‘हमारा पूरा परिवार 5 साल से CRPF की सुरक्षा में कैद है। हम घर के गेट पर खड़े ठेले से सब्जी खरीदने जाएंगे, तो CRPF के रजिस्टर में एंट्री करनी होगी। दवा लेने अस्पताल या मेडिकल स्टोर जाना है, तो CRPF की गाड़ी में जाएंगे। ऐसे में हम खेती-बाड़ी कैसे करें? नौकरी कैसे करें? अपने बच्चों को कैसे पढ़ाएं? सबसे बेहतर है कि हमें दूसरे शहर में शिफ्ट कर दिया जाए। जिससे हम बिना सुरक्षा रहकर नौकरी करके अपना घर चला सकें।’ यह दर्द है हाथरस कांड की पीड़िता के भाई का। यूपी के जिला हाथरस में दलित लड़की से कथित गैंगरेप को 14 सितंबर को 5 साल पूरे हो गए। पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्हें न्याय नहीं मिला। 3 नामजद युवक लोअर कोर्ट से बरी हो गए। लोअर कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में 2 साल से याचिका पेंडिंग है। यूपी सरकार ने पीड़ित परिवार को न दूसरे शहर में शिफ्ट किया, न ही नौकरी दी। 5 साल में क्या कुछ बदला? आज इस परिवार की हालत कैसी है? इस केस में अब तक क्या हुआ? ये सब जानने के लिए दैनिक भास्कर ग्राउंड जीरो पर पहुंचा। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… सबसे पहले घटनाक्रम समझिए पीड़िता की अस्पताल में हो गई थी मौत
हाथरस जिला मुख्यालय से 9 किलोमीटर दूर एक गांव में 14 सितंबर, 2020 को दलित समाज की 19 साल की युवती से कथित तौर पर 4 युवकों ने गैंगरेप किया। दिल्ली में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। मृतका का रात में अंतिम संस्कार करने से ये मामला देशभर में गूंजा था। पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी संदीप समेत 4 युवकों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। अक्टूबर, 2020 में यूपी सरकार ने इस केस की CBI जांच कराने की संस्तुति की थी। 10 अक्टूबर को CBI ने ये केस अपने हाथ में ले लिया। CBI ने अपनी चार्जशीट में भी संदीप समेत 4 युवकों को आरोपी बनाया था। 3 मार्च, 2023 को ट्रायल कोर्ट ने संदीप को गैर-इरादतन हत्या के मामले में दोषी करार देते हुए सजा सुनाई। अन्य 3 नामजद युवकों को बरी कर दिया था। जानिए, अब घर के क्या हालात हैं? भास्कर रिपोर्टर की रजिस्टर में एंट्री कराई, मेटल डिटेक्टर गेट से चेकिंग
5 साल बाद इस परिवार की स्थिति कैसी है, ये जानने के लिए हम हाथरस के उसी गांव में पहुंचे। हाईवे से अंदर गांव की दूरी करीब डेढ़ किलोमीटर होगी। इसी गांव के मोड़ पर पुलिस के कई बेरिकेड्स आज भी लगे हैं। टूटी-फूटी सड़क से होते हुए गांव में एंट्री करते ही आरोपी पक्ष के मकान मिले। इनके 10 कदम आगे ही पीड़ित परिवार का घर है। गेट पर CRPF का ट्रक खड़ा है। इसमें कुछ जवान चढ़ रहे हैं। संभवत: ड्यूटी की शिफ्ट बदल रही है। हमारे पहुंचते ही एक CRPF जवान ने सवाल पूछने शुरू कर दिए। कौन हो, कहां से आए हो, क्या काम है? हमने परिचय देने के बाद रजिस्टर में एंट्री की। रजिस्टर में कम से कम 10 कॉलम थे। इनमें नाम, एड्रेस, मोबाइल नंबर, आईडी प्रूफ नंबर, आने की वजह जैसे कॉलम भरे गए। ड्यूटी पर तैनात रिसीव करने वाले CRPF जवान से भी एक कॉलम में हस्ताक्षर कराए गए। मेटल डिटेक्टर गेट से गुजारने के बाद हमें घर में एंट्री दी गई। हमारे पहुंचने से कुछ देर पहले ही ये परिवार वापस घर आया था। वो घर की महिला सदस्य को दिखाने के लिए 2 किलोमीटर दूर हॉस्पिटल गए थे। CRPF उन्हें अपनी सुरक्षा में लेकर गई और वापस लाई थी। अब पीड़ित परिजनों का दर्द ‘प्रशासन ने रखी शर्त- पहले हम ये संपत्ति छोड़ें, तब अलीगढ़ में देंगे मकान’
घर के आंगन में चारपाई पर मृतक युवती के दोनों भाई और मां बैठे मिले। सामने वाली दूसरी चारपाई पर पिता उदास बैठे थे। सबसे बड़े भाई कहते हैं- हमें कोर्ट से न्याय नहीं मिला। इस केस में कुल 4 आरोपियों पर FIR हुई थी। हाथरस की लोअर कोर्ट ने 3 आरोपियों को बरी कर दिया। सिर्फ एक आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई, जो जेल में बंद है। हमने लोअर कोर्ट के फैसले के खिलाफ साल-2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका डाली थी। इस पर आज तक सुनवाई ही नहीं हो सकी। पुलिस ने हमारी बहन के शव का जबरन अंतिम संस्कार रात 2 बजे किया। इसके खिलाफ भी हमने हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में याचिका डाली। इस पर भी कोई सुनवाई आज तक नहीं हुई। यूपी सरकार ने हमें दूसरे शहर में मकान और नौकरी देने के लिए कहा था। आज तक दोनों में से कोई वायदा पूरा नहीं हुआ। 8 मार्च, 2024 को हाथरस की डीएम अर्चना वर्मा ने मकान और नौकरी देने के हाईकोर्ट के आदेश पर पीड़ित परिवार को एक चिट्ठी लिखी। इसमें डीएम ने कहा- हम आपको अलीगढ़ में मकान देने पर विचार कर रहे हैं। लेकिन, उससे पहले आपको गांव का ये पैतृक मकान और पूरी जमीन को छोड़ना होगा। पीड़ित परिवार कहता है- ये मकान पुश्तैनी है। इसमें परिवार के कई लोगों के हिस्से हैं। इसलिए वो ये मकान राज्य सरकार को नहीं दे सकते। ये भी क्या गारंटी है कि हमारी जितनी जमीन गांव में है, उतनी जमीन हमें अलीगढ़ में मिल जाएगी। हम चाहते हैं कि यूपी सरकार गारंटी ले कि हम जितना मकान-जमीन छोड़ेंगे, उसके बराबर ही हमें अलीगढ़ में दी जाएगी। ‘बच्चों ने स्कूल तक नहीं देखा, हमारी नौकरी छूट गई’
इस केस से पहले पीड़ित युवती के दोनों भाई जॉब करते थे। सबसे बड़ा भाई नोएडा की मोबाइल कंपनी में कार्यरत था। उससे छोटा भाई गाजियाबाद में पैथोलॉजी लैब पर नौकरी करता था। इस घटना के बाद दोनों भाइयों की नौकरी छूट गई। वो वापस गांव आ गए। दूसरा भाई कहता है- यूपी सरकार ने हमें 25 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी। वो केस लड़ने में खर्च हो गए। हम CRPF सुरक्षा की वजह से कहीं नौकरी नहीं कर सकते। पिछले 5 साल से उन्हीं 25 लाख रुपए से घर चला रहे हैं। हमने कई जगह नौकरी का ट्राई किया। लेकिन, लोग हमारे साथ CRPF जवान देखकर नौकरी देने से साफ मना कर देते हैं। वो आगे बताते हैं- मेरे बड़े भाई के 3 बच्चे हैं। बड़ी भतीजी को हम 150 किलोमीटर दूर रिश्तेदार के घर पढ़ा रहे हैं। बाकी उससे छोटे दोनों बच्चों ने आज तक स्कूल का मुंह नहीं देखा है। उसकी वजह है सुरक्षा। CRPF हमें बिना अनुमति और बिना निगरानी घर से बाहर एक कदम तक नहीं रखने देती। आरोपियों के मकान बगल में हैं। इस वजह से हर वक्त डर बना रहता है। कोई सब्जी बेचने भी आता है, तो CRPF जवान उसे घेरकर गेट पर खड़े रहते हैं। ऐसे में हम न नौकरी कर पा रहे, न बच्चों को पढ़ा पा रहे। हम चाहते हैं कि सरकार हमें हाथरस से दूर कहीं भी शिफ्ट कर दे। जिससे हम नौकरी या कोई काम-धंधा करके अपना घर चला सकें और बच्चों को पढ़ा सकें। ‘हम यहां रहना नहीं चाहते’
गैंगरेप की शिकार लड़की की भाभी कहती हैं- आरोपी जब से कोर्ट से बरी हुए हैं, उनसे डर बना रहता है। हमारी 2 बेटियां हैं। वो घर से बाहर निकलने से डरती हैं। आरोपियों के मकान बगल में हैं। स्कूल में बच्ची नहीं भेज सकते। क्योंकि, उसी स्कूल में आरोपी पक्ष के बच्चे भी पढ़ते हैं। आरोपी कहते हैं कि जब तक सीआरपीएफ वाले हैं, तब तक सही है। इनके जाने के बाद तुम लोगों को देखेंगे। हम टेंशन में रहते हैं कि सुरक्षा हटने के बाद हमारा क्या होगा? इसीलिए हम यहां रहना ही नहीं चाहते। जितनी जल्दी हो सके हमारी मांगें पूरी हों, ताकि हम यहां से दूसरे शहर में शिफ्ट हो सकें। ————————– ये खबर भी पढ़ें… संभल में जामा मस्जिद के सामने बनेगा ATS ऑफिस, 20 से ज्यादा आरोपियों के आतंकी कनेक्शन संभल में एंटी टेरेरिस्ट स्क्वायड (ATS) यूनिट स्थापित की जाएगी। दरअसल, संभल पुलिस ने सरकार को एक कॉन्फिडेंशियल रिपोर्ट भेजी थी। इसमें यहां के 20 से ज्यादा ऐसे लोगों के नाम थे, जो आतंकी गतिविधियों में संलिप्त रहे हैं। दैनिक भास्कर को ये कॉन्फिडेंशियल रिपोर्ट हाथ लगी है। इससे हमने समझा कि यहां ATS क्यों भेजी जा रही? इसके मायने क्या हैं? लोगों की इस पर प्रतिक्रिया क्या है? पढ़िए पूरी खबर…
हाथरस जिला मुख्यालय से 9 किलोमीटर दूर एक गांव में 14 सितंबर, 2020 को दलित समाज की 19 साल की युवती से कथित तौर पर 4 युवकों ने गैंगरेप किया। दिल्ली में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। मृतका का रात में अंतिम संस्कार करने से ये मामला देशभर में गूंजा था। पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी संदीप समेत 4 युवकों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। अक्टूबर, 2020 में यूपी सरकार ने इस केस की CBI जांच कराने की संस्तुति की थी। 10 अक्टूबर को CBI ने ये केस अपने हाथ में ले लिया। CBI ने अपनी चार्जशीट में भी संदीप समेत 4 युवकों को आरोपी बनाया था। 3 मार्च, 2023 को ट्रायल कोर्ट ने संदीप को गैर-इरादतन हत्या के मामले में दोषी करार देते हुए सजा सुनाई। अन्य 3 नामजद युवकों को बरी कर दिया था। जानिए, अब घर के क्या हालात हैं? भास्कर रिपोर्टर की रजिस्टर में एंट्री कराई, मेटल डिटेक्टर गेट से चेकिंग
5 साल बाद इस परिवार की स्थिति कैसी है, ये जानने के लिए हम हाथरस के उसी गांव में पहुंचे। हाईवे से अंदर गांव की दूरी करीब डेढ़ किलोमीटर होगी। इसी गांव के मोड़ पर पुलिस के कई बेरिकेड्स आज भी लगे हैं। टूटी-फूटी सड़क से होते हुए गांव में एंट्री करते ही आरोपी पक्ष के मकान मिले। इनके 10 कदम आगे ही पीड़ित परिवार का घर है। गेट पर CRPF का ट्रक खड़ा है। इसमें कुछ जवान चढ़ रहे हैं। संभवत: ड्यूटी की शिफ्ट बदल रही है। हमारे पहुंचते ही एक CRPF जवान ने सवाल पूछने शुरू कर दिए। कौन हो, कहां से आए हो, क्या काम है? हमने परिचय देने के बाद रजिस्टर में एंट्री की। रजिस्टर में कम से कम 10 कॉलम थे। इनमें नाम, एड्रेस, मोबाइल नंबर, आईडी प्रूफ नंबर, आने की वजह जैसे कॉलम भरे गए। ड्यूटी पर तैनात रिसीव करने वाले CRPF जवान से भी एक कॉलम में हस्ताक्षर कराए गए। मेटल डिटेक्टर गेट से गुजारने के बाद हमें घर में एंट्री दी गई। हमारे पहुंचने से कुछ देर पहले ही ये परिवार वापस घर आया था। वो घर की महिला सदस्य को दिखाने के लिए 2 किलोमीटर दूर हॉस्पिटल गए थे। CRPF उन्हें अपनी सुरक्षा में लेकर गई और वापस लाई थी। अब पीड़ित परिजनों का दर्द ‘प्रशासन ने रखी शर्त- पहले हम ये संपत्ति छोड़ें, तब अलीगढ़ में देंगे मकान’
घर के आंगन में चारपाई पर मृतक युवती के दोनों भाई और मां बैठे मिले। सामने वाली दूसरी चारपाई पर पिता उदास बैठे थे। सबसे बड़े भाई कहते हैं- हमें कोर्ट से न्याय नहीं मिला। इस केस में कुल 4 आरोपियों पर FIR हुई थी। हाथरस की लोअर कोर्ट ने 3 आरोपियों को बरी कर दिया। सिर्फ एक आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई, जो जेल में बंद है। हमने लोअर कोर्ट के फैसले के खिलाफ साल-2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका डाली थी। इस पर आज तक सुनवाई ही नहीं हो सकी। पुलिस ने हमारी बहन के शव का जबरन अंतिम संस्कार रात 2 बजे किया। इसके खिलाफ भी हमने हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में याचिका डाली। इस पर भी कोई सुनवाई आज तक नहीं हुई। यूपी सरकार ने हमें दूसरे शहर में मकान और नौकरी देने के लिए कहा था। आज तक दोनों में से कोई वायदा पूरा नहीं हुआ। 8 मार्च, 2024 को हाथरस की डीएम अर्चना वर्मा ने मकान और नौकरी देने के हाईकोर्ट के आदेश पर पीड़ित परिवार को एक चिट्ठी लिखी। इसमें डीएम ने कहा- हम आपको अलीगढ़ में मकान देने पर विचार कर रहे हैं। लेकिन, उससे पहले आपको गांव का ये पैतृक मकान और पूरी जमीन को छोड़ना होगा। पीड़ित परिवार कहता है- ये मकान पुश्तैनी है। इसमें परिवार के कई लोगों के हिस्से हैं। इसलिए वो ये मकान राज्य सरकार को नहीं दे सकते। ये भी क्या गारंटी है कि हमारी जितनी जमीन गांव में है, उतनी जमीन हमें अलीगढ़ में मिल जाएगी। हम चाहते हैं कि यूपी सरकार गारंटी ले कि हम जितना मकान-जमीन छोड़ेंगे, उसके बराबर ही हमें अलीगढ़ में दी जाएगी। ‘बच्चों ने स्कूल तक नहीं देखा, हमारी नौकरी छूट गई’
इस केस से पहले पीड़ित युवती के दोनों भाई जॉब करते थे। सबसे बड़ा भाई नोएडा की मोबाइल कंपनी में कार्यरत था। उससे छोटा भाई गाजियाबाद में पैथोलॉजी लैब पर नौकरी करता था। इस घटना के बाद दोनों भाइयों की नौकरी छूट गई। वो वापस गांव आ गए। दूसरा भाई कहता है- यूपी सरकार ने हमें 25 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी। वो केस लड़ने में खर्च हो गए। हम CRPF सुरक्षा की वजह से कहीं नौकरी नहीं कर सकते। पिछले 5 साल से उन्हीं 25 लाख रुपए से घर चला रहे हैं। हमने कई जगह नौकरी का ट्राई किया। लेकिन, लोग हमारे साथ CRPF जवान देखकर नौकरी देने से साफ मना कर देते हैं। वो आगे बताते हैं- मेरे बड़े भाई के 3 बच्चे हैं। बड़ी भतीजी को हम 150 किलोमीटर दूर रिश्तेदार के घर पढ़ा रहे हैं। बाकी उससे छोटे दोनों बच्चों ने आज तक स्कूल का मुंह नहीं देखा है। उसकी वजह है सुरक्षा। CRPF हमें बिना अनुमति और बिना निगरानी घर से बाहर एक कदम तक नहीं रखने देती। आरोपियों के मकान बगल में हैं। इस वजह से हर वक्त डर बना रहता है। कोई सब्जी बेचने भी आता है, तो CRPF जवान उसे घेरकर गेट पर खड़े रहते हैं। ऐसे में हम न नौकरी कर पा रहे, न बच्चों को पढ़ा पा रहे। हम चाहते हैं कि सरकार हमें हाथरस से दूर कहीं भी शिफ्ट कर दे। जिससे हम नौकरी या कोई काम-धंधा करके अपना घर चला सकें और बच्चों को पढ़ा सकें। ‘हम यहां रहना नहीं चाहते’
गैंगरेप की शिकार लड़की की भाभी कहती हैं- आरोपी जब से कोर्ट से बरी हुए हैं, उनसे डर बना रहता है। हमारी 2 बेटियां हैं। वो घर से बाहर निकलने से डरती हैं। आरोपियों के मकान बगल में हैं। स्कूल में बच्ची नहीं भेज सकते। क्योंकि, उसी स्कूल में आरोपी पक्ष के बच्चे भी पढ़ते हैं। आरोपी कहते हैं कि जब तक सीआरपीएफ वाले हैं, तब तक सही है। इनके जाने के बाद तुम लोगों को देखेंगे। हम टेंशन में रहते हैं कि सुरक्षा हटने के बाद हमारा क्या होगा? इसीलिए हम यहां रहना ही नहीं चाहते। जितनी जल्दी हो सके हमारी मांगें पूरी हों, ताकि हम यहां से दूसरे शहर में शिफ्ट हो सकें। ————————– ये खबर भी पढ़ें… संभल में जामा मस्जिद के सामने बनेगा ATS ऑफिस, 20 से ज्यादा आरोपियों के आतंकी कनेक्शन संभल में एंटी टेरेरिस्ट स्क्वायड (ATS) यूनिट स्थापित की जाएगी। दरअसल, संभल पुलिस ने सरकार को एक कॉन्फिडेंशियल रिपोर्ट भेजी थी। इसमें यहां के 20 से ज्यादा ऐसे लोगों के नाम थे, जो आतंकी गतिविधियों में संलिप्त रहे हैं। दैनिक भास्कर को ये कॉन्फिडेंशियल रिपोर्ट हाथ लगी है। इससे हमने समझा कि यहां ATS क्यों भेजी जा रही? इसके मायने क्या हैं? लोगों की इस पर प्रतिक्रिया क्या है? पढ़िए पूरी खबर…