हुए की। पढ़ें पूरी खबर