इस्तीफा देने वाले रिंकू सिंह बोले- नौकरी नहीं छोड़ना चाहता:मुझे सरकारी सिस्टम पसंद, प्रताड़ित नहीं किया गया

यूपी में वकीलों के सामने उठक-बैठक करने वाले IAS रिंकू सिंह राही एक बार फिर सुर्खियों में हैं। मंगलवार को उनके नौकरी से इस्तीफा देने की बात सामने आई। इसके बाद दैनिक भास्कर ने रिंकू सिंह से बात की। उन्होंने बताया- मैंने इस्तीफा नहीं दिया है। मीडिया में गलत बातें चल रही हैं। मैंने 26 मार्च को राष्ट्रपति को एक पत्र लिखा था, जिसमें टेक्निकल रेजिगनेशन मांगा। इसे आप एक विकल्प या अनुरोध के रूप में समझिए। इसका मतलब यह है कि अगर उनसे इस पद पर काम नहीं लिया जा पा रहा है, तो उन्हें उनकी मूल सेवा (विभाग) में वापस भेज दिया जाए। दरअसल, रिंकू सिंह IAS बनने से पहले PCS अधिकारी थे। अब वह फिर से PCS कैडर में लौटकर काम करना चाहते हैं। वह कहते हैं- कुछ अधिकारी सरकारी सिस्टम को समझ नहीं पाते और नौकरी छोड़ देते हैं, लेकिन मैं सेवा छोड़ना नहीं चाहता। सिस्टम में कुछ कमियां हैं, जिन्हें सुधारा जा सकता है। 44 साल के रिंकू सिंह राही 2021 बैच के IAS अधिकारी हैं। उनकी सेवा के अभी 16 साल शेष हैं। 8 महीने पहले उन्हें शाहजहांपुर से हटाकर राजस्व परिषद भेजा गया था। तब से उन्हें कोई फील्ड पोस्टिंग नहीं दी गई है। वकीलों के सामने उठक-बैठक करने पर शहाजहांपुर पुवायां तहसील से हटाया गया था। वहां वह SDM थे। टेक्निकल रेजिगनेशन क्या होता है? अब रिंकू का पूरा इंटरव्यू पढ़िए… सवाल : क्या पोस्टिंग के लिए आपको प्रताड़ित किया गया?
रिंकू : मुझे प्रताड़ित नहीं किया गया। मैं व्यक्तिगत रूप से बहुत खुश हूं। घूमने-फिरने का समय मिल रहा है। मैं नौकरी व्यक्तिगत सुविधा के लिए नहीं, बल्कि लोगों की सेवा के लिए करने आया हूं। यह नैतिक मामला है। मेरे आदर्श और सिद्धांत आड़े आ रहे हैं। सवाल : आपने कभी मुख्य सचिव या राजस्व परिषद के अध्यक्ष से संपर्क किया?
रिंकू : मैंने उन्हें ‘नो वर्क-नो पे’ वाला पत्र लिखा था। इसके बाद उनसे मुलाकात का क्या मतलब है। सवाल : आपने कभी पोस्टिंग के लिए मुख्य सचिव से संपर्क किया?
रिंकू : जिन्हें पोस्टिंग की चाहत होती है, वे अधिकारियों से मिलते हैं। मुझे पोस्टिंग की चाहत नहीं है। कोई भी काम दें, मुझे सिर्फ काम करना है। यह उनकी ड्यूटी है कि मेरी पोस्टिंग कहां करनी है। मैं उन्हें क्यों बताने जाऊं। सवाल : फिर आपने इस्ताफी क्यों दिया?
रिंकू : मीडिया में यह गलत आया है कि मैंने पोस्टिंग न मिलने के कारण त्यागपत्र दिया है। मुझे पोस्टिंग की चिंता नहीं है। जहां रखेंगे, वहीं काम करूंगा। यह मैं तय नहीं करूंगा कि कहां काम करना है। जिसकी जो ड्यूटी है, वह निभाएगा। मैं उन्हें बताने क्यों जाऊं कि आपकी ड्यूटी है मुझे पोस्ट करना। सवाल : आप अनुसूचित जाति से आते हैं, क्या इस कारण ऐसा हुआ?
रिंकू : मुझे नहीं पता। मैंने इस बारे में कभी सोचा नहीं है, इसलिए उत्तर नहीं दे सकता। मेरी जगह कोई और अधिकारी होता, तो उसे भी यह झेलना पड़ता। मैं यह कहना चाहता हूं कि SC जाति के अलावा एक और जाति होती है- ईमानदारी वाली जाति। ईमानदारी भी दो तरह की होती है। एक, जो सिर्फ पैसा नहीं लेते। दूसरी, जो ईमानदारी से काम करते हैं। मैं ईमानदारी से काम करने वालों में हूं। सवाल : आपने लिखा कि भ्रष्टाचार का समानांतर तंत्र चल रहा है, इसका आधार?
रिंकू : बिल्कुल सही कहा है। आप देखते होंगे कि कई जगह सड़क नहीं होती, लेकिन कागजों में सड़क बन चुकी होती है। यह भ्रष्टाचार का तंत्र है, जिससे राजनीतिक लोग भी परेशान हैं। सवाल : इस भ्रष्टाचार के तंत्र को कौन चला रहा है?
रिंकू : ब्यूरोक्रेसी ही इस भ्रष्टाचार का तंत्र चला रही है। बिना पैसा दिए यह तंत्र चलता ही नहीं। जब कागजों में ही काम हो रहा है, तो इसका क्या मतलब है। सवाल : आपको 8 महीने से पोस्टिंग नहीं मिली है, क्या कहेंगे?
रिंकू : आजादी के बाद शायद यह पहला मौका होगा, जब किसी जूनियर IAS के साथ ऐसा व्यवहार हुआ है। मैंने पहले ही कह दिया था कि अगर काम नहीं मिलेगा, तो वेतन भी नहीं लूंगा। अगर जूनियर IAS के साथ ऐसा होगा, तो उसका क्या संदेश जाएगा। मैं तो पहले ही पोस्टिंग और पनिशमेंट झेल चुका हूं, लेकिन किसी नए अधिकारी के साथ ऐसा हुआ तो वह हमेशा के लिए नेगेटिव हो जाएगा। सवाल : क्या आपसे किसी शासन के अधिकारी ने संपर्क किया?
रिंकू : मेरी कई लोगों से बात हो रही है। शासन की ओर से अब या तो लिखित नोटिस आएगा या चार्जशीट। पढ़िए, SDM से क्यों हटाए गए थे रिंकू सिंह
8 महीने पहले रिंकू सिंह राही मथुरा में जॉइंट मजिस्ट्रेट थे। वहां से ट्रांसफर होकर 24 जुलाई, 2025 को दोपहर 2 बजे शाहजहांपुर की पुवायां तहसील में SDM का चार्ज संभाला था। इसी दौरान उनकी नजर परिसर के अंदर ही दीवार के पास टॉयलेट कर रहे वकील आज्ञाराम के मुंशी विजय (38) पर पड़ी। उन्होंने उसे टोक दिया और शौचालय का इस्तेमाल करने के लिए कहा। मुंशी ने रिंकू सिंह को जवाब दिया कि शौचालय गंदे हैं। इस पर एसडीएम बिफर गए थे। कहने लगे थे कि ये गलती तहसील कर्मचारियों की है। उन्होंने मौके पर ही मुंशी से उठक-बैठक लगवा दी थी। तहसील परिसर में वकील अपनी कुछ मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। तभी उनको मंशी से उठक-बैठक लगवाने की बात पता चल गई। इस पर वकील भड़क गए थे। उन्होंने एसडीएम को मौके पर बुलवा लिया था। एसडीएम ने वकीलों से कहा था कि मुंशी ने गलती की है। इस पर वकीलों ने कहा था कि गलती है, तो उठक-बैठक लगवाना सही नहीं है। क्या आप उठक-बैठक लगा सकते हैं? इस पर रिंकू सिंह ने कहा था कि इसमें कोई शर्म नहीं है। मैं उठक-बैठक लगा सकता हूं। इसके बाद उन्होंने 5 बार उठक-बैठक लगाई थी। वीडियो सामने आने के बाद उन्हें हटा दिया गया था। हाथरस के रहने वाले, पहले PCS फिर IAS बने
रिंकू सिंह राही का जन्म 20 मई, 1982 को हाथरस में एक दलित परिवार में हुआ था। वह थाना सासनी के गांव ऊसवा के रहने वाले हैं। दो भाइयों में बड़े रिंक के पिता सौदान सिंह राही आटा चक्की चलाकर परिवार का पालन करते थे। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने की वजह से उन्होंने सरकारी स्कूल से पढ़ाई की थी। अच्छे नंबरों से 12वीं पास करने पर उन्हें स्कॉलरशिप मिली थी। इसकी मदद से उन्होंने जमशेदपुर के टाटा इंस्टीट्यूट से बीटेक किया था। 2004 में रिंकू सिंह ने पीसीएस परीक्षा पास की थी। नौकरी के दौरान उन्होंने दिव्यांग कोटे से यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा दी। 2021 में उन्हें 683वीं रैंक मिली और वे आईएएस बने थे। परिवार में पत्नी सुलेखा योगा टीचर रही हैं। 10 साल का एक बेटा ध्रुव राही है। ताऊ रघुवीर सिंह राही बसपा शासनकाल में जिलाध्यक्ष रहे हैं। भ्रष्टाचार का खुलासा करने पर 7 गोलियां मारी गई थीं पीसीएस बनने के बाद 2008 में रिंकू सिंह की पहली पोस्टिंग मुजफ्फरनगर में जिला समाज कल्याण अधिकारी के रूप में हुई थी। वहां उन्होंने छात्रवृत्ति और पेंशन में हो रहे भ्रष्टाचार का खुलासा किया था। रिंकू ने दैनिक भास्कर को बताया था- जांच में मुझे पता चला था कि 100 करोड़ रुपए गबन हुआ। इसके पीछे राजनीतिक पार्टी के अलावा पूरा गैंग था। उस समय बसपा सरकार थी। 26 मार्च, 2009 को रिंकू एक सहकर्मी के साथ बैडमिंटन खेल रहे थे। तभी उन पर दो हमलावरों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दी थीं। इसमें रिंकू राही को सात गोलियां लगी थी। इनमें से दो उनके चेहरे पर लगी थीं। उनका जबड़ा तक बाहर आ गया और चेहरा बिगड़ गया था। साथ ही एक कान खराब हो गया और एक आंख की रोशनी चली गई थी। एक महीने अस्पताल में भर्ती रहे, धरना दिया था
इस हमले के बाद रिंकू को हायर सेंटर मेरठ ले जाया गया था। करीब एक महीने मेरठ के सुभारती मेडिकल कॉलेज में भर्ती रहे थे। ऑपरेशन के बाद वह ठीक होकर लौटे थे। इसके बाद घोटाला के खुलासे के लिए रिंकू ने RTI के तहत विभाग से कुछ सूचनाएं मांगी थीं। लेकिन, एक साल बाद भी उन्हें सूचनाएं नहीं दी गईं। इसके बाद 26 मार्च, 2012 को रिंकू राही ने लखनऊ निदेशालय के बाहर अनशन शुरू कर दिया था। पुलिस ने रिंकू राही को वहां से उठाकर मेंटल हॉस्पिटल लखनऊ भेज दिया था। रिंकू के फैसले पर परिवार ने क्या कहा? पिता बोले- इस्तीफा नहीं दिया, राष्ट्रपति को लेटर लिखा है
रिंकू सिंह के पिता सौदान सिंह राही ने कहा- बेटा ईमानदार और मेहनती है, लेकिन उसे काम नहीं दिया जा रहा है। 2009 में मुजफ्फरनगर में रिंकू समाज कल्याण अधिकारी थे। उस दौरान उन्होंने 100 करोड़ रुपये का घोटाला उजागर किया था, जिसमें उनकी एक आंख चली गई और जबड़ा भी क्षतिग्रस्त हो गया, फिर भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। 2023 में उन्होंने IAS परीक्षा पास की, जिस पर हमें गर्व है। वह जो भी निर्णय लेते हैं, देशहित में लेते हैं। आप हमारा मकान देख लीजिए, आटा चक्की की मेहनत से ही प्लास्टर हुआ है। 2009 में जब रिंकू को गोली लगी थी, उसी समय मुजफ्फरनगर आने-जाने और इलाज में हमारे सारे पैसे खत्म हो गए। हमारे पास कुछ नहीं है। आप हमारा बैंक बैलेंस भी देख सकते हैं। जो लोग ईमानदार और मेहनती होते हैं, उनके पास बैंक बैलेंस नहीं होता। अब आगे आयोग सही निर्णय लेगा। रिंकू सिंह ने इस्तीफा नहीं दिया है। उन्हें काम नहीं दिया जा रहा है, इसी को लेकर उन्होंने राष्ट्रपति को पत्र लिखा है। सवाल यह है कि 100 करोड़ का घोटाला उजागर करने के बाद भी उन्हें काम क्यों नहीं दिया जा रहा है। बहू बोली- समाज की सेवा करना चाहते हैं, पोस्टिंग मिलनी चाहिए
रिंकू के छोटे भाई नील राही की पत्नी नीलम राही ने कहा- उन्होंने जो किया है, वह सही किया है। एक IAS अधिकारी के पद के अनुसार उन्हें काम मिलना चाहिए था, चाहे वह फील्ड का हो या किसी अन्य जिम्मेदारी का। वह इस लायक हैं। एक इंसान सात गोलियां खाने के बाद भी अपनी परेशानी की चिंता किए बिना काम कर सकता है। इस समय घर का माहौल तनावपूर्ण है। वह घर आने के बाद ड्यूटी से जुड़ी कोई भी बातें साझा नहीं करते थे। वह कभी भी परिवार के लोगों को परेशान नहीं करना चाहते थे। वह समाज की सेवा करना चाहते हैं। ऐसे में उन्हें मौका मिलना चाहिए।
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