SGPGI महिला रेजिडेंट का साथी डॉक्टर ने यौन शोषण किया:पीड़िता बोली- कैंपस में बदनाम किया, लखनऊ पुलिस कर रही जांच

SGPGI लखनऊ की रेजिडेंट डॉक्टर ने साथी डॉक्टर पर यौन शोषण और मानसिक प्रताणना का आरोप लगाते हुए FIR दर्ज कराई है। मामले में पीड़ित महिला रेजिडेंट डॉक्टर की तहरीर पर SGPGI थाने में BNS की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। पीड़िता का आरोप है कि पहले आरोपी ने उसे झांसा देकर उसके साथ फिजिकल रिलेशन्स बनाए और उसके बाद जब वो प्रेग्नेंट हो गई तो अबोर्शन का दबाव बनाने लगा। जब पीड़िता ने उसकी बात नहीं मानी तो आरोपी ने उसका शोषण करना शुरू कर दिया। उसे धमकी दी और उसकी बदनामी करने लगा। जिसके चलते पीड़िता मानसिक अवसाद में चली गई। लंबी लड़ाई और कई दरवाजे खटखटाने के बाद आखिरकार उसकी आवाज सुनी गई। दर-दर भटकने को थी मजबूर पश्चिम बंगाल की मूल निवासी महिला रेजिडेंट (एमडी छात्रा) मौजूदा समय SGPGI के हॉस्टल में रहती हैं। पुलिस को दी तहरीर में उसने लिखा है कि उसके एक साथी रेजिडेंट डॉक्टर द्वारा शादी का झांसा देकर शारीरिक और मानसिक शोषण किया गया। पीड़िया न्याय के लिए दो महीने से भटक रही थी आख़िरकार मंगलवार रात पुलिस ने आरोपी डॉक्टर दिल्ली नागलोई निवासी सचिन गुप्ता के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है, लेकिन वह अभी फरार है। भरोसे से शुरू हुआ रिश्ता, दर्द में खत्म हुआ पीड़िता के अनुसार नवंबर 2023 में दोनों के बीच पढ़ाई के दौरान दोस्ती हुई, जो धीरे-धीरे गहरे रिश्ते में बदल गई। सचिन ने शादी का भरोसा दिलाकर उसके करीबियां बढ़ाईं। इसी भरोसे में वह उसके साथ रही, लेकिन यह रिश्ता अगस्त 2024 आते-आते उसके लिए मानसिक और शारीरिक पीड़ा का कारण बन गया। जबरन संबंध, नशा और दबाव के आरोप पीड़िता का आरोप है कि आरोपी ने उसे कई बार शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर किया। संस्थान के हॉस्टल, विभाग, होटल और कार तक में उसका यौन शोषण किया। इतना ही नहीं, उसे जबरन नशा कराया गया और गर्भनिरोधक गोलियां भी दी जाती रहीं। जब पीड़िता ने शादी की बात कही तो आरोपी पीछे हट गया। उसने दूरी बनानी शुरू कर दी और अन्य लड़कियों से नजदीकियां बढ़ा लीं। विरोध करने पर पीड़िता को ही विभाग में बदनाम किया जाने लगा। इस सबके बीच वह मानसिक रूप से टूट गई और एक बार हॉस्टल में ही आत्महत्या का प्रयास भी किया, लेकिन आसपास के लोगों ने समय रहते बचा लिया। हर दरवाजे पर दी दस्तक, फिर भी देर से मिला न्याय पीड़िता ने 24 फरवरी को पुलिस से शिकायत की। इसके बाद 16 मार्च को विशाखा कमेटी, 24 मार्च को वन स्टॉप सेंटर और 30 मार्च को महिला आयोग में गुहार लगाई, लेकिन उसे सिर्फ इंतजार ही मिला। दो महीनों की जद्दोजहद के बाद मंगलवार रात मामला दर्ज किया गया। SGPGI इंस्पेक्टर धीरेंद्र सिंह ने बताया कि विशाखा कमेटी की रिपोर्ट अभी तक नहीं मिली है। फिलहाल पीड़िता की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और आरोपी डॉक्टर सचिन गुप्ता की तलाश की जा रही है।