‘मैं सीता नहीं हूं, जो अग्नि परीक्षा दूं। महाकुंभ 2025 से शुरू हुई कहानी अब खत्म हो रही है। विरोध, चरित्र हनन और मानसिक दबाव का सामना करना पड़ा। इसलिए अब धर्म की राह छोड़कर पुराने प्रोफेशन की तरफ लौट रही हूं।’ सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हर्षा रिछारिया ने 12 जनवरी, 2026 को ये बातें एक वीडियो में कही थीं। इस बयान के सिर्फ 3 महीने बाद 19 अप्रैल, 2026 को उन्होंने उज्जैन में संन्यास ले लिया। खुद का पिंडदान और श्राद्ध किया। इसके बाद उन्हें नया नाम मिला- साध्वी हर्षानंद गिरि। दैनिक भास्कर ने हर्षा से बात की। संन्यास लेने का कारण पूछा। उनके पुराने बयानों के पीछे की वजह समझी। आगे का प्लान जाना। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… हर्षा बोलीं- संन्यास लेने के लिए अंदर से आवाज आई
हर्षा उज्जैन में थीं। हमने मोबाइल पर उनसे बात की। पहला सवाल पूछा कि संन्यास के पीछे वजह क्या रही? हर्षा कहती हैं- मैं महाकुंभ में पहली बार साध्वी की तरह पहुंची थी। जो कुछ वहां महसूस किया, उससे ख्याल आया कि अब संन्यास लिया जा सकता है। उसी वक्त से मेरा मन भटक रहा था। महाकुंभ के बाद मैं धर्म से जुड़ गई। सनातन की हर चीज को ठीक से समझा। दिसंबर, 2025 में मन पक्का हो गया कि अब संन्यास ले लेना चाहिए। मैंने अंदर की आवाज सुनी और अब संन्यास ले लिया। इसके लिए किसी गुरु ने प्रेरित नहीं किया। संन्यास की बात सुनकर मां की कंडीशन बिगड़ी
हमने पूछा- संन्यास की बात सुनकर आपके पेरेंट्स ने क्या कहा? वो कहती हैं- वो लोग तो हैरान रह गए। हों भी क्यों न… हर परिवार को अजीब लगेगा, अगर उनकी बेटी संन्यास लेने की बात कहे। वो राजी नहीं हुए। मेरी मां लगातार रो रही थीं। उनकी कंडीशन ज्यादा खराब हो गई थी। लेकिन, धीरे-धीरे उन्हें समझ आया कि मैं कुछ गलत करने नहीं जा रही हूं। अब मां मेरे साथ नहीं हैं, न मैं उनके साथ हूं। अब मुझे नहीं पता कि वे किस कंडीशन में हैं। शायद उन्होंने समझ लिया होगा कि आखिर में संन्यास ही सत्य है। हर्षा बोलीं- सोशल मीडिया पर कुछ गलत नहीं सिखा रही
हमने पूछा- संन्यास के बावजूद क्या सोशल मीडिया पर आध्यात्मिक संदेश देंगी? वे कहती हैं- मुझे एक बात बताइए, क्या मैं सोशल मीडिया पर कुछ गलत सिखा रही हूं…नहीं न। आज की डेट में बड़े-बड़े नेता, धर्मगुरु सोशल मीडिया पर एक्टिव हैं। उनकी बातें लाखों लोग सुनते और देखते हैं। मुझे नहीं लगता कि इससे दूरी बनाने की जरूरत है। इसके जरिए हम अपनी बात दूर तक पहुंचा पाते हैं। मेरी परेशानी की वजह कोई और नहीं, संत थे…
हमने पूछा- आपने ऐसा क्यों कहा कि धर्म की राह पर सिर्फ चरित्र हनन मिला? कुछ सोचते हुए हर्षा कहती हैं- मैं महाकुंभ से पहले कभी सनातन धर्म के इतना करीब नहीं आई थी। जब आई तो कई साधु-संतों ने मेरा विरोध शुरू कर दिया। कहने लगे कि एक नाचने-गाने वाली को संन्यासी बना दिया, जबकि मैं कहां जाकर नाच-गा रही थी। मैं तो एंकरिंग करती थी। उसी काम से मेरी पहचान बनी थी। मैंने कभी कोई गलत काम नहीं किया। इसके बावजूद मेरा विरोध किया गया। एक वक्त तो ऐसा आया कि मैं बहुत परेशान हो गई। मेरी परेशानी की वजह कोई और नहीं, बल्कि संत ही थे। उस वक्त मेरे दिमाग में आया कि जब कोई मुस्लिम व्यक्ति हिंदू धर्म अपनाता है, तब लोग कितना स्वागत करते हैं। लेकिन, जब हिंदू धर्म की बेटी आई तो धार्मिक गुरु तक विरोध करने लगे। यह सब देखकर मन विचलित हुआ था। लड़कियों के लिए धर्म की राह आसान नहीं
क्या लगता है कि लड़कियों के लिए धर्म का रास्ता कठिन है? हर्षा कहती हैं- महिलाएं भावुक होती हैं। लोग इसका फायदा उठाते हैं। इसीलिए महिलाओं के लिए धर्म का रास्ता थोड़ा मुश्किल है। जब महिला गलत नहीं होती, तो वह जल्दी टूट जाती है। वह सोचने लगती है कि मैंने ऐसा क्या पाप कर दिया, जो टारगेट किया जा रहा। महिला को तोड़ने के लिए लोग चरित्र हनन शुरू कर देते हैं। क्योंकि, उन्हें पता है कि लड़की कितनी भी मजबूत हो, बात चरित्र पर आएगी तो टूट ही जाएगी। कुछ संतों ने मेरे चरित्र पर भी उंगली उठाई। बहुत सारी बातें कहीं, लेकिन मैं मजबूती से खड़ी रही। वे जो बोल रहे थे, वो उनकी मानसिकता है। मैं जो कर रही हूं, वो मेरा फैसला है। ब्राइडल लुक की तस्वीरों पर बोलीं- अब सब पीछे छूटा
हमने पूछा- आपने 4 दिन पहले वेस्टर्न कपड़ों में अपनी तस्वीरें शेयर की थीं। क्या वो आखिरी बार याद रखने के लिए था? वे कहती हैं- मेरे ऊपर बहुत प्रेशर था। मैं आगे क्या करने वाली हूं, ये किसी को बताना नहीं चाहती थी। इसी वजह से 4 दिन पहले मैंने ब्राइडल लुक के वीडियो-फोटो डालकर लोगों को भ्रमित किया। वो तस्वीरें पुरानी थीं। बस उस दिन पोस्ट की थीं। अब मैंने संन्यास ले लिया है। सब पीछे छूट चुका है। देश-समाज के लिए काम करूंगी
आपका आगे क्या प्लान है? हर्षा कहती हैं- अब मैं क्या ही बताऊं। बस इतना कहूंगी कि अब मैं खुलकर समाज के लिए, युवा पीढ़ी के लिए और देश के लिए काम करूंगी। ये कोई गलत काम तो नहीं है। अब सही से भी किसी को दिक्कत होगी तो मैं कुछ नहीं कर सकती। ———————— ये खबर भी पढ़ें… एल्युमिनियम के बर्तन में खाना पकाना कितना खतरनाक, एम्स के डॉक्टर बोले- किडनी, लिवर पर असर फतेहपुर जिले में चाय की एक दुकान पर 16 अप्रैल को फूड डिपार्टमेंट ने छापेमारी की। अधिकारियों ने एल्युमिनियम के बर्तन में चाय बनाने पर आपत्ति जताई। यहीं से सवाल उठे कि क्या वाकई एल्युमिनियम के बर्तन में खाना पकाने से सेहत को नुकसान होता है? पूरी खबर पढ़ें…
हर्षा उज्जैन में थीं। हमने मोबाइल पर उनसे बात की। पहला सवाल पूछा कि संन्यास के पीछे वजह क्या रही? हर्षा कहती हैं- मैं महाकुंभ में पहली बार साध्वी की तरह पहुंची थी। जो कुछ वहां महसूस किया, उससे ख्याल आया कि अब संन्यास लिया जा सकता है। उसी वक्त से मेरा मन भटक रहा था। महाकुंभ के बाद मैं धर्म से जुड़ गई। सनातन की हर चीज को ठीक से समझा। दिसंबर, 2025 में मन पक्का हो गया कि अब संन्यास ले लेना चाहिए। मैंने अंदर की आवाज सुनी और अब संन्यास ले लिया। इसके लिए किसी गुरु ने प्रेरित नहीं किया। संन्यास की बात सुनकर मां की कंडीशन बिगड़ी
हमने पूछा- संन्यास की बात सुनकर आपके पेरेंट्स ने क्या कहा? वो कहती हैं- वो लोग तो हैरान रह गए। हों भी क्यों न… हर परिवार को अजीब लगेगा, अगर उनकी बेटी संन्यास लेने की बात कहे। वो राजी नहीं हुए। मेरी मां लगातार रो रही थीं। उनकी कंडीशन ज्यादा खराब हो गई थी। लेकिन, धीरे-धीरे उन्हें समझ आया कि मैं कुछ गलत करने नहीं जा रही हूं। अब मां मेरे साथ नहीं हैं, न मैं उनके साथ हूं। अब मुझे नहीं पता कि वे किस कंडीशन में हैं। शायद उन्होंने समझ लिया होगा कि आखिर में संन्यास ही सत्य है। हर्षा बोलीं- सोशल मीडिया पर कुछ गलत नहीं सिखा रही
हमने पूछा- संन्यास के बावजूद क्या सोशल मीडिया पर आध्यात्मिक संदेश देंगी? वे कहती हैं- मुझे एक बात बताइए, क्या मैं सोशल मीडिया पर कुछ गलत सिखा रही हूं…नहीं न। आज की डेट में बड़े-बड़े नेता, धर्मगुरु सोशल मीडिया पर एक्टिव हैं। उनकी बातें लाखों लोग सुनते और देखते हैं। मुझे नहीं लगता कि इससे दूरी बनाने की जरूरत है। इसके जरिए हम अपनी बात दूर तक पहुंचा पाते हैं। मेरी परेशानी की वजह कोई और नहीं, संत थे…
हमने पूछा- आपने ऐसा क्यों कहा कि धर्म की राह पर सिर्फ चरित्र हनन मिला? कुछ सोचते हुए हर्षा कहती हैं- मैं महाकुंभ से पहले कभी सनातन धर्म के इतना करीब नहीं आई थी। जब आई तो कई साधु-संतों ने मेरा विरोध शुरू कर दिया। कहने लगे कि एक नाचने-गाने वाली को संन्यासी बना दिया, जबकि मैं कहां जाकर नाच-गा रही थी। मैं तो एंकरिंग करती थी। उसी काम से मेरी पहचान बनी थी। मैंने कभी कोई गलत काम नहीं किया। इसके बावजूद मेरा विरोध किया गया। एक वक्त तो ऐसा आया कि मैं बहुत परेशान हो गई। मेरी परेशानी की वजह कोई और नहीं, बल्कि संत ही थे। उस वक्त मेरे दिमाग में आया कि जब कोई मुस्लिम व्यक्ति हिंदू धर्म अपनाता है, तब लोग कितना स्वागत करते हैं। लेकिन, जब हिंदू धर्म की बेटी आई तो धार्मिक गुरु तक विरोध करने लगे। यह सब देखकर मन विचलित हुआ था। लड़कियों के लिए धर्म की राह आसान नहीं
क्या लगता है कि लड़कियों के लिए धर्म का रास्ता कठिन है? हर्षा कहती हैं- महिलाएं भावुक होती हैं। लोग इसका फायदा उठाते हैं। इसीलिए महिलाओं के लिए धर्म का रास्ता थोड़ा मुश्किल है। जब महिला गलत नहीं होती, तो वह जल्दी टूट जाती है। वह सोचने लगती है कि मैंने ऐसा क्या पाप कर दिया, जो टारगेट किया जा रहा। महिला को तोड़ने के लिए लोग चरित्र हनन शुरू कर देते हैं। क्योंकि, उन्हें पता है कि लड़की कितनी भी मजबूत हो, बात चरित्र पर आएगी तो टूट ही जाएगी। कुछ संतों ने मेरे चरित्र पर भी उंगली उठाई। बहुत सारी बातें कहीं, लेकिन मैं मजबूती से खड़ी रही। वे जो बोल रहे थे, वो उनकी मानसिकता है। मैं जो कर रही हूं, वो मेरा फैसला है। ब्राइडल लुक की तस्वीरों पर बोलीं- अब सब पीछे छूटा
हमने पूछा- आपने 4 दिन पहले वेस्टर्न कपड़ों में अपनी तस्वीरें शेयर की थीं। क्या वो आखिरी बार याद रखने के लिए था? वे कहती हैं- मेरे ऊपर बहुत प्रेशर था। मैं आगे क्या करने वाली हूं, ये किसी को बताना नहीं चाहती थी। इसी वजह से 4 दिन पहले मैंने ब्राइडल लुक के वीडियो-फोटो डालकर लोगों को भ्रमित किया। वो तस्वीरें पुरानी थीं। बस उस दिन पोस्ट की थीं। अब मैंने संन्यास ले लिया है। सब पीछे छूट चुका है। देश-समाज के लिए काम करूंगी
आपका आगे क्या प्लान है? हर्षा कहती हैं- अब मैं क्या ही बताऊं। बस इतना कहूंगी कि अब मैं खुलकर समाज के लिए, युवा पीढ़ी के लिए और देश के लिए काम करूंगी। ये कोई गलत काम तो नहीं है। अब सही से भी किसी को दिक्कत होगी तो मैं कुछ नहीं कर सकती। ———————— ये खबर भी पढ़ें… एल्युमिनियम के बर्तन में खाना पकाना कितना खतरनाक, एम्स के डॉक्टर बोले- किडनी, लिवर पर असर फतेहपुर जिले में चाय की एक दुकान पर 16 अप्रैल को फूड डिपार्टमेंट ने छापेमारी की। अधिकारियों ने एल्युमिनियम के बर्तन में चाय बनाने पर आपत्ति जताई। यहीं से सवाल उठे कि क्या वाकई एल्युमिनियम के बर्तन में खाना पकाने से सेहत को नुकसान होता है? पूरी खबर पढ़ें…