झांसी का दिव्य दरबार…तंत्र-मंत्र के बीच दंडवत करते अनुयायी। ऊंचे तख्त पर ‘ज्ञान’ दे रहे बाबा के सामने अफसर और नेता भी मत्था टेक रहे हैं। 22 साल बाद पुलिस को पता चला ‘ज्ञान’ देने वाला यह बाबा लूट और किडनैपिंग का आरोपी है। 5 दिन पहले (11 अक्टूबर) झांसी से गिरफ्तार काली सरकार बाबा (असली नाम प्रदीप शुक्ला) की पोल खुलने के बाद दैनिक भास्कर ने इन्वेस्टिगेशन किया। इसमें पता चला यूपी में ऐसे कई अपराधी हैं, जो पुलिस से बचने के लिए बाबा बन गए। धर्म-आस्था के कारण पुलिस ऐसे बाबाओं पर हाथ नहीं डालती, जिसका इन्होंने फायदा उठाया। हमारी इन्वेस्टिगेशन में यह भी सामने आया कि जिन बाबाओं पर आपराधिक केस दर्ज हैं, उन्होंने पैसे कमाने के लिए शुरू में कई काम-धंधे किए। किसी ने मछली बेची, किसी ने लोहारी का काम किया। किसी ने राजनीति में हाथ आजमाया और चुनाव भी लड़ा। कहीं भी कामयाब नहीं हुए, तो बाबा बन गए। अब ये लोगों के भरोसे का फायदा उठाकर उनकी जान जोखिम में डाल रहे हैं। पढ़िए पूरा इन्वेस्टिगेशन… महाराजगंज के खोस्ट गांव में खेतों के बीच मुनव्वर बाबा का घर है। घर में एक मजार है। हमें बताया कि बाबा यहीं पर रुहानी ताकतों को जगाता है। दीवार पर उसका नंबर लिखा था। घर के अंदर उसके अनुयायी नहीं थे, परिवार के 3-4 लोग थे। उन्होंने बताया कि बाबा नेपाल गए हैं, 8 दिन बाद मिलेंगे। मोबाइल बंद है, इसलिए बहुत दूर-दूर से लोग आ रहे हैं। मुनव्वर बाबा के बगल के घर में गब्बर बाबा रहता है, वो भी ताबीज देता है। विशेष दुआ पढ़कर बांझपन, भूत-प्रेत बाधा दूर करने का दावा करता है। गांव के लोगों ने बताया कि बाबा किसी की पूजा में नहीं गया। उसके खिलाफ लड़की ने रेप के आरोप लगाए हैं। एक नाबालिग के अपहरण का केस है, इसलिए भाग गया था। पुलिस ने उसे पकड़कर जेल भेजा है। लड़की ने बाबा मुनव्वर की बताई सच्चाई रेप का केस दर्ज कराने वाली लड़की ने दैनिक भास्कर को आपबीती सुनाई। उसने कहा- 29 जुलाई, 2026 की सुबह करीब 9 बजे मैं छात्रवृत्ति का फार्म भरने के लिए स्कूल जा रही थी। रास्ते में मुनव्वर और गब्बर, दोनों भाई मिले। मुझे जबरन गाड़ी में बैठाकर नशीला पानी पिला दिया। मैं बेहोश हो गई। नेपाल बॉर्डर के पास मुनव्वर ने पूछा कि तुम्हारा आधार कार्ड कहां है? मैंने बताया कि आधार मौसी के पास है। मुझे धमकाया कि आधार मंगवाओ…नहीं तो तुम्हें मार देंगे या नेपाल में बेच देंगे। मैं डर गई। मौसी को कॉल करके मोबाइल पर आधार कार्ड मंगवाया। मुझे धमकी दी कि बॉर्डर पर जवान मिलेंगे, उनसे कहना कि नेपाल दवा लेने जा रहे हैं…मेरे साथ अंकल हैं। हालांकि, एसएसबी के जवानों को मेरी हालत पर शक हो गया, उन्होंने मुनव्वर को पकड़ लिया। लड़की ने पुलिस को बयान दिया कि मुनव्वर ने अपहरण से पहले 20 जुलाई को रेप भी किया था। बाबा पर FIR, भाई भी नेपाल भागा मुनव्वर पर आरोप है कि 28 जुलाई को नाबालिग लड़की को नेपाल ले जा रहा था। भारत-नेपाल सीमा पर तैनात एसएसबी के जवानों ने लड़की को रोक लिया और उसके परिवार को बुलाया। जवानों ने मुनव्वर और उसके भाई गब्बर को पकड़ा। चौक थाने में केस दर्ज हुआ। जांच में सामने आया कि गब्बर का इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है। लेकिन, मुनव्वर लड़की को नेपाल पहुंचाना चाहता था। इसलिए मुनव्वर को जेल भेजा गया। गब्बर भी डर की वजह से नेपाल भाग गया। बाबा गंगाराम के आश्रम के अंदर कमरे में रिसेप्शन बना मिला। दीवार पर लगे पोस्टर पर नियम-कायदे और बाबा के यहां नंबर लगाने के लिए मोबाइल नंबर लिखा था। जिस तरह डॉक्टर के यहां रजिस्ट्रेशन और पर्चा बनता है, ठीक उसी तरह से गंगाराम तांत्रिक के यहां भी नंबर लगता है। रजिस्ट्रेशन के लिए 200 रुपए फीस ली जाती है। साइड में लौंग-अगरबत्ती खरीदने का काउंटर बना हुआ था। सबसे पहले हमारी मुलाकात गंगाराम के ड्राइवर साहब सिंह से हुई, जो रिसेप्शन पर बैठा था। साहब सिंह बोला- बाबा फोन पर भी समस्या ठीक कर देते हैं रिपोर्टर: बाबा से मुलाकात कब होगी…क्या कोई फीस भी लगती है? साहब सिंह: बुधवार-शुक्रवार को नंबर लगता है। 200 रुपए देकर रजिस्ट्रेशन कराना होगा। रिपोर्टर: एक तो इनकी नौकरी नहीं लग रही और मुकदमेबाजी बहुत है। साहब सिंह: हां…तो लेकर आइएगा, काम हो जाएगा। रिपोर्टर: कितना पैसा लग जाएगा, 2-4 हजार में काम हो जाएगा? साहब सिंह: हां इतना तो लग ही जाता है… इससे ज्यादा भी लग जाता है। रिपोर्टर: फायदा होता है कि नहीं… कितने लोग आते हैं? साहब सिंह: बहुत दूर-दूर से लोग आते हैं…। यहां से बात कर निकले, तो हमें गांव के ही कुछ लोग मिल गए। उनसे बातचीत के बाद गंगाराम तांत्रिक की पोल खुल गई। ‘जेल जा चुका है, मार खा चुका… अब बाबा बन गया’ रिपोर्टर: इनके झाड़-फूंक से कुछ फायदा होता है? ग्रामीण: कुछ फायदा नहीं होता… सब बकवास है। रिपोर्टर: बाबा शुरू से यहीं रहता रहा है या कहीं से आया है? ग्रामीण: नहीं…गगहा (गोरखपुर का ग्रामीण इलाका) से यहां आकर बसा है। यहां जमीन लेकर आश्रम बनवाया, फिर धंधा शुरू कर दिया। रिपोर्टर: यहां बाबा को आए कितने साल हुए? ग्रामीण: 4-5 साल हुए हैं। पहले दुबियारी गांव में था। वहां रामनाथ प्रधान ने मार-मारकर खदेड़ दिया था। फिर यहां आया और जमीन खरीद कर आश्रम बनवा लिया। कुछ दिन कौड़ीराम में रहा है। रिपोर्टर: ये पहले क्या करता था? ग्रामीण: पहले मछली बेचता था। इस गांव में जबसे आया है, तभी से यह धंधा शुरू किया है। कई बार जेल भी गया है। एक बार देखेंगे, फिर 10 हजार दो… 20 हजार दो…50 हजार दो…. यही धंधा है। रिपोर्टर: आप लोग नहीं जाते हो क्या? ग्रामीण: नहीं…हम लोग उसे कुछ नहीं समझते। उसने खुद से चौराहे तक गंगाराम बाबा तांत्रिक लिखवा दिया है। वही देखकर लोग चले आते हैं। रिपोर्टर: इनसे किसी को कुछ फायदा हुआ है या नहीं? ग्रामीण: ये कोई नहीं जानता। पैसा लेकर कई लोगों को बर्बाद कर चुका है। लाख…डेढ़ लाख ले लेता है। बहुत से लोग गाली भी देते हैं। महिला से बाबा बोला- मैंने बहुत लोगों का बच्चा पैदा करवाया शादीशुदा पीड़िता गंगाराम के आश्रम में गई थी। उसको बच्चा नहीं हो रहा था। बाबा को समस्या बताकर पूजा-पाठ कराने के लिए कहा। बाबा ने कहा- मैंने बहुत से लोगों का बच्चा पैदा करवाया है। तंत्र-मंत्र अगर काम नहीं आया, तो किसी और तरीके से बच्चा पैदा करवा दूंगा। आरोप है कि इसके बाद बाबा गंगाराम पीड़िता को बार-बार कॉल करने लगा। लेकिन, महिला बाबा के झांसे में नहीं आई और इलाज से मना किया। इस पर बाबा ने फोन पर धमकाया। सितंबर, 2022 को बाबा गंगाराम के खिलाफ FIR दर्ज की गई। महाराजगंज मुख्यालय से करीब 10 किमी दूर बल्लो खास गांव है। यहां बाबा विजय मिश्रा ने अपना आश्रम बनवाया। नाम है सिद्धपीठ बल्लोधाम। बाबा से मिलने के लिए 100 रुपए का रजिस्ट्रेशन कराना होता है। फिर 3 से 4 घंटे बाद नंबर आता है। बाबा तंत्र-मंत्र से लोगों की समस्या दूर करने का दावा करता है। बीमारी भगाने के लिए अपने ब्रांड की हर्बल दवा भी देता है। सोमवार और शुक्रवार को यहां ज्यादा भीड़ होती है। सच्चाई बाहर लाने के लिए हमने हिडन कैमरे का इस्तेमाल किया। फिर ग्रामीणों ने चौंकाने वाले राज खोले… ‘बाबा के यहां एक लड़की रहती थी, खेत में पेड़ पर लटकी मिली थी’ रिपोर्टर: तुम लोगों को बाबा पर भरोसा है या नहीं? ग्रामीण 1: हम लोगों को भरोसा नहीं है… तुम चाहो तो जाकर देख लो। रिपोर्टर: गांववालों को नहीं फंसा पाया है क्या अभी तक…? ग्रामीण 1: हम लोग सब कुछ जानते हैं, तो क्यों फंसेंगे? दूर-दूर से आदमी आते हैं। वो क्या करते हैं, क्या नहीं करते, हम नहीं जानते। रिपोर्टर: पैसा भी खर्च हो जाए, फायदा भी न हो तो क्यों जाएं? ग्रामीण 2: ये बात सही है। जैसे ही अंदर जाओगे, 100 रुपए की पर्ची कटवानी पड़ेगी। रोज आओगे, तो रोज देना पड़ेगा। रिपोर्टर: बाबा के पास कोई सिद्धि भी है कि बस ऐसे ही सब चल रहा है? ग्रामीण 2: अब ये सब हम लोगों से मत पूछिए। रिपोर्टर: ये बाबा पहले क्या करता था? ग्रामीण: पहले तो नेतागिरी करता था। फिर सोखाई (भूत प्रेत झाड़ना) करने लगा। गांव में सबसे बोला कि हम 11 फीट का शिवलिंग बनवाएंगे। इसका वीडियो इंटरनेट पर डाल दिया। फिर चंदे के लिए गांव-गांव घूमने लगा। इससे दूर-दूर के लोग उसे जानने लगे। रिपोर्टर: आश्रम में कभी कुछ ऐसा हुआ, जो नहीं होना चाहिए था? ग्रामीण: कुछ साल पहले की बात है, एक बच्ची थी। उसी के यहां रहती थी। घर से कुछ दूर गले में फंदा लगाकर टंगी मिली थी। खूब बवाल हुआ। फिर पैसा-वैसा देकर मामला शांत हो गया। 3 साल हो गए, बाबा गांववालों से ही नहीं मिला। वह अपने घर के अंदर ही रहता है। रिपोर्टर: ये झाड़-फूंक कैसे करता है? ग्रामीण: अगर आप वहां जाओगे तो वह कहेगा कि लौंग, कपूर और अगरबत्ती ले आओ। 3-4 हजार रुपए पूजा कराने का ले लेगा। देवी को पानी छिड़ककर पूजा खत्म कर देगा। पेड़ पर लटकी मिली थी लड़की विजय के आश्रम में एक लड़की रहती थी। उसकी लाश 19 जून, 2024 को पेड़ से लटकी मिली थी। आरोप लगे कि विजय ने लड़की के साथ रेप किया, उसकी हत्या कर दी गई है। पुलिस जांच में सामने आया कि लड़की की हत्या नहीं हुई है, बल्कि वह खुद फंदे से लटकी थी। अब हम चौरी चौरा में चौथे बाबा शिवा विश्वकर्मा के गांव में पहुंचे… शिवा विश्वकर्मा पहले लोहार का काम करता था। गांव के खेत में कामाख्या देवी मंदिर बना लिया है। अब मां दुर्गा और काली की पूजा के बहाने तंत्र-मंत्र करता है। जब हम मौके पर पहुंचे तो शिवा विश्वकर्मा नहीं मिला। मंदिर के गेट पर ताला लगा था। वहीं हमें कुछ ग्रामीण मिले, जिनसे हमारी बातचीत हुई। ‘पहले साइकिल बनाता था, अब बाबा बन गया’ रिपोर्टर: फायदा वगैरह होता है या नहीं ? ग्रामीण: किसी को फायदा होता है, किसी को नहीं होता। रिपोर्टर: आप तो गांव के हैं, पता ही होगा? ग्रामीण: गांव के लोग नहीं दिखाते। सब जानते हैं कि ये बेकार आदमी है। रिपोर्टर: कब से कर रहा है? ग्रामीण: 2-3 साल से ज्यादा हो गए। रिपोर्टर: पहले क्या करता था? ग्रामीण: पहले साइकिल बनाता था। फिर धीरे-धीरे इस लाइन में घुस गया। रिपोर्टर: हमको कोई बताया कि बहुत बड़ा बाबा है। जाओ… 100% काम हो जाएगा। ग्रामीण: बाबू… 100% गारंटी तो भगवान ही ले सकते हैं। डॉक्टर नहीं लेते तो ये इनका क्या ठिकाना है। रिपोर्टर: कोई कह रहा था कि फ्रॉड है, मत जाइए? ग्रामीण: ये बाबा वगैरह तो सबसे ज्यादा फ्रॉड करते हैं। रिपोर्टर: पैसे खर्च होने के बाद फायदा होगा कि नहीं? ग्रामीण: पहले आप दिखाइए। पैसा मत दीजिएगा। 300 रुपए फीस लेता है। भीड़ बहुत होती है। दूर-दूर के आदमी आते हैं। रिपोर्टर: क्या नेता वगैरह भी यहां आते हैं? ग्रामीण: नेता नहीं आते, लेकिन ये उनसे मिलता रहता है। रिपोर्टर: क्या बाबा राजनीति भी करता है? ग्रामीण: अब जिसके पास पैसा है, वह राजनीति तो करेगा ही। किसानी या मजदूरी थोड़ी न करेगा। रिपोर्टर: किसी पार्टी से जुड़ा है क्या? ग्रामीण: चेयरमैन सनी जायसवाल से जुड़ा है। उन्हीं के साथ घूमता रहता है। महीने की कमाई 10-11 लाख रुपए ————————– यह खबर भी पढ़ें – यूपी में जंगल और खेतों में बना डाले डिग्री कॉलेज, पहुंचने का रास्ता तक नहीं, केवल एग्जाम देने आते बच्चे यूपी में कई प्राइवेट डिग्री कॉलेज जंगल और सुनसान इलाकों में खोल दिए गए हैं। कुछ कॉलेजों तक तो जाने का रास्ता भी नहीं है। यह इसलिए किया, ताकि यहां अफसर जांच-पड़ताल के लिए पहुंच ही न सकें। दैनिक भास्कर ने इन्वेस्टिगेशन किया कि आखिर ये कॉलेज यहां खुल कैसे गए? इनके हालात क्या हैं? कैसे दो से तीन गुना फीस लेकर ये छात्रों को पास कराने की गारंटी दे रहे हैं। पढ़िए रिपोर्ट…