यूपी में अंडे पर एक्सपायरी डेट नहीं लिखी जाएगी:अफसर बोले- नए नियम से रेट बढ़ेंगे, रोज डेढ़ करोड़ अंडे दूसरे राज्यों से आते हैं

यूपी में अंडों पर फिलहाल एक्सपायरी डेट नहीं लिखी जा सकेगी। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग (FSDA) ने हाथ खड़े कर दिए हैं। FSDA का कहना है- अगर ये नियम सख्ती से लागू होते हैं, तो यूपी में अंडों की शॉर्टेज आ जाएगी। रेट भी काफी बढ़ जाएंगे। वहीं, यूपी कुक्कुट विकास समिति के अध्यक्ष वीपी सिंह कहते हैं- विभाग बड़े व्यापारियों के दबाव में है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि यूपी सरकार के इस आदेश को लागू करने में असली अड़चन क्या है? किसे नुकसान है? यूपी में अंडा किन राज्यों से आता है? उन राज्यों में क्या नियम लागू हैं? इन सवालों के जवाब इस रिपोर्ट में पढ़िए… 2 वजह से नियम लागू नहीं हो पा रहे… पहली वजह- दूसरे राज्यों ने नहीं आ पाएंगे अंडे
यूपी में हर दिन लोग 3.35 करोड़ अंडे खा जाते हैं। ये आंकड़े यूपी को सबसे ज्यादा खपत वाला राज्य बनाते हैं। यूपी के पोल्ट्री फार्मों में 1.80 करोड़ अंडों का प्रोडक्शन होता है। बाकी अंडे हरियाणा, पंजाब, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु से आते हैं। इन 5 राज्यों से यूपी में रोज करीब 1.55 करोड़ अंडों की सप्लाई होती है। यह कुल खपत का 46% है। दरअसल, इन 5 राज्यों में अंडों पर स्टैंपिंग सिर्फ उन अंडों पर होती है, जिन्हें विदेश में एक्सपोर्ट करना होता है। यूपी में आने वाले अंडों पर कोई स्टैंपिंग नहीं होती। ऐसे में यूपी में अंडे पर प्रोडक्शन और एक्सपायरी डेट लिखने के नियम लागू होते ही दूसरे राज्यों के अंडे मार्केट में बिक नहीं पाएंगे। इससे तय है कि पूरे यूपी में अंडे की शॉर्टेज हो जाएगी। दूसरी वजह- मार्केट और कोल्ड स्टोरेज में रखने वाले अंडों में कंफ्यूजन
यह भी बताया जा रहा है कि अंडे को अगर 5 डिग्री सेल्सियस तापमान पर रखा जाए, तो इसे 35 से 45 दिनों तक इस्तेमाल किया जा सकता है। 25 से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान पर रखने पर यही अंडे 14 दिनों तक इस्तेमाल किए जा सकते हैं। अब प्रोडक्शन और एक्सपायरी डेट मुर्गी के अंडा देने के बाद लिखनी होगी। ऐसे में यह तय करना मुश्किल होगा कि कौन-सा अंडा सीधे मार्केट में जाएगा? कौन-सा अंडा कोल्ड स्टोरेज में रखा जाएगा? यही वजह है कि FSDA नियम लागू नहीं कर पा रहा है। 5 राज्यों को लिखा जाएगा लेटर
FSDA के एक वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं- यूपी में जिन 5 राज्यों से अंडों की सप्लाई होती है, उनमें हरियाणा सबसे बड़ा सप्लायर है। यूपी में अंडों पर स्टैंपिंग के नियम लागू होने से पहले पंजाब, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, हरियाणा और तमिलनाडु के शासन को लेटर लिखे जाएंगे। इन राज्यों की बेस्ट प्रैक्टिस के बारे में पूछा जा रहा है कि वहां अंडों की एक्सपायरी को लेकर क्या नियम हैं? इन राज्यों से अनुरोध भी किया जाएगा कि वो इस तरह के नियम बनाएं, जिससे अंडों की डिमांड और सप्लाई में कोई अड़चन न आए। आरोप- बड़े व्यापारी के दबाव में नहीं लागू हो पा रहा आदेश
यूपी कुक्कुट विकास समिति के अध्यक्ष वीपी सिंह कहते हैं- विभाग बहानेबाजी कर रहा है। ये लोग यूपी के बड़े व्यापारियों के दबाव में हैं। पशुपालन विभाग की ओर से जो आंकड़े सप्लाई और उत्पादन के दिए गए हैं, वो आंकड़े 2012 के हैं। यूपी में अंडों का उत्पादन काफी बढ़ चुका है। वीपी सिंह का कहना है- केंद्र सरकार ने फरवरी, 2023 में यह नियम बनाया था। अगर विभाग की इसे लागू करने की मंशा होती तो वो संबंधित राज्यों से भी कह सकता था कि जिस तरह एक्सपोर्ट किए जा रहे अंडों पर स्टैंपिंग की जाती है, उसी तरह यूपी में सप्लाई होने वाले अंडों पर भी की जाए। जहां तक खुले बाजार में बिकने वाले अंडों और स्टोरेज के अंडों की पहचान का सवाल है। इसके लिए सुझाव दिया गया था कि दोनों के लिए अलग-अलग इंक का इस्तेमाल किया जाए। जो अंडे कोल्ड स्टाेर में जाने वाले हैं, उन पर ग्रे स्याही से स्टैंपिंग की जाए। जो अंडे सीधे खुले बाजार में जा रहे हैं, उन पर पिंक स्याही से स्टैंपिंग की जाए। बड़े व्यापारी और एनईसीसी को क्या फायदा
वीपी सिंह बताते हैं- बड़े व्यापारी और खासकर एनईसीसी (नेशनल एग कोऑर्डिनेशन कमेटी) अंडों की कालाबाजारी करने के लिए इस तरह का आदेश लागू नहीं होने दे रही। ये अपने हिसाब से अंडों का रेट गिराते और उठाते हैं। अंडों का रेट डाउन करके बाजार से अंडे ले लेकर स्टोर कर लेते हैं। जब अंडों की शार्टेज होती है, तो यही महंगे अंडे स्टोर से निकाल कर बेच देते हैं। यूपी में बरवाला (पंजाब) का रेट फॉलो किया जाता है। यहां बीते एक सप्ताह में अंडे के रेट में 30 रुपए प्रति 100 अंडे का अंतर आ गया है। 23 मार्च को अंडे का रेट 385 रुपए प्रति 100 अंडा था। 30 मार्च को ये रेट 415 रुपए हो गया। इसे अगर डेली होने वाली सप्लाई से हिसाब लगाया जाए ताे अंतर करीब एक करोड़ रुपए का आ जाएगा। NECC के सीईओ बोले- छोटे व्यापारियों को दिक्कत होनी तय
एनईसीसी के सीईओ अजीत सिंह कहते हैं- हमें स्टैंपिंग से कोई आपत्ति नहीं है। हमने अधिकारियों के सामने ये बात रखी थी कि क्या हमारे पास इतने संसाधन हैं कि इसे लागू कर सकें? यूपी में जो बाहर से अंडे आते हैं, उन पर स्टैंपिंग कैसे होगी? स्टैंपिंग सीमित क्षेत्र में होगी और व्यापार राष्ट्रीय स्तर पर होगा, तो इसमें एकरूपता नहीं आ पाएगी। जिस तरह फल और सब्जियों पर स्टैंपिंग नहीं हो सकती, उसी तरह अंडे पर भी नहीं हाे सकती। जहां तक रही बात अंडे को चेक करने की, तो सबसे आसान विधि जो महिलाएं आज भी परखने के लिए इस्तेमाल करती हैं। वह है पानी में अंडे को डाल कर देख लें। अगर अंडा पानी में डूब जाता है तो सही और सतह पर ऊपर आ जाता है, तो खराब है। अजीत कहते हैं- कोल्ड स्टोरेज में रखे अंडे के लिए रिटेलर तक पहुंचाने के लिए पूरी चेन होनी जरूरी है। मसलन, कोल्ड स्टोरेज से अंडा रेफ्रिजरेटर वैन से रिटेलर के यहां पहुंचे। यहां भी रेफ्रिजरेटर में रखा जाए। रेफ्रिजरेटर से बाहर आने के बाद अधिकतम 48 घंटे में उसका इस्तेमाल होना चाहिए। इसके अलावा जो छोटे व्यापारी हैं, उनकी स्टैंपिंग की वजह से कॉस्ट बढ़ जाएगी। इससे अंडे की कीमत भी बढ़ जाएगी। कमिश्नर ने कहा- ये आसान मामला नहीं
FSDA की कमिश्नर रौशन जैकब कहती हैं- यह एक आसान मामला नहीं है। हमारे कई पाॅइंट हैं। मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर, लोकल छोटे पैमाने के अंडा उत्पादकों के हित और इसको लागू कैसे किया जाएगा? इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए कोई आदेश जारी किया जाना चाहिए। अंडों पर स्टैंपिंग के लिए मैं कृषि उत्पादन आयुक्त और पशुपालन विभाग के अधिकारियों से बात करने के बाद ही कोई आदेश जारी करूंगी। —————————– अब भास्कर के सबसे बड़े सर्वे में हिस्सा लीजिए…
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