यूपी में बेमौसम आंधी- बारिश और ओले से फसलों को भारी नुकसान हुआ है। गेहूं, सरसों और अफीम की फसल खेतों में गिर गईं। राजधानी लखनऊ से सटे बाराबंकी में 40 करोड़ से ज्यादा कीमत की अफीम बर्बाद हो गई। किसानों का कहना है- बेमौसम बारिश की वजह से हमारी फसलें बर्बाद हो गईं हैं। ऐसे ही 2-3 दिन और पानी बरसा, तो फिर हम दाने-दाने को मोहताज हो जाएंगे। गेहूं और सरसों पककर तैयार थीं। लेकिन बारिश ने सब चौपट कर दिया। असमय बारिश को देखकर मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों से कहा है कि वे खुद फील्ड में उतरें। स्थिति का जायजा लें और प्रभावित क्षेत्रों में फसलों को हुए नुकसान का तत्काल आकलन कराएं। उन्होंने सख्त लहजे में कहा, यह काम केवल कागजी न होकर जमीनी स्थिति के आधार पर किया जाए, ताकि किसानों को सही और समय पर सहायता मिल सके। यूपी में 24 घंटे में यूपी के 23 जिलों में बारिश हुई। 8 से ज्यादा ऐसे रहे, जहां जमकर ओले गिरे हैं। ‘दैनिक भास्कर’ बाराबंकी जिले में पहुंचा और किसानों की परेशानी, उनके दर्द को समझाने की कोशिश की। पढ़िए रिपोर्ट… बाराबंकी में अफीम के डोडा काले पड़े, दाने निकलना मुश्किल
बाराबंकी में हमें अफीम के खेत पर किसान इंद्रजीत मिले। वो परेशान थे। परेशानी का कारण पूछा तो उन्होंने कहा- नवंबर में हमने अफीत की खेती की थी, मार्च में फूल आए। अब डोडे (फल) लग गए थे। अप्रैल-मई में काटकर सरकार को देने होते हैं, लेकिन अब मार्च में बेमौसम बारिश हो गई है। इससे अफीम के जो पौधे बारिश-ओले की वजह से नीचे गिर गए हैं। उनके डोडे सड़ने लगेंगे। दाना कमजोर हो जाएगा। अगर पूरी फसल नहीं मिली, तो नुकसान होना तय है। अब आप समझिए कि सरकार को मौसम की मार से कोई लेनादेना नहीं है, क्योंकि सरकार ने जितना कोटा तय किया है, उतनी फसल तो हमें सरकार को देनी ही पड़ेगी। जिले में 3 हजार किसान अफीम उगाते हैं, सब परेशान
किसान सूरजपाल कहते हैं- सिर्फ बाराबंकी में 3 हजार किसान अफीम की खेती से जुड़े हुए हैं। एक सीजन में करीब 5 हजार किलोग्राम अफीम पैदा होती है। 1 किग्रा अफीम 10 से 12 लाख रुपए में बिकती है। एक सीजन में इसका 500 करोड़ से ज्यादा का कारोबार होता है। अब बारिश होने की वजह से दिक्कत बढ़ गई है। हमने पूछा- जो फसल खराब हुई है, उसका क्या होता है। उन्होंने बताया- सरकारी अफसर आते हैं, अपने सामने खराब फसल को जमीन में दफनवा देते हैं। तेज हवाओं से सरसों का दाना गिरा, अब निकालना मुश्किल
किसान विक्रम प्रसाद से भी हमने बात की। वह कहते हैं- गेहूं, सरसों, मटर, चना बाेया था। इस बार गेहूं बोने में थोड़ा लेट हो गया था। अब फसल कटने वाली थी, लेकिन बारिश हो गई। अब गेहूं खेत में गिर गया है। पानी लगने के बाद अब दाना कमजोर रह जाएगा। पैदावार कम हो जाएगी। सरसों की फसल पक चुकी थी। अभी उसे काट नहीं पाए थे, तेज हवाओं से दाना खेत में गिर गया है। अब हम ठीक से सरसों का दाना निकाल नहीं पाएंगे। अगर 2-3 दिन ऐसे बारिश हुई, तो पूरा सत्यानाश हो जाएगा। विक्रम कहते हैं- आलू किसान पहले ही अपनी फसल कोल्ड स्टोरेज पहुंचा चुके हैं, इसलिए वो नुकसान बच गए हैं। किसान बोले- नुकसान के बाद घर कैसे चलाएंगे?
किसान वीरेंद्र कुमार कहते हैं- बारिश के साथ ओले गिरने से दिक्कत हुई है। गेहूं की फसल का दाना भीग चुका है, ज्यादा बारिश हुई तो फसल निकालने में दिक्कत आ जाएगी। कुछ भी काम का नहीं रहेगा, बाजार में सही कीमत नहीं मिलती है, हमें तो इसका मुआवजा भी नहीं मिल सकेगा। किसान तो फसल के लिए मेहनत तो करता है, लेकिन मौसम ही बिगड़ जाए, तो क्या करेंगे। सबको तो फसल बीमा का फायदा नहीं मिलता है। जो नुकसान हो गया है, उसके बाद यही सोच रहे हैं कि घर कैसे चलाएंगे। खीरे की फसल को पॉलीथिन से ढका
किसानों से बात करने के बाद हम रामसनेहीघाट तक पहुंचे। यहां किसान राजन से मुलाकात हुई, वो कहते हैं- हमने खेत में सरसों बोई थी। आज बारिश के साथ ओले भी गिरे हैं। कुछ सरसों हमने काट ली थी, लेकिन जो खेतों में ही पड़ी है, उसमें से दाना निकालने में दिक्कत आएगी। बगल के खेत में खीरे की फसल लगी हुई थी। फसल को बचाने के लिए पॉलिथीन से ढकी गई थी। यहां किसान प्रियांशू कहते हैं- खीरे की फसल में पानी भर गया है। अगर 2-3 दिन मौसम ऐसा रहा, तो दिक्कत हो जाएगी। क्योंकि तब फसल सड़ने लगेगी। अब और जिलों में बारिश के बाद हुए नुकसान को जानिए अब जानिए, अचानक क्यों बदला मौसम पश्चिम विक्षोभ एक्टिव होने से तेज बारिश
मौसम विभाग की मानें तो पश्चिमी विक्षोभ के एक्टिव होने की वजह से पूरे प्रदेश में मौसम बदल गया है। अगले 2 दिन मौसम ऐसे ही बिगड़ा रहेगा। 40 किमी/घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी। लखनऊ के मौसम वैज्ञानिक अतुल सिंह ने बताया- पश्चिमी विक्षोभ की वजह से पूरे प्रदेश में बारिश की संभावना दिख रही है। 2 दिन बाद इसका असर कम होने लगेगा। पिछले 24 घंटे में मथुरा में सबसे तेज 87 किमी/घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं। हवा की रफ्तार नोएडा में 59 किमी, आगरा और बुलंदशहर में 57 किमी/घंटा दर्ज की गई। सबसे ज्यादा बारिश बागपत और बुलंदशहर में करीब 6 मिमी. रिकॉर्ड हुई। 2 दिनों तक कैसा रहेगा मौसम 21 मार्च- पश्चिमी-पूर्वी यूपी के कुछ जिलों में बारिश हो सकती है। 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी। तापमान में 2–3 डिग्री की गिरावट हो सकती है। 22 मार्च- पश्चिमी-पूर्वी यूपी के ज्यादातर जिलों में बादल छाए रहेंगे। कहीं-कहीं बारिश हो सकती है। तेज हवाएं भी चलेंगी। 24 घंटे में 25 से ज्यादा जिलों में बारिश; सबसे ज्यादा मथुरा-अलीगढ़, बागपत में बादल बरसे ….………….. ये पढ़ें – ललितपुर में ओले की चादर बिछी, 25 जिलों में बारिश:काशी-प्रयागराज में धूल भरी आंधी, UP में बिजली गिरने से 5 की मौत यूपी में शुक्रवार को मौसम अचानक बिगड़ गया। ललितपुर में दोपहर बाद जमकर ओले गिरे। खड़ी फसल पर सफेद चादर जैसी बिछ गई। इससे किसान काफी चिंता में दिखे। लखनऊ में सुबह 10 बजे अचानक अंधेरा छा गया। तेज हवा के साथ बारिश हुई। कुछ इलाकों में ओले भी गिरे। इससे पहले अयोध्या, बाराबंकी, सीतापुर और सिद्धार्थनगर में भी तेज बारिश के साथ ओले गिरे। झांसी में भी दोपहर बाद अंधेरा छा गया। यहां भी बारिश शुरु हो गई। प्रयागराज में धूल भरी आंधी के बाद मौसम बिगड़ गया। मथुरा में तेज बारिश से सड़कों पर पानी भर गया। स्कूली बच्चे और ऑफिस जा रहे लोग रेनकोट और छातों के साथ नजर आए। पढ़िए पूरी खबर…
बाराबंकी में हमें अफीम के खेत पर किसान इंद्रजीत मिले। वो परेशान थे। परेशानी का कारण पूछा तो उन्होंने कहा- नवंबर में हमने अफीत की खेती की थी, मार्च में फूल आए। अब डोडे (फल) लग गए थे। अप्रैल-मई में काटकर सरकार को देने होते हैं, लेकिन अब मार्च में बेमौसम बारिश हो गई है। इससे अफीम के जो पौधे बारिश-ओले की वजह से नीचे गिर गए हैं। उनके डोडे सड़ने लगेंगे। दाना कमजोर हो जाएगा। अगर पूरी फसल नहीं मिली, तो नुकसान होना तय है। अब आप समझिए कि सरकार को मौसम की मार से कोई लेनादेना नहीं है, क्योंकि सरकार ने जितना कोटा तय किया है, उतनी फसल तो हमें सरकार को देनी ही पड़ेगी। जिले में 3 हजार किसान अफीम उगाते हैं, सब परेशान
किसान सूरजपाल कहते हैं- सिर्फ बाराबंकी में 3 हजार किसान अफीम की खेती से जुड़े हुए हैं। एक सीजन में करीब 5 हजार किलोग्राम अफीम पैदा होती है। 1 किग्रा अफीम 10 से 12 लाख रुपए में बिकती है। एक सीजन में इसका 500 करोड़ से ज्यादा का कारोबार होता है। अब बारिश होने की वजह से दिक्कत बढ़ गई है। हमने पूछा- जो फसल खराब हुई है, उसका क्या होता है। उन्होंने बताया- सरकारी अफसर आते हैं, अपने सामने खराब फसल को जमीन में दफनवा देते हैं। तेज हवाओं से सरसों का दाना गिरा, अब निकालना मुश्किल
किसान विक्रम प्रसाद से भी हमने बात की। वह कहते हैं- गेहूं, सरसों, मटर, चना बाेया था। इस बार गेहूं बोने में थोड़ा लेट हो गया था। अब फसल कटने वाली थी, लेकिन बारिश हो गई। अब गेहूं खेत में गिर गया है। पानी लगने के बाद अब दाना कमजोर रह जाएगा। पैदावार कम हो जाएगी। सरसों की फसल पक चुकी थी। अभी उसे काट नहीं पाए थे, तेज हवाओं से दाना खेत में गिर गया है। अब हम ठीक से सरसों का दाना निकाल नहीं पाएंगे। अगर 2-3 दिन ऐसे बारिश हुई, तो पूरा सत्यानाश हो जाएगा। विक्रम कहते हैं- आलू किसान पहले ही अपनी फसल कोल्ड स्टोरेज पहुंचा चुके हैं, इसलिए वो नुकसान बच गए हैं। किसान बोले- नुकसान के बाद घर कैसे चलाएंगे?
किसान वीरेंद्र कुमार कहते हैं- बारिश के साथ ओले गिरने से दिक्कत हुई है। गेहूं की फसल का दाना भीग चुका है, ज्यादा बारिश हुई तो फसल निकालने में दिक्कत आ जाएगी। कुछ भी काम का नहीं रहेगा, बाजार में सही कीमत नहीं मिलती है, हमें तो इसका मुआवजा भी नहीं मिल सकेगा। किसान तो फसल के लिए मेहनत तो करता है, लेकिन मौसम ही बिगड़ जाए, तो क्या करेंगे। सबको तो फसल बीमा का फायदा नहीं मिलता है। जो नुकसान हो गया है, उसके बाद यही सोच रहे हैं कि घर कैसे चलाएंगे। खीरे की फसल को पॉलीथिन से ढका
किसानों से बात करने के बाद हम रामसनेहीघाट तक पहुंचे। यहां किसान राजन से मुलाकात हुई, वो कहते हैं- हमने खेत में सरसों बोई थी। आज बारिश के साथ ओले भी गिरे हैं। कुछ सरसों हमने काट ली थी, लेकिन जो खेतों में ही पड़ी है, उसमें से दाना निकालने में दिक्कत आएगी। बगल के खेत में खीरे की फसल लगी हुई थी। फसल को बचाने के लिए पॉलिथीन से ढकी गई थी। यहां किसान प्रियांशू कहते हैं- खीरे की फसल में पानी भर गया है। अगर 2-3 दिन मौसम ऐसा रहा, तो दिक्कत हो जाएगी। क्योंकि तब फसल सड़ने लगेगी। अब और जिलों में बारिश के बाद हुए नुकसान को जानिए अब जानिए, अचानक क्यों बदला मौसम पश्चिम विक्षोभ एक्टिव होने से तेज बारिश
मौसम विभाग की मानें तो पश्चिमी विक्षोभ के एक्टिव होने की वजह से पूरे प्रदेश में मौसम बदल गया है। अगले 2 दिन मौसम ऐसे ही बिगड़ा रहेगा। 40 किमी/घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी। लखनऊ के मौसम वैज्ञानिक अतुल सिंह ने बताया- पश्चिमी विक्षोभ की वजह से पूरे प्रदेश में बारिश की संभावना दिख रही है। 2 दिन बाद इसका असर कम होने लगेगा। पिछले 24 घंटे में मथुरा में सबसे तेज 87 किमी/घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं। हवा की रफ्तार नोएडा में 59 किमी, आगरा और बुलंदशहर में 57 किमी/घंटा दर्ज की गई। सबसे ज्यादा बारिश बागपत और बुलंदशहर में करीब 6 मिमी. रिकॉर्ड हुई। 2 दिनों तक कैसा रहेगा मौसम 21 मार्च- पश्चिमी-पूर्वी यूपी के कुछ जिलों में बारिश हो सकती है। 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी। तापमान में 2–3 डिग्री की गिरावट हो सकती है। 22 मार्च- पश्चिमी-पूर्वी यूपी के ज्यादातर जिलों में बादल छाए रहेंगे। कहीं-कहीं बारिश हो सकती है। तेज हवाएं भी चलेंगी। 24 घंटे में 25 से ज्यादा जिलों में बारिश; सबसे ज्यादा मथुरा-अलीगढ़, बागपत में बादल बरसे ….………….. ये पढ़ें – ललितपुर में ओले की चादर बिछी, 25 जिलों में बारिश:काशी-प्रयागराज में धूल भरी आंधी, UP में बिजली गिरने से 5 की मौत यूपी में शुक्रवार को मौसम अचानक बिगड़ गया। ललितपुर में दोपहर बाद जमकर ओले गिरे। खड़ी फसल पर सफेद चादर जैसी बिछ गई। इससे किसान काफी चिंता में दिखे। लखनऊ में सुबह 10 बजे अचानक अंधेरा छा गया। तेज हवा के साथ बारिश हुई। कुछ इलाकों में ओले भी गिरे। इससे पहले अयोध्या, बाराबंकी, सीतापुर और सिद्धार्थनगर में भी तेज बारिश के साथ ओले गिरे। झांसी में भी दोपहर बाद अंधेरा छा गया। यहां भी बारिश शुरु हो गई। प्रयागराज में धूल भरी आंधी के बाद मौसम बिगड़ गया। मथुरा में तेज बारिश से सड़कों पर पानी भर गया। स्कूली बच्चे और ऑफिस जा रहे लोग रेनकोट और छातों के साथ नजर आए। पढ़िए पूरी खबर…