यूपी कांग्रेस अध्यक्ष क्या हटाए जाएंगे:2 बड़े नेताओं के बीच ‘कुर्सी’ की खींचतान; आखिरी फैसला राहुल गांधी लेंगे

2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश कांग्रेस में संगठन की कमान को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। यह 2 तरह की है- पहली : प्रदेश अध्यक्ष अजय राय को हटाया जा सकता है। दूसरी : वे पद पर बने रह सकते हैं। उनके साथ 3-4 कार्यकारी अध्यक्ष जिम्मेदारी संभाल सकते हैं। इस फॉर्मूले पर मंथन की चर्चा चल रही है। प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम का दावा है कि पार्टी नेतृत्व विचार कर रहा है। 30 सितंबर तक बड़े फैसले हो सकते हैं। दूसरी तरफ, अजय राय का कहना है कि उन्हें राज्य स्तर पर किसी संगठनात्मक बदलाव की जानकारी ही नहीं है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… क्यों जोर पकड़ रही अध्यक्ष बदलने की चर्चा यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम हाईकमान के सामने सामाजिक समीकरण का हवाला दे रहे हैं। तर्क दिया जा रहा है कि अजय राय जिस भूमिहार समाज से आते हैं, उसकी आबादी प्रदेश में बेहद कम है। 2027 का चुनाव जीतने के लिए कांग्रेस को एक ऐसे चेहरे की जरूरत है, जिसका वोटबैंक बड़ा और व्यापक हो। गौतम खुद दलित वर्ग से आते हैं। उनकी रणनीति है कि दलित-ब्राह्मण या दलित-ओबीसी के समीकरण से यूपी का किला फतह किया जाए। इसी फेरबदल में प्रमोद तिवारी की बेटी और विधायक आराधना मिश्रा का नाम तेजी से उछल रहा है। अपने-अपने हिसाब से टिकट बांटना चाहते हैं पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का दावा है कि यह पूरी जंग संगठन की नहीं, बल्कि आने वाले चुनाव में टिकट बांटने की पावर अपने हाथ में रखने की है। अगर सपा के साथ गठबंधन होता है, तो अजय राय चाहते हैं कि उनके करीबी नेताओं को ज्यादा से ज्यादा टिकट मिलें। वहीं, प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम की कोशिश अपने पसंदीदा उम्मीदवारों को मैदान में उतारने की है। हालांकि, दोनों ही नेताओं ने इस तरह की किसी गुटबाजी से सरेआम इनकार किया है। दोनों नेताओं के सुर कब-कब अलग दिखे 1. सपा से गठबंधन और सीटों को लेकर अलग-अलग दावे कांग्रेस ने जब ब्राह्मण चेहरे अविनाश पांडेय की जगह दलित नेता राजेंद्र पाल गौतम को यूपी प्रभारी बनाया, तभी से प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के भविष्य को लेकर चर्चाएं शुरू हो गईं। अजय राय करीब 3 साल से प्रदेश अध्यक्ष हैं। इस दौरान उन्होंने संगठन को मजबूत करने के लिए प्रदेश के अलग-अलग जिलों का दौरा किया। संगठन को जमीन पर मजबूत करने पर जोर दिया। गौतम के आने के बाद सपा के साथ सीट बंटवारे को लेकर भी कांग्रेस की रणनीति में उनकी सक्रियता बढ़ी। गौतम ने सपा के साथ बराबर सीटों पर बात करने की पैरवी की। जबकि, अजय राय लगातार यूपी की 403 विधानसभा सीटों पर संगठन तैयार करने पर जोर देते रहे। 2. मायावती से मुलाकात की कोशिश पर राय की नाराजगी मई- 2026 में राजेंद्र पाल गौतम अचानक बसपा प्रमुख मायावती से मिलने उनके आवास पहुंच गए। उनके साथ कांग्रेस के कुछ अन्य नेता और सांसद भी थे। हालांकि, मायावती ने उनसे मुलाकात नहीं की। तब इसे दलित नेताओं के बीच संवाद की कोशिश के तौर पर बताया गया था। इस पर अजय राय ने खुलेआम नाराजगी जताई थी। कहा था- मुझे इस बात की कोई खबर नहीं कि गौतम किसकी इजाजत से मायावती के घर गए? 3. जिला अध्यक्षों की लिस्ट सामने आने पर बढ़ा मतभेद 2 सितंबर को लखनऊ के ‘लोक हुंकार’ कार्यक्रम में भले ही राय और गौतम मुस्कुराते हुए एक साथ दिखे हों, लेकिन हफ्ता बीतते-बीतते मतभेद की चर्चाएं तेज हो गईं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, ‘संगठन सृजन’ अभियान के तहत जिला अध्यक्षों की जो लिस्ट तैयार की गई थी, उस पर गौतम ने आपत्ति जताई। चर्चा है कि उन्होंने दलित, OBC और अल्पसंख्यक समुदायों का प्रतिनिधित्व बढ़ाने की बात कही है। 4. दोनों नेताओं के एक ही दिन अलग-अलग जॉइनिंग कार्यक्रम 9 सितंबर को कांग्रेस मुख्यालय में तीन बड़े नेताओं को पार्टी में शामिल कराया गया। प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने सिद्धार्थनगर के नेता हेमंत चौधरी की जन सरदार पार्टी का कांग्रेस में विलय कराया। इसके अलावा भाजपा नेता मनोज कुमार चौहान हरवंश सिंह चौहान को कांग्रेस में शामिल कराया। इसी दिन सुबह 11 बजे प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने खुद से रिटायर हुए IAS अधिकारी डॉ. राकेश वर्मा और साउथ फिल्मों की अभिनेत्री फिरदौस बानो उर्फ जारा खान को कांग्रेस की सदस्यता दिलाई। हाईकमान के सामने 3 विकल्प, किस पर लगेगी मुहर राजेंद्र पाल गौतम 10-11 सितंबर को दिल्ली गए थे। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल के साथ लंबी बैठक की थी। अब हाईकमान के सामने 3 ऑप्शन हैं- पहला – अजय राय को हटाकर किसी ब्राह्मण, ओबीसी या दलित चेहरे को प्रदेश की कमान सौंप दी जाए। दूसरा – 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी के शानदार प्रदर्शन को देखते हुए अजय राय को ही अध्यक्ष पद पर बनाए रखा जाए। राय के पक्ष में सबसे बड़ा तर्क यह है कि उनके नेतृत्व में पार्टी ने 6 लोकसभा सीटें जीतीं। उन्होंने खुद वाराणसी में पीएम नरेंद्र मोदी को कड़ी टक्कर दी थी। मतगणना के दौरान अलग-अलग चरण में कुल 7 राउंड में बढ़त भी बनाई थी। तीसरा – चुनाव से ठीक 4 महीने पहले अध्यक्ष बदलने का जोखिम न लेते हुए अजय राय को पद पर बनाए रखा जाए। लेकिन, संतुलन साधने के लिए उनके साथ 3 से 4 कार्यकारी अध्यक्ष बना दिए जाएं। इनमें ब्राह्मण, दलित, ओबीसी और मुस्लिम चेहरे शामिल हों। क्या भारी पड़ेगा बिहार और झारखंड वाला ‘एक्सपेरिमेंट’ कांग्रेस मार्च- 2025 में बिहार विधानसभा चुनाव से करीब 7 महीने पहले प्रदेश अध्यक्ष बदल चुकी है। पार्टी ने अखिलेश प्रसाद सिंह की जगह दलित नेता राजेश कुमार को प्रदेश अध्यक्ष बनाया था। चुनाव नतीजों में कांग्रेस 19 सीटों से घटकर 6 सीटों पर रह गई। इसी तरह अगस्त- 2024 में झारखंड विधानसभा चुनाव से करीब 3 महीने पहले कांग्रेस ने राजेश ठाकुर की जगह OBC नेता केशव महतो कमलेश को प्रदेश अध्यक्ष बनाया था। चुनाव में कांग्रेस ने अपनी 16 सीटें बरकरार रखीं। अब अगर यूपी में अजय राय को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाया जाता है, तो चुनाव से पहले संगठन में बदलाव का यह कांग्रेस का तीसरा बड़ा प्रयोग होगा। ————————— यह खबर भी पढ़ें- अखिलेश ने फिर नीला गमछा पहनकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की, कहा- हमारी बनाई सड़कें नंबर-1 सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने गुरुवार को पार्टी मुख्यालय में दोपहर 1 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इससे ठीक पहले कार्यकर्ताओं और पत्रकारों को एक फिल्म दिखाई गई। इसमें यूपी के अलग-अलग एक्सप्रेस-वे की बदहाली, कानपुर-लखनऊ और गंगा एक्सप्रेस-वे के टूटे हिस्सों और निर्माण में कथित भ्रष्टाचार दिखाया गया। पढ़िए पूरी खबर…