लखनऊ में महात्मा गांधी की प्रेरणा से 1921 में स्थापित ऐतिहासिक ‘चुटकी भण्डार गर्ल्स इंटर कॉलेज’ का अस्तित्व खत्म हो गया है। यहां पढ़ने वाले बच्चे और पढ़ाने शिक्षक व कर्मचारी दूसरे स्कूल में समायोजित कर दिये गए हैं। हाईकोर्ट के आदेश स्कूल का नया भवन बनवाने के लिये प्रबंधक पवन वर्मा ने निजी आर्किटेक्ट की मदद से चार करोड़ का स्टीमेंट बनवाया है। डीआईओएस को स्टीमेंट भेजकर सरकार से बजट की मांग करेंगे। सरकारी मदद न मिलने पर जर्जर हुआ स्कूल शिक्षकों का कहना है कि जिस एतिहासिक स्कूल ने दशकों तक बेटियों का भविष्य संवारा है। आज उसे सरकारी उपेक्षा के कारण इस कदर जर्जर होने दिया गया कि हाईकोर्ट को दखल देना पड़ा। मई में हाईकोर्ट के आदेश पर शिक्षा विभाग ने जर्जर हो चुकी इमारत को सील कर दिया। स्कूल की करीब 100 छात्राओं और 24 शिक्षकों व कर्मचारियों को दूसरे स्कूलों समायोजन कर दिया गया है, लेकिन के नए भवन बनाने पर अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है। स्कूल बचाने के लिये आया शिक्षक संगठन उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ एकजुट के प्रदेश अध्यक्ष सोहन लाल वर्मा का कहना है कि शहर में संचालित 70 वर्ष से अधिक पुराने अशासकीय सहायता प्राप्त करीब 40 स्कूल खस्ताहाल हैं। यदि एक-एक कर ऐसे स्कूल बंद हो गए तो गरीब बच्चे कहां पढ़ेंगे। उन्होंने मांग कि है कि सरकार इस स्कूल के नए भवन के निर्माण के लिये अलंकार योजना से बजट जारी करे। इसके अलावा जर्जर भवन का ध्वस्तीकरण कर मलबे की बिक्री से जुटायी राशि के अलावा संगठन लखनऊ सभी 58 अशासकीय सहायता प्राप्त स्कूलों के शिक्षकों से सहयोग राशि जुटाकर स्कूल के निर्माण में सहयोग देगा।