अम्बेडकरनगर के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद अब युवाओं के लिए स्वरोजगार का जरिया बनेगा। एक जनपद एक व्यंजन योजना के तहत 18 वर्ष से अधिक उम्र के युवा बालूशाही, चाट और खजला जैसे पारंपरिक खाद्य उत्पादों का कारोबार शुरू कर सकते हैं। योजना में बैंक ऋण के साथ परियोजना लागत के आधार पर अनुदान देने का भी प्रावधान है।
योजना के तहत जिले में 10 युवाओं को लाभान्वित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके सापेक्ष अब तक नौ युवाओं ने आवेदन किया है, जबकि दो आवेदकों को बैंक से ऋण मिल चुका है। योजना के जरिए पारंपरिक व्यंजनों के कारोबार को बढ़ावा देने के साथ युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की तैयारी है।
योजना के तहत 25 लाख रुपये तक की परियोजना लागत पर 25 प्रतिशत तक अनुदान मिल सकता है। इसकी अधिकतम सीमा 6.25 लाख रुपये निर्धारित है। इससे युवा मिठाई, चाट और अन्य पारंपरिक खाद्य उत्पादों की दुकान खोलने, उत्पादन बढ़ाने या कारोबार का विस्तार करने के लिए आर्थिक मदद प्राप्त कर सकते हैं।
उद्योग विभाग के अजय शर्मा ने बताया कि योजना का उद्देश्य पारंपरिक व्यंजनों को बढ़ावा देने के साथ युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ना है। इच्छुक आवेदकों को निर्धारित पात्रता पूरी करने के साथ बैंक से ऋण स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
योजना के तहत जिले में 10 युवाओं को लाभान्वित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके सापेक्ष अब तक नौ युवाओं ने आवेदन किया है, जबकि दो आवेदकों को बैंक से ऋण मिल चुका है। योजना के जरिए पारंपरिक व्यंजनों के कारोबार को बढ़ावा देने के साथ युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की तैयारी है।
योजना के तहत 25 लाख रुपये तक की परियोजना लागत पर 25 प्रतिशत तक अनुदान मिल सकता है। इसकी अधिकतम सीमा 6.25 लाख रुपये निर्धारित है। इससे युवा मिठाई, चाट और अन्य पारंपरिक खाद्य उत्पादों की दुकान खोलने, उत्पादन बढ़ाने या कारोबार का विस्तार करने के लिए आर्थिक मदद प्राप्त कर सकते हैं।
उद्योग विभाग के अजय शर्मा ने बताया कि योजना का उद्देश्य पारंपरिक व्यंजनों को बढ़ावा देने के साथ युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ना है। इच्छुक आवेदकों को निर्धारित पात्रता पूरी करने के साथ बैंक से ऋण स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।