एके शर्मा यूपी में बिजली सप्लाई क्यों नहीं सुधार सके:अपने ही चेयरमैन से ठनी; 32 साल ब्यूरोक्रेसी का अनुभव काम नहीं आया

गुजरात कैडर के IAS अधिकारी डॉ. एके शर्मा। 32 साल ब्यूरोक्रेसी में सर्विस देकर पॉलिटिक्स में आए। भाजपा ने डॉ. शर्मा को यूपी से विधान परिषद सदस्य (MLC) बना दिया। करीब 6 महीने बाद भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी दे दी। इस समय वे योगी सरकार में नगर विकास और ऊर्जा मंत्री हैं। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बिजली सप्लाई बड़ा मुद्दा बन गया। पब्लिक सड़क पर आ गई। भाजपा के सांसद-विधायक ही मुख्यमंत्री को चिटि्ठयां लिख रहे हैं। अखिलेश यादव कह रहे हैं कि अगर सपा की सरकार बनती है, तो 300 यूनिट फ्री बिजली देंगे। मुख्यमंत्री को खुद दखल देते हुए ऊर्जा विभाग के 2 इंजीनियरों को सस्पेंड और 2 को कारण बताओ नोटिस देना पड़ा। सवाल उठा कि 13 साल गुजरात में मुख्यमंत्री कार्यालय, फिर 6 साल प्रधानमंत्री कार्यालय में जिम्मेदारी संभालने वाले डॉ. एके शर्मा आखिर ऊर्जा विभाग में क्यों कोई कमाल नहीं कर सके? रिपोर्ट पढ़िए… रिकॉर्ड डिमांड- देश में पहले नंबर पर यूपी यूपी को मई महीने में हर रोज करीब 31 हजार 824 मेगावाट बिजली की जरूरत पड़ रही है। इस मांग के साथ यूपी देश में नंबर-1 पर है। महाराष्ट्र 29 हजार 463 मेगावाट के साथ दूसरे नंबर पर है। यूपी को बिजली मुख्य रूप से 5 सोर्स से मिलती है- 1. राज्य के अपने सरकारी प्लांट (7,500-8,500 MW)- ‘अनपारा’, ‘ओबरा’, ‘हरदुआगंज’ और ‘परीछा’ जैसे थर्मल पावर प्लांट चौबीसों घंटे बेस लोड संभालते हैं। 2. जॉइंट वेंचर और प्राइवेट कंपनियां (7,000-9,000 MW)- केंद्र-राज्य के साझे प्रोजेक्ट्स (मेजा, घाटमपुर) और निजी कंपनियों (ललितपुर, रोजा, प्रयागराज पावर) से लंबे समय के समझौते (PPA) के तहत बड़ी मात्रा में बिजली ली जाती है। 3. केंद्रीय कोटा आवंटन (7,000-8,000 MW)- केंद्र सरकार के बड़े प्लांटों (जैसे सिंगरोली, रिहंद, ऊंचाहार, दादरी) से यूपी को उसके हिस्से की तय बिजली मिलती है। 4. पावर बैंकिंग और एक्सचेंज (आपातकालीन बैकअप)- सर्दियों में यूपी जो अतिरिक्त बिजली पहाड़ी राज्यों (JK, हिमाचल) को उधार देता है, उसे गर्मियों में वापस ले लेता है। 5. रिन्यूएबल और हाइड्रो पावर (पीक ऑवर्स मैनेजमेंट)- दोपहर में एसी (AC) के बढ़ते लोड को बुंदेलखंड की सौर ऊर्जा संभालती है। शाम को सोलर बंद होने पर रिहंद और ओबरा जल विद्युत प्रोजेक्ट्स से अतिरिक्त बिजली ग्रिड में छोड़ी जाती है। संकट क्यों खड़ा हुआ? 3 बड़े कारण पढ़िए मंत्री V/S चेयरमैन, दोनों के बीच सब कुछ ठीक नहीं उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा के मुताबिक, ऊर्जा मंत्री एके शर्मा और पावर कॉरपोरेशन के चेयरमैन आशीष गोयल के बीच सब कुछ ठीक नहीं है। मंत्री नहीं चाहते थे कि संविदाकर्मियों को हटाया जाए। लेकिन, चेयरमैन ने उनकी बात दरकिनार कर पीक सीजन से ठीक पहले 20 हजार संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों को हटा दिया। कर्मचारियों को हटाए जाने के कारण फील्ड में मैनपावर नहीं बची। एक सब-स्टेशन के पास 8 फीडर होते हैं। गांव में इनके बीच की दूरी 30 से 35 किलोमीटर तक होती है। इन 8 फीडरों को 24 घंटे संभालने के लिए सिर्फ 3 टीमें हैं। पावर प्लांट बंद होने से 3 हजार मेगावाट सप्लाई कम हुई मई में अनपरा (सोनभद्र), ओबरा, हरदुआगंज (अलीगढ़) और परीछा (झांसी) पावर प्लांट के साथ प्राइवेट सेक्टर के ललितपुर (बजाज) और प्रयागराज (टाटा) प्लांट में भी अचानक तकनीकी गड़बड़ी आई। इन्हें ‘फोर्स्ड शटडाउन’ यानी आपातकालीन स्थिति में बंद करना पड़ा। ये इकाइयां 3 से 18 दिन के लिए बंद हुईं। फिर उन्हें शुरू किया जा सका। इससे सीधे करीब 3 हजार मेगावाट बिजली कम हो गई। तालमेल की कमी, प्लांटों का मेंटेनेंस नहीं हुआ अवधेश वर्मा आगे कहते हैं- यूपी पावर कॉरपोरेशन और उत्पादन निगम के बीच तालमेल की कमी के कारण कई प्लांटों का मेंटेनेंस समय पर पूरा नहीं हुआ। कुछ निजी प्लांट को समय पर कोयले की रैक (सप्लाई) नहीं मिल सकी। इससे कोयले की कमी हो गई और उत्पादन रोकना पड़ा। मंत्री और चेयरमैन के बीच सामंजस्य नहीं होने से इन्हें दोबारा शुरू कराने पर ध्यान ही नहीं दिया गया। जनता ने घेरा, तो मंत्री के पक्ष में नहीं आए विधायक जब यूपी के अलग-अलग इलाकों में बिजली कटी, तो जनता ने स्थानीय भाजपा विधायकों को घेरना शुरू किया। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि विधायकों ने ऊर्जा मंत्री से बात करने के बजाय सीधे मुख्यमंत्री योगी को चिट्ठियां लिखनी शुरू कर दीं। भाजपा विधायक खुलकर योगी सरकार 1.0 के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा को याद कर रहे हैं। विधायकों का कहना है कि श्रीकांत को फोन करते ही काम होता था। जबकि, एके शर्मा से संपर्क करना भी मुश्किल है। PMO-CMO का तजुर्बा मैनेजमेंट में क्यों काम नहीं आया वरिष्ठ पत्रकारों और विश्लेषकों के मुताबिक, 32 साल नौकरशाही में गुजारने वाले एके शर्मा के विभागीय मैनेजमेंट के मोर्चे पर बहुत सफल नहीं होने की कई वजहें हैं। यूपी के ऊर्जा विभाग में कर्मचारियों की यूनियन हावी रहती है। स्ट्रक्चर रिफॉर्म पर कोई बड़ा काम नहीं हो सका। पहले प्राइवेटाइजेशन को लेकर कर्मचारियों ने हड़ताल की। फिर एक वक्त ऊर्जा मंत्री और मुख्यमंत्री के बीच नाराजगी खुलकर सामने आई। जब एके शर्मा को कहना पड़ा- मैं अपनी इच्छा से जूनियर इंजीनियर तक का ट्रांसफर भी नहीं कर सकता हूं। विभाग, पब्लिक, सबसे कम बातचीत करना वरिष्ठ पत्रकारों का मानना है कि एके शर्मा की सबसे बड़ी कमजोरी मीडिया और जनता से दूरी है। वे प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों के सवालों का जवाब दिए बिना चले जाते हैं। जनता जब बिजली कटौती पर सवाल पूछती है, तो वे समाधान बताने के बजाय ‘जय श्रीराम’ का नारा लगाकर आगे बढ़ जाते हैं। मंत्री कुछ बोलते नहीं हैं, जबकि लोग आपूर्ति कम होने का जवाब चाहते हैं। दूसरी तरफ विभाग के अधिकारी और इंजीनियर भी लोगों को सही से कम्युनिकेट नहीं करते। गुजरात का ‘फीडर मॉडल’ यूपी में नहीं लागू कर सके वरिष्ठ पत्रकार वीरेंद्रनाथ भट्ट के मुताबिक, सपा सरकार के समय बिजली क्षमता 16 हजार मेगावाट थी, जो अब 32 हजार मेगावाट है। सरकार ने कनेक्शन तो बांट दिए, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत नहीं किया। पीएम मोदी ने गुजरात का सीएम रहते घरेलू और कृषि के लिए अलग-अलग फीडर बनाकर सिस्टम सुधारा था। शर्मा पीएम मोदी के साथ रहे। लेकिन, यूपी में पूरा मौका मिलने के बाद भी केंद्र की पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस) योजना 5 साल में भी सही से लागू नहीं कर सके। जिन 3 चुनाव का जिम्मा मिला, वहां प्रदर्शन फीका रहा निकाय चुनाव 2023 (मऊ)- मऊ, एके शर्मा का गृह जनपद है। उनकी जिद पर सामान्य सीट होने के बावजूद दलित प्रत्याशी अजय कुमार को टिकट दिया गया। नतीजा- बीजेपी प्रत्याशी 36 हजार वोटों से हार गया। घोसी उपचुनाव 2023- मऊ की घोसी सीट पर उपचुनाव में भाजपा ने पूरी ताकत झोंकी। लेकिन, शर्मा अपने ही स्वजातीय (भूमिहार) वोटबैंक को भाजपा के पाले में लाने में नाकाम रहे और दारा सिंह चौहान चुनाव हार गए। लोकसभा चुनाव 2024- काशी क्षेत्र में भूमिहार वोट बैंक को साधने की जिम्मेदारी एके शर्मा की थी। लेकिन, चुनाव नतीजों के आकलन में सामने आया कि भूमिहार वोट भाजपा से छिटककर कांग्रेस की तरफ शिफ्ट हो गया। इससे वाराणसी में खुद पीएम की जीत का मार्जिन कम हुआ। ————————– यह खबर भी पढ़ें – यूपी में 50 हजार बेटियों को फ्री स्कूटी मिलेगी, ये पहली बार की वोटर, पेट्रोल मॉडल या EV, ये अभी तय नहीं योगी सरकार यूपी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बड़ा दांव खेलने जा रही है। इस साल 50 हजार से ज्यादा मेधावी बेटियों को फ्री स्कूटी देने की तैयारी है। सरकार 2022 विधानसभा चुनाव के वक्त किए गए वादे को पूरा करने जा रही है। इसके लिए 400 करोड़ रुपए का बजट भी तय हो चुका है। पढ़िए पूरी खबर…