दुनिया की सबसे खूबसूरत इमारतों में से एक है ताजमहल। सफेद संगमरमर से बनी प्रेम की निशानी। जिसे देखने हर साल लाखों पर्यटक पूरी दुनिया से आते हैं। लेकिन यही इमारत ताजमहल के आस-पास बसे 5 गांवों के लोगों के लिए अभिशाप बन गई है। सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश से इन गांवों में रहने वाले उस दिन को कोसते हैं, जब इनके पूर्वज इन गांवों में आकर बसे थे। आखिर क्या है सुप्रीम कोर्ट का आदेश? क्या है इन गावों की दिक्कतें? क्यों कोसते हैं इन गांवों के लोग ताजमहल को? दैनिक भास्कर के साथ पढ़िए पूरी रिपोर्ट – ताजमहल आसपास बसे 5 गांवों के लिए है अभिशाप
ताजमहल के पास पांच गांव बसे हैं, जिनके नाम हैं गढ़ी बंगस, नगला पैमा, नगला तल्फी, करबना और धांधुपुरा। इन पांच गांवों की आबादी मिलाकर लगभग 20 हजार है। ताजमहल से ये गांव तीन से पांच किलोमीटर दूर हैं। इन गांवों का एक रास्ता ताज के पूर्वी गेट के सामने से होकर गुजरता है। दूसरा रास्ता 10 किलोमीटर दूर शिल्पग्राम के पास खुलता है। दशहरा घाट एंट्री प्वाइंट पर हर समय पुलिस और सीआईएसएफ का पहरा रहता है। पूर्वी गेट से गांवों तक जाने वाले लोगों को सिर्फ टू व्हीलर पर जाने की अनुमति है। हर टू व्हीलर पर आधार कार्ड की कॉपी लगी होती है। अगर गांव के पते का आधार कार्ड नहीं है। तो,12 किलोमीटर घूमकर घर जाना पड़ेगा। इसी तरह कार चालकों को भी पूरा घूम कर आना पड़ता है। सालों से नहीं बनी है सड़क
गांवों में अब तक पाइप लाइन नहीं डल पाई है। लोग सबमर्सिबल लगवाते हैं। सड़कें पिछले 10-15 सालों से नहीं बनी हैं। सड़कों पर गड्ढे बहुत ज्यादा है। बरसात में जलभराव की स्थिति बनी रहती है। गांवों का विकास भी नहीं हो पा रहा है।
जितेंद्र यादव बहुत गुस्से में थे। बोले- कैसे होगा विकास? आज तक सांसद यहां नहीं आए हैं। उन्हें पता ही नहीं है इन गांवों के लोगों को क्या समस्याएं हैं। सिर्फ वोट मांगना कुछ नहीं होता है। जितेंद्र ने कहा कि सड़कें नहीं हैं, सफाई नहीं होती। पार्षद कभी-कभी आता है। उसकी तो किसी विभाग में सुनवाई नहीं होती। रास्ते में ही हो जाती है डिलीवरी
मोतिया देवी ने बताया कि कई बार डिलीवरी गांव के रास्ते में ही हो गई हैं क्योंकि पूर्वी गेट से निकलने नहीं देते हैं। लंबा घूम तक जाना पड़ता है, जिससे बहुत परेशानी आती है। यहां तक कि अगर बच्चा रास्ते में हो जाए तो उसे भी अस्पताल ले जाने के लिए बहुत मुश्किल होती है। बीमारी या डिलीवरी के दौरान एम्बुलेंस तक नहीं आ पाती हैं। वीआईपी मूवमेंट में रोक दिया जाता है रास्ता
देवेश कुमार ने बताया कि हमारे लिए ताजमहल अभिशाप है। आए दिन वीआईपी आते हैं, रास्ते बंद हो जाते हैं। हमें जाने नहीं दिया जाता। क्लासेज छूट जाती हैं। पढ़ाई में पीछे रह जाते हैं। स्कूल तक जाने के लिए बच्चों को परेशानी होती है। बच्चे या तो पैदल जाते हैं या पिता छोड़ने जाते हैं क्योंकि स्कूल वैन नहीं आ सकती हैं। पुलिस निकलने नहीं देती
सोनू ने बताया कि पुलिस और सीआईएसएफ निकलने ही नहीं देती है। चाहे कितनी ही मुश्किल या परेशानी क्यों न हो। मदन सिंह ने बताया कि समस्या बहुत हैं। शहर तक जाने के लिए रास्ता ही नहीं है। लंबे रास्ते पर जाने में दिक्कत होती है। शादी के लिए बारात आती है तो बारात पर पत्थर फेंकते हैं। लड़कियों और महिलाओं के साथ छेड़छाड़ होती है। नहीं हो पा रही शादियां
अर्जुन सिंह ने बताया कि कई युवक शादी की उम्र होने पर भी कुंवारे बैठे हैं। गांव में बारात लेकर आना आसान नहीं है। इस वजह से लोग इन गांवों में रिश्ता जोड़ना पसंद नहीं करते। गांव का नाम सुनकर शादी से इनकार कर देते हैं। 40-45 साल की उम्र तक कुंवारे रहते हैं। लड़कियों की शादी में भी दिक्कत आती है। रवि ने बताया कि लोग गांव छोड़कर दूसरी जगहों पर जाकर बस रहे हैं। यह है सुप्रीम कोर्ट का आदेश
ताजमहल के 500 मीटर के दायरे में बिना अनुमति के वाहन नहीं ले जा सकते हैं। हर बार गांव वालों की तलाशी होती है। ताज की तरफ से चार पहिया वाहन ले जाने की अनुमति नहीं है। इन दिक्कतों की वजह से गांव के लोग कार नहीं खरीदते हैं। इन गावों में एक भी कार नहीं है। नहीं पहुंच पाई फायर ब्रिगेड
दुष्यंत निषाद ने बताया कि कुछ महीने पहले गांव में एक घर में आग लग गई। लेकिन फायर ब्रिगेड की गाड़ी को 10-12 किलोमीटर घूम कर आना पड़ा, जिससे आग पूरे घर में फैल गई। इसमें दो लोगों की मौत भी हो गई थी।
ताजमहल के पास पांच गांव बसे हैं, जिनके नाम हैं गढ़ी बंगस, नगला पैमा, नगला तल्फी, करबना और धांधुपुरा। इन पांच गांवों की आबादी मिलाकर लगभग 20 हजार है। ताजमहल से ये गांव तीन से पांच किलोमीटर दूर हैं। इन गांवों का एक रास्ता ताज के पूर्वी गेट के सामने से होकर गुजरता है। दूसरा रास्ता 10 किलोमीटर दूर शिल्पग्राम के पास खुलता है। दशहरा घाट एंट्री प्वाइंट पर हर समय पुलिस और सीआईएसएफ का पहरा रहता है। पूर्वी गेट से गांवों तक जाने वाले लोगों को सिर्फ टू व्हीलर पर जाने की अनुमति है। हर टू व्हीलर पर आधार कार्ड की कॉपी लगी होती है। अगर गांव के पते का आधार कार्ड नहीं है। तो,12 किलोमीटर घूमकर घर जाना पड़ेगा। इसी तरह कार चालकों को भी पूरा घूम कर आना पड़ता है। सालों से नहीं बनी है सड़क
गांवों में अब तक पाइप लाइन नहीं डल पाई है। लोग सबमर्सिबल लगवाते हैं। सड़कें पिछले 10-15 सालों से नहीं बनी हैं। सड़कों पर गड्ढे बहुत ज्यादा है। बरसात में जलभराव की स्थिति बनी रहती है। गांवों का विकास भी नहीं हो पा रहा है।
जितेंद्र यादव बहुत गुस्से में थे। बोले- कैसे होगा विकास? आज तक सांसद यहां नहीं आए हैं। उन्हें पता ही नहीं है इन गांवों के लोगों को क्या समस्याएं हैं। सिर्फ वोट मांगना कुछ नहीं होता है। जितेंद्र ने कहा कि सड़कें नहीं हैं, सफाई नहीं होती। पार्षद कभी-कभी आता है। उसकी तो किसी विभाग में सुनवाई नहीं होती। रास्ते में ही हो जाती है डिलीवरी
मोतिया देवी ने बताया कि कई बार डिलीवरी गांव के रास्ते में ही हो गई हैं क्योंकि पूर्वी गेट से निकलने नहीं देते हैं। लंबा घूम तक जाना पड़ता है, जिससे बहुत परेशानी आती है। यहां तक कि अगर बच्चा रास्ते में हो जाए तो उसे भी अस्पताल ले जाने के लिए बहुत मुश्किल होती है। बीमारी या डिलीवरी के दौरान एम्बुलेंस तक नहीं आ पाती हैं। वीआईपी मूवमेंट में रोक दिया जाता है रास्ता
देवेश कुमार ने बताया कि हमारे लिए ताजमहल अभिशाप है। आए दिन वीआईपी आते हैं, रास्ते बंद हो जाते हैं। हमें जाने नहीं दिया जाता। क्लासेज छूट जाती हैं। पढ़ाई में पीछे रह जाते हैं। स्कूल तक जाने के लिए बच्चों को परेशानी होती है। बच्चे या तो पैदल जाते हैं या पिता छोड़ने जाते हैं क्योंकि स्कूल वैन नहीं आ सकती हैं। पुलिस निकलने नहीं देती
सोनू ने बताया कि पुलिस और सीआईएसएफ निकलने ही नहीं देती है। चाहे कितनी ही मुश्किल या परेशानी क्यों न हो। मदन सिंह ने बताया कि समस्या बहुत हैं। शहर तक जाने के लिए रास्ता ही नहीं है। लंबे रास्ते पर जाने में दिक्कत होती है। शादी के लिए बारात आती है तो बारात पर पत्थर फेंकते हैं। लड़कियों और महिलाओं के साथ छेड़छाड़ होती है। नहीं हो पा रही शादियां
अर्जुन सिंह ने बताया कि कई युवक शादी की उम्र होने पर भी कुंवारे बैठे हैं। गांव में बारात लेकर आना आसान नहीं है। इस वजह से लोग इन गांवों में रिश्ता जोड़ना पसंद नहीं करते। गांव का नाम सुनकर शादी से इनकार कर देते हैं। 40-45 साल की उम्र तक कुंवारे रहते हैं। लड़कियों की शादी में भी दिक्कत आती है। रवि ने बताया कि लोग गांव छोड़कर दूसरी जगहों पर जाकर बस रहे हैं। यह है सुप्रीम कोर्ट का आदेश
ताजमहल के 500 मीटर के दायरे में बिना अनुमति के वाहन नहीं ले जा सकते हैं। हर बार गांव वालों की तलाशी होती है। ताज की तरफ से चार पहिया वाहन ले जाने की अनुमति नहीं है। इन दिक्कतों की वजह से गांव के लोग कार नहीं खरीदते हैं। इन गावों में एक भी कार नहीं है। नहीं पहुंच पाई फायर ब्रिगेड
दुष्यंत निषाद ने बताया कि कुछ महीने पहले गांव में एक घर में आग लग गई। लेकिन फायर ब्रिगेड की गाड़ी को 10-12 किलोमीटर घूम कर आना पड़ा, जिससे आग पूरे घर में फैल गई। इसमें दो लोगों की मौत भी हो गई थी।