बच्ची भेड़िया खा गया, पोस्टमॉर्टम के बाद लाश नहीं मिली:बहराइच में पिता बोले- सिर का एक टुकड़ा बचा; अभी भी घूम रहा भेड़िया

12 सितंबर की रात रानी 3 महीने की बच्ची को लेकर घर के बरामदे में सो रही थीं। लाइट नहीं होने के चलते अंधेरा था। रात करीब 3 बजे भेड़िया उनकी खाट (चारपाई) के पास आया। रानी को कुछ आभास हुआ, लेकिन नींद और अंधेरे के चलते पता नहीं चल सका। वह बच्ची को दूध पिला रही थी। तभी भेड़िए ने झपट्टा मारा और बच्ची को उठाकर तेजी से भागा। रानी कुछ समझ पाती और चिल्लाती, आसपास के लोग जागते, तब तक भेड़िया बच्ची को लेकर भाग चुका था। सुबह बच्ची के सिर का एक टुकड़ा मिल सका। बहराइच में 2 दिन के अंदर भेड़िया 2 मासूम बच्चों को अपना शिकार बना चुका है। दो अन्य हमले भी किए। अब स्थिति यह है कि आसपास के गांव में लोगों के अंदर डर भर गया है। रात-रातभर जाग रहे। बच्चों को घर में सुला रहे। गन्ने के खेतों में नहीं जा रहे। दैनिक भास्कर की टीम इस पूरे मामले को कवर करने प्रभावित स्थानों में पहुंची। आइए सब कुछ एक तरफ से जानते हैं… लगा कुत्ता है, लेकिन वह भेड़िया था
बहराइच जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर भौंरी बहोरवा गांव है। यह महसी तहसील और बौंडी थाना क्षेत्र में पड़ता है। यहां चारों तरफ गन्ने के खेत नजर आते हैं। 13 सितंबर की भोर में इस गांव में भेड़िए का हमला हुआ था। हमारी टीम सीधे दिनेश तिवारी के घर पहुंची, जिनकी 3 महीने की बेटी को भेड़िया खा गया। दिनेश का घर गांव के एकदम किनारे है। 100 मीटर की दूरी पर गन्ने का खेत शुरू हो जाता है। रात के अंधेरे में पूरा परिवार घर के बाहर ही बैठा था। वन विभाग के कुछ अफसर घर के बाहर डेरा डाले थे। हमारी मुलाकात सबसे पहले पहले दिनेश की पत्नी रानी से हुई। रानी के 4 बच्चे थे। 3 महीने पहले ही उन्होंने चौथे बच्चे के रूप में एक बच्ची को जन्म दिया था। उसका नाम संध्या रखा था। बेटी की मौत के बाद रानी रोती-बिलखती घर के ही बाहर बैठी थीं। कहती हैं- रात के 10-11 बजे तक सब जाग रहे थे। इसके बाद सोने लगे। हम अपनी बेटी को लेकर घर के बरामदे में ही सो रहे थे। उस वक्त लाइट नहीं थी, चारों तरफ अंधेरा था। घटना को लेकर रानी कहती हैं- रात करीब 3 बज रहे थे, हम बिटिया को दूध पिला रहे थे। तभी आभास हुआ कि कोई जानवर खाट के पास आकर बैठा है। हमने सोचा कुत्ता है। लेकिन, तभी उसने झपट्टा मारा और मेरी बेटी को उठाकर भागा। हम तुरंत ही उठे और चिल्लाए। सब लोग जाग गए, लेकिन तब तक भेड़िया मेरी बेटी को उठा ले गया। पोस्टमॉर्टम हुआ लेकिन लाश नहीं मिली
बच्ची के पिता दिनेश तिवारी कहते हैं- जैसे ही पत्नी चिल्लाई, हम लोग उठ गए। खेत की तरफ भागे। हमारे साथ गांव के और लोग भी आ गए। हम लोगों ने खेत में खूब खोजा, लेकिन बच्ची का कुछ पता नहीं चल सका। 2 घंटे बाद सुबह के 5 बजे जब थोड़ा उजाला हुआ, तो गन्ने के खेत में घुसे। वहीं बच्ची के सिर का एक छोटा-सा हिस्सा पड़ा था। बगल में ही उसके कपड़े और हाथ का कड़ा पड़ा था। हम समझ गए कि हमारी बच्ची का ही है। दिनेश कहते हैं- वन विभाग के लोग भी आ गए। मांस का टुकड़ा पोस्टमॉर्टम के लिए गया। वहां पोस्टमॉर्टम हुआ, लेकिन लाश नहीं मिली। कहा गया कि एक छोटा-सा टुकड़ा ही है। ये भी तीन भाग में बंटेगा और अलग-अलग अफसरों के पास जाएगा। अगर आप ले लेंगे, तो आपको पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट नहीं मिलेगी। हमने कुछ नहीं कहा और वापस आ गए। महसी के विधायक सुरेश्वर सिंह भी आए थे। वो लोग मेरा अकाउंट नंबर ले गए हैं, बाकी मुझे कुछ भी पता नहीं। बच्ची के चाचा रमेश तिवारी घटना के वक्त घर के बाहर ही सो रहे थे। वह कहते हैं- हमारे यहां लाइट की बहुत समस्या है। जिस वक्त की घटना थी, उस वक्त भी लाइट नहीं थी। अंधेरे का फायदा उठाकर भेड़िया आ गया था। भाभी को लगा कि कुत्ता है। उन्होंने उसे भगाया भी, लेकिन तभी वह बच्ची को लेकर भाग गया। सुबह जब हमें बच्ची मिली, तो हम लोग नहीं पहचान पाए। वो तो हाथ का कड़ा और कपड़े से पहचान पाए। भेड़िया मेरे सामने आ गया
भेड़िए ने 3 महीने की संध्या को अपना शिकार बनाने से 2 दिन पहले परागपुरवा में 7 साल की बच्ची का भी शिकार किया था। ये गांव भौंरी बहोरवा से करीब 5 किलोमीटर दूर है। इस वक्त स्थिति यह है कि लोग पूरी रात जागकर पहरा दे रहे हैं। इसी गांव के हमें आदर्श शुक्ला मिले। 16 साल के आदर्श कहते हैं- मैं खेत की तरफ से गांव में आ रहा था। तभी एक भेड़िया मेरे सामने आ गया। उस वक्त लगा कि कुत्ता है। हमने हटाया, लेकिन वह कुछ दूर जाकर वह ठहर गया। फिर लगा कि ये तो भेड़िया है। मैं डरकर पीछे हट गया। गांव के ही अनिल कुमार शुक्ला कहते हैं- महसी के इस इलाके में पिछले साल भी भेड़िया आया था। लेकिन उस वक्त वह हमारे गांव में नहीं था, बल्कि यहां 30-40 किलोमीटर की दूरी पर हमला कर रहे थे। अब पहली बार इधर आया है। हम लोग रातभर जागकर बच्चों की रखवाली कर रहे हैं। प्रशासन भी हम लोगों की मदद में लगा है। हम तो चाहते हैं कि यहां की व्यवस्था में सुधार हो। बिजली की व्यवस्था बहुत खराब है, रात में लाइट आती-जाती रहती है। गांव में स्ट्रीट लाइट नहीं है। हमले के बाद कुछ स्थानों पर लगाई गई है। 3 भेड़िए एक साथ देखा, फिर उसके पीछे दौड़े
हम गांव में लोगों से बात ही कर रहे थे, तभी हल्ला मचा कि गांव के दूसरे छोर पर 3 भेड़िए देखे गए हैं। सारा गांव उधर भागा। हम भी उन लोगों के पीछे दौड़े। सभी हाथों में लाठी-डंडे, हथियार और टार्च लेकर भेड़िए को खोज रहे थे। कुछ लोगों ने दावा किया गांव के बाहर 3 भेड़िए खड़े थे। टार्च की रोशनी में उनकी आंखें नजर आईं। इसके बाद हम लोगों ने उन्हें दौड़ा लिया, वो सभी खेतों में आकर छिप गए हैं। हम उन्हें तब तक खोजेंगे, जब तक इस इलाके को नहीं छोड़ देते। गांव के ही सरकारी स्कूल में इस वक्त वन विभाग ने अपना कैंप बना रखा है। जहां भेड़िए ने हमला किया है, उसके थोड़ी दूरी पर एक पिंजरा भी लगा रखा है। इसके अलावा एक पिंजरा अभी लाकर ऐसे ही रखा गया है। उसे भी लगाने की तैयारी है। दिनेश के घर के पास वन विभाग के कर्मी तैनात किए गए हैं। करीब 20 से ज्यादा कर्मी इस वक्त गांव में ही कैंप लगाए बैठे हैं। डीएफओ बोले- 7 टीमें तैनात की गई हैं
भेड़िए के हमलों को लेकर बहराइच के डीएफओ राम सिंह यादव लगातार सक्रिय हैं। देर रात वह भी गांव में ही डटे हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत करते हुए कहते हैं- जंगली जानवरों से बचाव के लिए इस वक्त विभाग की 7 टीमें लगाई गई हैं। इनमें 66 लोग हैं। अयोध्या, अमेठी, उन्नाव से भी टीमें यहां आ रही हैं। हमारे पास 3 थर्मल ड्रोन हैं, कैमरा ट्रैप और पिंजरा भी लगाया गया है। अभी यह क्लियर नहीं हो पाया है कि किस जानवर का हमला है? इसलिए लेपर्ड के हिसाब से भी पिंजरा लगाया गया है। इन इलाकों में हमलों को लेकर डीएफओ कहते हैं- यहां 50-60 किलोमीटर का जो एरिया है वो लेपर्ड, भेड़िया और सियार के लिए उपयुक्त है। यहां गन्ने के खेत हैं, जंगल हैं, सब इसी में छिप जाते हैं। हम ग्राम प्रधान, पंचायत सदस्यों के जरिए लोगों को जागरूक कर रहे हैं। विभाग के साथ लोग भी गश्त करें, ताकि दूसरी घटना को रोका जा सके। ————————– ये खबर भी पढ़ें… यूपी में एक लाख दो, डेढ़ लाख का बिल माफ, बिजली विभाग का JE बोला- पूरा पैसा कैश में चाहिए ‘आपके कनेक्शन पर डेढ़ लाख बकाया है। घर जाकर लोड चेक करुंगा तो यह 4 लाख पहुंच जाएगा। एक लाख दे दो, सब सेटलमेंट कर दूंगा। बस पैसा कैश चाहिए, ऊपर भी कैश ही देना पड़ता है। दो नंबर के पैसे का खाते से कोई लेनदेन नहीं होता।’ यह कहना है सिद्धार्थनगर में तैनात बिजली विभाग के जूनियर इंजीनियर जितेंद्र दुबे का। ये ‘दैनिक भास्कर’ के खुफिया कैमरे पर रुपए के बदले बकाया बिजली बिल के सेटलमेंट का पूरा गणित समझा रहे हैं। यानी बिजली विभाग भले ही घाटे में रहे, लेकिन अफसर खूब कमाई कर रहे हैं। पढ़िए पूरी खबर…