क्या बसपा राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा खो देगी?:बंगाल-तमिलनाडु-केरल में 1% वोट नहीं मिले; लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी जीरो होगी

देश में इस वक्त 6 नेशनल पार्टियां हैं। इनमें भाजपा, कांग्रेस, बसपा, सीपीआई (एम), आप और एनपीपी शामिल हैं। लेकिन, अब बसपा की नेशनल पार्टी के दर्जे पर संकट है। बसपा को बंगाल, तमिलनाडु और केरल विधानसभा चुनाव में 1% वोट भी नहीं मिले। लोकसभा में एक भी सांसद नहीं है। राज्यसभा में सिर्फ एक सांसद है। सवाल है, बसपा के नेशनल पार्टी के दर्जे पर कितना खतरा है? नेशनल पार्टी की मान्यता किस वजह से बची है? यूपी, पंजाब और उत्तराखंड के विधानसभा चुनाव बसपा के लिए क्यों बड़ा चैलेंज है? पढ़िए पूरी रिपोर्ट… बंगाल, केरल और तमिलनाडु में खराब प्रदर्शन बसपा ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में 294 सीटों पर 152 पर प्रत्याशी उतारे थे। सभी प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई। पार्टी को कुल 1.17 लाख (0.18%) वोट मिले। इसी तरह 140 सीटों वाले केरल के विधानसभा चुनाव में बसपा ने 55 सीटों पर प्रत्याशी उतारे। केरल में बसपा को सिर्फ 33 हजार 125 (0.15%) वोट ही मिले। तमिलनाडु में 234 विधानसभा सीटों में बसपा ने 118 पर प्रत्याशी उतारे थे। बसपा को तमिलनाडु में 53 हजार 369 (0.11%) वोट मिले। तीनों राज्यों में बसपा को 2.04 लाख कुल वोट मिले। मतलब, बसपा तीनों ही राज्यों में स्टेट पार्टी की शर्त भी पूरी नहीं कर पाई। बिहार में खाता खुला, लेकिन वोट प्रतिशत 2 के नीचे रहा 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में बसपा ने 243 सीटों में 192 पर प्रत्याशी उतारे थे। बसपा सिर्फ एक सीट जीत सकी थी। उसे कुल 8.13 लाख (1.62%) वोट मिले थे। बसपा बिहार में भी स्टेट पार्टी की मान्यता पूरी नहीं कर सकी। दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र, झारखंड में भी खराब परफॉर्मेंस दिल्ली: फरवरी, 2025 में दिल्ली विधानसभा का चुनाव हुआ। 70 सीटों में बसपा ने 68 सीटों पर प्रत्याशी उतारे। एक भी प्रत्याशी जमानत नहीं बचा पाया। बसपा को कुल 55 हजार (0.58%) वोट मिले। हरियाणा: अक्टूबर, 2024 में हरियाणा विधानसभा का चुनाव हुआ। बसपा ने ये चुनाव इनेलो (INLD) के साथ गठबंधन में लड़ा। विधानसभा की 90 में से 35 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे। सभी की जमानत जब्त हो गई। बसपा को कुल 2.52 लाख (1.82%) वोट मिले। महाराष्ट्र: नवंबर, 2024 में महाराष्ट्र का चुनाव हुआ। बसपा ने 288 सीटों में 237 पर प्रत्याशी उतारे। सभी की जमानत जब्त हो गई। पार्टी का वोट शेयर महज 0.48% रहा। झारखंड: नवंबर-दिसंबर, 2024 में झारखंड में भी विधानसभा चुनाव हुआ। बसपा ने सभी 81 सीटों पर प्रत्याशी उतारे। एक भी सीट नहीं जीत पाई। उसका वोट शेयर 1% से भी कम रहा। बसपा ने 2014 में बचा लिया था नेशनल पार्टी का दर्जा बसपा को साल- 1997 में नेशनल पार्टी का दर्जा मिला था। 2014 में बसपा की नेशनल पार्टी का दर्जा खत्म हो रहा था। तब 2024 की तरह ही लोकसभा में बसपा का खाता नहीं खुला था। पार्टी का वोट शेयर भी 4.19% रह गया था। चुनाव आयोग ने अगस्त, 2014 में BSP, NCP और CPI को एक साथ शो-कॉज नोटिस जारी किया। पूछा कि क्यों न उनका नेशनल पार्टी दर्जा रद्द कर दिया जाए? तब बसपा ने चुनाव आयोग से समय मांगा और दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजों तक इंतजार करने की अपील की। 2016 में चुनाव आयोग ने इलेक्शन सिंबल (रिजर्वेशन एंड अलॉटमेंट) ऑर्डर, 1968 में संशोधन कर दिया। इसके मुताबिक, नेशनल पार्टी के लिए हर 5 साल में होने वाला रिव्यू अब 10 साल में होगा। इसके कारण बसपा, एनसीपी और सीपीआई को 2019 तक राहत मिल गई। बाद में बसपा को यूपी, उत्तराखंड, राजस्थान, बिहार, पंजाब के चुनाव में 6% से ज्यादा वोट मिल गए। इस तरह से स्टेट पार्टी का स्टेटस बनाए रखने में पार्टी कामयाब हो गई। अपना नेशनल पार्टी का दर्जा बचा लिया। —————————- यह खबर भी पढ़ें – 2027 में कम हो सकते हैं सपा के मुस्लिम प्रत्याशी, अखिलेश केदारेश्वर मंदिर से छवि बदल रहे, अब ‘पंडितजी’ की सलाह से चलेंगे 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश यादव अपनी छवि बदलने की कोशिश कर रहे हैं। आम धारणा है कि सपा मुस्लिम-यादव वोटर्स के इर्द-गिर्द अपनी राजनीति करती रही है। भाजपा इसे चुनाव में हमेशा हथियार बनाती रही है। अब अखिलेश इटावा में केदारेश्वर मंदिर बनवाकर नया नैरेटिव गढ़ रहे हैं। पढ़िए पूरी खबर…