मंत्री राजभर ने दिल्ली में पीले गमछे का दम दिखाया:बोले- सबको पता है कौन ताकतवर; यह भाजपा पर सीटें बढ़ाने का दबाव या सपा की काट

यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) ने दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में अपनी ताकत दिखाई। शुक्रवार को हुई सामाजिक समरसता महारैली में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने सपा पर हमला बोला। साथ ही 2027 में फिर से एनडीए की प्रचंड जीत का दावा किया। रैली में पीली टोपी और पीला पटका पहने बड़ी संख्या में समर्थक पहुंचे थे। पहले रैली की 3 तस्वीरें देखिए पढ़िए राजभर ने रैली क्या कहा सपा-कांग्रेस ने मुसलमानों को धोखा दिया रैली को संबोधित करते हुए सुभासपा प्रमुख और मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने सपा और कांग्रेस पर मुसलमानों को धोखा देने का आरोप लगाया। कहा- आजादी के समय सरकारी नौकरियों में मुसलमानों की हिस्सेदारी करीब 38% थी, जो अब घटकर 1% से भी कम रह गई है। कुछ दल समाज में नफरत फैलाने की राजनीति करते हैं। जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी की सरकार में मुस्लिम समाज भी शिक्षा के प्रति जागरूक हुआ है। यूपीएससी (सिविल सर्विस) में 53 मुस्लिम बच्चों के सिलेक्शन इसका उदाहरण है। ओबीसी की कई जातियां राजनीतिक रूप से वंचित यूपी में आज भी बड़ी संख्या में बंजारा, सपेरा, प्रजापति, लोहार, नाई समेत कई पिछड़ी जातियां राजनीतिक प्रतिनिधित्व से वंचित हैं। इन वर्गों को अपनी आबादी के अनुपात में अधिकार नहीं मिले हैं। सुभासपा कार्यकर्ता केंद्र और प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी घर-घर तक पहुंचाएं। रैली को पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अरविंद राजभर, सालिक यादव, सुनील सिंह समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने भी संबोधित किया। भाजपा को सीटों का संदेश, कार्यकर्ताओं में जोश भरने की कोशिश रैली में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अरुण राजभर ने कहा कि दिल्ली में आयोजन का उद्देश्य भाजपा नेतृत्व को पार्टी की ताकत दिखाना था। साथ ही कार्यकर्ताओं में यह भरोसा जगाना था कि सुभासपा की पहुंच अब दिल्ली तक है। उन्होंने कहा कि पार्टी पश्चिमी यूपी में भी अपनी मौजूदगी मजबूत कर रही है। ‘छड़ी’ चुनाव चिह्न के साथ 2027 की लड़ाई के लिए पूरी तरह तैयार है। दरअसल, विधानसभा चुनाव की घोषणा में अब 6 महीने का समय भी नहीं बचा है। एनडीए के सहयोगी दल भाजपा पर दबाव बना रहे हैं कि उन्हें गठबंधन में मिलने वाली सीटों की स्थिति साफ की जाए। जिससे वे उन सीटों पर चुनावी तैयारी शुरू कर सके। बीते दिनों भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह के लखनऊ प्रवास में भी एनडीए के घटक दलों के नेताओं ने उनसे मुलाकात कर सीटों के बंटवारे पर बात की थी। इसीलिए राजभर की दिल्ली में हुई इस रैली के बाद लखनऊ से लेकर दिल्ली तक सत्ता के गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। राजभर ने भाजपा नेतृत्व को बताने का प्रयास किया है कि पश्चिमी यूपी के जिलों में भी उनकी पार्टी का जनाधार है। लिहाजा टिकट वितरण के साथ उनकी पार्टी को केवल पूर्वांचल या अवध तक सीमित नहीं रखा जाए। राजभर बोले- किसे पता नहीं कि ताकत किसके पास ओमप्रकाश राजभर ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा- सुभासपा को लोग पूरब की पार्टी कहते थे। लेकिन, पार्टी के पश्चिमी यूपी जिलों में भी बड़ा जनाधार है। पश्चिम यूपी के कार्यकर्ताओं की डिमांड थी कि दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में रैली की जाए। उनके प्रस्ताव पर ही दिल्ली में रैली की है। जहां तक ताकत की बात है, तो किसे पता नहीं कि ताकत किसके पास है? राजभर ने कहा कि दिल्ली में सामाजिक समरसता रैली में दलित और पिछड़े वर्ग की कई जातियों के लोग शामिल हुए। ऐसी जातियों के लोग शामिल हुए, जो आज भी सरकार की योजनाओं और विकास की मुख्य धारा से दूर हैं। उनकी पार्टी की रैला की उद्देश्य ऐसी जातियों को जोड़ना है। जिससे उन्हें सरकार की योजनाओं के लाभ के साथ सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक अवसर का लाभ मिले। 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी का आगाज दिल्ली में हुई इस महारैली को यूपी विधानसभा चुनाव 2027 के लिए सुभासपा के चुनावी अभियान की शुरुआत माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व का दावा है कि सामाजिक समरसता के मुद्दे के साथ वह पूर्वांचल के अलावा पश्चिमी और मध्य उत्तर प्रदेश में भी अपना जनाधार बढ़ाने की तैयारी कर रही है। वरिष्ठ पत्रकार आनंद राय के मुताबिक राजभर का यह आयोजन केवल कार्यकर्ता सम्मेलन नहीं, भाजपा नेतृत्व और विपक्ष दोनों के लिए राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। पूर्वांचल की राजनीति करने वाले ओम प्रकाश राजभर ने दिल्ली में रैली कर यह बताने की कोशिश की कि उनका प्रभाव अब केवल पूर्वांचल तक सीमित नहीं है। पूरे उत्तर प्रदेश और राष्ट्रीय राजधानी तक उनका संगठन सक्रिय है। सपा पर लगातार हमलावर हैं राजभर ओम प्रकाश राजभर पिछले कुछ समय से समाजवादी पार्टी और उसके अध्यक्ष अखिलेश यादव पर लगातार हमलावर हैं। रैली में भी सपा को निशाने पर रखा गया। अरुण राजभर ने कहा कि यह आयोजन “सपा के दंभ को तोड़ने” के लिए किया गया है। रैली से एक दिन पहले भी ओम प्रकाश राजभर ने पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के मुद्दे पर अखिलेश यादव को घेरते हुए सोशल मीडिया पर लिखा था कि “धर्मेंद्र प्रधान कुर्मी थे, इसलिए इस्तीफा मांग लिया गया। अगर यादव होते तो इस्तीफा नहीं मांगा जाता।” इसके जरिए उन्होंने सपा पर जातीय राजनीति करने का आरोप लगाया था। पहले भी अखिलेश यादव पर हमलावर रहे हैं राजभर गाजीपुर में युवती की मौत के मामले में मंत्री राजभर ने अखिलेश यादव पर निशाना साधा था। सुल्तानपुर में उन्होंने कहा-अखिलेश यादव से मैं पूछना चाहता हूं। जब बाराबंकी में यादव समाज के लोग राजभर की मूड़ी काटते हैं तब वहां क्यों नहीं जाते। देवरिया में दिन में गोली मार दी जाती है तब क्यों नहीं जाते। कौशांबी में चार लोग पाल की बेटी से रेप कर देते हैं। लेकिन उनको केवल गाजीपुर दिख रहा। वह जाति संघर्ष कराने के मूड में हैं। आजमगढ़ में मंत्री राजभर ने सभी 9 सीटों पर कैंडिडेट उतारने का ऐलान करते हुए कहा था कि आजमगढ़ में सपा समर्थक यादव विधायकों ने भय और आतंक का वातावरण बना रखा है। दूसरे की जमीनों पर कब्जा कर लेना, किसी को भी धमका देना, मारपीट करना यहां रोज की बात है। सबसे ज्यादा भय और आतंक के साये में अति पिछड़े समाज के लोग जी रहे हैं। यहां इनकी पैरवी करने वाला कोई नहीं। मुजफ्फरनगर में ओम प्रकाश राजभर ने कहा था कि मुजफ्फरनगर दंगों के दौरान जब लोग मारे जा रहे थे, तब अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे। मुख्यमंत्री का कर्तव्य जिले के हालात को नियंत्रित करना होता है, लेकिन अखिलेश यादव के लिए नाच देखना अधिक महत्वपूर्ण था।