अगर आप किसी मुसीबत में हैं और पुलिस से मदद मांगते हैं, तो लाइव लोकेशन ट्रैक कर सकेंगे कि वो आप तक कितने समय में पहुंचेंगे? आपको अपना पता बताने की भी जरूरत नहीं होगी। बस यूपी 112 पर डायल करना होगा। जी हां, यूपी 112 सर्विस देश की पहली ऐसी सर्विस बनने जा रही, जो एंड्रॉयड इमरजेंसी लोकेशन सर्विस (ELS) पर काम करेगी। इसका ट्रायल चल रहा है और नवंबर में ही ये सेवा पूरे यूपी में शुरू हो जाएगी। ELS के जरिए जिस हैंडसेट से काल की गई है, उसकी लाइव लोकेशन यूपी 112 के कंट्रोल रूम को दिखने लगेगी। इससे मदद मांगने वाले को अपनी लोकेशन नहीं बतानी पड़ेगी। साथ ही आप पुलिस को लाइव ट्रैक कर पाएंगे। 112 सर्विस को और पावरफुल बनाने व रिस्पॉन्स टाइम कम करने के लिए ये कवायद की जा रही। इसके लिए पुलिस गाड़ियों की संख्या भी बढ़ाई जा रही है। यूपी 112 पर अभी कितनी काल आती हैं? कितनी जल्द पुलिस को पहुंचना होता है? कितनी गाड़ियां पुलिस के पास हैं? कितने पुलिसकर्मी यूपी 112 में काम कर रहे? आने वाले दिनों में और कितनी गाड़ियां इसकी फ्लीट में शामिल होंगी? ELS कैसे काम करेगी, पूरी प्रक्रिया जानिए… हर दिन 40 हजार लोग मांगते हैं यूपी पुलिस की मदद यूपी में हर दिन 40 हजार से ज्यादा फोन कॉल ‘यूपी 112’ पर आती हैं। इनमें पुलिस को क्विक रिस्पॉन्स करना होता है, मतलब मौके पर पहुंचना होता है। बड़े त्योहारों के समय पर ये संख्या डेढ़ गुना तक बढ़ जाती है। जैसे ,इस बार दीपावली के मौके पर यूपी 112 पर 59 हजार ऐसी कॉल आईं, जिनमें पुलिस काे मौके पर पहुंचना पड़ा। यूपी 112 के एक अधिकारी ने बताया कि आम दिनों में 112 पर 75 से 80 हजार कॉल आती हैं। इनमें से आधी कॉल ऐसी होती हैं, जिन पर पुलिस को मौके पर पहुंचने की जरूरत होती है। 7 मिनट में पहुंचती है पुलिस
उत्तर प्रदेश में हाइटेक यूपी 100 की शुरुआत नवंबर, 2016 में हुई थी। उस समय रिस्पॉन्स टाइम 25 मिनट तक का था। यानी शिकायत मिलने या सूचना मिलने के 25 मिनट के अंदर गाड़ी मौके पर पहुंच जाती थी। धीरे-धीरे इसमें बदलाव हुआ, गाड़ियों की संख्या बढ़ाई गई। रिस्पॉन्स टाइम घटकर अब 7 मिनट पर आ चुका है। इसे और कम करने के लिए गाड़ियों की संख्या बढ़ाई जा रही है। पुलिस की फ्लीट में कितनी गाड़ियां हैं?
पुलिस विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया- यूपी 112 के सुधार का ये दूसरा चरण है। पहले चरण में 4800 गाड़ियां यूपी 112 के पास थीं। दूसरा चरण दिसंबर 2023 से शुरू हुआ। मौजूदा समय में इसके पास 6,278 गाड़ियां हैं। इसमें टू व्हीलर गाड़ियों की संख्या करीब 2000 हजार है। बाकी फोर व्हीलर गाड़ियां हैं। 30 करोड़ की लागत से 284 और गाड़ियां यूपी 112 को दी जा रही हैं। इनमें 31 इनोवा क्रिस्टा, 166 महिंद्रा स्कॉर्पियो और 87 पल्सर गाड़ियों की खरीद की जा रही है। इन गाड़ियों के यूपी 112 के बेड़े में शामिल होने के बाद रिस्पॉन्स टाइम और बेहतर होने की उम्मीद है। पीआरवी पर यूज होता है एपल का टैबलेट
पीआरवी (पुलिस रिस्पॉन्स व्हीकल) पर त्वरित और बाधा रहित सर्विस देने के लिए एपल के टैबलेट का इस्तेमाल किया जा रहा है। टैबलेट के जरिए पीआरवी पर मौजूद पुलिसकर्मी को डिटेल मिलने और उस पर कार्रवाई करने में आसानी होती है। मौजूदा समय में यूपी 112 में एआई तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके अलावा मोबाइल डेटा टर्मिनल, नंबर मास्किंग, कॉलर द्वारा पीआरवी की लोकेशन ट्रैकिंग, लाइव जीपीएस मैप और सभी गाड़ियों पर बॉडी वार्न कैमरे लगाए गए हैं। 688 गाड़ियां ऐसी हैं, जहां PTZ कैमरे लगाए गए हैं। PTZ का फुल फॉर्म होता है- पैन यानी दाएं से बाएं या बाएं से दाएं देखना। टिल्ट यानी ऊपर और नीचे देखना और जूम यानी कैमरा जूम करके किसी को देखना। 3 शिफ्ट में 60 हजार पुलिसकर्मियों की ड्यूटी
यूपी 112 पर 3 शिफ्ट में 60 हजार पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। हर शिफ्ट में 20 हजार पुलिसकर्मी होते हैं। इसमें ड्राइवर के अलावा हर गाड़ी पर एक सबइंस्पेक्टर और दीवान या सिपाही की ड्यूटी होती है। यूपी के पूर्व डीजीपी ओम प्रकाश सिंह कहते हैं- यूपी की 112 सर्विस देश में ही नहीं, दुनियाभर में बेहतर इमरजेंसी सर्विस में से एक है। जब मैं डीजीपी था, उस समय ही सभी महत्वपूर्ण सेवाओं जैसे फायर सर्विस, एम्बुलेंस सर्विस, महिला हेल्पलाइन, चाइल्ड हेल्पलाइन, साइबर क्राइम सेल, जीआरपी, ट्रैफिक जैसी सेवाओं को एक नंबर से जोड़ा गया था। 2019 में शारजाह में इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम के तहत यूपी 112 को दुनिया भर में तीसरा स्थान मिला था। ——————— ये खबर भी पढ़ें… रामपुर CRPF कैंप पर आतंकी हमला किसने किया?, 18 साल से जेल में बंद सभी दोषी बरी यूपी के रामपुर में CRPF कैंप पर 31 दिसंबर, 2007 की रात आतंकी हमला हुआ। 29 अक्टूबर, 2025 को इलाहाबाद हाईकोर्ट (HC) ने 4 दोषियों की फांसी की सजा और एक की उम्रकैद की सजा रद कर दी। इन लोगों को सिर्फ आर्म्स एक्ट में दोषी पाते हुए 10 साल की सजा दी है। ये सभी 18 साल से जेलों में बंद हैं। ऐसे में ये माना जा रहा है कि सभी जल्द ही जेलों से बाहर आ सकते हैं। हाईकोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में पूरी तरह विफल रहा। पुलिस ने इस केस में जो गवाह बनाए, वो न तो इन लोगों को पहले से जानते थे। न ही इनकी कभी शिनाख्त परेड करवाई। ऐसे में वो कैसे जानते थे कि यही आरोपी हैं? या फिर इन्होंने ही जुर्म किया है। पढ़ें पूरी खबर…
उत्तर प्रदेश में हाइटेक यूपी 100 की शुरुआत नवंबर, 2016 में हुई थी। उस समय रिस्पॉन्स टाइम 25 मिनट तक का था। यानी शिकायत मिलने या सूचना मिलने के 25 मिनट के अंदर गाड़ी मौके पर पहुंच जाती थी। धीरे-धीरे इसमें बदलाव हुआ, गाड़ियों की संख्या बढ़ाई गई। रिस्पॉन्स टाइम घटकर अब 7 मिनट पर आ चुका है। इसे और कम करने के लिए गाड़ियों की संख्या बढ़ाई जा रही है। पुलिस की फ्लीट में कितनी गाड़ियां हैं?
पुलिस विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया- यूपी 112 के सुधार का ये दूसरा चरण है। पहले चरण में 4800 गाड़ियां यूपी 112 के पास थीं। दूसरा चरण दिसंबर 2023 से शुरू हुआ। मौजूदा समय में इसके पास 6,278 गाड़ियां हैं। इसमें टू व्हीलर गाड़ियों की संख्या करीब 2000 हजार है। बाकी फोर व्हीलर गाड़ियां हैं। 30 करोड़ की लागत से 284 और गाड़ियां यूपी 112 को दी जा रही हैं। इनमें 31 इनोवा क्रिस्टा, 166 महिंद्रा स्कॉर्पियो और 87 पल्सर गाड़ियों की खरीद की जा रही है। इन गाड़ियों के यूपी 112 के बेड़े में शामिल होने के बाद रिस्पॉन्स टाइम और बेहतर होने की उम्मीद है। पीआरवी पर यूज होता है एपल का टैबलेट
पीआरवी (पुलिस रिस्पॉन्स व्हीकल) पर त्वरित और बाधा रहित सर्विस देने के लिए एपल के टैबलेट का इस्तेमाल किया जा रहा है। टैबलेट के जरिए पीआरवी पर मौजूद पुलिसकर्मी को डिटेल मिलने और उस पर कार्रवाई करने में आसानी होती है। मौजूदा समय में यूपी 112 में एआई तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके अलावा मोबाइल डेटा टर्मिनल, नंबर मास्किंग, कॉलर द्वारा पीआरवी की लोकेशन ट्रैकिंग, लाइव जीपीएस मैप और सभी गाड़ियों पर बॉडी वार्न कैमरे लगाए गए हैं। 688 गाड़ियां ऐसी हैं, जहां PTZ कैमरे लगाए गए हैं। PTZ का फुल फॉर्म होता है- पैन यानी दाएं से बाएं या बाएं से दाएं देखना। टिल्ट यानी ऊपर और नीचे देखना और जूम यानी कैमरा जूम करके किसी को देखना। 3 शिफ्ट में 60 हजार पुलिसकर्मियों की ड्यूटी
यूपी 112 पर 3 शिफ्ट में 60 हजार पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। हर शिफ्ट में 20 हजार पुलिसकर्मी होते हैं। इसमें ड्राइवर के अलावा हर गाड़ी पर एक सबइंस्पेक्टर और दीवान या सिपाही की ड्यूटी होती है। यूपी के पूर्व डीजीपी ओम प्रकाश सिंह कहते हैं- यूपी की 112 सर्विस देश में ही नहीं, दुनियाभर में बेहतर इमरजेंसी सर्विस में से एक है। जब मैं डीजीपी था, उस समय ही सभी महत्वपूर्ण सेवाओं जैसे फायर सर्विस, एम्बुलेंस सर्विस, महिला हेल्पलाइन, चाइल्ड हेल्पलाइन, साइबर क्राइम सेल, जीआरपी, ट्रैफिक जैसी सेवाओं को एक नंबर से जोड़ा गया था। 2019 में शारजाह में इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम के तहत यूपी 112 को दुनिया भर में तीसरा स्थान मिला था। ——————— ये खबर भी पढ़ें… रामपुर CRPF कैंप पर आतंकी हमला किसने किया?, 18 साल से जेल में बंद सभी दोषी बरी यूपी के रामपुर में CRPF कैंप पर 31 दिसंबर, 2007 की रात आतंकी हमला हुआ। 29 अक्टूबर, 2025 को इलाहाबाद हाईकोर्ट (HC) ने 4 दोषियों की फांसी की सजा और एक की उम्रकैद की सजा रद कर दी। इन लोगों को सिर्फ आर्म्स एक्ट में दोषी पाते हुए 10 साल की सजा दी है। ये सभी 18 साल से जेलों में बंद हैं। ऐसे में ये माना जा रहा है कि सभी जल्द ही जेलों से बाहर आ सकते हैं। हाईकोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में पूरी तरह विफल रहा। पुलिस ने इस केस में जो गवाह बनाए, वो न तो इन लोगों को पहले से जानते थे। न ही इनकी कभी शिनाख्त परेड करवाई। ऐसे में वो कैसे जानते थे कि यही आरोपी हैं? या फिर इन्होंने ही जुर्म किया है। पढ़ें पूरी खबर…