मनोज पांडेय को मंत्री बनाकर शाह ने वादा पूरा किया:पहली बार कैबिनेट फुल; सबसे ज्यादा 25 ओबीसी मंत्री

योगी मंत्रिमंडल का रविवार को दूसरा विस्तार हो गया। 6 नए मंत्रियों को शपथ दिलाई गई। इस विस्तार में भूपेंद्र चौधरी को केंद्र के करीब रहने का इनाम मिला है। वहीं, सपा के बागी मनोज पांडेय से गृहमंत्री अमित शाह ने जो वादा किया था, वो पूरा किया है। सरकार ने नए चेहरों के जरिए पूर्वांचल, पश्चिम, अवध और बुंदेलखंड को साधने की कोशिश की है। ओबीसी और दलित को सबसे ज्यादा प्रतिनिधित्व देकर सपा के ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले की काट निकाली गई है। इस विस्तार के बाद अब कैबिनेट में पिछड़ों और दलितों की हिस्सेदारी बढ़ गई है। 9 साल के योगी कार्यकाल में यह पहला मौका है, जब मंत्रिमंडल का कोटा पूरा हो गया है। अब सभी 60 पदों पर मंत्री बनाए गए हैं। इस मंत्रिमंडल विस्तार को विधानसभा चुनाव 2027 के लिए भाजपा की फाइनल फील्डिंग की तरह देखा जा रहा है। पढ़िए मंत्रिमंडल विस्तार के मायने… अखिलेश यादव के ‘PDA’ को चुनौती दी समाजवादी पार्टी PDA के जरिए पिछड़ों और दलितों को एकजुट करने की कोशिश कर रही है। इसी वजह से मंत्रिमंडल में 3 ओबीसी और 2 दलित चेहरों को जगह दी गई है। भाजपा संदेश देना चाहती है कि वह इन वर्गों को न केवल सम्मान दे रही, बल्कि सत्ता में भी बराबर की हिस्सेदारी दे रही है। यह कदम उन जातियों के बीच भाजपा की पैठ को मजबूत करने के लिए है, जो सपा के साथ जा सकती हैं। अब 8 ब्राह्मण मंत्री हुए: मंत्रिमंडल विस्तार के बाद पिछड़े वर्ग के मंत्रियों की संख्या 22 से बढ़कर 25 हो गई है। सामान्य वर्ग के मंत्री 21 से बढ़कर 22 हो गए हैं। इनमें ब्राह्मण मंत्री 7 से बढ़कर 8 हो गए हैं। दलित मंत्री पहले 8 थे, अब 10 हो गए। एक सिख, एक मुस्लिम और एक अनुसूचित जनजाति के मंत्री हैं। योगी मंत्रिमंडल का विस्तार करीब 2 साल से ज्यादा समय बाद हुआ। एक्सपर्ट मानते हैं कि इसमें राजनीतिक तौर पर कोई खास बदलाव नहीं है। इसको 3 पॉइंट में समझिए… भूपेंद्र चौधरी को केंद्रीय नेतृत्व के भरोसे का इनाम मिला भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी को केंद्रीय नेतृत्व के भरोसे की कसौटी पर खरा उतरने का इनाम मिला है। चौधरी ने प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए हर कदम पर केंद्रीय नेतृत्व के मार्गदर्शन में ही काम किया। पश्चिमी यूपी में भूपेंद्र चौधरी भाजपा का बड़ा जाट चेहरा हैं। पश्चिमी यूपी के क्षेत्रीय अध्यक्ष रहे हैं। मूलरूप से भाजपा कैडर के हैं। जबकि, दूसरे जाट मंत्री लक्ष्मीनारायण चौधरी सपा, बसपा, कांग्रेस और रालोद सभी दलों में रह चुके हैं। ऐसे में पार्टी ने पश्चिमी यूपी में अपने कैडर के जाट चेहरे को सरकार में जगह देना जरूरी समझा। चौधरी योगी सरकार के पहले कार्यकाल में PWD राज्यमंत्री थे। 2019 में उन्हें पदोन्नत करके पंचायतीराज मंत्री बनाया गया था। 2022 में योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल में उन्हें पंचायतीराज मंत्री बनाया गया था। 25 अगस्त, 2022 में उन्हें भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। चौधरी अगस्त, 2022 से 14 दिसंबर, 2025 तक प्रदेश अध्यक्ष पद पर रहे। उनके मंत्री बनने के बाद जाट समाज से अब 3 मंत्री हो गए हैं। गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी और राज्यमंत्री केपी मलिक भी जाट समाज से आते हैं। अमित शाह ने मनोज पांडेय से किया वादा पूरा किया केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने ऊंचाहार से सपा के बागी विधायक मनोज पांडेय से किया वादा पूरा कर दिया है। फरवरी, 2024 में राज्यसभा चुनाव के दौरान मनोज पांडेय ने सपा से बगावत कर दी थी। उन्होंने भाजपा के पक्ष में न सिर्फ खुद मतदान किया था, बल्कि सपा के 6 अन्य विधायकों को भी भाजपा में शामिल कराने में अहम भूमिका निभाई थी। उसी समय गृहमंत्री अमित शाह ने उन्हें यूपी सरकार में मंत्री बनाने का वादा किया था। इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में अमित शाह रायबरेली में चुनावी रैली करने आए थे। उस दौरान पहली बार शाह की मौजूदगी में मनोज पांडेय भाजपा के मंच पर नजर आए थे। साथ ही भाजपा में घोषित रूप से शामिल हो गए थे। अमित शाह मनोज पांडेय के घर भी गए थे। अवध क्षेत्र का प्रतिनिधित्व मजबूत, अब 3 बड़े ब्राह्मण चेहरे मनोज पांडेय को अवध ही नहीं, पूर्वांचल का भी बड़ा ब्राह्मण नेता माना जाता है। ब्राह्मण समाज के लिए वह कई बार सड़क पर उतरे हैं, हक के लिए लड़ते रहे हैं। पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने जब-जब ब्राह्मण समाज या सनातन के खिलाफ बयान दिया, मनोज पांडेय ने खुलेआम उनका विरोध किया। माना जा रहा है कि मनोज पांडेय को मंत्री बनाने से अवध और पूर्वांचल के ब्राह्मणों की नाराजगी कुछ हद तक दूर होगी। इसके बाद यूपी में भाजपा की सियासत में अब 3 बड़े ब्राह्मण चेहरे होंगे। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक, केंद्रीय राज्यमंत्री जितिन प्रसाद और नवनियुक्त मंत्री मनोज पांडेय। लोध समाज की नाराजगी दूर की भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए लोध समाज की ओर से पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह, केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा और पूर्व सीएम कल्याण सिंह के बेटे राजवीर सिंह ‘राजू भैया’ मजबूत दावेदार थे। लेकिन, भाजपा ने कुर्मी समाज पर भरोसा जताते हुए पंकज चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाया था। इससे लोध समाज में अंदर ही अंदर नाराजगी थी। समाज के नेता खुलेआम कहने लगे थे कि कुर्मी समाज से 4 मंत्री हैं, लेकिन लोध से केवल दो मंत्री हैं। समाज की नाराजगी दूर करने के लिए आज लोध समाज के कैलाश राजपूत को मंत्री बनाया गया है। कैबिनेट में अब लोध समाज से 3 मंत्री हो गए हैं- पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह, बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार संदीप सिंह और नवनियुक्त राज्यमंत्री कैलाश राजपूत। हंसराज विश्वकर्मा पीएम मोदी के भरोसेमंद हैं हंसराज विश्वकर्मा वाराणसी में भाजपा के जिलाध्यक्ष रहे हैं। पीएम मोदी के भरोसेमंद हैं। उन्हें विधान परिषद सदस्य बनाया गया था। यूपी में विश्वकर्मा समाज की बड़ी आबादी है, लेकिन मंत्रिमंडल में समाज का प्रतिनिधित्व नहीं था। हंसराज विश्वकर्मा को मंत्री बनाने के बाद योगी मंत्रिमंडल में वाराणसी से अब 4 मंत्री हो गए हैं। श्रम मंत्री अनिल राजभर, राजस्व राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रवींद्र जायसवाल, आयुष राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर मिश्रा दयालु और हंसराज विश्वकर्मा। कृष्णा पासवान के जरिए ‘पासी महिला कार्ड’ खेला 2014 से पासी समाज को भाजपा का परंपरागत वोटबैंक माना जाता है। योगी मंत्रिमंडल में पासी समाज से अभी एकमात्र सुरेश राही ही मंत्री हैं। पार्टी को फीडबैक मिला था कि पासी समाज को अगर उचित प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया, तो 2027 में समाज का वोटबैंक खिसक सकता है। उधर, पार्टी की ओर से ‘नारी शक्ति वंदन’ संशोधन बिल गिरने के बाद सपा-कांग्रेस को महिला विरोधी बताने का अभियान शुरू किया था। ऐसे में कृष्णा पासवान को मंत्री बनाकर भाजपा 1 तीर से 3 निशाने साध रही है। अब दलित, पासी और महिला तीनों का कोटा पूरा हो गया है। वाल्मीकि समाज को सुरेंद्र दिलेर से साधा दलित वर्ग में वाल्मीकि समाज का बड़ा वोटबैंक है। यह भाजपा का कोर वोटर भी माना जाता है। भाजपा ने 2004 में हाथरस के सांसद राजीव दिलेर का टिकट काटकर पूर्व मंत्री अनूप वाल्मीकि के हाथरस से प्रत्याशी बनाया था। राजीव दिलेर का लोकसभा चुनाव के दौरान ही हार्टअटैक से निधन हो गया था। अनूप के सांसद निर्वाचित होने के बाद खाली हुई खैर विधानसभा सीट पर 2024 में उपचुनाव हुआ था। भाजपा ने राजीव दिलेर के बेटे सुरेंद्र दिलेर को उपचुनाव में प्रत्याशी बनाया था। सुरेंद्र दिलेर ने उपचुनाव जीत लिया। योगी मंत्रिमंडल में वाल्मीकि समाज से कोई मंत्री नहीं होने के कारण सुरेंद्र दिलेर को मंत्री बनाया गया है। जिन 2 मंत्रियों के कद बढ़े, अब उन्हें जानिए योगी कैबिनेट में अजीत पाल सिंह और सोमेंद्र तोमर को राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया है। 1. अजीत पाल सिंह पाल वोटर को अपने पाले में करने के लिए सपा ने श्यामलाल पाल को प्रदेश अध्यक्ष बनाया था। बसपा ने विश्वनाथ पाल को प्रदेश अध्यक्ष बना दिया था। पाल समाज को भाजपा का वोटबैंक माना जाता है। पाल समाज से योगी सरकार में एकमात्र अजीत कुमार पाल राज्यमंत्री थे। माना जा रहा था कि भाजपा असंबद्ध विधायक पूजा पाल को मंत्री बना सकती है। लेकिन, हाईकमान को पूजा पाल को मंत्री बनाने का कोई राजनीतिक फायदा नजर नहीं आया। लिहाजा, पार्टी ने अपने कैडर के पाल नेता अजीत कुमार को ही प्रमोट करके राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाने का फैसला लिया। 2. सोमेंद्र तोमर सपा पश्चिम यूपी में गुर्जर समाज को साधने की कोशिश कर रही है। हाल में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजदूगी में एक गुर्जर समाज का सम्मेलन भी हुआ था। शुरुआत में गुर्जर समाज के मंत्री की संख्या एक से बढ़ाकर दो करने पर मंथन हुआ था। पूर्व मंत्री अशोक कटारिया को एक बार फिर से मंत्री बनाने की चर्चा हुई। लेकिन, केंद्रीय नेतृत्व ने मंत्रिमंडल फेरबदल की जगह केवल विस्तार ही करने का निर्णय किया। इसके चलते गुर्जर समाज के सोमेंद्र तोमर को राज्यमंत्री से पदोन्नत कर राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार बनाने का निर्णय लिया गया। फिर भी महिला मंत्री 33% से कम कृष्णा पासवान को मंत्री बनाए जाने के बाद भी योगी मंत्रिमंडल में महिलाओं का प्रतिनिधित्व 33% से कम रहेगा। योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री बेबी रानी मौर्य, राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार गुलाब देवी, राज्यमंत्री रजनी तिवारी, राज्यमंत्री प्रतिभा शुक्ला, राज्यमंत्री विजय लक्ष्मी गौतम और नवनियुक्त मंत्री कृष्णा पासवान समेत कुल 6 महिला मंत्री हैं। 60 में से 6 महिला मंत्री होने के बाद केवल 10% महिलाएं ही मंत्री हैं। उधर, मंत्रिमंडल विस्तार से पहले ऐसा माना जा रहा था कि भाजपा महिला मंत्रियों की संख्या बढ़ाकर 20-25% तक कर सकती है। अब तक की सबसे युवा कैबिनेट यह कैबिनेट पिछली सरकार (योगी 1.0) की तुलना में युवा है। 2022 में कैबिनेट की औसत आयु 55 साल थी। अब ये घटकर 52.8 साल हो गई है। सबसे युवा मंत्री- सुरेंद्र दिलेर की आयु 33 साल है। सबसे बुजुर्ग मंत्री- डॉ. अरुण कुमार सक्सेना की करीब 74 साल के है। ————————— यह खबर भी पढ़ें – योगी मंत्रिमंडल का विस्तार-भूपेंद्र चौधरी ने सबसे पहले शपथ ली, मनोज पांडेय, अजीत सिंह पाल, सोमेंद्र तोमर भी मंत्री बने योगी कैबिनेट का आज रविवार को दूसरी बार विस्तार हो रहा है। राजभवन में शपथ ग्रहण समारोह शुरू हो चुका है। सबसे पहले पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने कैबिनेट मंत्री की शपथ ली। इसके बाद सपा से बगावत करने वाले विधायक मनोज पांडेय ने कैबिनेट मंत्री पद की शपथ ली। पढ़िए पूरी खबर…