महोबा में 49 साल के सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल मनोज कुमार ने सुसाइड कर लिया। बेटे ने कहा- TET को लेकर वो परेशान थे। यही बात मनोज के साथी टीचरों ने भी कही। इसके अलावा 13 सितंबर को हमीरपुर में गणेशी लाल नाम के टीचर ने भी खुदकुशी कर ली। TET के लिए इन घटनाओं ने बड़ा सवाल खड़ा किया है क्या यह वाकई इतना कठिन एग्जाम है? टीचरों के बीच यह डर क्यों बैठा है? इस परीक्षा का सिलेबस और पैटर्न आखिर क्या है? कितने सरकारी टीचर इस दायरे में आएंगे? इन बार संडे बिग स्टोरी में पढ़िए TET की टेंशन आखिर TET (टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट) है क्या
TET टीचर बनने की पहली पात्रता परीक्षा है। पहले यह पास करना उन सभी के लिए जरूरी है, जो सरकारी स्कूलों में टीचर बनना चाहते हैं। यह परीक्षा स्टेट लेवल पर होती है। TET एग्जाम साल में एक या दो बार होता है। यूपी में TET पास करने के बाद सुपर TET देना पड़ता है। इसे पास करने के बाद मेरिट बनती है। इसके आधार पर क्लास- 1 से लेकर 8 तक के सरकारी स्कूलों में नियुक्ति मिलती है। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर, 2025 को आदेश दिया कि अब पहले से कक्षा-1 से 8 तक पढ़ा रहे सभी टीचरों के लिए TET पास करना अनिवार्य होगा। यह नियम सरकारी और प्राइवेट दोनों टीचरों पर लागू होगा। फिलहाल अल्पसंख्यक विद्यालयों को इससे छूट दी गई है। इस मामले को सुप्रीम कोर्ट की बड़ी बेंच को सौंपा गया है। सितंबर 2025 से इसका सख्ती से पालन किया जाएगा। यूपी में सिर्फ 2 लाख टीचर ही TET पास
सुप्रीम कोर्ट के TET अनिवार्य के आदेश के बाद अब यूपी में 2011 के बाद नियुक्त सरकारी टीचरों को यह परीक्षा देनी होगी। भारत में स्कूली शिक्षा पर एकीकृत जिला शिक्षा सूचना प्रणाली (यूडीआईएसई) के मुताबिक, यूपी में सरकारी और प्राइवेट मिलाकर कुल 16 लाख 15 हजार 427 टीचर हैं। इनमें 7 लाख से ज्यादा सरकारी टीचर हैं। मेरठ के सहायक शिक्षक हिमांशु राणा के मुताबिक, यूपी में इस फैसले से 2 लाख अधिक सरकारी टीचर प्रभावित होंगे। इन सभी ने अपनी पढ़ाई छोड़कर बच्चों को उनके सिलेबस के आधार पर पढ़ाया है। नए सिलेबस के आधार पर वो परीक्षा पास कर पाएं, यह उनके लिए आसान नहीं होगा। अब जानिए टीईटी (TET) का सिलेबस और पैटर्न
सहायक शिक्षक हिमांशु राणा बताते है कि राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (NCTE) ने 2011 में टीईटी को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए थे। उसके अनुसार, इसमें मुख्य तौर पर दो पेपर होते हैं। अब समझते हैं एग्जाम का पैटर्न
हिमांशु राणा के अनुसार, इस एग्जाम में सभी सवाल एमसीक्यू ऑब्जेक्टिव टाइप होते है। हर सवाल 1 नंबर का होता है, कोई नेगेटिव मार्किंग नहीं होती। क्वालिफाई करने के लिए जनरल कैटेगरी को 60%, और आरक्षित कैटेगरी को करीब 55% अंक की आवश्यकता होती है। पहले और अबके सिलेबस में क्या अंतर है?
TET को 2011 में भारत में शिक्षा का अधिकार कानून लागू होने के बाद टीचरों के लिए अनिवार्य किया गया था। तब भी इसका सिलेबस सेम था। लेकिन, तब रट्टा आधारित सवाल ज्यादा होते है। क्वेश्चन एनसीईआरटी की बेसिक बुक से होते थे। साथ ही शिक्षा शास्त्र से कम गहराई वाले सवाल होते थे। लेकिन, एनईपी 2020 (नई शिक्षा नीति) आने के बाद सवालों का तरीका बदल गया। बेसिक क्वेश्चन की जगह कॉन्सेप्ट अंडरस्टैंडिंग सवाल पूछे जाने लगे। अब सिर्फ रट्टा नहीं, बल्कि टीचिंग स्किल्स पर फोकस किया जाने लगा। पहले ग्रामर तक सीमित था। लेकिन, अब लैंग्वेज पेडा-गोजी (कैसे भाषा पढ़ाई जाएगी, भाषा की कठिनाइयां) पर भी जोर दिया जाने लगा। साफतौर पर कहें, तो पुराने TET में सवाल सीधे थे। नई शिक्षा नीति के बाद सवाल केस स्टडी बेस्ड और टीचिंग ओरिएंटेड हो गए हैं। क्या TET बहुत कठिन है?
TET को कॉन्सेप्ट-बेस्ड परीक्षा माना जाता है, यानी इसे रटकर पास करना मुश्किल है। इसमें सवाल सीधे-सीधे ज्ञान पर नहीं, बल्कि समझ और एप्लिकेशन पर आधारित होते हैं। कई टीचर सालों से पढ़ा रहे हैं, लेकिन लंबे समय से किसी प्रतियोगी परीक्षा में नहीं बैठे। इसलिए उन्हें यह चुनौतीपूर्ण लगती है। हालांकि, इसका पासिंग परसेंट बहुत कम रहता है। कई बार केवल 20-25% ही इसको क्वालीफाई कर पाते हैं। अगर कोई शिक्षक TET पास न कर पाए, तो क्या नौकरी जाएगी?
अभी इस पर साफ नियमावली नहीं आई है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे अनिवार्य तो किया है, लेकिन राज्य सरकारों को गाइडलाइन बनानी होगी। संभावना है, पहले से कार्यरत शिक्षकों को कुछ राहत या ऑप्शन दिया जाए। TET पास करने की वैधता कितनी होती है?
पहले यह 7 साल तक मान्य होती थी। लेकिन, अब केंद्र ने इसे लाइफटाइम वैधता कर दिया है। आप इस परीक्षा को कितनी बार भी दे सकते हैं। क्यों घबरा रहे टीचर?
टीचरों को अपने भविष्य और नौकरी पर खतरा मंडराता दिख रहा है। दरअसल, जिनकी नौकरी सालों से सुरक्षित मानी जा रही थी, उन्हें अब दोबारा परीक्षा का डर है। उनमें डर है कि वो अब प्रतियोगिता के इस दबाव को झेल पाएंगे या नहीं। क्योंकि युवा अभ्यर्थी पहले से ही तैयारी में रहते हैं, लेकिन पुराने शिक्षकों के लिए यह कठिन चुनौती है। हालांकि शासनादेश और नियमावली अभी साफ नहीं है। इसलिए असमंजस है कि क्या यह सभी पर लागू होगा या सिर्फ नए उम्मीदवारों पर। हालांकि, बीते कई साल के रिजल्ट बताते हैं कि बड़ी संख्या में उम्मीदवार इस एग्जाम में असफल हो जाते हैं। क्या है सुप्रीम कोर्ट का आदेश?
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी करते हुए कहा कि कक्षा-1 से 8 तक पढ़ाने वाले सभी टीचरों को अगले 2 साल में TET पास करना होगा। ये पास करना अब सिर्फ नियुक्ति ही नहीं, बल्कि नौकरी जारी रखने और प्रमोशन के लिए भी अनिवार्य होगा। जो शिक्षक निर्धारित समय में पास नहीं करेंगे, उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जा सकती है। हालांकि जिनकी नौकरी में 5 साल से कम सेवा शेष है, उन्हें परीक्षा देने से छूट रहेगी। ऐसे शिक्षक अगर प्रमोशन चाहते हैं, तो उन्हें भी TET पास करना होगा। टीचरों का विरोध कितना बड़ा? उनकी क्या तैयारी है?
इस मुद्दे पर यूपी बीटीसी शिक्षक संघ के आह्वान पर 11 सितंबर से टीचरों ने डाक से प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) को पत्र भेजने का अभियान शुरू किया। पहले ही दिन 97 हजार 890 टीचरों ने पत्र लिखकर अपनी समस्याएं बताईं। यह अभियान 20 सितंबर तक चलेगा। 5 लाख पत्र भेजने का लक्ष्य है। संघ की मुख्य मांग है कि 25 अगस्त, 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET से छूट दी जाए। उनका कहना है कि 55 साल का शिक्षक अब बच्चों को पढ़ाए या खुद परीक्षा की तैयारी करे? केंद्र सरकार चाहे, तो टीचरों को राहत मिल सकती है। अगर समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो अगले महीने दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ा धरना दिया जाएगा। इस आदेश को लेकर शिक्षक संघ के नेताओं का रुख क्या है?
प्रदेश शिक्षक संघ के अध्यक्ष अनिल यादव ने कहा कि आरटीई एक्ट 25 अगस्त, 2010 को लागू हुआ। उस समय यह तय किया गया था कि इसके पहले नियुक्त शिक्षक इस नियम के दायरे में नहीं आएंगे। बाद में 10 अगस्त, 2017 को एनसीटीई (NCTE) ने आदेश जारी कर देशभर के सभी कार्यरत शिक्षकों के लिए न्यूनतम योग्यता स्नातक, बीटीसी या बीएड और टीईटी को गुपचुप तरीके से लागू कर दिया। इसके तहत 31 मार्च, 2015 तक नियुक्त सभी टीचरों को 4 साल के भीतर यानी 31 मार्च, 2019 तक अनिवार्य रूप से टीईटी उत्तीर्ण करना आवश्यक कर दिया गया। इस फैसले की जानकारी न तो शिक्षकों को समय पर दी गई और न ही उचित तरीके से सार्वजनिक किया गया। इसे आदेशों और फाइलों में दबाकर रखा गया। अध्यक्ष का कहना है कि 55 साल का शिक्षक अब कैसे परीक्षा पास कर पाएगा? वह बच्चों को पढ़ाए या खुद परीक्षा की तैयारी करे? केंद्र सरकार के कानून और सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश से प्रदेश के लाखों टीचरों की नौकरी पर संकट खड़ा हो गया है। अनिल यादव ने कहा कि अगर केंद्र सरकार और NCTE चाहे, तो टीचरों को राहत दी जा सकती है। जूनियर हाई स्कूल शिक्षा संघ के प्रदेश अध्यक्ष योगेश त्यागी का कहना है कि सरकार ने 10 अगस्त, 2017 को बिना सार्वजनिक रूप से जानकारी दिए चुपचाप आदेश लागू कर दिया। न तो शिक्षकों को समय पर अवगत कराया गया और न ही उनकी आपत्तियों को सही तरीके से अदालत के सामने रखा गया। संघ के मुताबिक, 2001 तक हुई ज्यादातर भर्तियां 12वीं के आधार पर हुई थीं। वहीं 31 मई, 1999 तक मृतक आश्रितों को अनुकंपा पर दी गई नियुक्तियां प्रशिक्षण से मुक्त थीं। इसके बाद कुछ विशेष बीटीसी और बीएड धारकों के माध्यम से नियुक्तियां हुईं। शिक्षकों का TET को लेकर क्या तर्क है?
TET कोई शैक्षिक योग्यता नहीं, बल्कि सिर्फ पात्रता परीक्षा है। इसे योग्यता की कसौटी मानना गलत है। शिक्षकों का तर्क है कि 40 साल न्यूनतम आयु सीमा होनी चाहिए। जबकि, आज अधिकांश शिक्षक 40 साल से ऊपर हैं। ऐसे में जब वे पात्र ही नहीं हैं, तो आवेदन कैसे करेंगे? शिक्षक नेताओं ने यह भी सवाल उठाया कि TET में आवेदन के लिए न्यूनतम 45% अंक अनिवार्य हैं, जबकि उस दौर में 33% अंक भी बड़ी बात माने जाते थे। अगर आज इस मानक को लागू किया गया, तो अधिकतर शिक्षक पात्रता से ही बाहर हो जाएंगे। 55 साल की उम्र का टीचर 12वीं स्तर का गणित और विज्ञान कैसे हल कर पाएगा? अनुमान है कि मुश्किल से 20% लोग ही परीक्षा पास कर पाएंगे, जबकि अधिकांश टीचर बाहर हो जाएंगे। संघ ने सरकार पर आरोप लगाया कि सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष यह उनका पक्ष नहीं रखा। सुप्रीम कोर्ट को इस मामले पर दोबारा गंभीरता से विचार करना चाहिए। ————————— ये खबर भी पढ़ें… मायावती फिर कमाल कर पाएंगी?, आकाश की रीलॉन्चिंग, बुआ-भतीजे का नया प्लान; कांशीराम की पुण्यतिथि पर शक्ति प्रदर्शन बसपा सुप्रीमो मायावती ने 9 साल बाद 9 अक्टूबर को शक्ति प्रदर्शन करने वाली हैं। इसी दिन कांशीराम की 19वीं पुण्यतिथि (महापरिनिर्वाण दिवस) है। बसपा का खुद को साबित करने का पुराना हथियार रैली है। जब भी पार्टी को अपना दमखम दिखाना होता है, वह बड़े स्तर पर रैलियां करती है और भीड़ इकट्ठा करती है। ऐसे में सवाल है कि आखिर बसपा का प्लान क्या है? क्या ये 2007 की यादें ताजा करने की कोशिश है? क्या आकाश आनंद की वापसी के बाद की नई रणनीति है? क्या कांशीराम की नीतियों को बसपा लागू करने वाली है? क्या बुआ-भतीजे की जोड़ी कमाल दिखा पाएगी? एक्सपर्ट क्या मानते हैं? पढ़िए पूरी रिपोर्ट
TET टीचर बनने की पहली पात्रता परीक्षा है। पहले यह पास करना उन सभी के लिए जरूरी है, जो सरकारी स्कूलों में टीचर बनना चाहते हैं। यह परीक्षा स्टेट लेवल पर होती है। TET एग्जाम साल में एक या दो बार होता है। यूपी में TET पास करने के बाद सुपर TET देना पड़ता है। इसे पास करने के बाद मेरिट बनती है। इसके आधार पर क्लास- 1 से लेकर 8 तक के सरकारी स्कूलों में नियुक्ति मिलती है। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर, 2025 को आदेश दिया कि अब पहले से कक्षा-1 से 8 तक पढ़ा रहे सभी टीचरों के लिए TET पास करना अनिवार्य होगा। यह नियम सरकारी और प्राइवेट दोनों टीचरों पर लागू होगा। फिलहाल अल्पसंख्यक विद्यालयों को इससे छूट दी गई है। इस मामले को सुप्रीम कोर्ट की बड़ी बेंच को सौंपा गया है। सितंबर 2025 से इसका सख्ती से पालन किया जाएगा। यूपी में सिर्फ 2 लाख टीचर ही TET पास
सुप्रीम कोर्ट के TET अनिवार्य के आदेश के बाद अब यूपी में 2011 के बाद नियुक्त सरकारी टीचरों को यह परीक्षा देनी होगी। भारत में स्कूली शिक्षा पर एकीकृत जिला शिक्षा सूचना प्रणाली (यूडीआईएसई) के मुताबिक, यूपी में सरकारी और प्राइवेट मिलाकर कुल 16 लाख 15 हजार 427 टीचर हैं। इनमें 7 लाख से ज्यादा सरकारी टीचर हैं। मेरठ के सहायक शिक्षक हिमांशु राणा के मुताबिक, यूपी में इस फैसले से 2 लाख अधिक सरकारी टीचर प्रभावित होंगे। इन सभी ने अपनी पढ़ाई छोड़कर बच्चों को उनके सिलेबस के आधार पर पढ़ाया है। नए सिलेबस के आधार पर वो परीक्षा पास कर पाएं, यह उनके लिए आसान नहीं होगा। अब जानिए टीईटी (TET) का सिलेबस और पैटर्न
सहायक शिक्षक हिमांशु राणा बताते है कि राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (NCTE) ने 2011 में टीईटी को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए थे। उसके अनुसार, इसमें मुख्य तौर पर दो पेपर होते हैं। अब समझते हैं एग्जाम का पैटर्न
हिमांशु राणा के अनुसार, इस एग्जाम में सभी सवाल एमसीक्यू ऑब्जेक्टिव टाइप होते है। हर सवाल 1 नंबर का होता है, कोई नेगेटिव मार्किंग नहीं होती। क्वालिफाई करने के लिए जनरल कैटेगरी को 60%, और आरक्षित कैटेगरी को करीब 55% अंक की आवश्यकता होती है। पहले और अबके सिलेबस में क्या अंतर है?
TET को 2011 में भारत में शिक्षा का अधिकार कानून लागू होने के बाद टीचरों के लिए अनिवार्य किया गया था। तब भी इसका सिलेबस सेम था। लेकिन, तब रट्टा आधारित सवाल ज्यादा होते है। क्वेश्चन एनसीईआरटी की बेसिक बुक से होते थे। साथ ही शिक्षा शास्त्र से कम गहराई वाले सवाल होते थे। लेकिन, एनईपी 2020 (नई शिक्षा नीति) आने के बाद सवालों का तरीका बदल गया। बेसिक क्वेश्चन की जगह कॉन्सेप्ट अंडरस्टैंडिंग सवाल पूछे जाने लगे। अब सिर्फ रट्टा नहीं, बल्कि टीचिंग स्किल्स पर फोकस किया जाने लगा। पहले ग्रामर तक सीमित था। लेकिन, अब लैंग्वेज पेडा-गोजी (कैसे भाषा पढ़ाई जाएगी, भाषा की कठिनाइयां) पर भी जोर दिया जाने लगा। साफतौर पर कहें, तो पुराने TET में सवाल सीधे थे। नई शिक्षा नीति के बाद सवाल केस स्टडी बेस्ड और टीचिंग ओरिएंटेड हो गए हैं। क्या TET बहुत कठिन है?
TET को कॉन्सेप्ट-बेस्ड परीक्षा माना जाता है, यानी इसे रटकर पास करना मुश्किल है। इसमें सवाल सीधे-सीधे ज्ञान पर नहीं, बल्कि समझ और एप्लिकेशन पर आधारित होते हैं। कई टीचर सालों से पढ़ा रहे हैं, लेकिन लंबे समय से किसी प्रतियोगी परीक्षा में नहीं बैठे। इसलिए उन्हें यह चुनौतीपूर्ण लगती है। हालांकि, इसका पासिंग परसेंट बहुत कम रहता है। कई बार केवल 20-25% ही इसको क्वालीफाई कर पाते हैं। अगर कोई शिक्षक TET पास न कर पाए, तो क्या नौकरी जाएगी?
अभी इस पर साफ नियमावली नहीं आई है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे अनिवार्य तो किया है, लेकिन राज्य सरकारों को गाइडलाइन बनानी होगी। संभावना है, पहले से कार्यरत शिक्षकों को कुछ राहत या ऑप्शन दिया जाए। TET पास करने की वैधता कितनी होती है?
पहले यह 7 साल तक मान्य होती थी। लेकिन, अब केंद्र ने इसे लाइफटाइम वैधता कर दिया है। आप इस परीक्षा को कितनी बार भी दे सकते हैं। क्यों घबरा रहे टीचर?
टीचरों को अपने भविष्य और नौकरी पर खतरा मंडराता दिख रहा है। दरअसल, जिनकी नौकरी सालों से सुरक्षित मानी जा रही थी, उन्हें अब दोबारा परीक्षा का डर है। उनमें डर है कि वो अब प्रतियोगिता के इस दबाव को झेल पाएंगे या नहीं। क्योंकि युवा अभ्यर्थी पहले से ही तैयारी में रहते हैं, लेकिन पुराने शिक्षकों के लिए यह कठिन चुनौती है। हालांकि शासनादेश और नियमावली अभी साफ नहीं है। इसलिए असमंजस है कि क्या यह सभी पर लागू होगा या सिर्फ नए उम्मीदवारों पर। हालांकि, बीते कई साल के रिजल्ट बताते हैं कि बड़ी संख्या में उम्मीदवार इस एग्जाम में असफल हो जाते हैं। क्या है सुप्रीम कोर्ट का आदेश?
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी करते हुए कहा कि कक्षा-1 से 8 तक पढ़ाने वाले सभी टीचरों को अगले 2 साल में TET पास करना होगा। ये पास करना अब सिर्फ नियुक्ति ही नहीं, बल्कि नौकरी जारी रखने और प्रमोशन के लिए भी अनिवार्य होगा। जो शिक्षक निर्धारित समय में पास नहीं करेंगे, उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जा सकती है। हालांकि जिनकी नौकरी में 5 साल से कम सेवा शेष है, उन्हें परीक्षा देने से छूट रहेगी। ऐसे शिक्षक अगर प्रमोशन चाहते हैं, तो उन्हें भी TET पास करना होगा। टीचरों का विरोध कितना बड़ा? उनकी क्या तैयारी है?
इस मुद्दे पर यूपी बीटीसी शिक्षक संघ के आह्वान पर 11 सितंबर से टीचरों ने डाक से प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) को पत्र भेजने का अभियान शुरू किया। पहले ही दिन 97 हजार 890 टीचरों ने पत्र लिखकर अपनी समस्याएं बताईं। यह अभियान 20 सितंबर तक चलेगा। 5 लाख पत्र भेजने का लक्ष्य है। संघ की मुख्य मांग है कि 25 अगस्त, 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET से छूट दी जाए। उनका कहना है कि 55 साल का शिक्षक अब बच्चों को पढ़ाए या खुद परीक्षा की तैयारी करे? केंद्र सरकार चाहे, तो टीचरों को राहत मिल सकती है। अगर समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो अगले महीने दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ा धरना दिया जाएगा। इस आदेश को लेकर शिक्षक संघ के नेताओं का रुख क्या है?
प्रदेश शिक्षक संघ के अध्यक्ष अनिल यादव ने कहा कि आरटीई एक्ट 25 अगस्त, 2010 को लागू हुआ। उस समय यह तय किया गया था कि इसके पहले नियुक्त शिक्षक इस नियम के दायरे में नहीं आएंगे। बाद में 10 अगस्त, 2017 को एनसीटीई (NCTE) ने आदेश जारी कर देशभर के सभी कार्यरत शिक्षकों के लिए न्यूनतम योग्यता स्नातक, बीटीसी या बीएड और टीईटी को गुपचुप तरीके से लागू कर दिया। इसके तहत 31 मार्च, 2015 तक नियुक्त सभी टीचरों को 4 साल के भीतर यानी 31 मार्च, 2019 तक अनिवार्य रूप से टीईटी उत्तीर्ण करना आवश्यक कर दिया गया। इस फैसले की जानकारी न तो शिक्षकों को समय पर दी गई और न ही उचित तरीके से सार्वजनिक किया गया। इसे आदेशों और फाइलों में दबाकर रखा गया। अध्यक्ष का कहना है कि 55 साल का शिक्षक अब कैसे परीक्षा पास कर पाएगा? वह बच्चों को पढ़ाए या खुद परीक्षा की तैयारी करे? केंद्र सरकार के कानून और सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश से प्रदेश के लाखों टीचरों की नौकरी पर संकट खड़ा हो गया है। अनिल यादव ने कहा कि अगर केंद्र सरकार और NCTE चाहे, तो टीचरों को राहत दी जा सकती है। जूनियर हाई स्कूल शिक्षा संघ के प्रदेश अध्यक्ष योगेश त्यागी का कहना है कि सरकार ने 10 अगस्त, 2017 को बिना सार्वजनिक रूप से जानकारी दिए चुपचाप आदेश लागू कर दिया। न तो शिक्षकों को समय पर अवगत कराया गया और न ही उनकी आपत्तियों को सही तरीके से अदालत के सामने रखा गया। संघ के मुताबिक, 2001 तक हुई ज्यादातर भर्तियां 12वीं के आधार पर हुई थीं। वहीं 31 मई, 1999 तक मृतक आश्रितों को अनुकंपा पर दी गई नियुक्तियां प्रशिक्षण से मुक्त थीं। इसके बाद कुछ विशेष बीटीसी और बीएड धारकों के माध्यम से नियुक्तियां हुईं। शिक्षकों का TET को लेकर क्या तर्क है?
TET कोई शैक्षिक योग्यता नहीं, बल्कि सिर्फ पात्रता परीक्षा है। इसे योग्यता की कसौटी मानना गलत है। शिक्षकों का तर्क है कि 40 साल न्यूनतम आयु सीमा होनी चाहिए। जबकि, आज अधिकांश शिक्षक 40 साल से ऊपर हैं। ऐसे में जब वे पात्र ही नहीं हैं, तो आवेदन कैसे करेंगे? शिक्षक नेताओं ने यह भी सवाल उठाया कि TET में आवेदन के लिए न्यूनतम 45% अंक अनिवार्य हैं, जबकि उस दौर में 33% अंक भी बड़ी बात माने जाते थे। अगर आज इस मानक को लागू किया गया, तो अधिकतर शिक्षक पात्रता से ही बाहर हो जाएंगे। 55 साल की उम्र का टीचर 12वीं स्तर का गणित और विज्ञान कैसे हल कर पाएगा? अनुमान है कि मुश्किल से 20% लोग ही परीक्षा पास कर पाएंगे, जबकि अधिकांश टीचर बाहर हो जाएंगे। संघ ने सरकार पर आरोप लगाया कि सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष यह उनका पक्ष नहीं रखा। सुप्रीम कोर्ट को इस मामले पर दोबारा गंभीरता से विचार करना चाहिए। ————————— ये खबर भी पढ़ें… मायावती फिर कमाल कर पाएंगी?, आकाश की रीलॉन्चिंग, बुआ-भतीजे का नया प्लान; कांशीराम की पुण्यतिथि पर शक्ति प्रदर्शन बसपा सुप्रीमो मायावती ने 9 साल बाद 9 अक्टूबर को शक्ति प्रदर्शन करने वाली हैं। इसी दिन कांशीराम की 19वीं पुण्यतिथि (महापरिनिर्वाण दिवस) है। बसपा का खुद को साबित करने का पुराना हथियार रैली है। जब भी पार्टी को अपना दमखम दिखाना होता है, वह बड़े स्तर पर रैलियां करती है और भीड़ इकट्ठा करती है। ऐसे में सवाल है कि आखिर बसपा का प्लान क्या है? क्या ये 2007 की यादें ताजा करने की कोशिश है? क्या आकाश आनंद की वापसी के बाद की नई रणनीति है? क्या कांशीराम की नीतियों को बसपा लागू करने वाली है? क्या बुआ-भतीजे की जोड़ी कमाल दिखा पाएगी? एक्सपर्ट क्या मानते हैं? पढ़िए पूरी रिपोर्ट