मेरठ में पालतू कुत्ते टफ्फू की मौत से परिवार इतना दुखी हुआ कि तीन दिन तक घर में खाना नहीं बना। रविवार को परिवार ने टफ्फू की इंसानों की तरह तेरहवीं की। सुबह हवन के बाद रिश्तेदारों और पड़ोसियों को प्रसाद बांटा गया। करीब 12 साल से परिवार का हिस्सा रहे टफ्फू को शुक्रवार, 11 सितंबर को तबीयत बिगड़ने पर खो दिया था। 3 तस्वीरें देखिए… अब विस्तार से पढ़िए… बेटी ने रखा था नाम, 12 साल से राखी बांधती थी रायबरेली निवासी सुनील यादव पिछले 16 साल से मेरठ में रह रहे हैं। वह डीएन इंटर कॉलेज में माली हैं। परिवार में पत्नी सुनीता, 18 साल की बेटी वर्षा और 17 साल का बेटा शिवम है। करीब 12 साल पहले इसी कॉलेज में एक देसी नस्ल की डॉग ने टफ्फू को जन्म दिया था। सुनील उसे अपने साथ घर ले आए। धीरे-धीरे टफ्फू परिवार का हिस्सा बन गया। वह घर के हर सदस्य की आवाज पहचानता था। कौन अपना है और कौन बाहर का, यह भी समझता था। सुनील ने बताया कि उनकी बेटी वर्षा ने ही डॉग का नाम टफ्फू रखा था। वर्षा उसे अपना भाई मानती थी और पिछले 12 साल से हर रक्षाबंधन पर उसे राखी बांधती थी। इस बार भी उसने टफ्फू को राखी बांधी थी। परिवार में किसी का जन्मदिन या त्योहार होता तो टफ्फू भी उस खुशी का हिस्सा बनता था। वर्षा का कहना है कि उसका एक भाई शिवम है और दूसरा टफ्फू था। शिवम के लिए भी टफ्फू बचपन का साथी था। 12 साल के दौरान दोनों ने साथ काफी समय बिताया। परिवार के किसी सदस्य के आने-जाने पर टफ्फू अपनी प्रतिक्रिया देता था और सभी को पहचानता था। डॉक्टर को दिखाया, लेकिन नहीं बचा सुनील के मुताबिक, शुक्रवार को अचानक टफ्फू की तबीयत खराब हो गई। उसे डॉक्टर को दिखाया गया। शाम को डॉक्टर को दोबारा घर आना था, लेकिन उससे पहले ही टफ्फू की मौत हो गई। सुनीता यादव बताती हैं कि टफ्फू के जाने के बाद घर का माहौल पूरी तरह बदल गया। वह तीन दिन से ठीक से सो नहीं पा रही हैं। घर के जिस हिस्से में टफ्फू रहता था, वहां अब उसकी यादें ही रह गई हैं। सुनील बोले- छोटा बेटा मानता था, इसलिए तेरहवीं की टफ्फू की तेरहवीं करने का फैसला सुनील यादव ने खुद लिया। सुनील के मुताबिक, वह टफ्फू को अपने छोटे बेटे की तरह मानते थे। इसलिए उसकी मौत के बाद परिवार ने इंसान की मृत्यु के बाद होने वाली रस्मों की तरह ही तेरहवीं करने का फैसला किया। तेरहवीं में टफ्फू की पसंद के लड्डू भी बनवाए रविवार को परिवार ने टफ्फू की तेरहवीं का आयोजन किया। इसमें रिश्तेदारों और आसपास के लोगों को बुलाया गया। सुबह हवन कराया गया और प्रसाद तैयार करने के लिए हलवाई लगाए गए। तेरहवीं में आलू और सीताफल की सब्जी, रायता, कचौरी और बूंदी के लड्डू बनवाए गए। सुनीता के मुताबिक, टफ्फू को बूंदी के लड्डू बहुत पसंद थे। इसलिए उसकी पसंद की यह मिठाई भी प्रसाद में शामिल की गई। तस्वीर लगाकर दी अंतिम विदाई तेरहवीं में टफ्फू की तस्वीर भी लगाई गई थी। परिवार और रिश्तेदारों ने हवन में शामिल होकर उसे याद किया। सुनीता कहती हैं कि टफ्फू उनके घर का अभिन्न हिस्सा था। उसकी मौजूदगी परिवार की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुकी थी। अब उसके जाने के बाद घर में उसकी कमी लगातार महसूस हो रही है। टफ्फू की कहानी डीएन इंटर कॉलेज से शुरू हुई थी, अब मौत के बाद उसे उसी कॉलेज के ग्राउंड में दफनाया गया। ————— ये खबर भी पढ़िए… वाराणसी में 40 साल के MS डॉक्टर ने सुसाइड किया:हेरिटेज हॉस्पिटल की OT से इंजेक्शन लाए, हाथ में सुई लगाई; बेड पर लाश मिली वाराणसी में 40 साल के डॉक्टर ने सुसाइड कर लिया। शनिवार रात कमरे में उन्होंने एनेस्थीसिया का इंजेक्शन हाथ में लगाकर जान दी। बेड पर उनका शव बैठी हुई हालत में मिला। डॉ. शुभंकर गौतम हेरिटेज इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस में 3 साल से यूरोलॉजिस्ट थे। यह वाराणसी का बड़ा प्राइवेट मेडिकल कॉलेज है। शुभंकर ने एम्स से MS और फिर MCh की डिग्री हासिल की थी। पूरी खबर पढ़िए…