यूपी में अगले 1 सप्ताह तक चलेगी लू:बांदा देश का सबसे गर्म शहर रहा, 25 जून तक आ सकता है मानसून

प्रदेश में अगले एक सप्ताह तक लू का असर जाती रहेगा। अभी फिलहाल मानसून की कोई संभावना नजर नहीं आ रही है। मौसम विभाग के अनुसार,ज्यादातर जिलों में एक से दो डिग्री हुई तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की गई । शनिवार को भी तापमान में आंशिक वृद्धि के आसार हैं। बारिश की संभावना एक सप्ताह तक नहीं है। आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि आगामी एक सप्ताह के दौरान सीमित छिटपुट मौसम गतिविधियों के परिप्रेक्ष्य में प्रदेश के पूर्वी मध्यवर्ती एवं दक्षिणी भाग में उष्ण लहर (लू) चलने की संभावना है। दो दिन में एक से दो डिग्री तक तापमान में बढ़ोतरी हो सकती है जिससे गर्मी का असर बढ़ेगा। प्रदेश में कहीं कहीं हल्की बूंदाबांदी के आसार भी हैं। मौसम विभाग के अनुसार, शुक्रवार को प्रदेश में सबसे गर्म जिला बांदा रहा जहां तापमान 44.2 डिग्री दर्ज किया गया। वहीं प्रयागराज में तापमान 43.6 डिग्री और वाराणसी में 43 डिग्री दर्ज किया गया। राजधानी लखनऊ में भी तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की गई जो एक दिन में 40.4 डिग्री से बढ़कर 41.3 डिग्री पहुंच गया। शनिवार को भी प्रदेश भर के सभी जिलों में तापमान में आंशिक बढ़ोतरी के आसार हैं। 5 दिन भीषण गर्मी पड़ेगी, लू चलेगी मौसम विभाग का कहना है कि प्रदेश में मौसमी गतिविधियां फिलहाल छिटपुट स्तर तक सीमित हैं। कहीं-कहीं आंधी-तूफान और हल्की बूंदाबांदी के आसार जरूर हैं, लेकिन इससे तापमान में कोई खास राहत मिलने के आसार नहीं हैं। अगले पांच दिनों में पारा लगातार बढ़ता रहेगा। इस दौरान लू की स्थिति और गंभीर रहने की संभावना है। यूपी में जून से सितंबर के बीच 8% बारिश कम होगी
सीनियर साइंटिस्ट अतुल सिंह बताते हैं- इस साल यूपी समेत पूरे देश में सामान्य से कम बारिश का अनुमान है। आमतौर पर यूपी में जून से सितंबर के बीच करीब 820 से 840 मिलीमीटर बारिश होती है। लेकिन, इस साल 8% कम यानी लगभग 754 से 773 मिलीमीटर तक ही पानी बरसेगा। यूपी में मानसून में कम बारिश की संभावना की वजह जानिए
मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक डॉ. एम महापात्रा ने बताया कि इस साल प्रशांत महासागर में ला नीना जैसी स्थितियां खत्म होकर अल नीनो की ओर बढ़ने के संकेत हैं। जो कम वर्षा का कारण बनेगी। यानी इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून के सामान्य से कमजोर रहने के संकेत हैं। साथ ही इस साल जनवरी-मार्च में उत्तरी गोलार्ध में बनी कम बर्फ भी मानसून को प्रभावित कर सकती है। खेती-किसानी पर होगा असर, महंगाई बढ़ेगी
यूपी में अल-नीनो की वजह से कम बारिश का सीधा असर राज्य की इकोनॉमी, खेती-किसानी और आम लोगों की जिंदगी पर पड़ेगा। धान जैसी फसलों के उत्पादन में 20% तक की कमी आ सकती है। जून-जुलाई में बारिश न होने से धान की रोपाई में देरी हो सकती है। रकबा भी घट सकता है। सिंचाई के लिए किसानों को ट्यूबवेल पर निर्भर रहना पड़ेगा। बिजली और डीजल का खर्च बढ़ने से खेती की लागत बहुत ज्यादा बढ़ सकती है। उत्पादन घटने से अनाज, दालों और सब्जियों के दाम तेजी से बढ़ सकते हैं। बुंदेलखंड और दक्षिण-पश्चिमी यूपी के जिलों (जैसे झांसी, महोबा, ललितपुर, मथुरा) में सूखे की आशंका गहरा सकती है। यूपी में पिछले 10 साल में मानसून कब आया, ग्राफिक्स में देखिए पिछले साल 10 से 15% ज्यादा बरसा था मानसून
मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, उत्तर प्रदेश में 2025 के मानसून सीजन (जून से सितंबर) के दौरान औसतन 870 से 900 मिमी बारिश दर्ज की गई थी। यह सामान्य मानसूनी औसत से करीब 10 से 15 प्रतिशत अधिक रही।