मुजफ्फरनगर की एक दोना-पत्तल की फैक्ट्री में मजदूरों को बंधकर बनाकर रखा गया। उनसे जबरन काम कराया जाता था। मना करने पर मजदूरों को हंटर, बेल्ट और डंडे से पीटा जाता। गर्म भाले से दागा जाता था। मजदूरों के पूरे शरीर पर सिर्फ घाव ही घाव मिले हैं। हैवानियत इससे समझी जा सकती है कि भागने की कोशिश करने वालों पर पिटबुल डॉग छोड़ दिया जाता था। मालिक मजदूरों से 24 घंटे काम करवाते, उन्हें सोने भी नहीं देते थे। पुलिस ने 22 जून (सोमवार) की शाम छापेमारी कर आरोपियों के चंगुल से 13 मजदूरों को मुक्त कराया। छूटे मजदूरों से दैनिक भास्कर ने बात की। उन्होंने कहा- पुलिस हमारे लिए भगवान बनकर आई। हम उनका धन्यवाद करते हैं। एसएसपी साहब को दिल से दुआ देते हैं। पुलिस ने फैक्ट्री मालिक के पिता और सुपरवाइजर को गिरफ्तार किया है। अब पुलिस फैक्ट्री मालिक की तलाश में जुटी है। पहले पढ़िए मजदूरों की आपबीती… ‘बेल्ट से मारकर कान खराब कर दिया’ सीतापुर के रहने वाले जगदीश ने रोते हुए बताते हैं- मुझे 11 महीने से बंधक बना रखा था। जब मैं कहता था कि घर जाना चाहता हूं। मेरा मन नहीं लग रहा, मैं काम नहीं करूंगा। तो मुझे बेल्ट से मारते थे। मेरी तनख्वाह 12 हजार थी, लेकिन देते नहीं थे। रात-दिन काम करवाते थे। सोने को भी नहीं मिलता था। बेल्ट से मार-मारकर मेरा एक कान भी खराब कर दिया। पुलिस प्रशासन ने हमें छुड़वाया है। हम उनका थैंक यू करते हैं, वो बहुत अच्छे हैं। मेरा हाथ पीछे की तरफ मोड़कर तोड़ दिया औरैया के रहने वाले शिवम जाटव ने बताया- मुझे 6 महीने से बंधकर बनाकर रखा था। बहुत मारते-पीटते थे। बहुत बुरी हालत कर रखी थी। मेरा हाथ पीछे की तरफ मारकर तोड़ दिया है। मैं कप्तान साहब को बहुत-बहुत धन्यवाद और दिल से दुआएं देता हूं। मालिक पिस्तौल दिखाकर डराता था, कहता- मारकर फेंक दूंगा नैनीताल के रहने वाले रामू ने कहा- मुझे यहां आए हुए 2 महीने 20 दिन हो गए थे। सही से खाना तक नहीं मिलता था। चोकर की रोटी मिलती थी। आज तक कभी सब्जी खाकर नहीं देखी। घर पर किसी से बात नहीं करने देते थे। मेरा आधार कार्ड जला दिया था। मोबाइल भी छीनकर रख लिया था। बेल्ट और लोहे की रॉड से मारते थे। मालिक अपने पास पिस्तौल रखता था। हमें डराता था कि किसी को कुछ बोलना नहीं। कोई आएगा, तो तुम्हें भी मारकर फेंक दूंगा। वहीं, बिहार के रहने वाले उज्ज्वल ने बताया- मुझे 10 महीने से बंधक बना रखा था। मालिक मुझे बेल्ट, डंडे, सरिया और लोहे से पीटते थे। अब सिलसिलेवार पढ़िए पूरा मामला… माड़ी गांव में प्रमोद बालियान (57) अपने परिवार के साथ रहता है। परिवार में बेटा अंकित बालियान (32) और बहू इंद्री देवी हैं। गांव में ही वह 6 साल से दोना-पत्तल की फैक्ट्री चलाता है। फैक्ट्री का नाम ‘किसान सरकार हाउस’ है। पुलिस को पता चला कि अंकित बालियान अपनी फैक्ट्री में मजदूरों को बंधकर बनाकर काम करवाता है। इसके बाद पुलिस ने सोमवार शाम 6 बजे फैक्ट्री पर छापेमारी की। एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने बताया- स्पेशल टीम बनाई गई थी। इसमें एसपी देहात अक्षय संजय महाडिक, सीओ फुगाना विश्वजीत सिंह, सहायक श्रम आयुक्त देवेश सिंह, तहसीलदार राधेश्याम गौड़ और तितावी थाना प्रभारी प्रमोद कुमार शामिल थे। छापेमारी में यहां से 13 मजदूरों को छुड़ाया गया। मौके से फैक्ट्री मालिक अंकित बालियान के पिता प्रदीप बालियान और सुपरवाइजर शिवा त्यागी को गिरफ्तार किया गया। इन लोगों ने उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, नेपाल, हरियाणा और राजस्थान के मजदूरों को डेढ़ साल से बंधक बनाकर रखा था। इन मजदूरों को 10 से 12 हजार रुपए महीने की सैलरी का लालच देकर यहां लाया गया था। लेकिन, बाद में न उन्हें सैलरी दी और न ही घर जाने दिया। भागने की कोशिश करने वालों पर पिटबुल डॉग छोड़ देता था फैक्ट्री मालिक अंकित बालियान मजदूरों को चोकर की बनी सूखी रोटी देता था। विरोध करने पर हंटर से पीटता था। जो मजदूर भागने की कोशिश करता, उस पर पिटबुल डॉग छोड़ देता था। पूछताछ में शिवा त्यागी ने बताया कि मजदूरों को किसी तरह का वेतन तक नहीं दिया जाता था। मुख्य आरोपी अंकित बालियान और उसके साथी को पकड़ने के लिए विशेष पुलिस टीम बनाई गई है। दो मजदूरों का सुराग नहीं, एक की मिली लाश दोना-पत्तल फैक्ट्री में काम करने वाले 3 मजदूर गायब बताए गए हैं। इनमें से नेपाल के अर्जुन की लाश नवंबर- 2025 में मिल चुकी है। अर्जुन की लाश बोरे में मिली थी, जिसका पोस्टमॉर्टम कराया गया था। यह भी पता चला है कि यातनाओं से मरने के बाद मजदूरों के शवों को लावारिस फेंक देते थे। जबकि लापता 2 लोगों के बारे में अभी कुछ नहीं पता लग पाया है। एसएसपी ने बताया कि मुख्य आरोपी अंकित बालियान की गिरफ्तारी के बाद ही लापता लोगों के बारे में पता चल पाएगा। एसएसपी ने माला पहनाकर शुभकामनाएं दी मुजफ्फरनगर पुलिस लाइन में मंगलवार दोपहर 3:30 बजे एसएसपी संजय वर्मा ने मजदूरों को समोसा और फ्रूटी दी। इसके बाद उनको माला डालकर नए जीवन के लिए शुभकामनाएं दीं। एसएसपी ने कहा कि कुछ मजदूरों के मोबाइल भी बरामद कर लिए गए हैं। एसओजी प्रभारी मोहित चौधरी और थानाध्यक्ष प्रमोद कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम को 25 हजार रुपए का पुरस्कार भी दिया जाएगा। ———————— ये खबर भी पढ़ें लखनऊ आग- बेटे की लाश देखकर पिता बेहोश, बहन चीख-चीखकर रोई, कई बच्चों ने घर पर आखिरी कॉल किया लखनऊ कोचिंग अग्निकांड में 15 लोगों की जान चली गई। शवों का सोमवार देर रात करीब 7 घंटे तक पोस्टमॉर्टम चला। इस दौरान शवों से निकला खून नालियों से बहकर बाहर आ गया। यह देखकर वहां मौजूद परिजन सहम गए और रोने लगे। बेटे नीलेश की लाश देखकर पिता बेहोश हो गए। बहन चीख-चीखकर रो पड़ी। पूरी खबर पढ़ें