बिना गारंटी ₹5 लाख तक कर्ज लें, ब्याज काफी कम:UP में 25 लाख किसान क्रेडिट कार्ड बनेंगे, ₹2 लाख करोड़ बांटेंगे; ऐसे करें आवेदन

उत्तर प्रदेश में मानसून की एंट्री के साथ ही खेती-किसानी के काम ने रफ्तार पकड़ ली है। सीजन में किसानों को पैसे की किल्लत न हो, इसके लिए यूपी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश में 25 लाख नए किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) बनाए जाएंगे। इसके तहत किसानों को ₹5 लाख तक का फसल ऋण बेहद सस्ते ब्याज और बिना किसी गारंटी के मिल सकेगा। शहरों में नौकरी करने वाले लोग जिस तरह अपनी जरूरतों और शॉपिंग के लिए क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं। ठीक उसी तर्ज पर सरकार किसानों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड लेकर आई है। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को खेती-किसानी के काम और खाद-बीज खरीदने के लिए बेहद आसान शर्तों पर कर्ज उपलब्ध कराना है। फसल डूबी तो KCC देगा सुरक्षा किसान क्रेडिट कार्ड सिर्फ लोन लेने का जरिया नहीं, बल्कि यह संकट के समय किसानों के लिए ‘सुरक्षा कवच’ का काम करता है। केसीसी धारक किसानों को फसल बीमा का सीधा लाभ मिलता है। अगर बाढ़, सूखा, ओलावृष्टि या किसी अन्य प्राकृतिक आपदा के कारण फसल खराब हो जाती है, तो प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) से नुकसान की भरपाई की जाती है। इससे किसानों को बैंक का कर्ज चुकाने में बहुत बड़ी राहत मिलती है। 4% ब्याज पर लोन, ₹2 लाख तक गारंटी की जरूरत नहीं इस योजना की शुरुआत अगस्त, 1998 में हुई थी। किसान क्रेडिट कार्ड पर पहले कर्ज लेने की लिमिट ₹3 लाख थी, जिसे बढ़ाकर ₹5 लाख कर दिया गया है। पशुपालन और मछली पालन के लिए बिना गारंटी लोन की लिमिट भी ₹1.60 लाख से बढ़ाकर ₹2 लाख कर दी गई है। किसान क्रेडिट कार्ड पर 7% ब्याज दर से लोन मिलता है। लेकिन, फसल कटने के बाद 1 साल में पैसा लौटाने पर सरकार 3% ब्याज सब्सिडी देती है। इससे किसान को सिर्फ 4% सालाना ब्याज देना पड़ता है। बाढ़, सूखा जैसी प्राकृतिक आपदा आने पर ब्याज माफ या कम भी हो सकता है। ₹3 लाख तक के किसान क्रेडिट कार्ड लोन पर बैंक कोई भी छिपा हुआ शुल्क नहीं लेता। प्रोसेसिंग फीस और इंस्पेक्शन चार्ज फ्री होता है। राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक के नियमों के अनुसार, एक बार किसान क्रेडिट कार्ड बन गया तो यह 5 साल तक वैलिड (मान्य) रहता है। अगर किसान समय पर पैसा चुकाता रहा, तो हर साल उसकी क्रेडिट लिमिट 10% तक बढ़ती रहेगी। यानी अगर पहले साल लिमिट ₹1 लाख थी, तो दूसरे साल यह बढ़कर ₹1.10 लाख हो जाएगी। छोटे किसानों के लिए अलग व्यवस्था किसान क्रेडिट कार्ड से कम रकबे में खेती वाले किसान ₹10 हजार से ₹50 हजार तक का लोन ले सकते हैं। किसान इस पैसे का इस्तेमाल खेती, फसल कटाई के बाद के खर्च और छोटे कृषि उपकरण खरीदने में कर सकते हैं। मौजूदा समय में जारी किसान क्रेडिट कार्डों में करीब 76% छोटे और सीमांत किसानों के पास हैं। यूपी में सिर्फ फसल उगाने वाले किसान ही नहीं, गाय-भैंस पालने वाले, बकरी पालने वाले, मुर्गी पालने या मछली पालने वाले भी इस योजना के तहत लोन ले सकते हैं। सिर्फ एक फार्म भरकर आवेदन करें सरकार ने किसान क्रेडिट कार्ड बनवाने की प्रक्रिया को पहले से आसान और डिजिटल कर दिया है। अब सिर्फ एक पेज का आवेदन फॉर्म भरना होता है। पीएम किसान योजना से जुड़े किसानों की कई जानकारियां पहले से फॉर्म में दर्ज रहती हैं। कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के जरिए भी आवेदन किया जा सकता है। सितंबर, 2023 में शुरू किए गए किसान ऋण पोर्टल से आवेदन और मंजूरी की प्रक्रिया तेज हुई है। देशभर में 457 बैंक दे रहे योजना का लाभ किसान क्रेडिट कार्ड योजना से देश के 457 बैंक जुड़े हैं। इनमें 37 कमर्शियल बैंक, 46 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और 374 सहकारी बैंक शामिल हैं। अब तक करीब 20 करोड़ आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। सबसे ज्यादा आवेदन सहकारी बैंकों के जरिए आए हैं। किसान क्रेडिट धारक किसानों को लोन के साथ-साथ दुर्घटना बीमा का भी लाभ मिलता है। इसके तहत कार्ड धारक किसान की मृत्यु या दिव्यांग होने पर परिवार को ₹50 हजार मिलता है। आंशिक दिव्यांगता पर ₹25 हजार तक का कवर मिलता है। इसका प्रीमियम भी बेहद नाममात्र होता है, जो बैंक खुद काटता है। किसान क्रेडिट कार्ड से जुड़े 3 जरूरी सवालों के जवाब सवाल- क्या बटाई पर खेती करने वाले भी कार्ड बनवा सकते हैं?
जवाब- हां, बिल्कुल। नाबार्ड के नियमानुसार, काफी लोग बटाईदार, पट्टेदार या किसान समझौते पर दूसरों की जमीन पर खेती करते हैं। वे भी समूह बनाकर या सेल्फ डिक्लेरेशन फॉर्म भरकर किसान क्रेडिट कार्ड से लोन लेने के पात्र हैं। सवाल- अगर समय पर लोन नहीं चुकाया, तो क्या होगा?
जवाब- अगर किसान 1 साल के भीतर ब्याज सहित लोन नहीं चुकाता, तो उसे 3% की अतिरिक्त ब्याज छूट नहीं मिलेगी। उसे पूरे 7% या 9% की दर से ब्याज देना होगा। इसलिए हर साल फसल बिकने के बाद किसान क्रेडिट कार्ड के खाते में लेन-देन कर लें। सवाल- यह ‘e-KCC’ क्या है?
जवाब- पहले केसीसी बनवाने में 25 से 30 दिन का समय लगता था। यूपी सरकार ने प्रदेश में ‘डिजिटल केसीसी’ सिस्टम लागू किया है। इसमें भूमि रिकॉर्ड का डिजिटल सत्यापन होता है। इससे बैंक महज कुछ ही मिनटों में लोन की मंजूरी दे देते हैं। ————————– आपके काम की ये खबर भी पढ़ें- UP में किसानों के लिए अब ‘फार्मर आईडी’ जरूरी, बिना इसके खाद-बीज नहीं मिलेगा; जानें घर बैठे मोबाइल से कैसे बनाएं यूपी सरकार किसानों के लिए 12 अंकों की यूनीक आईडी तैयार कर रही है। जिसे ‘फार्मर आईडी’ या ‘किसान रजिस्ट्री’ का नाम दिया गया है। ये खाद-बीज, पीएम किसान सम्मान निधि, फसल बीमा, किसान क्रेडिट कार्ड और कर्ज माफी जैसी सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए जरूरी है। पूरी खबर पढ़िए… ————————— योगी के ‘जनता दर्शन’ में कैसे पहुंचें?:CM से मिलने के लिए क्या करें? कौन से डॉक्यूमेंट जरूरी; ये सामान मत ले जाएं यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लोगों की समस्याएं सीधे सुनने के लिए ‘जनता दर्शन’ लगाते हैं। यहां पहुंचने वाले लोग जमीन के झगड़े, पुलिस से होने वाली परेशानी, पेंशन न मिलना जैसी बातें मुख्यमंत्री को सीधे बता पाते हैं। हर कोई मुख्यमंत्री से नहीं मिल सकता। इसका एक प्रॉसेस होता है, जिसको फॉलो करना जरूरी है। पूरी खबर पढिए…