“24 घंटे एक सूटकेस में बंद रहा। ऐसा पहली बार हुआ। न पानी पीया, न कुछ खाने को मिला। बांके बिहारी जी से मैंने निवेदन किया कि मुझे इस जगह से निकाल दो। मालिक के पास पहुंचा दो। फिर एकदम से मेरा बॉस आता है और सूटकेस से निकाल देता है। अब मैं बहुत खुश हूं, बिल्कुल तंदुरुस्त हूं, स्वस्थ हूं।’’ ये बातें दैनिक भास्कर से बातचीत में प्रेमानंद महाराज को हंसाने वाले टैडीबियर कार्टून जॉनी ने कहीं। जॉनी और जोजो दोनों अपने मालिक जयपुर के प्रसिद्ध कॉमेडियन राहुल मिश्रा से बिछड़ गए थे। राहुल मिश्रा अपने दोस्त के साथ वृंदावन परिक्रमा करने आए थे। वह परिक्रमा करके जब लौटे तो ई-रिक्शा में अपना सूटकेस भूल गए। जॉनी और जोजो दोनों 24 घंटे उसी सूटकेस में बंद रहे। इसके बाद राहुल मिश्रा ने बांके बिहारी से जॉनी-जोजो को मिलाने की प्रार्थना की। पुलिस से भी शिकायत की। पढ़िए कैसे बिछड़े जॉनी-जोजो और राहुल मिश्रा का मिलन हुआ… पहले राहुल मिश्रा, फिर जॉनी से बातचीत पढ़िए– सवाल : जॉनी-जोजो कैसे खो गए थे?
राहुल मिश्रा: हम वृंदावन परिक्रमा मार्ग में परिक्रमा कर रहे थे। संगीत में श्री हरिदास महाराज जी के साथ में परिक्रमा की। जॉनी और जोजो ने फिर लोगों को अपनी परफार्मेंस से हंसाया। इसके बाद हमें अपने होटल आना था। परिक्रमा मार्ग से ई-रिक्शा में बैठे। साथ में सूटकेस था, जिसमें जॉनी-जोजो को रखा था। गुरुवार-शुक्रवार की दरम्यानी रात करीब 1 बजे होटल के पास पहुंचे। जल्दबाजी में किराया दिया और सूटकेस भूल गए। ई-रिक्शा वाला भी चल दिया। आवाज लगाई, लेकिन वो सुन न सका। सवाल : किससे शिकायत की, कैसे ढूंढा और कब मिले?
राहुल मिश्रा : हम पूरी रात ई-रिक्शा वाले को ढूंढते रहे, लेकिन कहीं खोज खबर नहीं लगी। फिर पुलिस से शिकायत की। पुलिस ने भी अपनी टीम गठित की। हमारे मैनेजर ने कहा कि पुलिस तो अपना काम करेगी, लेकिन हम भी थोड़ा ढूंढने में लग जाएं। हम सब भी ढूंढने निकल पड़े। पुलिस भी ढूंढ ही रही थी। आखिरकार हमें 24 घंटे में ही यानी शुक्रवार-शनिवार की दरम्यानी रात करीब 1:30 बजे वो ई-रिक्शा ड्राइवर बांके बिहारी मंदिर के ठीक सामने मिल गया। ये बांके बिहारी जी की कृपा है कि ज्यादा समय नहीं लगाया और जल्दी हमारे जॉनी और जोजो को ढूंढ दिया। सवाल : आप मानते हैं कि बांके बिहारी जी से आपने गुहार लगाई और उन्होंने सुन ली?
राहुल मिश्रा: हां, क्योंकि थाना इंचार्ज ने भी हमसे यही कहा था कि बांके बिहारी जी पर भरोसा रखो। आपके जॉनी-जोजो एक दिन में ही मिल जाएंगे। वही हुआ, एक दिन के अंदर ही मिल गए। सवाल : ई-रिक्शा वाले ने सूटकेस कहां रखा था?
राहुल मिश्रा: जगह तो मुझे नहीं मालूम, लेकिन ई-रिक्शा वाला मुझे बहुत अंदर जंगल में ले गया। वहां उसने कुटिया में अपने पलंग के नीचे सूटकेस को रखा था। फिर उसने मुझे सूटकेस सौंपा। सवाल : वृंदावन पुलिस को क्या कहेंगे, जिसने आपकी मदद की?
राहुल मिश्रा: पुलिस को मैं सिर्फ एक ही बात बोलना चाहूंगा- बहुत-बहुत धन्यवाद। आपने जॉनी और जोजो को ढूंढने में बहुत सहायता की। हम तीनों की तरफ से बहुत-बहुत धन्यवाद। अब जॉनी से बातचीत– सवाल: जॉनी, कहां चले गए थे?
जॉनी : हंसते हुए, अरे सर… मैं क्या बताऊं। मुझे तो पानी भी नहीं मिला। सवाल: आप 24 घंटे गायब रहे?
जॉनी : हां, 24 घंटे इसी सूटकेस के अंदर था। पहली बार ऐसा हुआ है। सवाल: कुछ खाया-पीया नहीं?
जॉनी : नहीं, न कुछ खाने को मिला और न ही पीने को मिला। सवाल: जब आप सूटकेस के अंदर थे तो बांके बिहारी जी से आपने क्या कहा?
जॉनी : बिहारी जी से मैंने एक ही बात बोली थी कि मुझे इस जगह से बाहर निकाल दो। फिर एकदम से मेरा बॉस आता है और निकाल देता है। सवाल: अब आप ठीक हैं?
जॉनी : अब तो मैं बिल्कुल तंदुरुस्त, स्वस्थ हूं। जॉनी-जोजो कैसे लोगों को हंसाते हैं, जानिए अपनी कलाकारी और बोली से सभी को हंसाने वाले जॉनी-जोजो एक आम टैडीबियर कार्टून की तरह हैं। इसके पीछे असली कलाकारी राहुल मिश्रा की है। राहुल अपने होंठों को इस तरह चलाते हैं कि सामने वाला पता ही नहीं कर पाता कि बोल कौन रहा है। इसी कलाकारी ने राहुल मिश्रा को अलग पहचान दी है। इस कला को ‘वेंट्रिलोकिज्म’ कहते हैं। इसमें वक्ता (वेंट्रिलोक्विस्ट) बिना अपने होंठ हिलाए इस तरह आवाज निकालता है कि ऐसा लगता है कि आवाज कठपुतली या डमी से आ रही है। प्रेमानंद जी से एक साल पहले की थी मुलाकात एक साल पहले वृंदावन में प्रेमानंद जी महाराज से मुलाकात के दौरान जोजो और जॉनी ने उनसे बातचीत की थी। जिस पर वे लगातार हंसते रहे और बोले- ‘ये खिलौने खुद कैसे बोलते हैं? यह तो अद्भुत कला है।’ उन्होंने इस कला की काफी सराहना भी की थी। राहुल ने बताया था- प्रेमानंदजी ने मेरे जोजो और जॉनी को 500-500 इनाम के रूप में दिए। मुझे सम्मानित किया और प्रसादी ग्रहण करवाई। हमारे जैसे युवा उनके भक्त हैं। उनकी वाणी और प्रवचनों को फॉलो करते हैं। मेरे बाहर निकलते ही बृजवासियों ने घेर लिया। सभी कहने लगे कि हमने महाराजजी को इतना हंसते हुए नहीं देखा, आपने कमाल कर दिया। राहुल ने थिएटर से वेंट्रिलोक्विज्म तक का सफर किया राहुल जयपुर के रहने वाले हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत थिएटर से की थी, लेकिन इस क्षेत्र में पर्याप्त कमाई न होने के कारण उन्होंने 2015 में यूट्यूब पर एक चैनल बनाया। उनके दोस्तों ने उन्हें एक पपेट बनाकर दिया, जिससे उन्होंने वीडियो बनाए। टिकटॉक पर उनके वीडियो वायरल हुए, लेकिन असली कामयाबी तब मिली जब उन्होंने अपनी कला को और निखारा और बड़े मंचों तक पहुंचे। राहुल कई बड़े शोज का हिस्सा रह चुके हैं। वे बिग बॉस के सेट पर स्पेशल परफॉर्मेंस देने पहुंचे थे। वे इंडियाज गॉट टैलेंट में भी अपनी कला का प्रदर्शन कर चुके हैं। —————— ये खबर भी पढ़िए- यूपी में भास्कर रिपोर्टर को यीशु का ‘पवित्र लहू’ पिलाया:हिंदू से ईसाई बनाया, कहा-पत्नी को मत बताना; खुफिया कैमरे पर सीक्रेट धर्मांतरण “आप लोग यहां आने से पहले मूर्ति पूजा बहुत कर चुके, फायदा क्या हुआ? आपको अब ये सब नहीं करना है। मंदिर जाना भी तो प्रसाद नहीं खाना। ये यीशु का पवित्र लहू (लाल रंग का जूस) है, इससे शरीर में चंगाई (बीमारी खत्म) आएगी, दिक्कतों से छुटकारा मिलेगा।” यह कहते हुए नेपाल से आए पास्टर जीवन ने भास्कर रिपोर्टर को धर्मांतरण कराया और ईसाई बना दिया। पढ़ें पूरी खबर…
राहुल मिश्रा: हम वृंदावन परिक्रमा मार्ग में परिक्रमा कर रहे थे। संगीत में श्री हरिदास महाराज जी के साथ में परिक्रमा की। जॉनी और जोजो ने फिर लोगों को अपनी परफार्मेंस से हंसाया। इसके बाद हमें अपने होटल आना था। परिक्रमा मार्ग से ई-रिक्शा में बैठे। साथ में सूटकेस था, जिसमें जॉनी-जोजो को रखा था। गुरुवार-शुक्रवार की दरम्यानी रात करीब 1 बजे होटल के पास पहुंचे। जल्दबाजी में किराया दिया और सूटकेस भूल गए। ई-रिक्शा वाला भी चल दिया। आवाज लगाई, लेकिन वो सुन न सका। सवाल : किससे शिकायत की, कैसे ढूंढा और कब मिले?
राहुल मिश्रा : हम पूरी रात ई-रिक्शा वाले को ढूंढते रहे, लेकिन कहीं खोज खबर नहीं लगी। फिर पुलिस से शिकायत की। पुलिस ने भी अपनी टीम गठित की। हमारे मैनेजर ने कहा कि पुलिस तो अपना काम करेगी, लेकिन हम भी थोड़ा ढूंढने में लग जाएं। हम सब भी ढूंढने निकल पड़े। पुलिस भी ढूंढ ही रही थी। आखिरकार हमें 24 घंटे में ही यानी शुक्रवार-शनिवार की दरम्यानी रात करीब 1:30 बजे वो ई-रिक्शा ड्राइवर बांके बिहारी मंदिर के ठीक सामने मिल गया। ये बांके बिहारी जी की कृपा है कि ज्यादा समय नहीं लगाया और जल्दी हमारे जॉनी और जोजो को ढूंढ दिया। सवाल : आप मानते हैं कि बांके बिहारी जी से आपने गुहार लगाई और उन्होंने सुन ली?
राहुल मिश्रा: हां, क्योंकि थाना इंचार्ज ने भी हमसे यही कहा था कि बांके बिहारी जी पर भरोसा रखो। आपके जॉनी-जोजो एक दिन में ही मिल जाएंगे। वही हुआ, एक दिन के अंदर ही मिल गए। सवाल : ई-रिक्शा वाले ने सूटकेस कहां रखा था?
राहुल मिश्रा: जगह तो मुझे नहीं मालूम, लेकिन ई-रिक्शा वाला मुझे बहुत अंदर जंगल में ले गया। वहां उसने कुटिया में अपने पलंग के नीचे सूटकेस को रखा था। फिर उसने मुझे सूटकेस सौंपा। सवाल : वृंदावन पुलिस को क्या कहेंगे, जिसने आपकी मदद की?
राहुल मिश्रा: पुलिस को मैं सिर्फ एक ही बात बोलना चाहूंगा- बहुत-बहुत धन्यवाद। आपने जॉनी और जोजो को ढूंढने में बहुत सहायता की। हम तीनों की तरफ से बहुत-बहुत धन्यवाद। अब जॉनी से बातचीत– सवाल: जॉनी, कहां चले गए थे?
जॉनी : हंसते हुए, अरे सर… मैं क्या बताऊं। मुझे तो पानी भी नहीं मिला। सवाल: आप 24 घंटे गायब रहे?
जॉनी : हां, 24 घंटे इसी सूटकेस के अंदर था। पहली बार ऐसा हुआ है। सवाल: कुछ खाया-पीया नहीं?
जॉनी : नहीं, न कुछ खाने को मिला और न ही पीने को मिला। सवाल: जब आप सूटकेस के अंदर थे तो बांके बिहारी जी से आपने क्या कहा?
जॉनी : बिहारी जी से मैंने एक ही बात बोली थी कि मुझे इस जगह से बाहर निकाल दो। फिर एकदम से मेरा बॉस आता है और निकाल देता है। सवाल: अब आप ठीक हैं?
जॉनी : अब तो मैं बिल्कुल तंदुरुस्त, स्वस्थ हूं। जॉनी-जोजो कैसे लोगों को हंसाते हैं, जानिए अपनी कलाकारी और बोली से सभी को हंसाने वाले जॉनी-जोजो एक आम टैडीबियर कार्टून की तरह हैं। इसके पीछे असली कलाकारी राहुल मिश्रा की है। राहुल अपने होंठों को इस तरह चलाते हैं कि सामने वाला पता ही नहीं कर पाता कि बोल कौन रहा है। इसी कलाकारी ने राहुल मिश्रा को अलग पहचान दी है। इस कला को ‘वेंट्रिलोकिज्म’ कहते हैं। इसमें वक्ता (वेंट्रिलोक्विस्ट) बिना अपने होंठ हिलाए इस तरह आवाज निकालता है कि ऐसा लगता है कि आवाज कठपुतली या डमी से आ रही है। प्रेमानंद जी से एक साल पहले की थी मुलाकात एक साल पहले वृंदावन में प्रेमानंद जी महाराज से मुलाकात के दौरान जोजो और जॉनी ने उनसे बातचीत की थी। जिस पर वे लगातार हंसते रहे और बोले- ‘ये खिलौने खुद कैसे बोलते हैं? यह तो अद्भुत कला है।’ उन्होंने इस कला की काफी सराहना भी की थी। राहुल ने बताया था- प्रेमानंदजी ने मेरे जोजो और जॉनी को 500-500 इनाम के रूप में दिए। मुझे सम्मानित किया और प्रसादी ग्रहण करवाई। हमारे जैसे युवा उनके भक्त हैं। उनकी वाणी और प्रवचनों को फॉलो करते हैं। मेरे बाहर निकलते ही बृजवासियों ने घेर लिया। सभी कहने लगे कि हमने महाराजजी को इतना हंसते हुए नहीं देखा, आपने कमाल कर दिया। राहुल ने थिएटर से वेंट्रिलोक्विज्म तक का सफर किया राहुल जयपुर के रहने वाले हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत थिएटर से की थी, लेकिन इस क्षेत्र में पर्याप्त कमाई न होने के कारण उन्होंने 2015 में यूट्यूब पर एक चैनल बनाया। उनके दोस्तों ने उन्हें एक पपेट बनाकर दिया, जिससे उन्होंने वीडियो बनाए। टिकटॉक पर उनके वीडियो वायरल हुए, लेकिन असली कामयाबी तब मिली जब उन्होंने अपनी कला को और निखारा और बड़े मंचों तक पहुंचे। राहुल कई बड़े शोज का हिस्सा रह चुके हैं। वे बिग बॉस के सेट पर स्पेशल परफॉर्मेंस देने पहुंचे थे। वे इंडियाज गॉट टैलेंट में भी अपनी कला का प्रदर्शन कर चुके हैं। —————— ये खबर भी पढ़िए- यूपी में भास्कर रिपोर्टर को यीशु का ‘पवित्र लहू’ पिलाया:हिंदू से ईसाई बनाया, कहा-पत्नी को मत बताना; खुफिया कैमरे पर सीक्रेट धर्मांतरण “आप लोग यहां आने से पहले मूर्ति पूजा बहुत कर चुके, फायदा क्या हुआ? आपको अब ये सब नहीं करना है। मंदिर जाना भी तो प्रसाद नहीं खाना। ये यीशु का पवित्र लहू (लाल रंग का जूस) है, इससे शरीर में चंगाई (बीमारी खत्म) आएगी, दिक्कतों से छुटकारा मिलेगा।” यह कहते हुए नेपाल से आए पास्टर जीवन ने भास्कर रिपोर्टर को धर्मांतरण कराया और ईसाई बना दिया। पढ़ें पूरी खबर…