यूपी में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस में बदलाव की चर्चा तेज हो गई है। पार्टी यूपी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय को बदलने पर विचार कर रही है। उनकी जगह कांग्रेस विधायक और विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा ‘मोना’ का नाम रेस में है। हालांकि, पार्टी की ओर से अभी इस बारे में आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। सूत्रों के मुताबिक, मोना मिश्रा का नाम मंगलवार को नई दिल्ली स्थित AICC कार्यालय में हुई कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक में भी उठा। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत पार्टी के कई शीर्ष नेताओं ने सहमति जताई। हालांकि कांग्रेस का एक धड़ा उनके विरोध में है। मोना मिश्रा के पिता प्रमोद तिवारी इस समय राजस्थान से राज्यसभा सांसद और राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता हैं। प्रतापगढ़ की रामपुर खास सीट से 9 बार विधायक और यूपी सरकार में पूर्व कैबिनेट मंत्री रहे। उनके सपा प्रमुख अखिलेश यादव से भी अच्छे संबंध हैं। मोना मिश्रा लगातार तीन बार से पिता की पारंपरिक सीट से विधायक हैं। अगस्त 2023 से अजय राय के पास जिम्मेदारी अजय राय अगस्त 2023 से उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हैं। पार्टी के नए यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने ही प्रदेश में कांग्रेस अध्यक्ष बदले जाने की मांग की है। राजेंद्र पाल गौतम ने हाईकमान के सामने सामाजिक समीकरण का हवाला दिया है। तर्क दिया है कि अजय राय जिस भूमिहार समाज से आते हैं, उसकी आबादी प्रदेश में बेहद कम है। 2027 का चुनाव जीतने के लिए कांग्रेस को एक ऐसे चेहरे की जरूरत है, जिसका वोटबैंक बड़ा और व्यापक हो। गौतम खुद दलित वर्ग से आते हैं। उनकी रणनीति है कि दलित-ब्राह्मण या दलित-ओबीसी के समीकरण से यूपी का किला फतह किया जाए। इसी फेरबदल में प्रमोद तिवारी की बेटी और विधायक आराधना मिश्रा का नाम सामने आया है। चर्चा है कि अजय राय को पार्टी में केंद्रीय स्तर पर दूसरी जिम्मेदारी दी जा सकती है। हाईकमान के सामने 3 विकल्प, किस पर लगेगी मुहर राजेंद्र पाल गौतम 10-11 सितंबर को दिल्ली गए थे। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल के साथ लंबी बैठक की थी। अब हाईकमान के सामने 3 ऑप्शन हैं- पहला – अजय राय को हटाकर किसी ब्राह्मण, ओबीसी या दलित चेहरे को प्रदेश की कमान सौंप दी जाए। दूसरा – 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी के शानदार प्रदर्शन को देखते हुए अजय राय को ही अध्यक्ष पद पर बनाए रखा जाए। राय के पक्ष में सबसे बड़ा तर्क यह है कि उनके नेतृत्व में पार्टी ने 6 लोकसभा सीटें जीतीं। उन्होंने खुद वाराणसी में पीएम नरेंद्र मोदी को कड़ी टक्कर दी थी। मतगणना के दौरान अलग-अलग चरण में कुल 7 राउंड में बढ़त भी बनाई थी। तीसरा – चुनाव से ठीक 4 महीने पहले अध्यक्ष बदलने का जोखिम न लेते हुए अजय राय को पद पर बनाए रखा जाए। लेकिन, संतुलन साधने के लिए उनके साथ 3 से 4 कार्यकारी अध्यक्ष बना दिए जाएं। इनमें ब्राह्मण, दलित, ओबीसी और मुस्लिम चेहरे शामिल हों। ****************** यह खबर भी पढ़िए:- उमेश पाल की पत्नी ओबीसी मोर्चा की प्रदेश मंत्री बनीं:नाराज पूर्व मंत्री के बेटे को एससी-मोर्चा में जिम्मेदारी, यूपी BJP ने 6 टीमों का ऐलान किया यूपी में भाजपा पूरी तरह से चुनावी मोड में नजर आ रही है। पार्टी ने गुरुवार शाम 6 अलग-अलग मोर्चों की नई टीम का ऐलान किया। इनमें अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), पिछड़ा वर्ग (OBC), महिला, किसान और अल्पसंख्यक मोर्चा शामिल हैं। भाजपा ने प्रयागराज में मारे गए वकील उमेश पाल की पत्नी जया पाल को ओबीसी मोर्चा में प्रदेश मंत्री बनाया है। पढ़ें पूरी खबर…