महिला की अंतिम यात्रा में साथ चले दो पालतू हाथी:संभल में 12 गांव से डेढ़ हजार लोग पहुंचे, बेटा बोला- दोनों गुमसुम हैं

संभल में बुधवार शाम 74 साल की एक महिला की अनोखी अंतिम यात्रा निकली। महिला के अंतिम समय में भी उनके दो पालतू हाथियों ने साथ नहीं छोड़ा। मालकिन की अर्थी के पीछे गाजे-बाजे के साथ परमा और मोहन (हाथी) भी चल पड़े। महिला की अंतिम यात्रा में 12 गांवों से करीब डेढ़ हजार लोग शामिल होने पहुंचे। इस दौरान पूरे 15 किमी तक श्रीकृष्ण- शिवजी की झांकी भी निकाली गई। महिला की अंतिम यात्रा रजपुरा के बराला कस्बे से होते हुए राजघाट तक पहुंची। 2 तस्वीरें देखिए… अलीगढ़ के अस्पताल में भर्ती थीं रामबेटी जिला मुख्यालय से 20 किमी दूर रजपुरा क्षेत्र के ब्यौरा गांव की रहने वाली रामबेटी देवी (74) की बुधवार तड़के 4 बजे मौत हो गई। उन्हें 8 साल से शुगर था। 3 दिन पहले तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अलीगढ़ के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। रामबेटी देवी की मौत की खबर जैसे ही घर पहुंचीं, परिवार में मातम छा गया। पड़ोस और आसपास के गांव के लोगों की घर के बाहर भीड़ लगनी शुरू हो गई। दोनों बेटों मनवीर और चरन सिंह ने मां को सम्मान के साथ अंतिम विदाई देने का फैसला लिया। बेटा बोला- परमा और मोहन मां के लाडले थे दोनों बेटों ने कहा- पालतू हाथी परमा और मोहन से मां का लगाव बहुत था। वो परिवार के सदस्य की तरह हैं, इसलिए दोनों हाथी भी अंतिम यात्रा में साथ चलेंगे। परिवार ने भी मनवीर और चरन सिंह के फैसले पर हांमी भरी। इसके बाद अंतिम यात्रा की तैयारी शुरू हुई। महिला की अंतिम यात्रा में सबसे आगे चले हाथी ब्यौरा गांव से राजघाट गंगा तक करीब 15 किलोमीटर लंबी शव यात्रा निकली। इसमें ब्यौरा, न्यौरा, अमरपुर, मकसूदनपुर, सैंडोरा, जैतोरा सागरपुर, पवसरा, मेहुआ हसनगंज, सिंहदलपुर, हिरौनी, रजावली, रजपुरा, भिरावटी और शाहपुर समेत आसपास के गांवों के लोग शामिल हुए। शव यात्रा में सबसे आगे परिवार के पालतू हाथी परमा और मोहन चले। इसके पीछे 100 से ज्यादा वाहन चलते रहे। बबराला कस्बे से यात्रा गुजरने के दौरान करीब 25 मिनट तक जाम के भी हालात बने। हाथियों के साथ शव यात्रा देखकर कस्बे के लोग भी अचंभे में पड़ गए। 200 साल से परिवार में हाथी पालने का रिवाज मनवीर के मुताबिक, उनका परिवार 200 साल से ज्यादा समय से हाथी पाल रहा है। आसपास के क्षेत्र में परिवार की पहचान हाथी पालने वाले परिवार के रूप में है। साल 2012 में उनके पिता की मौत के बाद मां रामबेटी देवी ने हाथियों की देखभाल की। अब हाथियों की जिम्मेदारी परिवार के पास है। मनवीर ने बताया- उनके दादा करन सिंह के समय से परिवार में हाथी पाले जाते हैं। फिलहाल परिवार के पास परमा और मोहन नाम के दो हाथी हैं। दोनों की उम्र करीब 78 साल है। परिवार हाथी वाले नत्थू सिंह के नाम से शहर में मशहूर है। नत्थू हमारे स्वर्गीय पिताजी का नाम है। बेटा बोला- दोनों हाथी गुमसुम हैं मृतक रामबेटी देवी के बेटे मनवीर ने बताया कि मां के जाने के बाद से हाथी परमा और मोहन दोनों उदास हैं। खाना-पीना भी छोड़ रखा है। दरअसल, मां ने लंबे समय तक दोनों की देखभाल की थी। मनवीर की पत्नी डबलेश हैं। उनके तीन बच्चे हैं। बेटा स्वामी (18) और बेटियां कुशांत (15) व ज्योति (11) हैं। चरन सिंह की पत्नी ममता हैं। उनके भी तीन बच्चे हैं। बेटा निशांत (12) और बेटियां दिव्या (9) व कीर्ति (5) हैं। परिवार के पास करीब 40 बीघा खेती की जमीन भी है। —————— यह खबर भी पढ़ें… पति को सांप डसवाने वाली रविता हत्या की दोषी:मेरठ में प्रेमी के साथ मिलकर सोते वक्त गला घोटा, फिर बिस्तर पर सांप छोड़ा था मेरठ में पति की हत्या के मामले में रविता और उसके प्रेमी को कोर्ट ने दोषी करार दिया है। बुधवार को कोर्ट ने सुनवाई के दौरान माना कि दोनों ने मिलकर अमित कश्यप की हत्या की थी। कोर्ट 16 अक्टूबर को दोनों को सजा सुनाएगी। घटना के 538 दिन बाद 16 तारीखों में 12 से ज्यादा गवाहों के बयान के बाद कोर्ट ने यह फैसला लिया। पढ़ें पूरी खबर…