बेमौसम बारिश की वजह से गेहूं की फसल खराब होने से परेशान किसानों के लिए ‘डबल इंजन’ सरकार ने राहत का पिटारा खोल दिया है। उत्तर प्रदेश सरकार के अनुरोध पर केंद्र सरकार ने चमकविहीन और सिकुड़े हुए गेहूं को एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) पर खरीदने की मंजूरी दे दी है। अब किसानों को अपनी खराब दिख रही फसल को कम दाम पर बेचने की जरूरत नहीं पड़ेगी। बिना कटौती मिलेगा पूरा पैसा सरकार ने नियमों में बड़ी ढील देते हुए तय किया है कि अब 70 प्रतिशत तक चमक खो चुका गेहूं सरकारी केंद्रों पर लिया जाएगा। इसके साथ ही अगर गेहूं के दाने 20 प्रतिशत तक टूटे या सिकुड़े हुए हैं, तो भी उसे खरीदा जाएगा। सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि इस खराब गुणवत्ता के बावजूद किसानों के भुगतान में किसी भी तरह की कटौती नहीं की जाएगी और उन्हें पूरी कीमत दी जाएगी। सत्यापन न होने पर भी नहीं रुकेगी खरीद खरीद प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए सरकार ने एक और बड़ा फैसला लिया है। जिन किसानों का अभी तक राजस्व या चकबंदी विभाग से ऑनलाइन सत्यापन नहीं हो पाया है, उनका गेहूं भी केंद्र प्रभारी कागजात देखकर खरीद सकेंगे। प्रदेश भर में 15 जून तक गेहूं की खरीद जारी रहेगी। केंद्रों पर भीड़ कम करने के लिए टोकन व्यवस्था लागू की गई है, जिससे किसान अपनी तय तारीख पर आकर फसल बेच सकें। अफसरों की तैनाती और हेल्पलाइन नंबर पूरी व्यवस्था की निगरानी के लिए शासन ने सभी 18 मंडलों में बड़े प्रशासनिक अधिकारियों को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। ये अधिकारी खुद केंद्रों का दौरा करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि किसानों को कोई असुविधा न हो। अगर किसी किसान को गेहूं बेचने में कोई परेशानी आती है, तो वह टोल-फ्री नंबर 18001800150 पर संपर्क कर अपनी समस्या बता सकता है।