यूपी में अनाड़ी चला रहे मेडिकल स्टोर:33 हजार में किराए पर फार्मासिस्ट की डिग्री, बाबू ने मांगी 25 हजार घूस

पेट दर्द या फिर छोटी-मोटी चोट के लिए मेडिकल स्टोर्स से दवा लेना आम बात है। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि जिससे दवा ले रहे, वह आपका मर्ज पहचान कर दवा देने के काबिल है भी या नहीं। यूपी में किराए की डिग्री लेकर मेडिकल स्टोर्स चल रहे हैं। ड्रग ऑफिस से इन्हें शह मिल रही। यहां के बाबू पहले फार्मासिस्ट की डिग्री किराए पर देने वालों से मिलाते हैं। फिर मेडिकल स्टोर चलाने के लिए 5 हजार रुपए महीने की डील करते हैं। सिलसिलेवार पढ़िए पूरा इन्वेस्टिगेशन… शुरुआत राजधानी लखनऊ के ड्रग ऑफिस से की, जो केसरबाग में है। यहां ड्रग इंस्पेक्टर के कमरे के बाहर दलाल मिला। ड्रग इंस्पेक्टर के कमरे के बाहर ड्रग इंस्पेक्टर संदेश मौर्या और वरिष्ठ सहायक रमेश गौतम का बोर्ड लगा है। दलाल ने इशारे से अंदर बैठे बाबू ललित साहू को बुलाया… दलाल: कच्ची दुकान है, पास हो जाएगी? बाबू ललित साहू: कुछ खर्च करके देखो, फॉल सीलिंग करवा लेना। ऊपर कोई देखेगा ही नहीं। दलाल: भैया, हमारा काम करवा दीजिए। बाबू ललित साहू: देखो, तुम शुक्रवार को 12 बजे तक आना। सीधे सर से बात करवा देंगे। इसके बाद बाबू से हमारी बात होती है… बड़े बाबू ने डिग्री देने वाले का नंबर दिया
बाबू से बात होने के बाद हम अंदर गए। यहां औषधि निरीक्षक संदेश मौर्य के बगल की सीट पर बैठे बाबू रमेश गौतम (वरिष्ठ सहायक) से बात हुई। उन्होंने कहा कि परेशान होने की जरूरत नहीं। डिग्री कम पैसे में मिल जाएगी। उन्होंने प्रदीप नाम के फार्मासिस्ट का नंबर दिया। कहा- जाकर मिल लीजिए, 30-35 हजार में ही आपका काम हो जाएगा। तुम्हें कहीं आना-जाना नहीं है, बस आधार और डिग्री दे देना। इसके बाद प्रदीप के अलावा 5 लोगों के नंबर और दिए। फार्मेसी काउंसिल में काम करने वाला देता है किराए पर डिग्री
अब हमारे इन्वेस्टिगेशन का अगला पार्ट फार्मासिस्ट प्रदीप था। हमें ड्रग ऑफिस से प्रदीप का पता चल चुका था। हम ड्रग ऑफिस से निकलकर प्रदीप से मिलने फैजाबाद रोड स्थित लेखराज मार्केट पहुंचे। वह यहां फॉर्मेसी काउंसिल में काम करता है। यहां फार्मासिस्टों की डिग्री का रजिस्ट्रेशन होता है। फोन पर बातचीत के बाद वह गाड़ी में आकर बैठ गया। उससे फार्मासिस्ट की डिग्री किराए पर लेने की बात हुई… रिपोर्टर: इसका एग्रीमेंट भी बनेगा? प्रदीप: सालभर के लिए होता है। कोई एग्रीमेंट की जरूरत नहीं। एक साल बाद फिर रिन्यू होगा। एक साल बाद आप दूसरे का भी लगा सकते हैं। वो तो 10 रुपए का एग्रीमेंट बन जाता है। आपका ऑनलाइन कर देगा, तो उसको यूनिक आईडी भेजेंगे। इसके बाद मेरे पास एक ई-मेल आएगा। उसको अप्रूव करने के बाद साइट पर शो करने लगेगा। रिपोर्टर: कोई ओरिजिनल डॉक्यूमेंट की जरूरत नहीं पड़ेगी क्या? प्रदीप: नहीं, एक कागज निकलेगा, जिस पर मेरी और आपकी फोटो लगी मिलेगी। डीआई (ड्रग इंस्पेक्टर) ही पोर्टल पर देखता है। रिपोर्टर: अगर कोई जांच करने आया, तब क्या होगा? प्रदीप: तो कह दीजिएगा कि फार्मासिस्ट कहीं दवा लेने मार्केट गया है। आपके यहां निलेश सर चेक करने आएंगे। वहां वरिष्ठ सहायक रमेश बहुत पावरफुल है। रिपोर्टर: यानी आपका 31 माना जाए? प्रदीप: अरे नहीं सर, 35 कर दो। 40 तो वो बताए ही थे, हमने 35 कर दिया। सर, आप 33 तक कर दीजिए। रिपोर्टर: अरे 31 तक कर दो। दो ही हजार रुपए का तो अंतर पड़ रहा। प्रदीप: नहीं सर, 33 तक कर दीजिए। इसके बाद हम फिर आने की बात कह वहां से निकल गए। ड्रग ऑफिस से ही मिला दूसरे डिग्री होल्डर का नंबर
प्रदीप से डिग्री की डीलिंग करने के बाद हमारे सामने अब टास्क था कि दूसरे डिग्री होल्डर से बात की जाए। इसके लिए हमने बाबू रमेश गौतम से मिले समीर वाजपेयी के नंबर पर कॉल किया। उसने हमें लखनऊ के लालकुआं पर मिलने बुलाया। जब समीर हमसे मिलने पहुंचा, तो उसने मास्क लगा रखा था। बातचीत में पता चला कि उसका खुद का कोई रोजगार नहीं है। वह नौकरी की तलाश में है। बहरहाल, हमारी बातचीत समीर से शुरू हुई… एक अन्य युवक ने 35 हजार में देने की बात कही
अगले दिन युगांतर नाम के युवक का फोन आया। उसने समीर वाजपेयी का नाम बताते हुए अपनी फार्मासिस्ट की डिग्री देने की बात कही। युगांतर ने अपनी डिग्री की कीमत 35 हजार रुपए बताई। हमने कुछ कम करने को कहा। इस पर उसने कहा- कम ही बताया है। रेट तय हो गया। अब बात डिग्री की आईडी देने की हुई। उसने मोबाइल पर ही अपनी आईडी भेज दी। डिग्री की डील करने के बाद हम फिर ड्रग ऑफिस पहुंचे
मेडिकल स्टोर खोलने के लिए 3 डिग्रीधारकों की आईडी की डील के बाद हम एक बार फिर केसरबाग स्थित ड्रग ऑफिस पहुंचे। यहां हम फिर उसी कमरे में पहुंचे, जहां रमेश गौतम और ललित साहू बैठे थे। रमेश कुछ लोगों से बातचीत कर रहा था। वहीं बगल में बैठे ललित साहू को हमने इशारा करके बाहर बुलाया। रिपोर्टर: मेडिकल स्टोर के लिए डिग्री की बात हो गई है। अब यहां क्या लेना-देना रहेगा? बाबू ललित साहू: बात हो गई है, तो अब आप ऑनलाइन करा लीजिए। रिपोर्टर: अमित के यहां से करा लें? बाबू ललित साहू: नहीं, नंबर लिख लो। इनके यहां से करा लेना। रिपोर्टर: वैसे मोटा-मोटी कितना देना होगा? बाबू ललित साहू: 25 हजार में हो जाएगा, लेकिन आप पहले ऑनलाइन करा लो। सबसे बड़ा सवाल था कि क्या पूरे यूपी में ऐसा हो रहा है। इसके लिए हमने बाराबंकी और सीतापुर में भी फार्मेसी डिग्री के दलालों से भी बातचीत की। बाराबंकी की बात… हम लखनऊ से 30 किमी दूर बाराबंकी पहुंचे। यहां जिलाधिकारी परिसर में ड्रग इंस्पेक्टर का ऑफिस है। हम कमरा नंबर- 10 में पहुंचे। कमरे के बाहर ड्रग इंस्पेक्टर रजिया बानो का बाबू आरएल भारती मिला। हमने उससे पूछा- भैया, मैडम का नंबर है। उसने पूछा- क्या काम है? हमने कहा- दवा का लाइसेंस बनवाना है। वो हमें अपने साथ ड्रग इंस्पेक्टर के कमरा नंबर- 3 की ओर ले गया। कमरा खोलकर अंदर बिठाया। ड्रग ऑफिस के बाबू आरएल भारती से बातचीत के मुख्य अंश… ड्रग इंस्पेक्टर के कमरे में हुई डील रिपोर्टर: बंकी ब्लॉक में फुटकर दवा का लाइसेंस बनवाना है। मेरे पास बी-फार्मा की डिग्री भी नहीं है। बाबू आरएल भारती: ठीक है, बात कर लेंगे। महीने में 5 हजार रुपए लगेंगे। रिपोर्टर: अरे, ये तो ज्यादा है। बाबू आरएल भारती: पहले तो और ज्यादा लेते थे। अब तो ये बहुत कम हो गया है। रिपोर्टर: कुछ और कम कर देगा कि नहीं? बाबू आरएल भारती: हां, कम कर देगा। पर यही मानकर चलिए। रिपोर्टर: मैडम का नंबर दीजिए। बाबू आरएल भारती: ले लीजिए, लेकिन फोन मत करिएगा। मना किया है। रिपोर्टर: बी-फार्मा की डिग्री के लिए बात कर लीजिए। बाबू किसी से फोन पर बात करते हुए: सुभाष, कोई फार्मासिस्ट की डिग्री है तुम्हारे पास। एक भाई साहब बंकी में मेडिकल स्टोर्स खोल रहे हैं। इसके बाद बाबू फिर रिपोर्टर से मुखातिब हुआ… बी-फार्मा की डिग्री का रेट और मेडिकल स्टोर के लाइसेंस में खर्च के लिए हम सीतापुर के ड्रग ऑफिस पहुंचे। यहां महिला कोतवाली के बगल में ड्रग ऑफिस का बाबू राहुल बैठता है। बातचीत में बाबू राहुल ने ये भी कहा– आप अप्लाई कीजिए, इसके बाद मैडम (ड्रग इंस्पेक्टर अनीता कुरील) से मिलवा दूंगा। ड्रग ऑफिस से ही मिल रही है किराए पर डिग्री
इस पूरे मामले की इन्वेस्टिगेशन के बाद यह समझ में आ गया था कि आपको अगर दवा की दुकान खोलनी है, तो बी-फार्मा या किसी डिग्री की जरूरत नहीं। आप सीधे ड्रग ऑफिस जाइए। वहां किराए की डिग्री दिलाने के साथ आपसे सुविधा शुल्क लेकर कागज भी तैयार कर दिए जाएंगे। इस सेटिंग के बाद आपकी दुकान भी खुल जाएगी। ड्रग ऑफिस में फॉर्मासिस्ट की डिग्री की डील के बारे में आयुष, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के मंत्री दयाशंकर मिश्र दयालु से बात हुई। मंत्री ने पूरे प्रदेश में अभियान चलाकर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। ————————— भास्कर इन्वेस्टिगेशन की ये खबरें भी पढ़ें- यूपी में कैमरे पर लाशों का सौदा, पोस्टमॉर्टम कर्मचारी-पुलिस की डील, बोले- एक लाश डेढ़ लाख में ‘महीने में 30 से 40 लाशें निकल जाती हैं। आप बहुत कम दे रहे हैं। अभी पुराना रिकॉर्ड देखा जाए… उस समय डेढ़ लाख का रेट चल रहा था। राममूर्ति वाले डेढ़ लाख रुपए देकर जाते थे।’ यह दावा है बरेली के पोस्टमॉर्टम हाउस के कर्मचारी सुनील का। यूपी के बरेली में लाशों का सौदा हो रहा है। पढ़ें पूरी खबर यूपी में घर पहुंचने से पहले 4Kg गैस चोरी, स्टिंग में डिलीवरीमैन ने कान पकड़कर माफी मांगी, VIDEO में देखें लूट लखनऊ का खुर्रमनगर। घनी आबादी के बीच एक घर का बरामदा। यहां रसोई गैस के 15-20 सिलेंडर रखे हैं। डिलीवरीमैन बहुत सफाई से सिलेंडर की सील हटाता है। फिर पाइप से LPG खाली सिलेंडर में ट्रांसफर करता है। वह हर सिलेंडर से 3 से 4 किलो गैस निकाल रहा है। फिर बड़ी सफाई से सिलेंडर को पहले की तरह सील कर देता है। पढ़ें पूरी खबर