बंगाल और असम में प्रचंड जीत के बाद अब भाजपा का पूरा फोकस यूपी पर है। 2027 के चुनाव से पहले भाजपाऔर सपा के बीच नैरेटिव बदलने और बनाए रखने की जंग तेज हो गई है। योगी सरकार की तरफ सेबंगाल- सुवेंदु अधिकारी के पीए की हत्या, रिजल्ट के बाद 5वां मर्डर; तमिलनाडु CM पर संशय; आतंकी साजिश रच रहे 2 संदिग्ध यूपी से गिरफ्तार शिक्षामित्रों और अनुदेशकों का बढ़ा हुआ मानदेय देने के लिए ‘शिक्षामित्र सम्मान समारोह’ करना इसी रणनीति का हिस्सा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि एक शिक्षामित्र यूपी में 10 वोटरों पर असर डालता है। इस तरह 1.68 लाख शिक्षामित्रों और अनुदेशकों से भाजपा करीब 17 लाख वोटर्स को अपने पाले में करने की कोशिश कर रही है। इतना ही नहीं, भाजपा की कोशिश सरकारी स्कूलों के मर्जर पर उठ रहे सवालों की काट खोजने की है। वहीं, राजनीतिक जोखिम को भांपते हुए सपा इसके खिलाफ नैरेटिव सेट करने में जुटी है। 43 विधानसभा सीटों पर समीकरण बदलने की क्षमता शिक्षामित्र अपने परिवार और सामाजिक नेटवर्क के सहारे प्रदेश की 43 से ज्यादा सीटों पर निर्णायक असर रखते हैं। यूपी में शिक्षामित्र और अनुदेशकों की संख्या करीब 1.68 लाख है। पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, एक शिक्षामित्र अपने परिवार, रिश्तेदार और आस-पड़ोस के समेत 10 वोटर्स पर असर रखता है। इस हिसाब से शिक्षामित्र और अनुदेशकों का असर 16.80 लाख वोटर्स पर है। मतलब, हर विधानसभा सीट पर औसतन 4 हजार वोटर्स इनके प्रभाव वाले हैं। 2022 विधानसभा चुनाव में करीब 43 ऐसी सीटें थी, जहां जीत-हार का मार्जिन 4 हजार से कम था। इनमें से 25 सीटों पर भाजपा, तो 18 पर सपा ने जीत दर्ज की थी। शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को बढ़ा हुआ मानदेय, बीमा और कैशलेश इलाज की सुविधा देकर भाजपा ने चुनाव से पहले ऐसी टक्कर वाली सीटों पर समीकरण दुरुस्त करने की कोशिश कर रही है। अब शिक्षामित्रों से जुड़ी राजनीति समझिए… सपा समर्थक माने जाते हैं शिक्षामित्र-अनुदेशक सपा सरकार ने शिक्षामित्रों को सरकारी स्कूलों में समायोजित करके सहायक शिक्षक बनाने का फैसला किया था। जून, 2014 में 58 हजार और अप्रैल, 2015 में 91 हजार शिक्षामित्रों को सहायक शिक्षक बनाया गया था। इसके चलते सभी का वेतन 35 से 40 हजार रुपए हो गया था। हालांकि, पहले हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार का फैसला खारिज कर दिया। भाजपा सरकार आने पर शिक्षामित्रों को राहत मिलने की उम्मीद थी। लेकिन, मानदेय 3500 से बढ़कर 10 हजार रुपए होने के अलावा कोई सुविधा नहीं मिली। इससे शिक्षामित्रों में संदेश गया कि भाजपा सरकार उनका हित नहीं चाहती। इसके चलते 2019 लोकसभा और 2022 विधानसभा चुनाव में शिक्षामित्रों ने खुलकर सपा का साथ दिया। उन्हें भरोसा था कि सपा सरकार बनने पर वे सहायक शिक्षक के पद पर बहाल किए जाएंगे। 2022 में भाजपा ने शिक्षामित्रों को पोलिंग एजेंट नहीं बनने दिया था सपा की तरफ झुकाव को देखते हुए ही भाजपा ने 2022 विधानसभा चुनाव में शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को पोलिंग एजेंट नहीं बनने दिया था। भाजपा की जीत के बाद स्थितियां कुछ बदलीं। शिक्षामित्र संगठनों और सरकार के बीच बैठकों से संदेश गया कि सरकार उनकी समस्याओं को लेकर गंभीर है। सीएम योगी ने ‘स्कूल चलो अभियान’ के दौरान इनसे सीधी बात की। इससे उम्मीद जगी कि आने वाले समय में नियमितीकरण और 12 महीने के मानदेय जैसी मांगों पर भी विचार हो सकता है। इसके बाद शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को सरकार के विरोध का रवैया छोड़ना पड़ा। वहीं, सरकार ने इनका मानदेय बढ़ाने का फैसला किया। इस साल के बजट में शिक्षकों और अनुदेशकों का मानदेय बढ़ाने की घोषणा की और अप्रैल से लागू कर दिया। सपा शिक्षामित्रों में भाजपा का विरोध खत्म नहीं होने देना चाहती मानदेय बढ़ने के बावजूद सपा यह कहकर आलोचना कर रही है कि उसने शिक्षामित्रों को सहायक शिक्षक बनाकर 40 हजार रुपए वेतन दिया था। सरकार बनने पर इसे फिर से लागू किया जाएगा। इसके अलावा सपा सरकारी स्कूलों के मर्जर के मुद्दे पर ‘PDA पाठशाला’ के सहारे सरकार के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश कर रही है। अखिलेश यादव सोशल मीडिया X पर शिक्षामित्रों के नाम चिट्ठी लिखकर याद दिलाने की कोशिश कर रहे हैं कि सपा सरकार ने उन्हें शिक्षक बनाया था। कुल मिलाकर सपा की रणनीति शिक्षामित्रों में सरकार को लेकर असंतोष खत्म नहीं होने देने की है। इसके लिए सपा शिक्षक सभा को भी सक्रिय किया गया है। संदेश दिया जा रहा है कि केवल सपा सरकार ही शिक्षामित्रों की समस्याएं खत्म कर सकती है। सपा के ‘षड्यंत्र’ से बचने की नसीहत दे रहे सीएम योगी सीएम योगी जानते हैं कि सपा शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को भड़काने में कोर-कसर नहीं छोड़ेगी। इसी वजह से 5 मई को गोरखपुर में शिक्षामित्र सम्मान समारोह में उन्होंने कहा कि पहले की सरकारों ने बिना किसी प्रावधान के मनमाने ढंग से शिक्षक बना दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने इसे निरस्त कर दिया। इसके बावजूद हमने शिक्षामित्रों को बनाए रखा। साल-2017 में मानदेय 10 हजार रुपए किया। लेकिन, आपके बीच कुछ चंदा वसूलीबाज आ गए, जिन्होंने आपका शोषण किया और विपक्षी दलों के षड्यंत्र में फंसाया। जब आपको समझ आया, तब सरकार आपके साथ खड़ी हुई। अब 18 हजार रुपए मानदेय लागू कर दिया गया है। ट्रिपल कवर की घोषणा से साधा 2027 का चुनाव 1. म्यूचुअल ट्रांसफर की व्यवस्था मिलेगी। 2. बीमा से कवर कराने के लिए एक ही बैंक में खाते खोले जाएंगे। 3. शिक्षामित्र और अनुदेशकों को परिवार समेत 5 लाख रुपए तक कैशलेश इलाज की सुविधा मिलेगी। मानदेय बढ़ाने से सरकार पर 1457 करोड़ का भार बढ़ा यूपी में 1.29 लाख शिक्षामित्रों का मानदेय केंद्र सरकार के समग्र शिक्षा अभियान के तहत 60:40 के रेशियो में मिलता है। वहीं, 13,597 शिक्षामित्र ऐसे हैं, जिनका पूरा भुगतान यूपी सरकार करती है। अब मानदेय बढ़ने से यूपी सरकार पर कुल 1257.77 करोड़ रुपए का भार पड़ा। वहीं, उच्च प्राथमिक विद्यालयों में काम कर रहे 24,717 अनुदेशकों का मानदेय बढ़ने से 217.50 करोड़ रुपए का बोझ पड़ा। इस तरह सरकार पर सालाना 1475.27 करोड़ रुपए का भार पड़ा है। ————————- ये खबर भी पढ़ें… बंगाल जीतने के बाद BJP यूपी में जोर लगाएगी, संगठन-मंत्रिमंडल विस्तार में महिलाओं को साधेगी; निशाने पर रहेगी सपा दिन था पश्चिम बंगाल के ऐतिहासिक जीत के जश्न मनाने का। लेकिन, इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सपा का नाम लेकर यह जता दिया कि अगला मिशन यूपी ही है। मोदी ने संकेत दे दिया है कि अब भाजपा पूरी तरह यूपी पर फोकस करेगी। पूरी खबर पढ़ें…