करीब एक हफ्ते तक सपा और कांग्रेस नेताओं में गठबंधन को लेकर तीखी बयानबाजी होती रही। कयास लगाए जाने लगे कि गठबंधन टूटने वाला है। फिर रविवार (27 सितंबर) को सपा प्रमुख अखिलेश यादव का बयान आया। बोले- हम ऊपर-ऊपर से लड़ रहे हैं, अंदर से एक हैं। ये हमारी रणनीति का हिस्सा है। अब सवाल उठ रहे हैं कि जब गठबंधन तय है, तो इस बयानबाजी से क्या हासिल होगा? सीटों की बात फाइनल क्यों नहीं हो पा रही? आखिर अखिलेश क्या छुपा रहे? पढ़िए यूपी एक्सप्लेनर में… सवाल-1: सपा-कांग्रेस में सब कुछ ठीक नहीं होने की बात क्यों कही जा रही? जवाबः इस तरह की बातें जुलाई से कही जा रही हैं। तब भी सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के बयान से विवाद शुरू हुआ था। हालिया सरगर्मी की वजह भी उनके बयान ही है। 21 सितंबर को उन्होंने कहा था-अखिलेशजी कितने एक्टिव हैं, उसके कोई मायने नहीं हैं। अगर गठबंधन करना है तो करें, वरना हम अपनी तैयारी में जा रहे हैं। कांग्रेस के बिना पूरे देश में कहीं माहौल नहीं है, तो कांग्रेस के बिना चलने की भी न सोचें। सवाल-2: बयानबाजी स्ट्रैटजी है, तो इससे क्या हासिल होगा? जवाब: बयानबाजी सपा-कांग्रेस की साझा स्ट्रैटजी नहीं है, बल्कि कांग्रेस की प्रेशर पॉलिटिक्स का हिस्सा है। हालांकि, अखिलेश इसे साझा स्ट्रैटजी का नाम देकर ‘गठबंधन में सब ठीक है’ का संदेश देना चाहते हैं। सवाल-3: सपा-कांग्रेस में सीट बंटवारे पर बात क्यों नहीं बन पा रही? जवाब: सीट बंटवारे पर 20 जुलाई को अखिलेश यादव और राहुल गांधी की बंद कमरे में मुलाकात हुई थी। इस दौरान प्रियंका गांधी भी मौजूद थीं। सूत्रों के मुताबिक, तब अखिलेश ने राहुल से कहा था कि आप यूपी में जो सीटें चाहते हैं, वहां अपने उम्मीदवार का नाम भी बताना होगा; क्योंकि ये चुनाव हर हाल में जीतना है। सवाल-4: ‘हमारे बीच सब ठीक है’ कहकर अखिलेश क्या छुपाने की कोशिश कर रहे? जवाब: वरिष्ठ पत्रकार और राजनीति विश्लेषक हर्षवर्धन त्रिपाठी के मुताबिक, अखिलेश ऐसा कहकर कुछ छुपाने की नहीं, गठबंधन टूटने पर खुद को हर तरह की तोहमत से बचाने की कोशिश कर रहे हैं। दरअसल, यह बात साफ है कि अखिलेश और राहुल, गठबंधन के पक्ष में हैं। कम से कम अखिलेश यादव को देखकर तो ऐसा ही लगता है। सवाल-5: अगर सपा-कांग्रेस गठबंधन टूटा, तो क्या असर होगा? जवाब: इससे दोनों ही पार्टियों को नुकसान होगा। हालांकि, सपा के मुकाबले कांग्रेस को ज्यादा परेशानी होगी। जबकि भाजपा को इसका सीधा फायदा होगा। इसे 3 पॉइंट में समझ सकते हैं… (A) कांग्रेस के सामने अस्तित्व का संकट होगा (B) सपा का मुस्लिम वोट बिखर जाएगा (C) भाजपा के खिलाफ एंटी-इंकंबेंसी कम होगी ——————————- ये एक्सप्लेनर भी पढ़ें… अखिलेश के लिए अचानक अहम क्यों बना लोहिया ट्रस्ट, चुनाव से पहले कमान अपने हाथ में ली पिछले दिनों अखिलेश यादव ‘लोहिया ट्रस्ट’ के अध्यक्ष चुने गए। पार्टी मुख्यालय से लेकर जिला ऑफिस और कई अन्य संपत्तियों का मालिकाना हक ट्रस्ट के पास है। समाजवादी पार्टी के गठन में भी इसकी अहम भूमिका थी। 2016-17 की अदावत में तब के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल ‘टीम अखिलेश’ को बाहर का रास्ता दिखा रहे थे। इसके जवाब में अखिलेश ने ‘जनेश्वर मिश्र ट्रस्ट’ बना लिया। मुलायम अपनी आखिरी सांस तक इसके अध्यक्ष रहे। निधन के बाद शिवपाल मुखिया बने। अब अखिलेश को इसकी कमान सौंपने के पीछे क्या संदेश है? पढ़िए यूपी एक्सप्लेनर में…