यूपी में इन दिनों सुबह धुंध छाई हुई दिखाई दे रही है। आज गुरुवार सुबह भी मऊ, गोरखपुर, बलिया समेत पूर्वांचल में धुंध छाई रही। मऊ में तो विजिबिलिटी 30 मीटर रह गई। ऐसा 18 साल बाद दिख रहा है कि मार्च में धुंध छाई है। बुधवार की बात करें तो प्रयागराज में भी विजिबिलिटी घटकर सिर्फ 30 मीटर तक रह गई। बरेली में भी विजिबिलिटी 100 मीटर तक रह गई। बांदा 38.6 डिग्री तापमान के साथ सबसे गर्म रहा। आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के अनुसार, नमी से भरी पूर्वा हवाओं और हवा में धूल कणों के फंसने के कारण यह स्थिति बनी है। 14 मार्च से पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो सकता है। इससे 15 और 16 मार्च को तराई और पूर्वांचल में हल्की से मध्यम बारिश के आसार हैं। धुंध की तस्वीरें देखिए- मार्च 2008 में भी हुआ प्रदेश में ऐसा धुंध भरा मौसम
अतुल कुमार सिंह ने बताया कि नमी भरी पूर्वा हवाओं की वजह से मार्च 2008 में भी ऐसा मौसम देखने को मिला था। यह सामान्य मौसमी घटना है। उन्होंने कहा ग्लोबल वार्मिंग के कारण तापमान में आने वाले ये उतार-चढ़ाव भविष्य में खेती, स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं। सूरज चढ़ने के साथ कोहरा छंट तो गया है लेकिन यह अपने पीछे जलवायु संरक्षण के लिए कई गहरे सवाल छोड़ गया है।
किसानों के लिए हल्की बारिश फायदेमंद
डॉक्टरों ने लोगों को सलाह दी है कि दोपहर के समय तेज धूप में बाहर निकलने से बचें और पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। किसानों के लिए मौसम मिलाजुला असर डाल सकता है। हल्की बारिश जहां फसलों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है, वहीं तेज गर्मी और हवाओं से खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचने की भी आशंका है। 4 दिनों तक कैसा रहेगा मौसम अचानक धुंध की एक और वजह?
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के मौसम वैज्ञानिक मनोज श्रीवास्तव ने बताया- बिहार से मराठवाड़ा के बीच में लो-प्रेशर बना हुआ है। इस वजह से पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ भागों में सुबह के वक्त कोहरे जैसे हालात बन रहे हैं। हवा सतह से नीचे चल रही है। इसलिए तापमान में थोड़ी गिरावट देखी गई है, लेकिन दिन चढ़ने के साथ तापमान में वृद्धि होगी। उन्होंने बताया- आगामी सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ की वजह से 14 मार्च से प्रदेश के तापमान में धीरे-धीरे गिरावट आएगी। 15 मार्च से प्रदेश के तराई इलाकों के साथ-साथ पूर्वांचल के कुछ भागों में इस सीजन में पहली बार हल्की बारिश होगी। यह दौरान कुछ दिन चल चलेगा। बाद में तापमान में बढ़ोतरी शुरू होगी। मार्च में ही क्यों बढ़ रही है गर्मी?
स्काईमेट वेदर के उपाध्यक्ष महेश पलावत का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में जलवायु परिवर्तन (क्लाइमेट चेंज) का असर मौसम पर साफ दिखाई दे रहा है। इसी कारण मौसम का पैटर्न तेजी से बदल रहा है। गर्मी पहले की तुलना में जल्दी शुरू हो रही है। इसका असर यह है कि अब तापमान ज्यादा तेजी से बढ़ने लगा है। गर्म दिनों की संख्या भी बढ़ रही है। कई बार लू (हीटवेव) का दौर भी पहले से ज्यादा दिनों तक चलता है। बीते कुछ सालों में देश के कई शहरों में गर्मी के पुराने रिकॉर्ड भी टूटे हैं। कुछ जगहों पर तापमान 48 डिग्री से ऊपर तक दर्ज किया गया है। लंबे समय तक चल सकती है हीटवेव IMD के अनुमान के अनुसार, इस साल कुछ इलाकों में लंबे समय तक हीटवेव की स्थिति बन सकती है। इसका मतलब है कि कई शहरों में लगातार कई दिनों तक तापमान बहुत ज्यादा रह सकता है और लोगों को तेज गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। कब मानी जाती है हीटवेव? मौसम विभाग के मुताबिक, हीटवेव तब मानी जाती है, जब मैदानों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे ज्यादा पहुंच जाए या फिर सामान्य तापमान से 4 से 6 डिग्री ज्यादा दर्ज किया जाए। ऐसी स्थिति में लोगों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता है और लू लगने का खतरा बढ़ जाता है। गर्मी से फसलों को होगा नुकसान बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में कृषि विभाग के प्रोफेसर पीके सिंह कहते हैं- मार्च महीना किसानों के लिए चुनौती भरा साबित हो सकता है। तापमान बढ़ने का असर रबी की फसल पर पड़ेगा, खासतौर गेहूं पर। गर्मी से दाने पूरी तरह विकसित नहीं होंगे। इससे पैदावार कम होगी। पीके सिंह के अनुसार, गर्म हवाएं चलने से सरसों, चना और मटर जैसी फसल को भी नुकसान हो सकता है। बढ़ते तापमान से खेतों की मिट्टी जल्दी सूख जाती है। इससे सिंचाई का खर्च बढ़ता है। फसलों पर तनाव पड़ता है। ———————– ये खबर भी पढ़िए- क्रिकेटर कुलदीप की शादी में होगी 20 हजार की थाली: कानपुर में घर सजा, मसूरी में 14 मार्च को लेंगे 7 फेरे भारतीय क्रिकेट टीम के स्पिनर कुलदीप यादव अपनी बचपन की दोस्त वंशिका सिंह के साथ शादी करने जा रहे हैं। इसमें शामिल होने के लिए कानपुर से परिवार वाले और रिश्तेदार मसूरी रवाना हो गए हैं। शादी 14 मार्च (शनिवार) को है। दैनिक भास्कर की टीम कुलदीप के घर पर पहुंची। यहां पर कुलदीप का घर बंद था। लेकिन, घर को रंग-बिरंगी लाइटों, झालरों और फूलों से सजा है। पढ़ें पूरी खबर…
अतुल कुमार सिंह ने बताया कि नमी भरी पूर्वा हवाओं की वजह से मार्च 2008 में भी ऐसा मौसम देखने को मिला था। यह सामान्य मौसमी घटना है। उन्होंने कहा ग्लोबल वार्मिंग के कारण तापमान में आने वाले ये उतार-चढ़ाव भविष्य में खेती, स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं। सूरज चढ़ने के साथ कोहरा छंट तो गया है लेकिन यह अपने पीछे जलवायु संरक्षण के लिए कई गहरे सवाल छोड़ गया है।
किसानों के लिए हल्की बारिश फायदेमंद
डॉक्टरों ने लोगों को सलाह दी है कि दोपहर के समय तेज धूप में बाहर निकलने से बचें और पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। किसानों के लिए मौसम मिलाजुला असर डाल सकता है। हल्की बारिश जहां फसलों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है, वहीं तेज गर्मी और हवाओं से खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचने की भी आशंका है। 4 दिनों तक कैसा रहेगा मौसम अचानक धुंध की एक और वजह?
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के मौसम वैज्ञानिक मनोज श्रीवास्तव ने बताया- बिहार से मराठवाड़ा के बीच में लो-प्रेशर बना हुआ है। इस वजह से पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ भागों में सुबह के वक्त कोहरे जैसे हालात बन रहे हैं। हवा सतह से नीचे चल रही है। इसलिए तापमान में थोड़ी गिरावट देखी गई है, लेकिन दिन चढ़ने के साथ तापमान में वृद्धि होगी। उन्होंने बताया- आगामी सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ की वजह से 14 मार्च से प्रदेश के तापमान में धीरे-धीरे गिरावट आएगी। 15 मार्च से प्रदेश के तराई इलाकों के साथ-साथ पूर्वांचल के कुछ भागों में इस सीजन में पहली बार हल्की बारिश होगी। यह दौरान कुछ दिन चल चलेगा। बाद में तापमान में बढ़ोतरी शुरू होगी। मार्च में ही क्यों बढ़ रही है गर्मी?
स्काईमेट वेदर के उपाध्यक्ष महेश पलावत का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में जलवायु परिवर्तन (क्लाइमेट चेंज) का असर मौसम पर साफ दिखाई दे रहा है। इसी कारण मौसम का पैटर्न तेजी से बदल रहा है। गर्मी पहले की तुलना में जल्दी शुरू हो रही है। इसका असर यह है कि अब तापमान ज्यादा तेजी से बढ़ने लगा है। गर्म दिनों की संख्या भी बढ़ रही है। कई बार लू (हीटवेव) का दौर भी पहले से ज्यादा दिनों तक चलता है। बीते कुछ सालों में देश के कई शहरों में गर्मी के पुराने रिकॉर्ड भी टूटे हैं। कुछ जगहों पर तापमान 48 डिग्री से ऊपर तक दर्ज किया गया है। लंबे समय तक चल सकती है हीटवेव IMD के अनुमान के अनुसार, इस साल कुछ इलाकों में लंबे समय तक हीटवेव की स्थिति बन सकती है। इसका मतलब है कि कई शहरों में लगातार कई दिनों तक तापमान बहुत ज्यादा रह सकता है और लोगों को तेज गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। कब मानी जाती है हीटवेव? मौसम विभाग के मुताबिक, हीटवेव तब मानी जाती है, जब मैदानों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे ज्यादा पहुंच जाए या फिर सामान्य तापमान से 4 से 6 डिग्री ज्यादा दर्ज किया जाए। ऐसी स्थिति में लोगों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता है और लू लगने का खतरा बढ़ जाता है। गर्मी से फसलों को होगा नुकसान बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में कृषि विभाग के प्रोफेसर पीके सिंह कहते हैं- मार्च महीना किसानों के लिए चुनौती भरा साबित हो सकता है। तापमान बढ़ने का असर रबी की फसल पर पड़ेगा, खासतौर गेहूं पर। गर्मी से दाने पूरी तरह विकसित नहीं होंगे। इससे पैदावार कम होगी। पीके सिंह के अनुसार, गर्म हवाएं चलने से सरसों, चना और मटर जैसी फसल को भी नुकसान हो सकता है। बढ़ते तापमान से खेतों की मिट्टी जल्दी सूख जाती है। इससे सिंचाई का खर्च बढ़ता है। फसलों पर तनाव पड़ता है। ———————– ये खबर भी पढ़िए- क्रिकेटर कुलदीप की शादी में होगी 20 हजार की थाली: कानपुर में घर सजा, मसूरी में 14 मार्च को लेंगे 7 फेरे भारतीय क्रिकेट टीम के स्पिनर कुलदीप यादव अपनी बचपन की दोस्त वंशिका सिंह के साथ शादी करने जा रहे हैं। इसमें शामिल होने के लिए कानपुर से परिवार वाले और रिश्तेदार मसूरी रवाना हो गए हैं। शादी 14 मार्च (शनिवार) को है। दैनिक भास्कर की टीम कुलदीप के घर पर पहुंची। यहां पर कुलदीप का घर बंद था। लेकिन, घर को रंग-बिरंगी लाइटों, झालरों और फूलों से सजा है। पढ़ें पूरी खबर…