मेरठ में शहीद के पार्थिव शरीर से लिपटकर रोई पत्नी:ताबूत पर सिर पटककर बोली- मुझे साथ ले चलो, सड़क हादसे में गई थी जान

शिमला सड़क हादसे में जान गंवाने वाले सैनिक जनेश्वर कुमार (35) का पार्थिव शरीर शुक्रवार सुबह 10.30 बजे मेरठ स्थित पैतृक गांव लाया गया। शव जैसे ही घर पहुंचा, पत्नी ताबूत से लिपटकर फूट-फूटकर रोई। बार-बार ताबूत पर सिर पटककर कहती रही कि मुझे भी साथ ले चलो। अब मुझे भी नहीं रहना। पत्नी रोते-रोते बेहोश हो गई। तीनों बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। दोपहर 12 बजे जब शव यात्रा निकली तो पूरा गांव श्रद्धांजलि देने उमड़ पड़ा। ‘भारत माता की जय’ और ‘जनेश्वर कुमार अमर रहें’ के नारे लगाए गए। घर से 200 मी. दूर खेत में राजकीय और सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। 9 साल के बड़े बेटे हिमांशु ने चिता को मुखाग्नि दी। परिवार के लोगों से लिपटकर फूट-फूटकर रोया। जनेश्वर सेना की कुमाऊं रेजीमेंट में सेवाएं दे रहे थे। नायक के पद पर तैनात थे। हिमाचल प्रदेश के शिमला में तैनात थे। 1 जुलाई को सड़क हादसे में जनेश्वर सहित कई फौजी घायल हो गए थे। घायलों को मिलिट्री अस्पताल में भर्ती कराकर इलाज कराया जा रहा था। 15 जुलाई यानी बुधवार को जनेश्वर की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। अंतिम विदाई की 2 तस्वीरें- पैतृक गांव में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया पार्थिव शरीर 12 साल पहले भारतीय सेना में हुआ था चयन जनेश्वर तीन भाइयों में सबसे बड़े थे। छोटे भाई प्रदीप भी भारतीय सेना में सिपाही के पद पर तैनात हैं। जबकि मझले भाई घर पर खेती का काम देखते हैं। 2015 में जनेश्वर की शादी नीतू (33) हुई थी। उनके दो बेटे और एक बेटी है। बेटा हिमांशु (9), मान्या (6), लकी (4) हैं। 2014 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। दो साल पहले नायक के पद पर प्रमोशन मिला था। —————————–
ये खबर भी पढ़ें… शिकोहाबाद में एनकाउंटर, बदमाशों ने दो पुलिसवालों को गोली मारी:ट्रेन से कूदकर भागे, 300 जवानों ने गांव घेरा, एक बदमाश मारा गया फिरोजाबाद के शिकोहाबाद रेलवे स्टेशन पर शुक्रवार सुबह 11:45 बजे इटावा की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) और दो बदमाशों के बीच मुठभेड़ हो गई। बदमाशों की फायरिंग में एसओजी के दो सिपाही डेविड चौहान और पुष्पेंद्र गोली लगने से घायल हो गए। एक सिपाही के पेट में और दूसरे के कंधे में गोली लगी। दोनों को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है। पढ़िए पूरी खबर